Khabre Fatafat in Hindi Comedy stories by Jahnavi Suman books and stories PDF | खबरे फटाफट

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खबरे फटाफट

खबरें फटाफट

सुमन शर्मा

jahnavi-suman7@gmail-com



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खबरें फटाफट

आज कल खबरों के बहुत सारे चौनल हो गए हैं। चौबीस घंटे खबरें दिखाना, इन चौनलों के लिए सिरदर्दी बन गया है। इसलिए ये चैनल छोटी से छोटी खबर को किस कदर बढ़ा चढ़ाकर दिखाते हैं। एक झलक पेश है।

यहाँ ‘चौपड़ा परिवार' के टेलीविजन का रिमोेट खो गया है, जिस की खबर एक ‘समाचार चैनल' दिखा रहा है।

समाचार वाचिका ‘स्वाति' कहती है, ‘‘यह हैं, ‘खबरें फटाफट' और इस समय आप देख रहें हैं, ऐसे घर की तस्वीरें, जहाँ टी वी का रिमोट खो जाने से दहशत का माहोल बना हुआ है। हम अपनी संवाददाता ‘मेघना' से आपको सीधी बात—चीत के लिए ले चलतें हैं,

समाचार वाचिका ‘स्वाति' रूककर मेघना क्या हालात हैं, उस घर के? जिनका टी वी रिमोट खो गया है।

मेघना! मेघना! क्या आप हमें सुन पा रहीं हैं?

मेघनाः जी हाँ स्वाति, मैं आप को बिल्कुल सुन पा रही हूँ और मैं आप को इस घर के लोगों की ताजा जानकारी देने के लिए, इस घर के अन्दर लेकर चल रही हूँ। स्वाति! मैं आप को यह भी बताना चाहतीं हूँ, यह रिमोट एक या दो घंटे से नहीं, बल्कि पिछले चार दिन से खोया हुआ है।

स्वातिः मेघना! हम समझ पा रहे हैं, इस वख्त यह परिवार किस मनोस्थिति से गुजर रहा है। फिलहाल हम एक छोटा सा ब्रेक लेते हैं। ब्रेक के बाद हम घर के हर छोटे बड़े व्यक्ति से जानेगें, क्या है उनका हाल।

ब्रेक के बाद

स्वाति एक बार फिर से स्वागत है, आपका खबरें फटाफट में। ब्रेक में जाने से पहले आप उस घर की तस्वीरें देख रहे थे, जहाँ एक परिवार ने अपना टीवी रिमोट खो दिया है। यहाँ पूरी तरह से अफरातफरी का माहौल बन चुका है।

इस वख्त कैमरे पर चौपड़ा परिवार के सबसे छोटे बेटे, राजू की हम तस्वीरें देख रहें है। देखिए चार दिन पहले की तस्वीरो में राजू का मुँह कैस,े गोल गप्पे की तरह फूला हुआ था और आज कैसा पिचका हुआ आम लग रहा है। चलिए राजू से पूछते है कि आखिरी बार उसने रिमोट को कब देखा था।

स्वातिः मेघना! आप हमारी बात राजू से करवाएँं।

मेघनाः जी!

मेघनाः राजू! आप हमारे दर्शकों को बताएँ, आपने आखिरी बार, रिमोट कब देखा था।

राजू रोते हुए सोमवार को जब में स्कूल से वापिस आया, तब रिमोट मम्मी के हाथ में था। मैंने रिमोट माँगा तो मम्मी ने कहा, ‘‘पहले होमवर्क करो।''

स्वातिः तो देखा आपने, बच्चा माँ के सामने रिमोट के लिए कैसे गिड़गिड़ाता रहा, लेकिन निर्दयी माँ उसे होमवर्क के लिए धकेल देती है। इतना ही नहीं, बल्कि, रिमोट छीन कर वह,अपना सास—बहु का सीरियल देखने लगती है।

अभी तक आपने सुना होगा, ‘पूत कपूत हो सकते हैं, लेकिन माता कुमाता नहीं होती।' लेकिन यहाँ, यह कहावत उल्टी साबित हो रही है।

क्या घर में कोई बाहर का व्यक्ति आया था?

राजूः जी नहीं। कोई नहीं आया।

स्वातिः कोई बाहर का व्यक्ति घर के अन्दर नहीं आता है। घर का कोई व्यक्ति घर से बाहर नहीं जाता, पिफर टी वी का रिमोर्ट कैसे घर से गायब हो जाता है?

क्या यह किसी अन्य प्रकार के कारण हुआ? घर का कोई व्यक्ति इस विषय में कुछ नहीं जानता।

हमारे स्टूडियो में इस वख्त योगाचार्य स्वामी श्यामदेवजी भी मौजूद है, हम स्वामी जी से पूछतें हैं कि ऐसे समय में परिवार के यह सदस्य किस तरह स्वयं को इस संकट की घड़ी में बाँध्े रखें?

श्यामदेवजीः मैं पहले इस चौनल के माध्यम से उस परिवार के प्रति सहानुभूति प्रकट करना चाहता हूँ, जिनका रिमोट खोया है।

इस परिवार के सदस्य अपनी अनामिका उंगली के उपरी भाग को दूसरे अंगूठे से बार—बार दबायें। ऐसा करने से इनके मन को बहुत शांति मिलेगी। लम्बा—लम्बा सांस अन्दर ले जाएँ व बाहर छोड़ें।

स्वातिः चलिए यहाँ, एक ब्रेक के लिए रुकते हैं। ब्रेक के बाद डॉ गुप्ता से बातचीत करेगें।

ब्रेक के बाद

स्वातिः ब्रेक के बाद, आपका स्वागत है। जैसा की आप सब जानते हैं, दिल्ली के एक पोश इलाके में, एक परिवार ने अपना टीवी रिमोट खो दिया है। हमने अपने स्टूडियो में डॉ गुप्ता को बुलाया है।

डॉ गुप्ता हमें बताऐं इस मनोदशा को झेलने के बाद क्या यह लोग सामान्य जीवन व्यतीत कर सकेगें।

डॉ गुप्ताः बहुत अच्छा प्रश्न है। देखिए इन्हें सामन्य जीवन पर आने में कुछ समय अवश्य लगेगा। यह अवधि्‌ कितनी लम्बी होगी, ये इस बात पर निर्भर करता है, कि रिमोट कब और किस हालत में मिलता है। यह लोग कैसी प्रतिक्रिया व्यक्त करते ह,ैं इस बात पर बहुत कुछ निर्भर करता है।

स्वातिः यहाँ एक शक्स कापफी प्रसन्नचित दिखाई दे रहा है। मेघना जी हमारी बातचीत इस व्यक्ति से करवाएँ ।

मेघनाः जी बिल्कुल। इस समय आपकी टी वी स्क्रीन पर जो व्यक्ति बतीसी चमकाता हुए ,दिखाई दे रहें हं,ै वह इस घर के मुखिया हैं। बरसों से इनकी जीवा स्वादिष्ट भोजन के लिए, लालायित हो रही थी, किन्तु इनका कहना ह,ै कि घर की महिलाएँ टी वी के कार्यक्रम देखने में इतनी मस्त हो जाती थीं कि खाना बनाने में लेशमात्रा भी ध्यान नहीं देतीं थीं।

एक बार उनके घर की एक महिला ने मटर के दाने तो कूडेदाने में डाल दिए और मटर के छिलकों की सब्जी बना दी। अब रिमोट न मिलने से महिलाएँ तरह—तरह के व्यंजन बनाकर स्वयं को व्यस्त रखे हुए हैं।

तभी वहाँ धोबी कपड़ों का बड़ा सा पोटला लेकर आता है और जमीन पर धम से रख देता है। अपनी जेब से टी वी रिमोट निकालकर मेज पर रखता है। सभी कैमरे मेज की ओर घूम जातें हैं। सबसे पहले रिमोट के मिलने का समाचार देने के लिए चेनलों के बीच होड़ लग जाती है।

धोबी घर की मालकिन को घूरते हुए बोला, ‘‘कपड़ों की पोटली में आपने इसको क्यों बाँघ दिया था?'' इसके कारण मेरे घर में कितना हंगामा हुआ, आप नहीं जानतीं।

स्वातिः एक ब्रेक के बाद हम आप से फिर मिलेगें। धोबी के घ्ैार की ओर भी रुख करेंगें और जानेगें इस घर में रिमोट आने के बाद क्या क्या हुआ।

उधर घर में रिमोट आने के बाद का नजारा ऐसा था कि, आपसी छीना झपटी में रिमोट दो हिस्सों में बँट चुका था। घर की महिलाओ के भी टी वी सीरियल देखने के अरमान टुकड़े—टुकड़े हो चुके थे। न्यूज चैनल अपना ताम झाम समेट रहे थे। घर के आस पास जुटी भीड़ छंट चुकी थी। सूर्य देवता भी दिनभर तमाशा देखने के बाद अंगड़ाइ लेते हुए पश्चिम दिशा की ओर चल दिए।

हम भी अगले समाचार तक के लिए आपसे आज्ञा चाहतें हैं। नमस्कार।

— सुमन शर्मा

jahnavi-suman7@gmail-com