सकीजोफ्रेनिया


सकइज़ोफ्रेनिक
    
        शाम का वक़्त था। सभी दर्दी अपने अपने बेड पर जा रहे थे। तभी अचानक एक धम्म से आवाज़ आयी जिसने सबका ध्यान अपनी और खीच लिया।नर्स और कुछ इंटर्न स्टूडेंट्स वो जगह देखने को भागे जहाँ से आवाज़ आ रही थी।वहाँ पर आलरेडी भीड़ जमा हो चुकी थी तो डॉक्टर ने आकर सबको अपने अपने वार्ड में जाने को कहा और उस जगह को सील कर दिया गया।वहाँ मौजूद हर किसी की निगाहें उसी जगह डटी हुई थी और कुछ टटोल रही थी,आपस मे गुपचुप बाते भी होने लगी कही कोई बोल रहा था 

"बिचारा! अभी उम्र ही क्या थी उसकी", "तो कोई बोल रहा था "मानसिक हालत ठीक न थी बिचारे की"

तभी पुलिस सायरन की आवाज़ आने लगी। डॉक्टर ने एमएलसी फ़ाइल रेडी ही रखी थी, और पुलिस ने आकर अपनी जांच पड़ताल चालू कर दी।

डॉक्टर ने रिपोर्ट दी ' हेलो सर यह सकीजोफ्रेनिया नामक बीमारी से जूझ रहा एक मरीज था जिसका नाम अमन था। जिसकी मौत 11 बजे फ्लोर पर से गिरने की वजह से हुई थी।...............

10 साल पूर्व

आज अमन का 14 वा जन्मदिन था। जिससे की पूरे घर मे रौनक सी छायी हुई थी।अमन की माँ(सरला) जन्मदिन की तैयारियों में लगी हुई थी कि अमन का दोस्त आया और अमन के बारे में पूछने लगा।

"आंटी अमन कहा है कही दिखाई नही दे रहा"

अरे बेटा वो साहबज़ादे तो अभी तक सो रहे है। ये लड़का भी न कभी टाइम पर नही उठता, कमसेकम आज तो उठ जाता। तू रुक बेटा मैं अभी उसे उठाकर लाती हु। ऐसा कहकर सरला अमन को उठाने चली जाती है।
   हर बार की तरह अमन को पता था कि आज उसे स्कूल नही जाना है इसीलिए वो सुकून से चैन की नींद सो रहा था। वो अपने सपनो में खोया हुआ था कि उसकी माँ ने आकर उठाया
"अमन बेटा उठ जाओ अभी", तभी एक और आवाज़ आयी
मेरा शेर अभी तक सो रहा है 
तो अमन फटाक से उठ गया और देखा कि ये तो पापा है और वो दौड़ कर उन्हें गले लगाता है।
सरला भी खुश हो जाती है और सभी लोग साथ मे अमन का बर्थडे मनाते है
 
  दरअसल अमन के पापा विदेश में नौकरी करते है और साल में एक या दो बार ही घर पर आते थे आज वो अपने बेटे का जन्मदिन मनाने उनको कहे बिना आकर सरप्राइज देते है।

  सब कुछ सही चल रहा था अमन की ज़िंदगी में, बहोत खुश था वो पर कहते है ना चार दिन की चांदनी खुशी का कोई ठिकाना नही होता वो ज्यादा दिन तक एक जगह नही टिकती ऐसा ही कुछ उसके साथ भी हुआ। अचानक से खुशियो सी भरी उसकी जिंदगी में मातम छा गया।जब सुबह उसने अपने पापा को मरा हुआ पाया। उसकी जिंदगी में से जैसे किसीने सारे रंग छीन लिए। उसकी खुशियो भरी जिंदगी पर गम के बादल छा गए। बेरंग सी बंज़र ज़िन्दगी हो चुकी थी उसकी।वो और उसकी माँ फुट फुट कर रोने लगे।अब उसे सब धुंधला सा नज़र आ रहा था, कही कोई उम्मीद की किरण न दिख रही थी।सबसे ज्यादा वो जिस इंसान से प्यार करता था उसी को भगवान ने उससे छीन लिया था।आसपास के लोगो की बाते सुन वो घबरा सा गया था।

"क्या होगा इस बिना बाप के बच्चे का?"
" कैसे संभाल पायेगा वो इतनी जिम्मेदारियां?"
" भगवान ऐसा दुख किसी को न दे"
"क्या इसकी मा उसे सारी खुशिया दे पाएगी, ?"

ऐसी सब बाते सुन सुन के उसका दिमाग अब चकरा सा गया था।वो अब गुमसुम सा रहने लगा था न किसी से ज्यादा बाते करता न ही कुछ बोलता था। रोज स्कूल से आकर अपने कमरे में जाता और रोया करता था और सोचता रहता था कि अब क्या होगा मेरा और मेरे परिवार का.....


अमन अपने मे ही खोया रहता था। अब वो थोड़ा गुस्सेल हो गया था जरा जरा सी बात पर चिढ़ता था। हर किसी पर शक करता रहता था।ऐसा लगता है जैसे उसे हर इंसान अपना दुश्मन लगता था। स्कूल में भी कई बार उसकी लड़ाई की शिकायते आने लगी थी।इन शिकायतों से ऊब कर प्रिंसिपल ने अमन की माँ को बुलाया और कहा 

"आपका बेटा पढ़ाई से ज्यादा लड़ाई झगड़ा करता है,हम समझ सकते है उसके साथ जो हुआ उसका मतलब ये तो नही के स्कूल आते हर बच्चे के साथ वो मार पीट कर हल्ला मचाये। आई एम सॉरी सरला जी पर हम आपके बेटे को अपनी स्कूल में नही पढा सकते"

उसकी और से में माफी मांगति हु मेंम पर ऐसा न करे अगली बार से ऐसा नही होगा सरला ने कहा

ऐसे ही कुछ देर माफी मांग विनती करने पर प्रिन्सिपल ने एक मौका दिया 

अब धीरे धीरे अमन का बर्ताव बदलता जा रहा था। रात को वो अचानक से उठकर चिल्लाया करता था।एक बार तो हद ही हो गयी अचानक से उठकर शरीर से कुछ अलग अलग मुद्राए बनाने लगा ये देख सरला डर गई।और दूसरे दिन हवन की तैयारी करने लगी एक बाबा को बुलवाया गया और कुछ हवन किये गए। फिर भी वही हालत अगली रात फिर वही हुआ जिसका डर था। तब सरला को एक व्यक्ति ने सुजाव दिया कि कहि ये मानसिक असंतुलन तो नही एक बार डॉक्टर को दिखाना चाहिए
    
   सरला ने उसकी बात को रखते हुए दूसरे दिन अमन को लेकर अस्पताल (मानसिक रोग विभाग) गयी। वहां डॉक्टर ने सब हकीकत पूछी क्या हुआ कैसे हुआ और सब जांच पड़ताल करने के बाद सरला को जानकारी दी गयी

"आपके बेटे को सकीजोफ्रेनिया नामक बीमारी हो गयी है"



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