The Author सोनू समाधिया रसिक Follow Current Read अल्फाज़ अनकहे से... By सोनू समाधिया रसिक Hindi Love Stories Share Facebook Twitter Whatsapp Featured Books रोबोट शीर्षक: इंसान बनने की कोशिश करता रोबोटलेखक: विजय शर्मा एरी--... समर्पण से आंगे - 5 भाग – 5माँ के फैसले के बाद सब कुछ बाहर से सामान्य दिख रह... हनुमान का रोमंथन एवं मानसिक ताप हनुमान का रोमंथन एवं मानसिक ताप गंगा के उत्समुख गंगोत्री क... तेरा लाल इश्क - 27 Next Ep,,,,,️"वहा हथियार बनाए जा रहे थे ये बारूद और लोहे के... श्रापित एक प्रेम कहानी - 29 सोनाली खुश होती हैं और कहती हैं---->" ये तो बहुत अच्छी बात ह... 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"बाबू! उठिए, देखो सुबह हो गई है। लो, चाय पीलो।" - अनन्या ने अभिषेक से उसकी रजाई खींचते हुए कहा।अनन्या अभिषेक के नौकरानी की बेटी थी, वह अभिषेक की हमउम्र थी।उसका काम सुबह की सिफ्ट मे अपनी माँ की जगह वर्तन धोना और घर की साफ़ सफाई का काम करना था। "अरे! अन्नू तू भी न सोने भी नहीं देती। इसके लिए तो मेरे पैरेंट्स ही काफी है।तू तो कम से कम रहम कर दिया कर।चल रख टेबल पर और तू जा।" - अभिषेक ने रजाई से मुँह निकालते हुए और अंगड़ाई लेते हुए कहा।उसके चेहरे पर धूप पड़ रही थी वह अपनी आँखों को खोलने का प्रयास कर रहा था।अभिषेक और अनन्या एक दूसरे को कई दिनों से जानते थे। जिससे वो दोनों एक परिवार के सदस्य की तरह हिल मिल गए थे।अनन्या चाय को टेबल पर रख कर जैसे ही बाहर को जाने के लिए मुड़ी।तभी.."अन्नू! रुक!" अभिषेक ने पलकों को आधा खोलते हुए मुँह बनाते हुए कहा।"हाँ! बाबू ।" - अनन्या ने अभिषेक की तरफ मुड़कर कहा।"ये, बता कल रात तू! मेरी बर्थडे पार्टी में क्युं नहीं दिखी। क्या बात हो गई थी बड़ी आदमी बन गई है क्या।" - अभिषेक ने भोंह चढ़ाते हुए कहा।"वो बाबू, मैं...!" अनन्या ने झिझकते हुए अपनी बात पूरी नहीं कर पाई तब तक अभिषेक ने उसकी बात को काटते हुए कहा - "क्या मैं हाँ। "" वो मैं आपके लिए गिफ्ट लेना भूल गई थी, तो मैंने सोचा बिना गिफ्ट के जाना आपको अच्छा नही लगेगा।"-अनन्या ने झिझकते हुए कहा।"अच्छा! तो ये बात है, वैसे तुमसे किसने कहा था गिफ्ट लाने को। चलो, कोई नहीं टेबल पर मिठाई का बॉक्स रखा है तुम्हारे लिए उसे अपने घर ले जाना, ओके! "" और, हाँ! सुन ।"" जी! "" तेरा बर्थडे कब है? "" बाबू! मेरा बर्थडे नहीं मनाया जाता है।" "ओके! जाओ।" अनन्या के चले जाने के बाद कुछ समय बाद अभिषेक ने अपने पैरेंट्स से पूछा -" माँ! ये अन्नू का मेरी तरह बर्थडे क्यूँ नहीं मनाया जाता है? "" बेटा! वो हमारी तरह ऊंचे खानदान से नहीं है। वो एक नौकरानी के बेटी है और नौकरो की हैसियत नहीं है इतनी कि वे अपनी रईस लोगों की तरह पार्टी ऑर्गनाइज करें।" "पर! माँ हम लोग तो उसके बर्थडे पार्टी के लिए हेल्प कर सकते हैं न! वो भी तो हमारे जैसी इंसान है। "अभिषेक की बातें सुनकर उसके पैरेंट्स ने उसको समझाया। अभिषेक भी कम ज़िद्दी न था, वो भी अपनी माँ बाप की इकलौती संतान था, तो उसकी ज़िद के आगे पैरेंट्स को झुकना पड़ा। इस प्रकार अनन्या के बर्थडे पार्टी को किसी विशेष दिन को फ़िक्स कर दिया। अनन्या और उसकी माँ आश्चर्यचकित थी, लेकिन अभिषेक के पैरेंट्स की खुशी को देखते हुए वो मान गई। फिर उस दिन... रात को सभी मेहमान आ चुके थे, अनन्या सफेद गाउन पहने हुए थी जो अभिषेक द्वारा उसे गिफ्ट किए गए थे। उस गाउन में अनन्या परी जैसी दिख रही थी। अभिषेक अपने स्कूल के दोस्तों के साथ पार्टी एंजॉय कर रहा था वो आज बहुत खूब नजर आ रहा था। अनन्या ने कैक काटा और अभिषेक और उसके पैरेंट्स को खिलाया। आज सब बहुत खुश थे। जैसे जैसे दिन ढलते गये वैसे वैसे अभिषेक और अनन्या के व्यक्तित्व में परिवर्तन के साथ साथ वो स्कूल से कॉलेज में पहुंच गए। अभिषेक अनन्या को अब अपना बेस्ट फ्रेंड मानने लगा वो एक दूसरे के साथ परछाइ की तरह लगे रहते थे। घंटों तक फोन पर बातचीत करना, माँल, टॉकीज और रेस्टोरेंट में साथ खाना खाना आम बात हो गई थी। दोनों के विचार काफी हद तक एक दूसरे से मिलते थे। दोनों एक दूसरे की बहुत केयर करने लगे, शायद वो एक दूसरे को मन ही मन प्यार करने लगे थे। मगर दोनों इस बात को सिरियसली नहीं लेते थे। फिर एक दिन..... दोनों शहर से बाहर कार से घूमने के लिए निकले और तभी दुर्भाग्यवस उनकी कार का एक बस से एक्सिडेंट हो गया और कार के बहुत बुरी तरह से दुर्घटनाग्रस्त हो गई। अभिषेक और अनन्या को गंभीर हालत में हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया। दोनों के पैरेंट्स का रो रो के बुरा हाल हो गया था। कुछ दिनों बाद अभिषेक पूरी तरह से ठीक हो गया, उसी वक्त उसने अनन्या के बारे में पूछा तो उसके पापा ने इशारे से पास का रूम बता दिया। अपने पापा का इस प्रकार का बेहैव देखकार अभिषेक के जहन में एक अनजाने भय की लहर दौड़ गई। वह हड़ बड़ाता हुआ पास के रूम में गया तो अनन्या को सामने बेड पर बैठा पाया। उसकी आंखो पर काला चश्मा था। उसे समझते हुए देर न लगी उसने उससे पूछा - "ये क्या हुआ अन्नू तुझे?" वह जाकर उसके पास बैठ गया तभी अनन्या ने उसे गले लगाकर फूट फूट के रो पड़ी। "अभि! आज से मेरी नजर मेरा सब कुछ आप ही हो। जो मैं आज तक आपसे कह न सकी वो कहती हूँ, आई लव यू.... अभि। " आई लव यू टू अन्नू "दोनों एक दूसरे के से लिपट कर रोने लगे। बाद में पता चला कि एक्सिडेंट में अभिषेक ने अपनी आँखे खो दी थी। , लेकिन वो अभी जो देख रहा था वो सब उसके द्वारा अनन्या देख रही थी। अनन्या जब भी रोती है तो अभिषेक की आँखो से आंसू निकलने लगते हैं। ? समाप्त ?जै श्री राधे ? आपका सोनू समाधिया 'रसिक' Download Our App