शेनेल लौट आएगी - 5

शेनेल लौट आएगी

प्रदीप श्रीवास्तव

भाग 5

ऐमिलियो ने अलग होते हुए कहा ‘ठीक है रोहिट। हम दोनों शादी करेंगे। लेकिन इसके पहले मुझे एक बार अपने देश जाना ही पड़ेगा।’ ऐमिलियो की हां ने मेरी खुशियों को एक झटके में सातवें आसमान पर पहुंचा दिया। खुशी से मैं पागल हो उठा। हमारे बीच यह तय हुआ कि ठीक है वह अपने देश जाए। और जितनी जल्दी हो अपने सारे काम निपटा कर आ जाए। फिर बिना एक पल गंवाए हम दोनों शादी कर के एक साथ जीवन बिताएंगे। खुशी के मारे मेरे दिमाग में एक बार भी यह नहीं आया कि उससे कहता कि जाने से पहले शादी कर के जाओ।

मैं खुशी से इतना पगलाया हुआ था कि उस दिन ऐमिलियो के साथ फिर घूमने गया। सेनेगल जाने से पहले उसे काफी शॉपिंग करनी थी। अब वह अपने मूल देश लाइबेरिया के बजाय जहां शरणार्थी थी उसी देश सेनेगल को अपना देश कहती थी। उसकी वापसी के पहले मैं शादी के सपने देखते हुए उसे जोश में चार लाख रुपए से अधिक की शॉपिंग करवा बैठा।

उसके लिए एक डायमंड पेंडेंट गोल्ड चेन के साथ लिया। एक शो रूम में साड़ी पहने खड़ी एक खूबसूरत सी डमी देखकर दिमाग में एक खूबसूरत सी शरारत सूझी और ऐमिलियो के लिए एक महंगी साड़ी ब्लाउज का सेट ले आया। लौटते समय ढेर सारी गुलाब की पखुड़ियां, सेंट ले आया। साड़ी और अन्य चीजों के लिए उसने पूछा तो कुछ बताया नहीं। यहां तक की हज़ारों रुपए मेकप के सामान में ही खर्च कर दिए।

उस रात मैंने उसे अपने देश सेनेगल जाने से पहले खूबसूरत सरप्राइज देने की ठानी हुई थी। साथ ही खुद भी एक अद्भूत अहसास से गुजरने का अनुभव करना चाहता था। तो रात मैंने कहा ‘जब तक मैं ना कहूं तब तक प्लीज बेडरूम में ना जाना।’ वह मान गई। फिर मैंने बेडरूम को फूलों से सुहागसेज में बदल दिया। उसके बाद ऐमिलियो को बताया कि यह साड़ी भी तुम्हारे लिए लाया हूं। उसने आश्चर्य मिश्रित खुशी व्यक्त करते हुए कहा ‘इसे पहनेंगे कैसे? मुझे तो आती नहीं।’

मैंने कहा ‘ऐमिलियो गुगल बाबा के रहते यह नामुमकिन नहीं है। फिर यू-ट्यूब पर साड़ी पहनने के तरीके हम दोनों ने देखे। उसके बाद सेंट के पानी से दोनों ने खूब नहाया। फिर मैंने उसे साड़ी-ब्लाउज आदि पहनाया। उसका मेकप किया। मेकप के बाद अपने को शीशे में देख कर उसने खुशी से कहा ‘ओह मॉय गॉड रोहिट इट्स मी। आई कॉन्ट विलीव इट, इट्स अमेजिंग।’

संयोग से उसे मैं बहुत अच्छे ढंग से साड़ी पहनाने में सफल हो गया था। वह साउथ इंडियन फ़िल्मों की हिरोइन सी नजर आ रही थी। क्रीम कलर की काफी काम की हुई डिजायनर साड़ी थी। महरून लिपिस्टक, डार्क लिप लाइनर, खूबसूरत लाल बिंदी, बस मांग में सिंदूर नहीं था। उसे भी मैं कुछ देर में भरने वाला था। लेकिन पहले मैंने हिंदी फ़िल्म का यूट्यूब पर विवाह वाला दृश्य दिखाया। और सुहागरात का भी। इसे देखकर वह कुछ गंभीर सी दिखने लगी। मुझसे बोली ‘रोहिट मैं नहीं समझ पा रही हूं कि तुम क्या कर रहे हो?, क्यों कर रहे हो? मगर जो भी है मुझे अच्छा लग रहा है। खुशी हो रही है। मैं रोमांचित हो रही हूं।’

मैंने कहा ‘ऐमिलियो मैं खुशी बटोर रहा हूं। अपने लिए, तुम्हारे लिए। मैं अपने और तुम्हारे बिखरे हुए जीवन को एक जगह समेट, सजा कर दुनिया के तमाम खुशहाल कपल्स की तरह जीवन जीना चाहता हूं। मैं उसी की शुरुआत कर रहा हूं। हम दोनों अब हमेशा साथ रहेंगे। खुश रहेंगे। एक कंप्लीट सेटल्ड लाइफ जिएंगे।’ मेरी बातों का उस पर ना जाने क्या असर हो रहा था कि उसके होंठों, चेहरे पर मैं मुस्कान और भावुकता, की लकीरें साफ देख रहा था।

घर में भगवान का कोई चित्र या मूर्ति के नाम ड्रॉइंगरूम में एक कैलेंडर टंगा था। जिसमें तारीखों के बॉक्स के ऊपर शिव-पार्वती हिमालय पर्वत पर एक हिम खंड पर बैठे हुए थे। मैं उसी कैलेंडर के सामने ऐमिलियो को लेकर खड़ा हुआ और साथ में लाए सिंदूर की डिबिया निकालकर उसे फ़िल्म की शादी की बात याद दिलाई और ईश्वर को साक्षी मान कर ऐमिलियो से मांग भरने की इज़ाज़त मांगी। उसे मैं इसका सारा मतलब साफ-साफ बता चुका था। इज़ाज़त मांगने पर वह कुछ देर मुझे अपलक देखती रही। उस समय उसके चेहरे पर आ रहे तमाम भाव मैं नहीं समझ पा रहा था। मुझे लगा कि उसकी आंखें भरती जा रही हैं। खुद को भी मैं भावुकता में डूबता हुआ महसूस कर रहा था।

करीब पंद्रह सेकेंड के बाद ऐमिलियो ने अपना सिर हल्का सा आगे झुका दिया। उसे मैंने उसकी सहमति समझी और मांग में सिंदूर भर दिया। चुटकी से कितनी बार सिंदूर भरना होता है यह मुझे मालूम नहीं था। तो झट तर्क लगाया, कि सात फेरे लेते हैं। तो सात बार सिंदूर भी भर देते हैं। ईश्वर को साक्षी मानकर कर रहे हैं। पवित्र साफ मन से कर रहे हैं। ईश्वर अंतरयामी है। सब जानता है। गलत, सही वह सब देख समझ लेगा। ठीक कर देगा। सिंदूर भरने के बाद मैंने उसे गले से लगाकर चूम लिया। वह अखंड सुहागन दिखाई दे रही थी। मांग भरने की प्रक्रिया में ना जाने क्या था कि हम दोनों के चेहरे पर भावुकता मुस्कान दोनों साथ-साथ थी। अब हम बोल कम रहे थे। चेहरे के भावों से ज़्यादा बातें कर रहे थे।

ऐसे मौके पर नई-नवेली दुल्हन को जैसे घर की महिलाएं ख़ास तौर से नंदें, जिठानी जिस प्रकार सुहाग सेज पर ले जाकर बिठा देती हैं, वैसे ही मैंने ऐमिलियो को बेडरूम में खुद सजाए बेड पर बिठा दिया। फूलों की पंखुड़ियों से सजे और सेंट से मह-मह महकते बेड पर उसे बिठा कर मैंने एक शरारत और की। उसका चेहरा घूंघट से ढंक दिया। फिर एक गिलास में केसर मिला दूध लाकर रख दिया।

उसे याद दिला दिया कि फ़िल्म में जो देखा है आगे वह प्रक्रिया तुम पूरी करोगी। इन सब के दौरान वह तीन-चार बार हंसी। और कहा ‘रोहिट यह सब क्या कर रहे हो मैं समझ नहीं पा रही हूं, लेकिन अच्छा लग रहा है।’मैंने कहा ‘ऐमिलियो अभी और अच्छा लगेगा। हम एक ऐसे क्षण को एंज्वाय करने वाले हैं जिसका मौका लकिएस्ट पर्सन को ही मिलता है।’

फिर मैं कमरे से बाहर आ गया। और अपने कपड़े चेंज कर दो मिनट में ही बेडरूम में पहुंच गया। मैं जानता था कि ऐमिलियो ज़्यादा इंतजार नहीं कर सकती। मगर कमरे में मेरे पहुंचते ही ऐमिलियो ने जिस तरह से मुझे सरप्राइज दिया। मुझे चौंकाया वह अद्भुत था। मेरे लिए अकल्पनीय था। मैं पहुंचा तब भी वह घूंघट किए ही बैठी थी, कि तभी बिजली सी कौंध गई।

जब ऐमिलियो एक भारतीय दुल्हन की तरह उठी और झुक कर दोनों हाथों से मेरे पैर छू लिए। मैं अवाक रह गया। और उसे उठा कर बांहों में भरकर चूम लिया। यूट्यूब पर देख कर वह इतनी निपुणता के साथ यह कर गुजरेगी यह मैंने सोचा भी नहीं था। मैं फिर भावुक हो उठा। मैं उसे लेकर बेड पर बैठ गया। तभी उसने बेड के बगल में रखे दूध का गिलास उठाकर उसे पिलाने-पीने की रस्म भी पूरी कर डाली। और मैंने उसे सुहाग रात का गिफ्ट डायमंड पेंडेंट उसके गले में डाल दिया। उसे पहन कर वह खुशी से भर गई।

मेरे हाथों को पकड़ कर बोली ‘रोहिट मैंने सब ठीक तो किया। कोई मिस्टेक तो नहीं हुई।’ उसके चेहरे को दोनों हाथों में भरते हुए मैंने कहा ‘एक्सीलेंट।’ फिर हमने एक भारतीय नवविवाहित की तरह ही खूब जोरदार ढंग से रात भर सुहागरात मनाई। उसके पहले उसे अपने प्यार की सबसे खूबसूरत बेसकीमती निशानी, नया नाम दिया था। ‘‘शेनेल’’ जिसे सुन कर उसने अपनी खुशी ‘किस’ कर के व्यक्त की थी।

मैं उस रात को उसके साथ जी भर कर जी लेना चाहता था। निश्चित ही वह भी यही कर रही थी। उस रात मैंने पहले उसकी व्हिस्की की डिमांड यह कह कर मना कर दी थी कि ‘आज हमें नहीं पीना चाहिए।’ मगर कुछ देर में उसे भी दिया और खुद भी पी कि इसका दिल ना दुखे। हमारी सुहागरात भोर होने के करीब तक चलती रही। अगले दिन हम दोनों बहुत देर से उठे और फिर दिनभर उदास रहे। ना वह ज़्यादा बोल रही थी और ना मैं।

उसके अपने देश जाने का समय जैसे-जैसे करीब आ रहा था यह उदासी और गहरी होती जा रही थी। आखिर यह भारी समय भी बीत गया। और रात में मैं उसे इंदिरा गांधी एयर पोर्ट पर छोड़ने गया। वह बराबर मेरा हाथ पकड़े रही। चेक इन के बाद वह प्लेन के रनवे पर आने पर अन्य यात्रियों की तरह चलने को उठ खड़ी हुई। हम फिर गले मिले। मैंने ‘हैप्पी जर्नी’ बोला उसने मुझे अपना ख्याल रखने को कहा। फिर चल दी। मुड़-मुड़ कर पीछे देखती, हाथ हिलाती जाती। उसकी आंखों में आंसू चमक रहे थे। और गले में वह डायमंड पेंडेंट भी।

वह छः हज़ार मील दूर अपने देश जा रही थी। लौट कर हमेशा के लिए मेरे पास आने के लिए। मैं उसे ओझल हो जाने तक देखता रहा। और फिर प्लेन को टेक ऑफ कर आसमान में ओझल हो जाने तक। मेरी आंखों से बार-बार आंसू टपक रहे थे। मन बार-बार शेनेल, शेनेल कह रहा था। शेनेल जितनी जल्दी हो चली आना। अब तुम्हारे बिना जीना मुश्किल है। मैं तुम्हें अपनी लाइफ पार्टनर ही नहीं पत्नी मान चुका हूं। बना चुका हूं। शेनेल, शेनेल, मेरी शेनेल। घर लौटा तो मैं रातभर उसकी याद में जागता रहा। सिगरेट पीता रहा। और लैपटॉप पर बार-बार पिछली रात की वह क्लिपिंग्स देखता रहा जिसे मैंने और शेनेल ने अपने-अपने मोबाइल से बनाया था। और शेनेल ने अपने अच्छे वाले सौतेले पिता को मेल किया था।

अगले पूरे दिन मैं घर पर पड़ा रहा, बार-बार मेल चेक करता। ऐमिलियो के नंबर पर रिंग करता। मगर वह ऑफ मिलता। कोई मेल नहीं आई। मैंने सोचा सफर के थकान के कारण सो रही होगी। उठेगी तो करेगी। मगर धीरे-धीरे एक दिन, दो दिन, और फिर कई दिन बीत गए। ना उसका मोबाइल ऑन हुआ, ना मेल आई। फिर नंबर आउट ऑफ ऑर्डर हो गया। मेल बाउंस होने लगी। उसके अच्छे वाले सौतेले पिता और माता का नंबर भी आऊट ऑफ आर्डर हो गया। मुझे यकीन नहीं हो रहा था कि मैं ठगा गया। तन, मन, धन तीनों तरह से। हर तरह से।

बीतते समय ने अंततः पक्का यकीन करा दिया कि छः हज़ार मील दूर से आकर दो महीने में दस लाख का चुना लगा गई। कितनी अच्छी, लाजवाब थी उसकी साजिश कि विदेश में दो महीने खाना, पीना, घूमना, गाइड, सेक्स पार्टनर सब कुछ। जाते-जाते लाखों का सामान ले गई। सिर्फ साड़ी को छोड़ कर। जिसे गुस्से में मैंने जला दिया। मैं इतना विवश था कि कुछ नहीं कर सकता था। किसको बताता? क्या बताता? शादी का जो वीडियो बनाया था वैसी शादी का कोई कानूनी अर्थ नहीं। कानूनी मदद लूं भी तो दुनिया हंसेगी अलग, कि आधी उम्र की लड़की को दो महीने साथ रखा, ऐश करते रहे तब यह सब पता करने का होश नहीं था। दोस्तों की सलाह तब याद नहीं आई कि देखना इन धूर्त लड़कियों, इनकी बातों में उलझ ना जाना।

मगर उदासियों से हर बार पार पा कर आगे बढ़ जाना तो मेरी आदत है। तो कुछ ही दिनों में इस उदासी को भी तार-तार कर फिर से अपने अब तक के सबसे सुरक्षित वफादार साथी गुड्स ट्रेन के लोहे के घड़-घड़ करते गॉर्ड के डिब्बे में सवार हो गया। मीलों-मील की यात्रा करने। सबका माल सुरक्षित पहुंचाने के लिए। गॉर्ड वोगी की घड़-घड़ाहट दिमाग की नशें चीर दें इससे बचने के लिए मैं फिर अक्सर किसी ड्यूटी पार्टनर को साथ ले लेता हूं।

ड्यूटी पर एक सेक्स वर्कर को साथ लेकर चलने से नौकरी जाने का खतरा है तो क्या? अकेलापन नशों को चीर तो नहीं रहा। और शेनेल! ये नहीं कहूंगा कि उसकी याद नहीं आती। आती है, अब भी आती है। और तब उसके लिए कोई अपशब्द नहीं निकलता। बस हंसी आती है। और याद आते हैं साथ बिताए खूबसूरत पल। तब अनायास ही मुंह से निकल जाता है। शेनेल.......।

समाप्त

***

Rate & Review

Komal 4 hours ago

S Nagpal 2 months ago

Alkesh Bhayani 2 months ago

Rashmi Patel 5 months ago

Satish Pareek 5 months ago

बहुत ही सुंदर रचना। बेशक लूट कर लेगई मगर प्यार भी टूटकर किया