खुदा की खोज - 3 in Hindi Motivational Stories by Parmar Geeta books and stories Free | खुदा की खोज - 3

खुदा की खोज - 3

भाग - 3 


(पिछले भाग में आपने पढ़ा कि खुदा  अपने दूतों को भेज कर दाऊद को अपने पास बुलवाते है। दाऊद खुदा को अपने समक्ष पाकर अपने दुख दर्द भूल जाता है। और यूंही कुछ दिनों तक खुदा उसे अपने पास रखते हैं और एक दिन उसे अपनी मां की याद आती है और दाऊद जाने की इजाजत मांगता है। खुदा उसे कुछ मांगने को या  पूछने को कहते हैं। तब दाऊद अपने लिए कुछ मांगने के बजाय किले के बारे में पूछताा है और खुुदा कहते हैं कि वो अपनी बेटी की शादी करवा देें तो ऐसा  नहीं होगा और  यह संदेश जाकर बादशाह को देता है और बादशाह अपनी बेटी की शादी दाऊद से करने को कहते हैं अब आगे...) 


बादशाह की बात सुनकर दाऊद एकदम चौंक जाात है। तब बादशाह कहते हैं कि उसकी नेकी और उसका भोलापन देख कर उन्होंने यह फैसला लिया है। 

शहंशाह सिराज कहते हैं कि उन्हें औलाद में एक बेटी ही है और अगर तुम्हारी बात सही साबित हुई और हमारा किला आबाद बनकर तैयार हो गया तो हम तुम्हें तुर्की का शहंशाह बना देंगे। 

और बादशाह अपनी बेटी की शादी धूमधाम से दाऊद के साथ करवाते हैं। और एक तरफ़ किले का काम भी आबाद बिना किसी अड़चन के पुरा हो जाता है। और बादशाह सिराज दाऊद को शहंशाह बना देते हैं। 

और फिर एक दिन दाऊद पालखी  लेकर अपनी मां को लेने जाात है। 

इस तरफ दाऊद की मां को बहुत पछतावा होता है कि उसे दाऊद को जानें ही नहीं देना चाहिए था उसे लगा था कि दाऊद थक हार कर वााप आ जायेगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ उसे दिन  - रात चिंता खाये जाने लगीं वह खुदा से एक ही दुवा मांगती थी कि उसके बेटे को सही सलामत उसके पास भेज दें। उसने खाना पीीना भी छोड़ दिया था और फिर एक दिन उसने देखा कुछ घोड़े और पालखी उसके घर के आंगन में आकर खडेे हो गए पहले तो वह पहचान ही नहीं पातीीं अपने बेटे को बादशाह के रूप में देख कर चकित हो जातीं हैं। 

फिर दाऊद अपनी मां को अपनी आपबीती बताता है। और कहता है कि माँ मुझे माफ कर दो अब्बा के जाने के बाद भी तुमने मेरी हर जिद पूर की दुसरे अमीर लडकों को देखकर में तुझसे  हमेेंशा अपनी नादानी में पैसे मांगता था। लेकिन तुने जो मेरे लिए कििया वह कोई नहीं कर सकता। 

यह सुनकर दाऊद की मां की आँखों में आँसू आ गए वो कहती हैं अरे वाह मेरा बेटा तो काफी समझदार हो गया है। 

दाऊद  : हा मां ओर एक बात  "खुुदा  खुद देता नहीं पर दिलवाता जरूर है। 

दाऊद की मां : अगर इंसान सच्चाई और नेकी की राह पर चले  तो  ढूंढने से खुदा भी मिल जाता है। 

और फिर दाऊद अपनी मां को लेकर अपने महल की ओर निकल पडता है। 

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समाप्त 


(नमस्कार मित्रों कहानी लिखने का यह मेरा पहला प्रयास है आशा करतीं हूूं आप सभी को मेरी यह कहानी पसंद आयेगी.. 

यह कहानी काल्पनिक है इसका किसी भी व्यक्ति या घटना से कोई संबंध नहीं। आप अपने  कीमती अभिप्राय अवश्य दें ताकि मुझे आगे कुछ नया लिखने की प्रेरणा मिले.. 🙏


- गीता परमार