Paheli - 1 in Hindi Horror Stories by Sohail Saifi books and stories PDF | पहेली - 1

पहेली - 1

तिथि 31 मार्च 1990

एक अज्ञात व्यक्ति एक नवजात शिशु को कुमार फैमिली के घर के बाहर रख कर चला जाता हैँ¡ कुमार फैमिली मे एक अधेड उम्र का जोड़ा रहता हैँ !
उनके विवहा को बीस वर्षो से भी अधिक हो चुके थे किन्तु उन्हें अब तक सन्तान प्राप्ति नहीं हुई ! उन्होंने कई वेद हकीमो से चिकित्सा करवाई पर समस्या हल नहीं हुई !
जैसे जैसे समय बीतता उनकी सन्तान प्राप्ति की लालसा भी बढ़ती जाती और जब उनको अपने घर के दरवाजे पर एक कोमल सा शिशु दिखा तो उनके भीतर ममता और स्नेह उमड़ आया, उन्हें लगा ईश्वर ने उनकी भक्ति और लग्न का फल दिया हैँ और उन्होंने उस बालक को रख लिया !
वो बालक को अपनी सगी संतान के जैसा प्रेम करने लगे किन्तु कुछ ही दिनों मे उनको अनुभव हो गया के जहाँ वो अभी रहते हैँ वहा बालक का पालन पोषण करने पर वो बालक को गोद लेने की बात को गुप्त नहीं रखा पाएंगे !
इसलिए उन्होंने अपना निवास स्थान बदल कर एक अलग स्थान पर जा कर वास किया और अपने जीवन की नई शुरुवात की,
कुमार परिवार ने उसका नाम हरीश कुमार रखा, आगे चल कर हरीश एक दुर्लभ और तीक्षण बुद्धि का बालक बना, उसकी योग्यता और बुद्धिमानी का आकलन हम इस बात से लगा सकते हैँ ! के उसने सातवीं कक्षा मे पैराडॉक्स और टाइम ट्रेवल थेओरिस को पड़ कर अच्छे से समझ और याद कर लिया था जबकि ये सब समझ पाना एक व्यस्क व्यक्ति के लिए भी अत्यंत कठिन होता हैँ ! इतना ही नहीं उसने इस संसार को बारवी कक्षा मे दो अविष्कार दिए !
पेहला स्मार्ट फ़ोन और दूसरा होलोग्राफी मगर इन दोनों का श्रेय उसको नहीं मिला, कियोकि उसने इस आईडिया को मोटे दामों मे मल्टी नेशनल कम्पनियो को बेच दिया था! पहले तो उसको पैसे लेकर अपने अविष्कार को बेच देना उचित लगा था किन्तु जब कम्पनी ने इस का सारा श्रेय खुद के नाम कर लिया तो हरीश को समझ आ गया के नाम ना होने से कितना नुकसान हैँ !
अब उसने ठान ली चाहे जो हो जाए अबकी बार के अविष्कार का श्रेय वो नहीं खोयेगा, उसका अगला अविष्कार आने वाले समय का सबसे महान अविष्कार बनने वाला था उसका अगला अविष्कार समय यात्रा यन्त्र था इस अविष्कार को उसने वर्ष 2010 मे बनाना शुरू किया और वर्ष 2016 तक लगभग बना ही लिया था के तभी एक एक कर उसपर दुखों के बादल फुट पड़े !
उसके जीवन मे भूचाल सा आ गया,

4 मई 2016 को उसके पिता का एक दुर्घटना मे दिहांत हो गया इसके बाद हरीश की माता भी अपने पति की मौत के सदमे से बीमार पड़ कर मर गई !
लेकिन हरीश की माता ने अपनी मृत्यु से पहले हरीश को सब कुछ सच सच बता दिया
कियोकिं अपने अंतिम समय मे हरीश की माता को लगने लगा था के सत्य जानने का हरीश को पूरा अधिकार हैँ और संभवत वो अपने असली माता पिता का पता लगा कर इस कठोर संसार मे फिर से अपनों का साथ पा ले,

लेकिन जब से हरीश को इसका ज्ञान हुआ उसका मन विचलित रहने लगा, वो सदैव दुखी हो कर सोचने लगता के क्यों उसके माता पिता ने उसको फेंक दिया और त्यागना ही था तो पैदा ही क्यों किया !
इन सब के कारण ना तो हरीश को खाने की चिंता होती ना ही नहाने का फ़िक्र होता, यहाँ तक की उसने अपने जीवन के एक मात्र लक्ष्य समय यंत्र पर भी काम करना बंद कर दिया बस वो दुखी मन से इधर उधर भटकता रहता,
इसी प्रकार की उलझन मे कुछ महीने निकल गए फिर एक दिन दिसंबर 2016 को हरीश धुप सेकता हुआ एक पार्क मे बैठा था तभी उसकी नज़र एक व्यक्ति पर पड़ी जिसे देख कर हरीश चौक गया, क्योंकि वो हूबहू हरीश का हमशक्ल था मगर सामने वाला हमशक्ल हरीश को देख कर नहीं चौका, उस हमशक्ल की प्रतिक्रिया कुछ ऐसी थी जैसे वो हरीश को ही देखने आया हो,
इस बात ने हरीश की जिज्ञासा को जागृत कर दिया और हरीश उसके पास जाने लगा !
हरीश को आता देख वो हमशक्ल वहां खड़ा नहीं रहा आगे बड़ चला, जैसे जैसे हरीश अपनी रफ़्तार बढ़ाता वैसे वैसे वो हमशक्ल भी अपनी चाल तेज कर लेता था!

अंत मे वो हमशक्ल भाग कर एक गली मे जा घुसा और हरीश भी तेजी से उस गली के पास पहुँच गया ! जैसे ही हरीश उस गली मे घुसा वहां एक तेज सफ़ेद चमकदार रौशनी हुई ! जिसके कारण हरीश की ऑंखें कुछ क्षणों के लिए चौंधिया गई, जब हरीश को सब कुछ स्पष्ट दिखाई देने लगा तो उसने वो गली खाली देखी, वो गली आगे से दो मंजिला जितनी ऊँची दीवार से बंद की हुई थी
उस दिवार के नजदीक जाने पर हरीश को एक कागज चुपका मिला जिस पर हरीश की हथलेखि मे ये लिखा था,



समय आ गया हैँ !

इस अनोखी और अद्धभुत घटना ने हरीश को सोच मे डाल दिया के आखिर ये सब क्या था
हरीश उस कागज को लेकर अपने घर वापिस आ गया और आज की घटना को सुलझाने मे लग गया, बहुत सोचने के बाद हरीश मन ही मन मे बोला !

" आखिर वो कौन था मुझसे क्या चाहता था कही वो आदमी भविष्य से आया मेरा ही एक रूप तो नहीं वो कागज जिसमे लिखा हैँ समय आ गया हैँ का अर्थ हैँ मेरे अधूरे अविष्कार को पूरा करने का समय आ गया हैँ !

फिर इस बात को समझ कर हरीश अपने अविष्कार को पूरा करने मे जुट गया और दिन रात एक करके 15 महीनों की कड़ी मेहनत के बाद उसने समय यात्रा यंत्र बना ही लिया !
अब केवल आवश्यकता थी तो एक परिक्षण की, हरीश ने सबसे पहले परिक्षण का समय तय किया जो की आज से ठीक पंद्रह महीने पूर्व का था वही दिन जिस दिन हरीश को अपने अविष्कार को संपन्न करने की प्रेणा मिली थी
इस दिन को चुनने की एक बड़ी वजह ये भी थी के भूतकाल मे हुए बदलाव का सीधा असर भविष्य पर पड़ता हैँ ! यदि हरीश ऐसा ना करता तो उसके कुछ गलत असर वर्तमान पर पड़ने की सम्भावना थी !
इसलिए वहां जा कर हरीश ने वो सब कुछ दोहराया जो उसके साथ हो चूका था बस अंतर केवल इतना था पिछली बार वो पीछा करने वाले के किरदार मे था और इस बार पीछा करवाने वाला व्यक्ति था
उसके बाद हरीश इस समय यात्रा को सफलता से पार कर अपने सही समय मे आ गया यानि वर्ष 2018 मे !

इस पंद्रह महीने पीछे जाने की यात्रा को सफल कर हरीश का साहस और यंत्र पर विश्वास और भी बड़ गया और अब हरीश ने भूतकाल के उस समय मे जाने का निर्णय लिया जिस दिन कोई उसको कुमार फैमिली के दरवाजे पर छोड़ कर गया था इस प्रकार से वो अपने माता पिता का भी पता लगा सकता था

इस बार की यात्रा पर जाने से पहले हरीश अपने माँ बाप के पुराने घर पर पहुँच कर उस घर और उसके आस पास की जगह का अच्छे से निरिक्षण करता हैँ | वो जानता था 1990 से लेकर अब तक इस जगह मे बहोत अंतर आ चूका हैँ किन्तु उसके बाद भी इस समय इस स्थान का निरिक्षण करना उसके लिए लाभ कारी ही होगा !
उस जगह का अच्छे से अध्ययन कर हरीश वापिस अपने वर्तमान के घर मे आ जाता हैँ !
वो 31 मार्च 1990 की तिथि को समय यन्त्र मे लगा कर समय की यात्रा पर निकल गया !




पिछली बार की समय पार करने की अवधि पंद्रह महीने की थी जो यन्त्र ने बड़ी ही सरलता से सफलता पूर्वक तय कर ली थी किन्तु इस बार ये अवधि 28 वर्ष पूर्व की थी यानि पहले की तुलना मे बीस गुना अधिक जिसे यन्त्र झेल नहीं पाया और कुछ क्षणों के लिए यन्त्र किसी अज्ञात समय और अज्ञात स्थान पर पहुंच कर निकल आया उसके बाद यन्त्र ने हरीश को तय समय पर पहुंचाया!
उस समय जब हरीश कुछ क्षणों के लिए किसी अनजान जगह पर पंहुचा था तो सफ़ेद चमकदार रौशनी के कारण उसकी ऑंखें चोंधिया गई और उसको चक्कर भी आने लगे तो खुद को सँभालने के लिए उसने पास मे रखी किसी चीज को पकड़ा था इससे पहले हरीश उस चीज को छोड़ता वो फिर से समय यात्रा पर निकल पड़ा और वर्ष 1990 मे आ कर रुका साथ मे वो चीज भी उसके साथ आ गई!
हरीश को अब भी चक्कर आ रहे थे थोड़ी देर रुकने के बाद हरीश की हालत समान्य हो गई,
जब हरीश समान्य हुआ तो उसकी नज़र उसके साथ आई चीज पर पड़ी तो उसके होश उड़ गए, उसकी सांसे अटक गई कियोकि वो चीज हॉस्पिटल मे नवजात शिशु को लिटाने वाला पाला था जिसमे एक सुन्दर नवजात बालक सोया हुआ था,

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