Me aur mere ahsaas - 6 in Hindi Poems by Dr Darshita Babubhai Shah books and stories PDF | मे और मेरे अह्सास - 6

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मे और मेरे अह्सास - 6

मे और मेरे अह्सास

भाग- ६

किताबों ने मीटिंग रखीं है l
गूगल की छुट्टी करने को ll

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निगाहों से बयान होता है वो है इश्क l
इशारों से बयान होता है वो है इश्क ll

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उसकी गली से क्या गुजरे l
चहरे के तेवर ही बदल दिये ll

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आंख झुकी हुई है l
साँस रुकी हुई है ll

मुलाकात हो गई l
दिलकी बात हो गई ll

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पतंग मे व्हाट्सप्प लिख कर भेजा है l
आज खुदा को मेने मेसेज लिख भेजा है ll

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मन पतंगा उड़ा उड़ करे l
प्रीत संगे उड़ा उड़ करे ll

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तुम्हारी याद क्या लिख दी l
कागज मे गुलाब खिल गये ll

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तन्हाईया इस तरह शोर मचाने लगी l
अंदर - बाहर का शोर खामोश हो गया ll

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रंग होली का हो या इश्क का l
जाते जाते वक़्त तो लगता है ll

भंग का नशा जो चड़ गया l
उतरते हुए वक़्त तो लगता है ll

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ग़म मे तो अकेली रो लुंगी मे l
मेरी हर खुशी मे तू चाहिये ll

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फूल सी इच्छा जगी है मन में l
संग होली खेलनी है मन से ll

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सुनो ता-उम्र प्यार करते रहेगे l
बस तुम યું ही साथ देते रहेना ll

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हर जन्मोजन्म मुजे तू ही तू साथी चाहिये l
जबभी दुआकी बस एक यही दुआकी मेने ll

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स्त्री का
कोई स्थान
ले सकता है
तो
केवल
एक

"स्त्री"

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इश्क का रंग छाया है l
चहरे पे नूर आया है ll

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ग़म मे तो अकेली रो लुंगी मे l
मेरी हर खुशी मे तू चाहिये ll

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हमेशा दिल की बात सुनो l
क्योंकि दिल जुड़ नहीं बोलता ll

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इश्क को देखते ही हुस्न का लाल हो जाना l
वो मोहब्बत की एक मात्र निशानी ही है ll

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कश्ती को किनारा मिल गया l
इश्क देख हुस्न खिल गया ll

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रंग होली का हो या इश्क का l
जाते जाते वक़्त तो लगता है ll

भंग का नशा जो चड़ गया l
उतरते हुए वक़्त तो लगता है ll

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आपको पास मेरे आना पड़ेगा l
बंधकर डोरके संग आना पड़ेगा ll

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वक़्त ने दूर कर दिया l
जख्म ने दूर कर दिया ll

ग़लतफ़हमी छोटी सी हुई l
शब्द ने दूर कर दिया ll

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मन विचलित हो जाता है l
जब पुरानी तसवीरें कहीं l
से सामने आ जाती है ll

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तू जो मिला खूबसूरत जिंदगी हो गई l
दिल जो खिला खूबसूरत जिंदगी हो गई ll

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आज खिड़की से ज़ाक कर देख रहा था l
क्या देखा बच्चे खेल रहे थे l
लगता है फोन के टावर का l
कनेक्शन नहीं मिल रहा है ll

प्रेम का स्वीकार कर ले ए सनम l
फोन पे इजहार कर ले ए सनम ll

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होठो पे हसी देख धोखा मत खाना l
अक्सर गुमशुदा को हस्ते देखा है ll

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हर वक्त हर लम्हा तेरी यादों से धनी हैं l
हमारी हर साँस तेरी यादों से धनी हैं ll

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गर तुम खुश रहने का वादा करते हों l
ताउम्र चुपचाप तेरी जुदाई सह लेगे ll

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कई बार ये सोचते हैं l
कि तुम्हें याद करने के लिए चाय पीते हैं l
या चाय पीते हैं और तुम याद आ जाते हो ll

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बहोत ऊंची उड़ान भर रहा था l
बड़ी लम्बी दोड़ लगाई थी l
ना जाने कहां जाना चाहता था l
ना जाने क्या पाना चाहता था l
जाने क्या लगन दिमाग में हामी थी l
खुद को भुला गया था l
खुद के लिए जीना भूल गया था l
खुदा ने बस धीरे से एक फूंक मारी l
पिजरे मे कैद हो गया अकक्ल ठिकाने आ गयी l
खुद को तीसमार समझने वाला l
एक ही पल मे खुद के पास जाके बैठ गया ll

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बहोत सोच कर खुदा ने चाल चली l
पूरी दुनिया की गति पल मे रोक दी ll
कई दिनों से इंसान की बेटरी लो थी l
फिर से चार्ज करने के लिए रख दी ll

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इंसानो और उनके वाहनौ की आवजे क्या बंध हुईं l
बच्चों ने पक्षीओ की मधुर आवाज की अनुभूति की ll

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गाँव उजड़ लग रहा है l
शहर खाली खाली l
रास्ते गुमसुम है l
हर कही सन्नाटा छाया है l
सिर्फ खालीपन का शोर है l
अपनी ही करनी का फल है l
जो आज तू घर में कैद है l
सभी को खुला आसमाँ चाहिए l
ये बात आज तुजे पता लगेगी l
अभी भी वक़्त है, तू जी ले अपनी जिंदगी l
औरों को भी जीने दे खुलकर उनकी जिंदगी ll

दर्शिता.