Do balti pani - 13 in Hindi Comedy stories by Sarvesh Saxena books and stories PDF | दो बाल्टी पानी - 13

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दो बाल्टी पानी - 13



करीब घंटे भर बाद मिश्राइन और वर्माइन का नंबर आया, दोनों ने अपनी-अपनी बाल्टी भरी और मुंह लटकाए घर की ओर चली आईं |

मिश्राइन(घूंघट को नीचे की ओर खिंचते हुए) -
" गांव के मर्दों को तो जैसे कोई लाज सरम ही नहीं है, अरे हम जनानी पानी भरने जाए तो इन मुश्तअंडों को नहाता हुआ देखें" |

वर्माइन - "सही कहती हो बहन, बड़े निर्लज्ज है ये पर क्या करें मरना जुझना तो है ही हमें" |

दोनों औरतें अपनी भड़ास गांव के मर्दों को कोसकर निकालते हुए अपने-अपने घर पहुंचती हैं |



" लल्ला… रे लल्ला…" सरला सुनील को आवाज देती है |

सुनील पिंकी की फोटो अपने सीने से लगाए प्रेम के सागर में गोता लगा रहा था तभी आवाज आई छपा… और यह आवाज सुनील के प्रेम सागर में सरला के कूदने से हुई थी, सुनील एकाएक चौंक गया जब सरला ने उसके कमरे का दरवाजा जोर से खोला |
सुनील -" हां.. बो.. बो..बोलो ना क्या हुआ अम्मा"?

सरला जासूसी भरी नजरों से सुनील को देखकर बोली, "का बात है लल्ला? आजकल तू मोमबत्ती जैसा बुझा बुझा रहता है, शरीर भी कित्ता सूख गया है, कोई हवा बयार का चक्कर तो नहीं है" |

सुनील (सकपकाते हुए) - "अरे अम्मा.. कसम बजरंगबली की.. जो तुम्हारे जैसी अम्मा हमारे पास हो तो ऊपरी हवा बयार की का मजाल जो हमें फंसा सके" |

सरला -" चल चल, हमें सब पता है, जरूर उस चुड़ैल की नजर लग गई होगी हमारे लल्ला को "| अपनी तसल्ली के लिए सरला, सुनील की नजर उतार कर मुट्ठी भर मिर्ची चूल्हे में डाल देती है |


पानी भर भर के गांव के लोगों का बुरा हाल हो जाता है औरतों दिनभर बिजली वालों को कोसती और उसके मरने की दुआ करती |


" स्वीटी… स्वीटी… अरे बिटिया जरा ऊपर से कपड़े तो उतार ला, साँझ हो गई" | ठकुराइन ने रसोई घर में आटा सानते हुए कहा |

स्वीटी अपना मुंह लटकाए कपड़े उतार लाती है, ठकुराइन कुछ पूछने को बढ़ी लेकिन चुप हो गई |

अगले दिन स्वीटी जल्दी से उठी और नल पर जाने लगी, उसे सुनील को जो देखना था |

आज बर्माइन और मिश्राइन भी बहुत जल्दी उठकर सड़क के उस पार वाले नल पर चली गई और पहले ही नल पर पहुंच गईं |

मिश्राइन - "अरे वर्तमान का बात है? आज यहां कोई नहीं है वाह.." |

वर्माइन दूसरी ओर निहारते हुए बोली, "अरे जीजी.. टोली अब आना शुरू हुई है, चलो बढ़िया रहा हम जल्दी पानी भर कर निकल चलें, वरना यह बेसरम आदमी कपड़े उतार उतार कर यहीं नहाने लगेंगे" |

मिश्राइन ने अपनी बाल्टी लगाई और नल चलाया, पर नल जैसे जाम हो गया हो |

वर्माइन - "लगता है नल भी जाने वाला है, जरा जोर लगाओ जिज्जी… "|

मिश्राइन ने जोर लगाकर नल चलाया ही था कि बाल्टी में छपाक की आवाज आई |

इस पर दोनों औरतें चौंक गईं और दोनों ने बाल्टी में झांक कर देखा तो बालों का एक गुच्छा सा था, मुझे देखकर दोनों औरतें जोर जोर से चिल्लाने लगी, " अरे गजब हो गया.. गजब हो गया… नल पर चुड़ैल है, नल पर चुड़ैल है.. अरे भागो यहां से अपनी जान बचाओ" | यह कहते हुए दोनों औरतें बिन जल मछली सी तड़पने लगी और भागने लगी जिन्हें देखकर पीछे आ रही भीड़ भाग कर नल पर आ गई और बाल्टी में देखा तो सचमुच बाल थे |



आगे की कहानी अगले भाग में...