Shapit - 1 in Hindi Thriller by Ashish Dalal books and stories PDF | शापित - 1

शापित - 1

शापित

आशीष दलाल

[बचपन में यौनउत्पीड़न का शिकार हुए युवक की अपराधी से बदला लेने की भावना और अंतर्द्वंद पर आधारित अपराध कथा]

(१)

‘अंकल ! आपकी दाढ़ी चुभती है.’ दस वर्षीय नमन ने अपने नन्हें हाथों से रोहित के चेहरे को अपने गाल के पास से दूर करने की कोशिश की. रोहित कमरे के कोने में रखी कुर्सी पर बैठा हुआ था और नमन उसके दो पैरों के बीच खड़ा था.

‘ओके. ब्रेव बॉय ! ठीक है. अंकल तुम्हारें गालों नहीं छुएंगे पर तुम्हें अंकल से प्यार है तो जल्दी से उनके गालों पर पप्पी कर दो.’ कहते हुए रोहित ने नमन को खींचकर अपनी गोद में बिठा लिया.

नमन ने अपने कोमल होंठो से दो बार बारी बारी से रोहित के गालों को शर्माते हुए छू लिया.

‘एक और यहां.’ रोहित ने अपने होंठो की तरफ इशारा कर नमन से कहा.

‘नहीं. मैं अब घर जाऊंगा.’ नमन ने रोहित की गोद से उतरते हुए कहा.

‘अच्छा, चल आज एक नया खेल खेलते है.’ सहसा रोहित ने नमन का हाथ पकड़ लिया.

‘नया खेल ? कौन सा?’ रोहित की बात सुनकर नमन की आंखें चौड़ी हो गई.

‘बहुत ही मजेदार खेल है पर उस खेल को खेलने के लिए तुझे छोटा बच्चा बनना पड़ेगा.’ रोहित ने बड़े ही प्यार ने नमन के बालों को सहलाते हुए उसे देखा.

‘मैं तो अभी छोटा ही हूं न अंकल !’ कहते हुए नमन मुस्कुरा दिया.

‘और भी छोटा.’ रोहित ने लाड़ लड़ाते हुए नमन को अपने और नजदीक खींच लिया.

‘वो कैसे ?’ रोहित की बात सुनकर नमन उलझ गया.

‘वो मैं सीखा दूंगा पर पहले प्रामिस करों कि इस खेल के बारें में किसी से कुछ भी नहीं कहोगे.’ रोहित ने खड़े होते हुए फिर से नमन को गोद में ले लिया.

‘प्रामिस. सीक्रेट.’ नमन ने अपने दांये हाथ की ऊंगली रोहित के बायें हाथ की ऊंगली से जोड़ते हुए जवाब दिया.

‘और अगर भूल से भी किसी को बताया तो भगवान नाराज होकर तुम्हें श्राप दे देंगे और तुम्हारें यह अंकल मर जाएंगे. फिर उसका पाप तुम्हें ही लगेगा.’ रोहित ने पास ही लगे बेड की तरफ नमन को ले जाते हुए कहा.

‘नहीं कहूंगा अंकल. गॉड प्रामिस. चलों न खेलते है.’ नमन नए खेल के बारें में जानने को उत्सुक था.

‘तो ठीक है. एक बार छोटे बच्चे की एक्टिंग कर बताओं. इस बिस्तर पर लेटकर बताओं कि वह कैसे सोता है.’ रोहित ने अपनी गोद से उतारकर नमन को दीवार के पास लगे पलंग पर बिछे गद्दे पर बिठा दिया.

‘ये तो बड़ा ही आसान है.’ नमन चहकते हुए बिस्तर पर लेट गया. रोहित भी उसकी बगल में लेट गया और उसके बालों को सहलाने लगा.

सहसा उसने करवट ली और उसके गालों पर बड़ी ही हसरत से अपनी ऊंगलियां फेरने लगा.

‘अच्छा, अब बताओं । छोटा बच्चा रोता कैसे है ?’ सहसा रोहित ने नमन के नाजुक होंठो को छूते हुए पूछा.

‘ऊं...ऊं..वां...वां...’ नमन ने बड़ी ही मासूमियत से झूठमठ अपनी आंखों को मसलते हुए तीखी सी आवाज निकाली.

‘वेरी गुड ! तू तो बड़ा ही होशियार है रे !’ रोहित ने बड़े ही प्यार से एक बार फिर से नमन के गाल को सहलाया.

‘मुझे मजा नहीं आ रहा है इस खेल में. मैं घर जा रहा हूं.’ तभी नमन उठकर बैठ गया.

‘अभी मजा आएगा मेरे शेर.’ रोहित ने नमन का हाथ खींचकर वापस अपने पास लिटा लिया. नमन अनमना सा उसकी बगल में लेट गया.

‘गुड बॉय ! अब छोटा सा बच्चा चड्डी में पेशाब कर देता ही तो अंकल उसकी चड्डी चेंज करेंगे.’ सहसा रोहित के हाथ नमन की चड्डी तक पहुंच गए और एक झटके में कमर से उतरकर उसकी चड्डी घुटनों के नीचे तक पहुंच गई.

‘नहीं अंकल. मम्मी कहती है अब मैं बड़ा हो गया हूं तो मुझे सबके सामने चड्डी नहीं उतारनी चाहिए.’ नमन ने प्रतिकार किया.

‘इतनी जल्दी भूल गया? इस खेल में तू छोटा बच्चा बना है और छोटे बच्चे के शू शू करने पर चड्डी उतारनी ही पड़ती है.’ रोहित ने नमन को अपनी बातों में लपेटते हुए उस पर अपनी पकड़ बनाते हुए कहा.

‘पर अंकल, मैंने तो शू शू की ही नहीं.’ नमन ने प्रतिकार करते हुए कहा.

‘झूठमूठ में की है. ठीक है.’ रोहित ने नमन को समझाते हुए कहा.

‘पर मुझे शर्म आ रही है.’ नमन ने रोहित की पकड़ से छूटने की कोशिश कर अपनी चड्डी ऊपर चढ़ाने की कोशिश की.

‘ये बात है तो चल मैं भी अपना पेंट उतार देता हूं.’ कहते हुए रोहित ने अपना पेंट ढीला कर घुटने तक उतार दिया.

रोहित को इस अवस्था में देख नमन आश्चर्य से उसे घूरने लगा. तभी रोहित को ध्यान आया कि कमरे के सामने की दीवार की खिड़की खुली है. उसने अपना पेंट वापस ऊपर चढ़ाया और फुर्ती से जाकर खिड़की बंद कर दी. खिड़की बंद होने से कमरे में हल्का सा अंधेरा छा गया.

‘अंकल, मुझे अंधेरे में डर लगता है. आपने खिड़की क्यों बंद कर दी ?’ रोहित जैसे ही फिर से नमन की बगल में लेटा नमन ने उससे पूछा.

‘मैं हूं न तेरे संग. हमारा नया खेल कोई देख न ले न इसलिए अकेले में खेलना चाहिए.’ रोहित ने नमन को समझाया और अपना पेंट वापस घुटने तक नीचे कर लिया.

नमन रोहित को फिर से अर्धनग्न अवस्था में देखकर कुछ समझ न पाया.

‘इस खेल का नियम है यह. अच्छा, अब तू चुपचाप रहेगा तो ही खेल का मजा आएगा.’ कहते हुए रोहित के हाथ नमन के कमर के नीचे के भाग को सहलाने लगे. गुदगुदी होने का अहसास पाकर नमन चुपचाप रोहित की हरकतों का हिस्सा बनने लगा. कुछ देर तक नमन चुपचाप रहा फिर रोहित को कुछ हरकत करते पाकर वह हड़बड़ा उठा लेकिन रोहित की पकड़ से छूट न पाया.

‘नहीं .... अंकल. दुख रहा है.’ कुछ देर बाद नमन के मुंह से एक चीख निकल पड़ी.

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