Shapit - 3 in Hindi Thriller by Ashish Dalal books and stories PDF | शापित - 3

शापित - 3

शापित

आशीष दलाल

(३)

उस घटना के बाद थोड़ी समझ आने पर रोहित से वह जितना दूर रहने की कोशिश करता जिन्दगी के मोड़ उसे बार बार उसके नजदीक आने पर मजबूर कर देते. बारहवीं पास करने के बाद उसके पापा की हार्ट अटैक से असमय मौत हो जाने के बाद रोहित ने बड़े भाई की तरह नमन को हिम्मत दिलाकर जिन्दगी के संघर्षों से लड़ने के काबिल बनाया था. नमन रोहित को अपने बचपन में भी न समझ पाया और न ही युवावस्था की ओर बढ़ते हुए समझ पा रहा था. रोहित नमन के साथ इस तरह से व्यवहार करता जैसे उसने कुछ गलत किया ही नहीं और जो कुछ किया वह नमन को याद नहीं. लेकिन नमन सबकुछ जानते हुए समझते हुए अपने मन की पीड़ा को व्यक्त नहीं कर पा रहा था.

वैसे तो शरीर और शरीर को लेकर स्त्री पुरुषों के संबंधों के बारें में समझ आने पर नमन रोहित से एक निश्चित दूरी बनाकर रहने लगा था. सामजिक तौर पर बेहद मिलनसार, मददगार और खुशनुमा व्यक्तित्व के मालिक रोहित का पड़ौसी होने के नाते नमन के घर अक्सर आना जाना लगा ही रहता था. बढ़ती उम्र के साथ नमन मन में उपजी घृणा को मन में रखकर चेहरे पर एक झूठी मुस्कुराहट लाकर सबके सामने रोहित से हंस बोल तो लेता लेकिन फिर अकेले पड़ने पर मन ही मन खुद से अपनी देह के संग हुए अन्याय को लेकर लड़ने लगता. वह रोहित से जितनी दूरी बनाकर चलने की कोशिश कर रहा था कि अचानक जिन्दगी में उपजी हुई आकस्मिक परिस्थिति ने उसे उतना ही उसके करीब लाकर खड़ा कर दिया.

अपने पति किस असमय मौत हो जाने से अकेली पड़ गई सुनंदा की मदद को रोहित उसकी हर कठिनाइयों में साथ चला. दुःख की घड़ी में रोहित का सही मायनों में मददगार होना नमन के मन में उसके प्रति रही कड़वाहट को मिटा तो नहीं पाई लेकिन जहां रिश्तेदार केवल बातें बनाकर दूर हो गए थे उस समय रोहित द्वारा भावनात्मक संबल पाकर वह खुद अपने आपको सम्हाल पाया था. अपनी पहचान और संपर्कों की बदौलत शहर की अच्छी कॉलेज में दाखिला करवाकर समय समय पर रोहित नमन का मार्गदर्शन कर उसे आगे बढ़ने को प्रेरित भी करता रहा. रोहित द्वारा मिल रही मदद और भावनात्मक सहारे को नमन अपने संग बचपन में हुई उस घटना को लेकर उसके मन को समझ तो अब भी नहीं पा रहा था. अब तक रोहित की शादी और उसके बाद एक बच्चा हो जाने के बाद उसकी जिन्दगी तो जैसे सम्हल गई थी लेकिन नमन खुद को मिली तमाम सफलताओं के बावजूद मन में चुभ रही रोहित द्वारा दी गई वेदना और फिर मददगार होकर उसके अहसान का बोझ लेकर वह खुद ही अंतर्द्वंद से परेशान हो उठता.

समय बीतने पर तमाम प्रयासों की बदौलत एम. बी.ए. कर जब नमन ने नौकरी पा ली सुनंदा के कहने पर वह उस शाम रोहित के घर मिठाई का बाक्स लेकर गया था. रोहित उस वक्त घर पर अकेला ही था. नमन ने जब उसे अपनी नौकरी लगने की खबर सुनाकर मिठाई का बाक्स आगे बढ़ाया तो रोहित ने आगे बढ़कर उसे गले लगा लिया. रोहित के इस स्पर्श से नमन के शरीर में अजीब तरह की कंपकपी होने लगी. वह कुछ समझ पाता इससे पहले रोहित ने जोर से उसकी पीठ थपथपाई. नमन का चेहरा पसीने से भीग गया और वह एक झटके से रोहित से दूर जाकर खड़ा हो गया.

‘क्या हुआ नमन ?’ रोहित ने उसे असहज पाकर पूछा.

‘क... कुछ नहीं.’ कहते हुए नमन ने अपने चेहरे पर उभर आई पसीने की बूंदों को पोंछ डाला.

‘अब तो सुनंदा आंटी की आधी चिंता दूर हो गई. बस ! अब शादी भी कर ले तो उनकी पूरी चिंता दूर हो जाएगी.’ रोहित इस वक्त नमन के मन की स्थिति को समझ नहीं पाया और उसने हल्के अंदाज में उससे कहा.

जवाब में नमन कुछ न बोला लेकिन उसने एक व्यंग्यभरी नजर रोहित पर डाली.

‘बड़ा ही शर्मीला है. बचपन से जानता हूं तुझे. फिर भी लड़की वगैरह का चक्कर हो तो आंटी को पहले ही बता देना. तेरी पसंद को वें नकारेगी नहीं.’ कहते हुए रोहित ने मिठाई का एक टुकड़ा मुंह में रखा और हंस दिया.

‘ऐसी कोई बात नहीं है लेकिन मुझे शादी नहीं करनी है.’ नमन ने बड़े ही रुक्षभाव से जवाब दिया और वापस जाने को मुड़ा.

‘क्यों जेंटलमैन ? क्यों नहीं करनी शादी ? जवान हो, हेंडसम हो, अब तो अच्छी सी नौकरी भी संग है. पहले सभी ऐसा कहते है पर शादी का लड्डू खा ही लेते है.’ रोहित ने नमन को टोका और जब वह उसकी ओर मुड़ा तो उसे देखकर हंस दिया.

नमन कुछ सोचकर उसकी रोहित की तरफ आगे बढ़ा और हिम्मत जुटाकर अपने मन की बात को होंठों पर ले आया, ‘एक बहुत पुरानी बात करनी थी आपसे ?’

‘कैसी बात ? बेझिझक बोल ?’ रोहित ने उसके कंधे पर हाथ रखते हुए कहा.

‘आप भले ही भूल चुके हो वह बात लेकिन मैं जिन्दगीभर आपके द्वारा किए गए उस दुर्व्यवहार को नहीं भूल पाऊंगा.’ रोष के साथ कहते हुए नमन ने रोहित का हाथ अपने कंधे से हटा लिया.

‘कौन सी बात ?’ नमन के कहने का आशय समझते हुए रोहित ने अनजान बनते हुए पूछा. रोहित अब तक यही समझ रहा था कि बचपन की बातें नमन को याद न होगी. उसे यह भी विश्वास था कि अगर नमन के मन में उस घटना की धुंधली यादें रह भी गई होगी तो वह अपनी जुबान से उस घटना का जिक्र करने की हिम्मत कभी नहीं कर पाएगा.

वैसे भी बचपन की कई घटनायें इन्सान समय के साथ भूल जाता है. बीती बातें भूलने की ईश्वर ने हर इन्सान को एक सौगात दी है ताकि वह अपनी आगे की जिन्दगी भरपूर तरीके से जी सके. लेकिन इसके साथ ही कुछ बातें जिन्दगी के साथ इस कदर जुड़ जाती है कि उनकी परछाई जिन्दगी के कुछ पलों को अन्धकारमय बनाती रहती है. अभी ऐसा ही कुछ नमन और रोहित के साथ हो रहा था. रोहित गुनाहगार था और मजबूत था इसी से वह घटना याद होते हुए उसे ज्यादा महत्व न देकर लगभग भूल ही चुका था और अपनी जिन्दगी में मस्त था. नमन पीड़ित था और नासमझी में उस यौनशोषण का हिस्सा बना था इसी से वह अपने संग हुई उस घटना को आज तक नहीं भूल पाया था.

‘क्यों अपने आपको धोखा दे रहे है अंकल ? पंद्रह साल पीछे जाकर देखिए सबकुछ साफ साफ नजर आ जाएगा. मैं कुछ भी भूला नहीं हूं.’ नमन ने कहने को कह तो दिया लेकिन बड़ी कठिनाई के संग कहते हुए इस बात को लेकर वह और ज्यादा विचलित हो गया.

नमन की बात सुनकर रोहित कुछ पल को चुप रहा फिर उसे कुछ कहते हुए उसके कंधे पर हाथ रखने ही जा रहा था कि नमन पीछे हट गया.

‘जब से शरीर और उसे लेकर सम्बंधों के बारें में समझ आयी है तब से लेकर अब तक एक अजीब तरह की लड़ाई लड़ रहा हूं अपने मन से. आपने मेरा बचपन रौंद डाला. मेरी किशोर अवस्था अन्य लड़कों की तरह सामान्य न रही. आज जब मेरे हमउम्र लड़के सेक्स और रोमांस को लेकर बिन्दास बातें करते है, चुटकुले सुनाते है या अपने अनुभव शेयर करते है तो मैं एक पीड़ा और अजीब सी नकारात्मक भावना से घिर जाता हूं. मेरी जिन्दगी की खुशियों पर ग्रहण लगाने वाले आप ही हो अंकल. आपने मुझे एक शापित जिन्दगी जीने पर मजबूर कर दिया.’ कहते हुए नमन की सांस तेज हो गई और वह पास रखी कुर्सी पर जाकर बैठ गया.

‘नमन ! मुझे माफ कर दे बेटा. उस वक्त उन्माद में न सम्हाल पाया अपने आपको.’ रोहित ने इस बात को यहीं खत्म करने के इरादे से नमन की तरफ पीठ करते हुए माफी मांग ली.

‘उन्माद तो मेरे शरीर में भी बहुत उठ रहा है इस वक्त. आपके माफी मांग लेने से वह शान्त नहीं हो जाएगा.’ नमन ने गुस्से से कहा और अपनी जगह से खड़ा होकर रोहित के सामने जाकर खड़ा हो गया.

‘अपने किए के प्रायश्चित के तौर पर तुम्हारी जिन्दगी संवारने के हर संभव प्रयास कर चुका हूं और आज मेरी ही बदौलत तुम अपनी जिन्दगी की इस हसीन सफलता को प्राप्त कर सके हो.’ रोहित ने नमन पर भावनात्मक दबाव लाकर उसे शांत करने का यत्न किया.

‘बड़ी आसानी से कह दी आपने यह बात लेकिन मेरे मन के घाव आपकी इस बात से कम नहीं हो पाएंगे. आपसे बदला तो जरुर लूंगा और उसी अन्दाज में लूंगा जिस अन्दाज से आपने मेरी मासूमियत का गला घोंटा था और मेरे विश्वास को तोड़ा था.’ रोहित की बात का जवाब देते हुए नमन के चेहरे पर एक कुटिल मुस्कान छा गई.

‘तुम्हारें कहने का मतलब क्या है ?’ रोहित के स्वर में घबराहट समा गई.

‘सब साफ है. एक आकर्षण से परिचय तो आपने अनजाने में बचपन और किशोरवय के संधिकाल में ही करवा दिया था. अब वही आकर्षण पुख्त होकर अनुभव में बदलना चाहता है.’ नमन ने हंसते हुए कहा और वहां से जाने लगा.

‘नमन ! बात अधूरी है. तेरे कहने का आशय क्या है.’ रोहित ने विचलित होते हुए उससे पूछा.

‘आपका बेटा मुझ पर उतना ही विश्वास करता है जितना मैं आपसे किया करता था.’ रोहित की बात का जवाब देकर नमन वहां से बाहर जाने लगा. रोहित ने कुछ कहना चाहा लेकिन नमन उसकी परवाह न करते हुए बाहर निकल गया.

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