A highschool girl in Hindi Love Stories by Dr. Surya Shukla books and stories PDF | class -10 वाली लड़की

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class -10 वाली लड़की

Chapter-1
हम सभी लोग अपनी जिंदगी की सबसे लंबी छुट्टियों पर है।इस छुट्टी के और बढ़ जाने की संभावना पर कोई संदेह नही करना चाहिए।हालात इतने नाजुक हो जाएंगे किसी ने सोचा तक न था। हर कोई अपना काम छोड़ अपने शहर ,घर जाना चाहता है। कुछ लोग समय से निकल आये कुछ लोगों को मजबूरी में आना पड़ा। पिछले तीन महीने से सब कुछ बंद है ।सिवाय बेहद जरूरी कामो के अलावा। इसी आपातकालीन छुट्टी में मुझे अपने गांव में आना हुआ। बहुत दिनों से घर मे बैठे बोर हो गया था कल ही सुना था कि अब बाजार खुलने वाले है।
चूंकि अनलॉक की प्रॉसेस शुरू हो गयी है।
आज तीन महीने बाद बाज़ार खुली है कुछ रौनक आयी है।
माँ ने एक लंबी लिस्ट थामते हुए कहा सोनू की दुकान से सामान लेके आना ,तेरे बचपन का दोस्त है ।औऱ उसकी घरवाली से भी मिलके आना ,तू उसकी शादी में नही आया था।मै सुबह तैयार होके बाजार चल दिया ।बाजार में बहुत हलचल दिख रही थी लेकिन एक चीज सबमे बहुत कॉमन थी,
पता है क्या।ज्यादातर लोग मास्क वैगरह लागये हुए थे।
मै जल्दी से सोनू के की दुकान पर गया।सोनू के पापा को नमस्ते किया और बोला अंकल सोनू कहाँ है।अंकल ने सोनू को आवाज देके बुलाते तब तक मैं बाइक की चाभी ,हेलमेट और चश्मा निकाल के काउंटर के सामने बेंच पर रख दिया ।
सोनू आया हमने गले मिलकर एक दूसरे को प्यार जताया।
Chapter-2

मैं सोनू के साथ गप्पे मारने लगा ।उसकी नई नई शादी हुई है ,ये जानकर मैं उसे भाभी के नाम पर थोड़ा हसी मजाक भी कर रहा था। कोई बुजुर्ग के सिगरेट लेने के लिए सोनू के पापा से बहस कर रहा था।मैं और सोनू बाहर आकर मामला सम्भाल लिए।इसी दौरान एक आदमी सायद अपने पत्नी के साथ दुकान पर आता है उनके साथलगभग साल -डेढ़ साल का बच्चा भी था। कुछ जरूरी सामानों के लिस्ट सोनू को पकड़ाते उसने औरत से कहा तुम यही बैठो, मैं बैंक होके आ रहा हूं। औरत बच्चे के साथ काउंटर के सामने लगी बेंच पर बैठ गयी। मुझे भी आये हुए काफी देर हो चुका था ,सोनू और भाभिसे विदा लेके चलने लगा था।
जब हेलमेट और चश्मा उठाने के लिए बेंच की ओर गया देखा तो बच्चा हेलमेट और चश्मे से खेल रहा था।बच्चा बहुत गोरा और तंदुरस्तथा ,उसे देख मुझे मेरे बचपन की तस्वीर याद आने लगी।मेरे कमरे में बचपन की तस्वीरों क्रोनोलॉजिकल ऑर्डरर में लगी है।
मैंने बच्चे की तरफ इशारा करके उससे अपना समान मांगने की कोशिस की ।बच्चा मुझे देख के रोने लगा। मुझे बड़ा ही अटपटा लगा कि मेरी वजह से ही रोने लगा ।लेकिन समान लेना भी जरूरी था।अजनबियों से अक्सर बच्चे डर जाते है मैंने पीडियाट्रिक्स में पढ़ा था और मेरी तो ढाढ़ी मूछे भी बहुत बढ़ गयी ।
बच्चे के मा को समझते देर न लगी।वो कोशिस करने लगी कि मुझे मेरे समान मिल जाये।लेकिन बच्चा और तेज़ तेज़ रोने लगा। अब मैं क्या करूँ ,बच्चे से समान तो छीना जा नही सकता था।दुकान से चोकलेट और टॉफी देकर मानने की कोशिस भी असफल रही।
बच्चे को मनाने के लिए उसकी माँ जतन करने लगीं और आखिर में अपना मास्क हटाकर कुछ बोलने लगी ,जिससे बच्चा समझ जाएं।
Chapter-3
माँ बच्चे को दुलार रही हो या मना रही हों ,इससे खूबसूरत दृश्य हो नही सकता ।मैं उन्हें बड़े ध्यान से देख रहा था। मास्क हटाने से उनका चेहरा साफ दिख रहा था।
वो चेहरा मुझे कुछ जाना पहचाना लगा, दिमाग लगा रहा था कि कौन है ।फिर हल्की सी याद ताजा हुई।
मैंने कन्फर्म करने के लिए सोनू से जाके पूछा अबे सोनू ये highschool वाली प्रिया लग रही है?
‌उसने कहा नही बे। मैंने कहा साले तुझे स्कूल की प्रेयर तक तो याद नही हुई प्रिया क्या घंटा याद होगी।
‌मै उनके पास जाके कहा - शायद मैं आपको जानता हूं, माफ कीजियेगा लेकिन कुछ जाना पहचाना चेहरा लग रहा है
कहीं आपका नाम प्रिया मिश्रा तो नही है ,सेक्शन c
DAV स्कूल ।उसने कहा हाँ लेकिन मैंने आपको नही पहचाना -मैंने अपना परिचय दिया ।
‌उसने कहा अरे बाप रे तुम तुम्हे कौन भूल सकता है मैंने सोचा भी नही था कि कभी तुमसे मुलाकात होगी।
‌ तुम कितना बदल गए हो बिल्कुल पहचान में नही आ रहे हो ,इतनी ढाढ़ी और मूछे रख लिए कैसे पहचानती भी ?
‌मैंने कहा आज 8 साल बाद मिले है और बदलाव भी जरूरी है।
‌प्रिया ने कहा बस तुम्हारी स्मार्टness नही बदली है,
‌बिल्कुल class 10 की तरह स्मार्ट हैंडसम हो बस थोड़ा मोटे हो गए हो। वही घुंघराले बाल ,छोटी छोटी आंखे बड़ा विज़नवाला फालतू का चश्मा लिए।
‌ मै मनमे ही सोचने लगा कि क्या हम वाकई इतने ख़ूबसूरत होते हैं, जितना हमें हमारे चाहने वाले महसूस करा देते हैं।
‌मैंने कहा तुम तो बहुत बदल गयी हुई।
बॉयकाट बाल से लेके लंबे बाल, काजल तक न लगाने वाली लड़की फुल मेकअप ,स्कर्ट से साड़ी में ,मांग में सिंदूर भी ,बिना मुझे बुलाये ही शादी करली।मतलब तुम्ही अकेले धरती से चांद तक गयी हो।
उसने कहा बस बस, तुम अपना बताओ क्या चल रहा ,क्या कर रहे हो ,सादी हुई कि नही ,नही हुई होगी तो .....
चार छे gf तो होंगी ? इतने शरीफ तो हो तुम😂
मैंने कहा तुम तो जानती हो मुझे.......उसने कहा मुझसे अच्छा कौन जान पायेगा तुम्हे?
मुझे ख्याल आया कि सच्चे प्यार की तलाश में हम अपनी सबसे खूबसुरत उम्र अकेले गुजार देते देहैं और फिर सोचते हैं, ‘की हम अकेले रह गए।
chapter-4

‌मेरे बारे सब पूछने लगी ,जो सही लगा मैंने बताया।
‌ मैंने कहा तुम हाइस्कूल के बाद कहाँ गायब हो गयी ,उसने कहा दीदी के साथ हुए घटना के बाद पूरी फैमिली टूट चुकी थी ,मुहल्ले वाले ताना मारने लगे थे। कब तक लोगो की सुनते ,
‌गलती दीदी ने की थी। समाज को क्या मुह दिखाते ।फिर
‌हमलोग गोरखपुर नानी के यहाँ रहने लगे थे।वहीं से ग्रेजुएशन करने के बाद ,स्कूल में पढ़ रही हूं।
‌ मैंने कहा वो आदमी - मेरा पति है प्रिया ने जबाब दिया
‌मैं ये सुनकर न जाने क्या सोचने लगा।
‌।मैंने कहा इतनी जल्दी शादी करली ।
‌प्रिया ने कहा तुम तो तीस साल तक शादी करते नही।
‌और मेरे पापा इतना इन्जार ,बहुत बडे सपने देखने वाले लड़को मेसे थे तुम ,मैं बस हँसे जा रहा था। फिर उसके पति के आने तक हमने खूब बातें की। प्रिया ने अपने पति से मिलवाया ,उसके पति में कहाभाई साहब आप की बारे में मैंने बहुत सुना है।मैंने उसे सोनू को भी मिलवाया और उसकी
‌वाइफ से। भाभी ने हमसबको चाय पिलाया।
‌हमें आपस मे इस तरह से बात करते देख प्रिया के बच्चे
‌को भी अच्छा लगने लगा था।
‌अब मैं उसके लिए कोई अजनबी नही था। अजनबी कैसे होता मैं प्रिया के बचपन का बेस्ट फ्रेंड जो था।
‌मैंने उसे गोदी में उठाया ,बगल वाली खिलोने के दुकान से बिल्कुल अपने जैसा चश्मा और हैल्मेट के रंग की बड़ी वाली गेंद दिलाई।
‌अब वो बहुत खुश लग रहा था
‌,प्रिया की गोद मे भी जाने से कतरा रहा था,
‌लेकिन माँ एक जादूगर होती है ,प्रिया ने
ने पता नही क्या कहा
वो बच्चों मेरी गोद से प्रिया की गोद मे कूद गया।
मैंने पढ़ा था कि बच्चे अपनी माँ को उनकी महक से पहचान लेते है।। जन्म के बाद से बच्चा अपनी माँ सबसे ज्यादा देखता है।माँ बच्चे की पहली दोस्त होती है वो भी बेस्ट फ्रेंड वाली।जैसे मैं और प्रिया बेस्ट फ्रेंड थे।
Chapter-5
आज मैंने बाजार से बहुत चीजे पैसे देकर घर ला रहा था।
औऱ सबसे अनमोल रिश्ता मेरा बेस्ट फ्रेंड या मेरा सबसे बड़ा वेल wisher उससे मिल के आ रहा था।अपनी पुरानी दोस्ती को फिरसे पक्का करके आ रहा था।
हमने आपस मे मोबाइल नो. एक्सचेंज किया।
फिर मिलने का वादा किया।
जाते जाते एक सवाल रह गया था वो भी
मैंने प्रिया से पूछ ही लिया बच्चे का नाम क्या रखा है?
‌उसने कहा वही -जो मैं तुम्हे highschool में बुलाती थी
‌highschool वाला मैं ......?
‌ प्रिया की गोद से मुझे मेरा हाई स्कूल bye bye bye किये जा रहा था।
मैं एक नई तालाश में निकल चुका हूं और अपना असली नाम भूल कर। तलाश करूँगा प्रिया वाले खुद को highschool में।
Chapter-6

प्रिया से पहली मुलाकात क्लास 9th में आते ही चौबे सर् की क्लास में हुई थी।हम लोग जूनियर सेक्शन से sift हुए थे और प्रिया बालिका विद्या मंदिर से आयी थी क्योंकि उसे मैथ्स पढ़ना था।चौबे सर् बता रहे थे मैथ विषय के प्रवेश परीक्षा में सबसे ज्यादा 88अंक प्रिया को और मुझे सबसे कम 57 मिला था। मैथ सेक्शन के 80 बाच्चो में सिर्फ 16 लड़कियां थी। 15 लड़कियां मेरे साथ कि केवल प्रिया मिश्रा अभी नई नई आयी थी
मैं हँसमुख और थोड़ा विचित्र नेचर का हु सबसे हंसी मजाक और भाईचारे जैसा व्यवहार रखता था। क्लास की सभी लड़कियों से मेरा ठीक ठाक बनता था। या सभी मेरी थोड़ी मोड़ी दोस्त जैसी थी।
चौबे सर् मेरे रिश्तेदार थे अक्सर question मुझी से पूंछते थे न बताने पर प्रिया औऱ अन्य लड़कियों बताती थी और चौबे सर् लगभग बेज्जती करते हुए कहते कुछ इनसे सीखो महराज।
एक दिन किसी सवाल में दशमलव के स्थान तक प्रिया ने मेरा पीछा करके गलत साबित किया। मेरा उत्तर 9.7 और प्रिया का 9.9 था बस ,। बहस करने पर चौबे सर् मुझे मुर्गा बना दिये थे।

इंटरवल में मैंने प्रिया को बहुत सुनाया ,मैंने कहा ज्यादा काबिल मत बना करो, पता है कितना आता है मैं तुमहरी तरह ट्यूशन नही पड़ता हु ,सब सवाल पहले लगा लिया है अब बहुत तीस मार खान बन रही हो ।
CHapter -7
उसके बाद प्रिया 2 दिन तक स्कूल नही आयीं। रागिनी बता रही थी कि उसे मेरी बात का बुरा लगा ।वो टेंशन में थी और अपनी साईकल से गिर गयी घुटनो में चोट आने की वजह से ।
इधर लड़को ने मुझे पानी पर चढ़ा दिया था।मेरे मन मे प्रिया के लिए बड़की पढ़ाकू और घमंडी टाइप वाली लड़की है ,इमेज बना दी। चौबे सर् को पता चला तो मेरे घर आकर समझा रहे थे की प्रिया तुम्हे गलत नही साबित का रही थी वो तो बस अपना उत्तर बता रही थी। सर् ने कहा हेल्थी कम्पटीशन रखो आगे जाओगे। और लड़कियां क्लास का माहौल ख़ुशनुमा बनाती है। उनसे सीखो मेहनत करो और आगे निकलो।
जब प्रिया आयी तो मैंने उससे सॉरी बोला उसने कहा कोई बात नही।अब मैंने पूरा मन पढ़ायी में लगा दिया।तिमाही एग्जाम में प्रिया ने टॉप किया।मैं बस अच्छे से पास हो पाया था लेकिन मेरे मार्क्स इंग्लिश में प्रिया से ज्यादा और मैथ्स में प्रिया से कम आये थे।
अब मेरे और प्रिया के बीच थोडी बातचीत होने लगी थी।
छोटे मोटे सवालों का हिसाब किताब होने लगा था। एक दोस्ती जैसा कुछ माहौल बना। प्रिया पढ़ाई में मेरी मदद करने लगीं
हाफ अर्ली एग्जाम हुआ , इसमें प्रिया के सबसे ज्यादा मार्क् आये और मैं दूसरे।
प्रिया ने मुझे मिठाई खिलाई और कहा देखो हम दोनो साथ मिलके पढ़े तो बहुत अच्छा कर सकते है।हमे जब भी टाइम मिलता साथ मे पढ़ने लगते।हमारी बढ़ती हुई नजदीकी देख के बाकी लड़के लडकिया जलने लगे।हमारी दोस्ती तोड़ने का प्रयास भी किया।
9 th फाइनल एग्जाम प्रिया ने टॉप किया दूसरे पर रागिनी और तीसेरे पर मै था। मैं प्रिया के साथ ही रागिनी का भी अच्छा दोस्त बन गया था।
दसवीं में पहुँचतें ही लड़को में एक नया जुनून आ जाता है ,उनको mature होने का एहसास । दसवीं आगे बढ़ रही थी, और लड़कों में जलन ।एक बार किसी ने मेरे नाम से एक लव लेटर मुक्ता शुक्ला को भेज दिया था। लिखा था शुक्ल शुक्ल बढिया जोड़ी होगी।बस क्या घर तक शिकायत हो गए ,जमके कुटाई हुई
मैंने प्रिया को बताया मैने ऐसा नही किया है लेकिन उसको भरोसा नही दिला पाया। लेकिन हमारी दोस्ती अच्छी थी तो ज्यादा फर्क नही पड़ा।
Chapter-8
अब हमने साथ मे कोचिंग जॉइन कर लिया।
हम दोनों कोचिंग टाइम से पहले आते और देर से जाते ।
मुझे प्रिया के साथ रहना अच्छा लगने लगा, उसको भी मेरे साथ।
हमथोड़ी बाते फोन पर करने लगे थे। रागिनी को पता चला तो उसने हमदोनो से पूछ लिया कि दोस्ती फोन तक पहुच गयी आगे ddlj बनने का इरादा है क्या।हम खूब हँसे
उस साल नवरात्रि में हम दोनो ने साथ गरबा खेला।
November में स्कूल में हुए annul कल्चरल प्रोग्राम में मैंने जमकर पार्टिसिपेट किया लेकिन डांस मे मुझे मुक्ता शुक्ला को पार्टनर बनाना पड़ा।डांस प्रैक्टिस में मुक्ता मेरे बहुत करीब आ चुकी थी। बैकस्टेज prepration में मुक्ता ने मुझे किस कर लिया।फिर उत्साह में मै भी बहक गया।
रागिनी ने देख लिया।और सब प्रिया को बता दिया। प्रिया के सामने मैंने अपनी गलती मान ली
एक अच्छे दोस्त अपने दोस्त को माफ कर देता है ,उसकी अनजाने में हुई गलती के लिए, प्रिया ने भी वही किया।
Chapter 9
उस दिन मुझे माफ़ करने के बाद प्रिया के आंसू बह रहे थे।मैं बेबस उसके सामने खड़ा रहा ,बस सॉरी प्रिया sorry प्रिया करता रहा।उस दिन के अपराध के बाद मैं प्रिया से हफ़्तों तक बात करने की हिम्मत नही जुटा पाया।
थैंक्स to चौबे सर्- ,जिन्होंने इस खामोसी को तोड़ने का मौका दिया ,जब ब्लाकबोर्ड पर ट्रिग्नोमेट्री का सवाल हल करना था।
New year 2012 आने वाला था ,मैंने प्रिया को कॉल किया। एक दूसरे को सुभकामना दी।अगले दिन प्रिया ने मुझे ग्रीटिंग कार्ड दिया ।हमारी दोस्ती अपनी राह पर फिर चलने लगी थी।
ऐसे ही किसी दिन मैंने प्रिया से पूछ लिया -क्यों मानती हूं मुझे इतना ,उसने कहा पहले तुम बताओ। पहले तुम .नही पहले तुम।।।
इस सवाल का जबाब preholi celebration पर मिला ,जब हमने एक दूसरे को खूब रंग लगाया ,और गले मिले। जब गले लगे तो बस देर तक लगे रह गए ,रागिनी ने हम दोनों को अलग किया। मैंने शाम को कॉल करके कहा प्रिया तुमसे कुछ बात करनी है।उसने कहा बाद में करेंगे । अभी घर मे कुछ बवाल चल रहा है। फिर कई दिनों तकबात न हो पाई।
Chapter -10
होली के बाद 10th का बोर्ड एग्जाम सुरु गया।मैं अपनी जरूरी बात कहना भूल गया। एग्जाम खत्म होने के दो दिन बाद रागिनी के birhday में हम मिले ,मैंने कहा प्रिया -हम हाइस्कूल खत्म कर चुके है। आगे कुछ प्लान है कहाँ पढ़ना है कौन सा सब्जेक्ट लेना और
जानती हो मैं तुम्हे बहुत पसंद करता हु।
शायद तुमसे प्यार भी करने लगा हूँ। ये
प्रिया ने कहा अभी बहुत टाइम है ।ये सब करने लिए पूरी उम्र पड़ी है ,पढ़ लिखलो कुछ बन जाओ फिर शाहरुख खान बनना।चलो चलो केक काटने का टाइम है
उस शाम की रात बहुत बेचैनियों में बीती ,रात भर करवट बदलता रहा। सुबह पापा मम्मी के साथ गर्मियों की छुट्टियों बिताने नैनीताल चला गया।
रिजल्ट आया प्रिया ने highschool top किया ,मै दूसरे no. पर आया था।
मैं साईकल उठा प्रिया के घर गया।वहां पर कोई नही था।बगल वाले वर्माजी का बड़ा लड़का बताया कि अब वो लोग कभी मुँह नही दिखाएँगे। सहर छोड कर चले गए है ।मैंने पूछा क्या हुआ -उसने कहा प्रियाकी बडी बहन ने भागकर दूसरी जाति मे सादी कर ली है।
मैं रोता हु रागिनी के यहां आया - रागिनी ने मुझे सब डिटेल में बताया।
लेकिन रागिनी के पास कोई एडरेस या मोबाइल no.नही था जिससे मैं प्रिया से बात का सकू।
आज आठ साल बाद प्रिया मेरे सामने खड़ी है ,जाके बात करूं तो कही मुझे पहचानने से ही इनकार कर दे।
लेकिन मैं प्रिया की तरह नही हु जो अपने सबसे अच्छे दोस्त ,पहले प्यार से एक बार बात न कर पाउँ।
लेकिन अपना समान मागने के बहाने कुछ बात तो कर सकता हु।मैं उस दिन सोनू के दुकान पर प्रिया से बहुत सवाल पूछना चाहता था।लेकिन उसके गोद मे प्यारा बच्चा मेरे सारे सवालों का जबाब दे चुका था।
मैं सोच रहा था क्यों किसी एक गलती पूरे परिवार को सजा देती है ,परिवार से जुड़े दोस्त रिश्तेदार को भी दुख उठाना पड़ता है। प्रेम करना कोई गुनाह नही है ,लेकिन मा बाप को दुख देकर भाग के सादी करना पाप है। क्यों हम हिम्मत नही कर पाते अपने घर वालो को मनाने की ,क्यों उनको भरोसा नही दिला पाते है कि प्रेम से जाति ,और जाति से विवाह
कोई फर्क नही होता है।लेकिन एक बात समझ आयी कभी
किसी से भागकर शादी नही करना है।

बस इतनी सी थी कहानी।

Surya