ek bhram in Hindi Thriller by Aman Mansuri books and stories PDF | एक भ्रम

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एक भ्रम

जानवी  : कपूर परिवार की बड़ी बहू
इशानी  : जानवी की छोटी बहन
कबिर  : कपूर परिवार का बड़ा बेटा
धनराज: कपुर परिवार का बड़ा सदस्य
 
आज कपूर परिवार में सगई है। इशानी और कबीर की 
कबीर जो आज 5 साल बाद घर आ रहा है। और वही एक तोहफा आता है धनराज उस तोहफे को खोलता
है। उस तोहफे में धनराज का प्लास्टिक का सिर होता है। वही घर की बड़ी बहू जानवी ने मन्नत ली थी।कि
जब इशानी और कबीर की सगाई के दिन वो 7 घड़े मटके के सिर पर वो मंदिर से घर आएगी । वो घर पहुचती है।कि मटके गिर जाते है। धनराज कहता है ।
की ये तो उपसगुन हो गया। जानवी पंडित से इस उपसगुन का कोई उपाई है।पंडित कहता है कि 52 पंडित को खाना खिलाना होगा ।और सब पूजा करने जाते है। पंडित कहते है कि धनराज की पत्नी को पूजा करनी होगी।धनराज कहता है कि उसकी हालत ठीक नही है । पंडीत ना कहते है जानवी लेने जाती है। सुमन हनुमान चालीसा पढ़ती है। और पागलो जैसी हरकत करती है।लेकिन जानवी उसे अच्चे कपड़े पहनकर लेके आती है। और पूजा करती है।
पंडित सुमन को प्रसाद बनाने को कहते है। लेकिन 
धनराज ना कहता है। लेकिन जानवी के कहने पर वो
प्रसाद बनाने की अनुमति देता है।जानवी प्रसाद में मच्छी दलदेती है । और जब पंडित खाना खाते है ।
और उन्ही मच्छी दिखती है । और वो कहना छोड़ कर
चले जाते है।जानवी पंडितों से माफी मांगती है।लेकिन पंडित साप देते है।धनराज सुमन पर बोहोत
गुस्से होते है। लेकिन जानवी सुमन को समजाती है। 
इशानी जानवी से कहती है । वाह आज क्या नाटक देखने को मिला जानवी कहती है कि ये तो हर रोज होगा ।wait and watch कबीर की गाड़ी आती है।
सब स्वागत के लिए बाहर जाते है। और कबीर गाड़ी में से नीचे उतरता है और दूसरी तरफ से कोई लड़की निकलती है उसे देखकर सब चोक जाते है
 
जानवी कहती है ये लड़की कोन है। कबीर कहता है कि ये काव्या है। मेरी बीवी धनराज कबीर को थप्पड़ मरता है। और इशानी घर मे चली जाती है।
सब घर मे चले जाते है। लेकिन जानवी उन दोनों का स्वागत करती है। कबीर धन्यवाद कहता है।शेफाली(जानवी की नंनद)कहती है कि इशानी दरवाजा नही खोल रही। सब भाग कर जाते है। इशानी ने पाइजन खलिया था। 

हॉस्पिटल
डॉक्टर कहता है। की वो अब ठीक है जानवी उससे मिलने जाती है। इशानी कहती है कि मेरी जगह इस काव्या ने ले ली और आप उसका स्वागत कररही थी। जानवी इशानी पर गुस्सा हो जाती है। धनराज कहता है कि वो लड़की हमे भी नही पसंद तुम फिकर मत करो इशानी हम देख लेंगे । जानवी इशानी को थप्पड़ मारती है ।और हाथ पक्कड़ कर हॉस्पिटल के बाहर लेकर जाती है और गाड़ी में बिठाती है। कबीर कहता है कि इशानी आप कहा ले जा रहे हो ।जानवी कहती है आप हुम् दोनो के बीच मत बोलिये।और जानवी गाड़ी चलती है। धनराज उसके पीछे जाता है।वही गाड़ी में जानवी कहती है ।क्या कमाल किया इशानी जबरजस्त एक्टिंग लेकिन दी आप ने मुझे चाटा क्यों मारा ।जानवी गाडी मेसे बाहर निकल कर सामने मंदिर में इशानी को ले जाती है।और कहती है कि जब हम अनाथ हुए थे तब यह आये थे।आज भी वो दिन याद है मुझे की कैसे हमारे मा -बाप जल के मर रहे थे नही 
भूलूंगी वो दिन इस धनराज ने हमारे मा बाप को ज़िंदा जला दिया था ।
 और वही धनराज आता है। 
जानवी से कहता है मेरी सर्वगुण संम्पन्न बहु 
जानवी और इशानी डर जाते है
चलो इशानी वो काव्या तुम्हे कुछ नही करेगी और में तुम्हारी शादी कबीर से करूँगा।तुम भी चलो जानवी
जानवी जी पापा कहती है।

मित्तल निवास
धनराज काव्या को बोहोत कुछ सुनाता है ।
फिर काव्या किसी को बताए बिगर रेलवे सटेशन
चली जाती है।
घर मे जानवी कहती है कि काव्या कही नही है।
जानवी और कबीर रेल्वे सटेशन जाते है
और काव्या मिल जाती है। लेकिन उसके पर्स मेसे व्योम की तस्वीर गिरती है।जानवी पूछती है कि ये को है कबीर सब सच बताता है।कि वह फ़ौज में मेरा एक दोस्त था ।व्योम मेरा भाई था वो। लेकिन लड़ाई में उसने मेरी जान बचाई और खुद गोली खाली ।मेने कावया से शादी करली।जानवी मन मे कहती है कि मुझे पता था कि आप ने शादी करली
है इसी लिए तो इशानी की शादी आपसे फ़िक्स की 
थी।अब में जो करुँगी वो सब काव्या पर इल्ज़ाम आएंगे
कमस: