सुजाता जो 20 साल की एक बहुत होशियार और चंचल युवती थी अब उसे इंटर की परीक्षा पास किए दो साल बीत चुके थे परंतु जब सुजाता चौदह वर्ष की थी तभी किसी कारणवश उसके पिता की मृत्यु हो गई और उसके घर की आर्थिक स्थिति खराब रहने लगी, जैसे - तैसे करके सुजाता की माँ ने सुजाता और उसके छोटे भाई जो अभी मात्र पंद्रह वर्ष का था, दोनों का पढ़ाया लिखाया परंतु इंटर के बाद आखिरी में सुजाता को अपनी पढ़ाई छोड़नी पड़ी| सुजाता की माँ ने सुजाता के विवाह के लिए कई जगह बात चलाई परंतु सुजाता के सावलेपन के कारण कही बात नहीं बन पातीं और अगर बात बनतीं भी तो लड़के वालों की मांग बहुत ज्यादा होती थी| हालांकि अब सुजाता घर के काम के साथ - साथ ट्युशन पढ़ा कर अपनी माँ के साथ घर का थोड़ा खर्च उठाने लगीं थी|
आज मंगलवार का दिन था, और सुजाता को अपनी सबसे खास सहेली विभा की शादी में जाना था, विभा और सुजाता स्कूल में एक कक्षा में पड़ती थी और दोनों एक दूसरे की बहुत सहायता करतीं थीं| शाम हो चुकी थी और सुजाता और विभा की मुलाकात दो साल के बाद हुई थी, आज दोनों ने मिलकर बहुत सारी बातें की विवाह का मुहुर्त हो चुका था, सुजाता और विभा बाहर आये तभी सुजाता की नजर एक नौजवान लड़के पर पड़ी साथ ही उस लड़के की नजर भी अचानक से सुजाता पर पड़ी, पर मारे शर्म के दोनों ने ही अपनी नजरें झुका ली उसके बाद कई दफा दोनों ने एक दुसरे से बात करने की कोशिश की पर दोनों ही हिम्मत नहीं जुटा पाते आखिरी में शादी खत्म हुई और दोनों अपने घर चले आए|
दो दिन के बाद सुजाता को घर का राशन लेने किराने की दुकान पर जाना था, तो उसने पाया की ये वही लड़का था जो शादी में आया था, साथ ही विनय ने भी उसे पहचान लिया अब क्या था दोनों मे बातें होने लगी, और बातों ही बातों में पता चला कि विनय परा-स्नातक का छात्र है और आगे की पढ़ाई वो अब पटना से ही करेगा इसलिए वो अपने चाचा के घर आया है|
अब सुजाता और विनय की मुलाकाते रोज होने लगी और दोनों घंटो बात करने लगे धीरे- धीरे दोनों एक - दुसरे के काफी करीब आ चुके थे| एक दिन विनय ने शाम को सुजाता से मंदिर के पीछे वाले पार्क में मिलने को बुलाया परंतु काफी देर तक मना करने के बाद सुजाता मान गयी|
शाम होती है दोनों पार्क मे आते हैं----------
सुजाता- क्या हुआ, तुमने मुझे यहाँ क्यों बुलाया|
विनय- वो, वो मुझे तुमसे कुछ बात करनी थी सुजाता, पर डर है कि कहीं तुम गुस्सा ना करो|
सुजाता- अच्छा! बोलो क्या बात है
विनय- सुजाता वो, वो मुझे लगता है कि मैं तुम्हें पसंद करने
लगा हूँ, और तुम्हारे बिना नहीं रह सकता|
सुजाता- विनय मै भी कई दिनों से तुमसे यही बात कहना चाहती थी, परंतु डर के मारे कह ना पाती थी|
दोनों ने फैसला किया कि वो इस बारे में अपने घर वालो से बात करेंगे परंतु विनय के नीची जाति के कारण सुजाता की माँ ने इस रिश्ते से इंकार कर दिया और सुजाता का विवाह एक 35 वर्ष के आदमी से तय कर दिया जिसके दो बच्चे थे और पत्नी की कैंसर से मृत्यु हो चुकी थी, इसी कारण लड़के वालों की कोई मांग भी नहीं थी और आखिरकार सुजाता का विवाह उस आदमी से हो गया| हालांकि सुजाता को उसके ससुराल में किसी चीज की कमी नहीं थी परंतु आज भी वो विनय को नहीं भुल पाई थी| उसकी जिंदगी में किसी भी चीज़ की कमी ना होने के बावजूद एक खाली था जो वो किसी को भी नहीं बता पातीं थी पर शिवाय रोने के वो और कर भी क्या सकतीं थी| उधर विनय की भी हालत कुछ ऐसी ही थी,
उसका भी अब पटना में मन ना लग पाने के कारण वो दिल्ली आ गया और यही से उसने अपनी पी.एच. डी कर एक प्रोफेसर के तौर पर किसी काॅलेज में लग गया और कभी शादी ना करने का फैसला किया|
अब सुजाता और विनय की जिंदगी में शिवाय एक दुसरे के यादों और उस पहली मुलाकात के सिवा कुछ नहीं था, वो याद वो पल जो उन्होंने एक साथ गुजारा था,
बस वही था|
सोनू कुमारी