Sanyog--Murad Mana Ki - 2 in Hindi Social Stories by किशनलाल शर्मा books and stories PDF | संयोग--मुराद मन की - 2

संयोग--मुराद मन की - 2

उस दिन के बाद अनुराग को रोज तीनो लडकिया नज़र आने लगी।वे तीनों लडकिया कहां जाती है?इस बात का पता करने के लिए एक दिन उसने उनका पीछा किया।तब उसे पता चला तीनो लडकिया किरन होटल जाती है।
यह होटल पर्यटकों के लिए बनाया गया था।लेकिन शहर से दूर होने के कारण यह होटल पर्यटकों को ज्यादा आकर्षित नही कर पाया।बहुत ही कम पर्यटक यहां आते थे।ज्यादातर यह होटल खाली ही पड़ा रहता था।इसी होटल के एक हिस्से में भारत सरकार का जनगणना का ऑफिस खुल गया था।इस काम के लिए लड़के लड़कियों को अस्थायी नौकरी पर रखा गया था।उनमे वे तीनों लडकिया भी थी।
अनुराग को इसी दफ्तर में मोहन मिल गया था।मोहन उसके साथ स्कूल में पढ़ता था।अनुराग ने मोहन से उस लड़की के बारे में कुछ जानकारी देने के लिए कहा था।
मोहन से ही उसे पता चला उस लड़की का नाम पूनम है।।वह रिटायर फौजी की बेटी है।उससे छोटी तीन बहने और हैं।
पहली बार देखते ही अनुराग को पूनम पसंद आ गयी थी।धीरे धीरे उसकी छवि उसके दिल मे बस गई थी।वह उसे चाहने लगा।प्यार करने लगा।औऱ उसे अपनी जीवन संगनी बनाने के सपने देखने लगा।उसका प्यार एक तरफा था।
अनुराग चाहता था,कोई ने कोई तरकीब निकाल कर उससे बात करे।लेकिन वह कभी अकेली नही होती थी।जब उसे उससे बात करने का मौका नही मिला तब उसने उसका ध्यान आकर्षित करने का एक तरीका निकाला। वह उसे देखकर रोज जोकरों जैसी हरकते करने लगा।उसकी उलूल जुलूल हरकते देखकर पूनम के बगल में बैठी लड़कियां हंस पड़ती।लेकिन पूनम निर्विकार बनी रहती।अनुराग की किसी भी हरकत का उस पर कोई भी असर नही होता।
अनुराग अपने प्यार का इजहार करना चाहता था।अपने दिल की बात पूनम से कहना चाहता था।पर कैसे?
अनुराग सोचता रहा।और कई दिन सोचने के बाद उसे एक तरकीब सूझी थी।होली का त्यौहार आने वाला था।उसने एक सुंदर से ग्रीटिंग खरीदकर पूनम को पोस्ट कर दिया।फिर वह एक दिन अपने दोस्त मोहन के पास गया।अनुराग ने मोहन को कार्ड वाली बात बताई थी।मोहन अनुराग की बात सुनकर बोला,"तुम्हारा तीर खाली गया।पूनम ने तुम्हारा कार्ड फाड़कर डस्टबिन में डाल दिया था।"
अनुराग अपने दोस्त मोहन की बात सुनकर हताश नही हुआ।वह उसे जब तब पत्र डालने लगा।किसी पत्र में आई लव यू तो किसी मे मैं तुम्हे चाहता हूँ।लिखा होता।पूनम बिना पढ़े ही उसके पत्र को फाड़कर फेंक देती।अनुराग के दिल मे पूनम को पाने की चाहत दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही थी।
और दिन पर दिन सरकते रहे।एक दिन मोहन ने उसे बताया।जनगणना का काम पूरा हो चुका है।सभी अस्थाई कर्मचारी धीरे धीरे हटाये जाएंगे।
इस समाचार ने अनुराग को बेचैन कर दिया।पिछले एक साल में वह चाहकर भी पूनम से बात नही कर पाया था।अब अगर अपने दिल की बात उस तक नही पहुंचाई गई,तो न जाने आगे यह अवसर मिले या नही मिले।
और पूनम के साथ आनेवाली एक लड़की को हटा दिया गया।अब रिक्शे में पूनम के साथ एक ही लड़की आने लगी थी।और फिर दूसरी लड़की को भी हटा दिया गया।मोहन से उसे पता चला पूनम को भी कभी भी हटाया जा सकता है।
(कहानी का शेष और अंतिम भाग अगले अंक में

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