The Author Vishnu Dabhi Follow Current Read मायावी सम्राट सूर्यसिंग - 11 By Vishnu Dabhi Hindi Fiction Stories Share Facebook Twitter Whatsapp Featured Books Without you - 15 [Notice :- sorry for not updating the novel and disappearing... When silence learned my Name - 17 Chapter 17: The Moment He Found HerMumbai did not slow down... Chasing butterflies …….35 Chasing butterflies ……. (A spicy hot romantic and suspense t... The Universe Where I Let You Go - 9 The car that had slowed near the building didn’t stop.But it... The Laughing Portrait: Chapter 7 SummaryWith the portrait's origin revealed, its interact... Categories Short Stories Spiritual Stories Fiction Stories Motivational Stories Classic Stories Children Stories Comedy stories Magazine Poems Travel stories Women Focused Drama Love Stories Detective stories Moral Stories Adventure Stories Human Science Philosophy Health Biography Cooking Recipe Letter Horror Stories Film Reviews Mythological Stories Book Reviews Thriller Science-Fiction Business Sports Animals Astrology Science Anything Crime Stories Novel by Vishnu Dabhi in Hindi Fiction Stories Total Episodes : 13 Share मायावी सम्राट सूर्यसिंग - 11 (2.4k) 3k 8.8k इस और राक्षस राजा अपनी मोज में जुट गया था। वो युद्ध की तैयारी छोड़ ऐयासी में डूब गया। ओर वो युद्ध को भूल ही गया था । अब राक्षस राजा की सेना उनसे घ्रेणा करने लगी थी की थोड़े दिनों बाद होने वाले युद्ध की राजा को कोई परवा नहीं है। ओर इस और सूर्यगढ़ में सभी सेना पति और सैनिकों की जोर शोरो से युद्ध की तैयारी देख कर लगता था की वो अब ये जीत कर ही मानेंगे। धर्मदेव और सुल्ताना–ए– सूर्यगढ़ मित्रा के पुत्र सूर्यसिंग को अब एक सेना के साथ तैयार हो गई । ।।।............… महायुद्ध.............. ।।। चिल द्वारा राक्षस राजा को संदेशा कहलवाया कि तुम्हारी पूरी सेना के साथ तैयार हो जाओ अब होनेवाला है युद्ध । ये सुन कर राक्षस राजा ने अपने सेनापति द्वारा सूर्यसिंग संदेशा कहलवाया कि तुम और तुम्हारी पूरी सेना हमारे सामने टिक नहीं पाएगी। हम तुम सबको चिटिकी तरह मसल कर रख देंगे। ये सब बाते वाते पूर्ण होने के बाद दोनो ओर से पांच आक्षोहिनी सेना युद्धे चढ़ी। महायुद्ध का पारंभ हुआ उसमे सूर्या का विकराल रूप राक्षस राजा के सेना का सहार कर रहा था । सूर्या अपनी जादुई शक्तियों से बिजली छोड़ रहा था उसमे राक्षसों का वध हो रहा था । चारो ओर राक्षसों के सब गिर रहे थे । बहुत दिनों की तैयारी ने अब अपना रंग दिखाना शुरू किया था। एक दिन पूरा हुआ ।दूसरा,तीसरा और ऐसे करके पंदर दिन तक युद्ध चलता रहा आखिर में सूर्या का विजय हुआ किंतु इस युद्ध में बोतल का जिन शहीद हुए। युद्ध के परिणाम और सर्त मुताबित राक्षस राजा का राज्य सूर्या को मिला । सबको पता चला कि सूर्या और कोई नहीं परन्तु अपने ही राज्य का होने वाला राजा है ।ये समाचार हवा की तरह पूरे सूर्यगढ़ में फेल गया । दूसरे दिन सूर्या का राज्याभिषेक होने वाला था। राज्याभिषेक के समय पर सब गांव वासी उपस्थित थे । लोगो ने धूम धाम से सूर्या का राज्याभिषेक किया । अब सूर्या सूर्या में से मायावी सम्राट सूर्यसिंग बन गया था। सूर्यगढ़ में शुभ अवसर के साथ सुख और शांति आने लगी । अब सूर्यगढ़ के सम्राट की शादी की बात होने लगी। दूर दूर से अच्छी अच्छी लड़किया के मांगे आने लगे। एक दिन सम्राट आखेट पर निकले वो मुर्ग के पीछे दौड़ते दौड़ते कब सूर्यगढ़ की सीमा से बाहर निकल गई उसका पता खुद को ही नही चला । वो दौड़ते दौड़ते एक बगीचे में पहुंच गए। अब सूर्यसिंग को प्यास लगी वो चारो ओर पानी खोजने लगे वही पर वहा की शहजादी अरूणा कवर पोधो को पानी पिला रही थी। सम्राट ने वहा से पानी पिया । साथ में वो शहजादी के रूप में मोहित हो गई। सम्राट काफी थके हुए थे । अपने प्राण के लिए उन्होंने अपनी पहचान छुपा दी। एक दिन रुक ने के बाद वो फिर से अपने राज्य वापस आए । ओर सबको अरूणा कवर के बारेमे बताया। सूर्यगढ़ के मंत्री अपनी टुकड़ी के साथ मगदबाद पहुंचे । ओर वहा के राजा को पूरे परिवार के साथ सूर्यगढ़ में बुलाया गया। सूर्यगढ़ में पहुंचते ही अरूणा कवर स्तंभ सी रह गई। उन्होंने देखा की इतने बड़े सूर्यगढ़ के सम्राट और कोई नहीं परन्तु जिसको उन्होंने पानी पिलाया था वही है। बाद में अली खान ने अरूणा के पिता से बात की ओर सूर्यसिंग का रिश्ता पक्का किया । ‹ Previous Chapterमायावी सम्राट सूर्यसिंग - 10 › Next Chapter मायावी सम्राट सूर्यसिंग - 12 Download Our App