Badri Vishal Sabke Hain - 5 in Hindi Novel Episodes by डॉ स्वतन्त्र कुमार सक्सैना books and stories PDF | बद्री विशाल सबके हैं - 5

बद्री विशाल सबके हैं - 5

बद्री विशाल सबके हैं 5

कहानी

स्‍वतंत्र कुमार सक्‍सेना

साजिद भाई की पत्‍नी को प्रसव होना था।‘ तो अहमद साहब बोले –‘ अब मैं बताता हूं ।

साजिद भाई की पत्‍नी को प्रसव होना था उन्‍हें ब्‍लड की जरूरत पड़ी उनका ब्‍लड ग्रुप निगेटिव था, किसी का ब्‍लड ग्रुप मिल नहीं रहा था, तो अपने पटेल साहब ने बीच में हस्‍तक्षेप कर कहा –‘मेरा देख लो,।‘ वहां बात चल रही थी –‘मायके वालों को बुलवा लो।‘ , वे सब इनकी बात पर हंस दिए।, पर डाक्‍टर ने कहा –‘ठीक है देख लेते हैं।‘ संयोग से मिल गया और इन्‍हों ने दिया।‘ फिर इनके कराटे के लड़के आ गए उनमें एक लड़का था ,नलिन उसे भी बुलाया था ,उसका भी मिल गया, पर साजिद भाई संकोच में थे ,कि उन्‍हीं में से कोई साथी जाकर पिताजी को बुला लाया,

वे (साजिद भाई )डाक्‍टर से कह रहे थे थोड़ा ठहरो !

तभी बरामदे से पंडित श्‍याम लाल बोले –‘काहे को ठहरो, डाक्‍टर साहब निकाल लो,।’ और साजिद भाई को डांटने लगे-‘ आपसे ऐसी उम्‍मीद न थी, अरे एक बोतल क्‍या जितना चाहिए ले लें आप हमें गैर समझते हैं ।‘इस तरह मां बेटे की जान बच गई ।

अहमद साहब फिर बोले –‘आप लोग जान कर आश्‍चर्य चकित होगे, उस बेटे का क्‍या नाम रखा गया ।‘ वह अब बड़ा हो गया न्‍यूरो सर्जन है अमेरिका में काम करता है बहू भी डाक्‍टर है हर साल कस्‍बे में आता है फ्री कैम्‍प करता है अपना खर्चा करता है और लोग भी चंदा करते हैं उस डाक्‍टर का क्षेत्र में प्रसिद्ध नाम है डा. गज्‍जू भाई !उसका असल नाम साजिद भाई ने रखा था।‘ अहमद साहब मुस्‍कराए रूक गए पटेल साहब शर्मिंदा हो गए।अहमद साहब फिर बोले –‘ असल नाम है डा. गजेन्‍द्र खान ।‘ तब पटेल साहब बोले-‘ अपने चाचा के नाम पर उसका नाम रखा।‘ जब श्रीमती शैलजा अहमद मुस्‍करानें लगी और श्रीमती पटेल तो जोर से ठहाका मार कर हंस पड़ीं तब डा. माथुर अंगूठे से पटेल साहब की ओर इशारा करते सब बच्‍चों से बोले-‘ चाचा जे बैठा है।‘ सब बच्‍चे हंसने लगे ।

अब तीसरे दिन तीर्थ दर्शन पूरे हो गए सब बच्‍चे बोले-‘ फूलों वाली घाटी देखेंगे।‘ बजुर्गों की राय थी-‘ लौट चले।‘ पर आखिर बच्‍चों की ही चली । जब ये बातें हो रहीं थीं तो पंडा जी के बेटे बोले-‘ मैं भी वहां तक चलूं?’ वहां से लौट आऊंगा।‘ पटेल साहब ने मुस्‍कराते हुए स्‍वीकृति दे दी, धीरे से उससे बोले-‘ लास्‍ट चांस।‘ तो वह हंस पड़ा लंच के बाद सब चले, पंडा जी आ गए थे, सब ने उन्‍हें दक्षिणा दी, व जो भी अन्‍य देय था चुकाया, पंडा जी संतुष्‍ट थे, सबको आर्शीवचन कह रहे थे । बस आगे चली ।

अब बस फूलोंवाली घाटी पहुंची वहां शाम हो गई थी सबने लंच लिया व विश्राम करने लगे पर नईमा फिर से पटेल साहब के करीब पहुंच गई पटेल चाचा नमस्‍ते नींद नहीं आ रही थी सोचा अगर आप फ्री हों तो ...; पटेल साहब बोले –‘ हां तो शुरू करते हैं अब थोड़ी सी ही रह गई ।‘ श्रीमती पटेल बोली-‘ वह तो लली की जिज्ञासा जगा रही है जैसे फिल्‍म में एन्‍ड क्‍या हुआ ।‘पटेल साहब –‘ पिता जी पूरी कोशिश कर रहे थे आखिर उनके प्रयास सफल हुए उन्‍होंने अब्‍बा से कहा वहां गांव में साजिद भाई के पास संदेश पहुंचा गजेन्‍द्र को भेज दो तो मेरा और साजिद भाई ने अपना रिजर्वेशन कराया हम दोनो ट्रेन से ग्‍वालियर आए और पिताजी के बताए कोर्ट में पहुंचे उन्‍होंने मेरा मेकअप कर रखा था मुझे शलवार कुर्ता पहिनाया काला चश्‍मा लगाया टोपी भी पहिनाई वे अपनी पेंट की जेब में पिस्‍टल रखे थे मतलब पठान की ड्रेस में मैं था पठान का कर्तव्‍य वे कर रहे थे पूरी तरह चौकन्‍ने थे वे हमारे वकील साहब जो बताए गये थे उनके पास पहुंचे और हम दोनो अदालत के कक्ष में घुस गए सीधे मजिस्‍ट्रेट साहब के कक्ष में पहुंचे वकील साहब ने कागज रखे मेरा समर्पण स्‍वीकार किया गया व सीधे जेल भेज देने का आदेश हो गया जब तक अन्‍य लोगों को पता लगा तब तक मैं जेल भेजा जा चुका था । वहां मुझे छ: महीने रहना पड़ा नया अनोखा अनुभव था पिताजी के सम्‍पर्क व प्रयास से मेरी छ: महीने बाद हाईकोर्ट से जमानत हुई तीन साल केस चला बिरोधी कोई मजबूत प्रत्‍यक्ष्‍ दर्शी गवाह पेश नहीं कर सके यह पिताजी का प्रयास था ससुर साहब भी पूरा सहयोग कर रह्र थे । हमारी बंदूक भी जब्‍त नहीं हुई पुलिस के सारे दबाव घर की खोज बीन रिश्‍तेदारों की जासूसी के बावजूद मां की दृढ़ता व सूझबूझ थी वे टूटी नहीं न किसी के बहकावे में आईं उल्‍टे बदूंक की चोरी की रिपोर्ट लिखवा दी । थी जब कि उनकी(दुश्‍मन मृतकों की ) बंदूक घटना स्‍थल पर ही पुलिस ने जब्‍त की मैं बरी कर दिया गया हां इसमें पिताजी ने जो दस बीघा जमीन खरीदी थी वह बिक गई बहुत लोगों के अहसान हो गए जो पिताजी ने चुकाए उन्‍हें भी इसके लिए बहुत से सही गलत काम करना पड़े किसी का अहसान हो जाए तो उसका काम पड़ने पर आप कह नहीं सकते ये गलत काम है हम रजनीति या सामाजिक व्‍यवहार में किताबी नैतिकता में सीमित नहीं रह पाते सही गलत सब करना पड़ता है ।मैं बरी हो गया पर आर्मी अफसर नहीं रहा तुम्‍हारी आंटी तो बहुत डिस्‍टर्ब रहीं मेंन्‍टल डिप्रेसन में चली गईं तब से हमारा पारिवारिक जीवन पहले जैसा नहीं रहा । हां मेरे ससुर साहब भी परेशान तो हुए पर अपने को सम्‍हाल लिया उन्‍होंने ही प्‍लॉट दिया हमने ग्‍वालियार में मकान बनाया एक कॅालेज खोला जिसमें स्‍पोर्ट व एथलीट की ट्रेनिगं देने लगा मेरे रिटायर्ड आर्मी के साथी व सिपाही काम करते हैं ।कुछ स्‍पोर्ट टीचर हैं। चल निकला ।पिता जी के कारण अब मैं भी पटेल साहब बन कर रह गया, अब राजनीति व समाजिक काम करता हूं, हां पिताजी जैसा सफल नहीं हूं ,असली पटेल साहब वे ही हैं । उनका अब भी बहुत प्रभाव है उन्‍होंने एक और पढ़ाई पढ़ी है जो किसी कॉलेज या स्‍कूल में नहीं पढ़ाई जाती वैसे वे मात्र हस्‍ताक्षर कर लेते हैं बस । ।‘अब रात बहुत हो गई थी सब सोने चले गए ।

दूसरे दिन सुबह सब तैयार होकर घूमने निकले चूकि ऑफ सीजन था बहुत कम टूरिस्‍ट थे अत: सेवा देने वाले भी कम थे स्‍टाफ अपने घर चला गया था तो पास के एक पशुपालकों के डेरे पर गए वहां रूके एक बाबा हुक्‍का पी रहे थे पटेल साहब व उनके पिताजी उनसे मिले जब बताया कि कहां से हैं हम भी गांव से हैं खेती करते हैं व जानवर पालते हें तो उन्‍होंने अपना हुक्‍का पिताजी की ओर बढ़ाया वे सीनियर पटेल साहब की बातों से प्रभावित हुए ।अपना हुक्‍का बढ़ाना मेहमान के प्रति सम्‍मान व अपनत्‍व की बात थी । उनके डेरे का प्रबंध एक लड़की कर रही थी दूध वालों का हिसाब कम्‍प्‍यूटर पर कर रही थी लोगों को निर्देश दे रही थी बीच बीच में उठ जाती फिर अचानक एक भैंसा उछलने लगा वह दौड़ी बार बार चिल्‍ला रही थी भौंदू भौंदू फिर लट्ठ से मारने लगी साथ के और लड़के पानी की उस पर बौछार करने लगे उस लड़की ने हिम्‍मत कर के उस भैंसे के गले में पड़े पट्टे में लोहे की जंजीर का हुक फंसाया व उसे बांधा। तब बाबा बोले-‘ इस ने अभी दो माह पहले इस लड़की के भाई को पटक दिया। वह आराम कर रहा है।‘ तो पटेल साहब बोले –‘लड़की हिम्‍मत वाली है । ‘वह गिलास में सब को दूध लाई क्षमा मांग रही थी, मनुहार कर रही थी, दादा जी (पटेल साहब के पिता जी ) ने कहा –‘आधा गिलास कर दो ।‘तो छोटे गिलास ले आई जब धीरू(पटेल साहब के बेटे) ने कहा-‘ आधा गिलास ही में पी पाऊंगा।‘ तो हंस पड़ी,-‘ दादा जी तक तो ठीक है, पर तुम तो पूरा गिलास पियो।‘ धीरू बोला-‘ पचेगा नहीं ।‘ तो दादा जी की ओर देख कर कहा-‘ कैसे किसान के बेटे ?’अरे डेरे के चार चक्‍कर लगा लो, पच जाएगा ।कॉलेज में पढ़ते होगे ,खेत पर नहीं जाते, क्‍यों दादा जी !।‘सब हंस पड़े, पर धीरू शर्मा गया और श्रीमती पटेल कुछ बोलीं तो नहीं पर उन्‍हें अच्‍छा नहीं लगा । थोड़ी देर में कुछ गोरे लोग आ गए उन्‍हें भी बिठाला व उन से पूंछ कर कॉफी ऑफर की वह उनसे अंग्रेजी में बोलने लगी । पटेल साहब ने पूंछा-‘ बेटे कहां तक पढ़ी हो?’ तो बोली-‘ अंकल केवल मेट्रिक तक। यहीं जब सर्दियों में डेरा नीचे जाता है तब हम ज्‍यादा कहां पढ़ पाते हैं।‘ तो पटेल साहब बोले-‘ फिर अंग्रेजी कैसे सीखी ?’तो बोली –‘यहां टूरिस्‍ट आते हैं। उनको दूध व सामान देना ,और मैं ट्रेकिगं में गाईड करती हूं, बड़े भैया के साथ जाती थी, अब अकेले भी जाती हूं, तो उनकी सोहबत में सीख गई, काम चलाऊ फ्रेंच जरमन भी ,सब यहां गर्मियों में ट्रेकिगं को आते , चहल पहल रहती है, तो गाईड बन जाती हूं। ,अंकल जी ! हमारी लाईफ स्‍ट्रगल फुल है ,ईजी नहीं है,।‘ वह किसी से बात करने चली गई व साथियों को निर्देश दे रही थी। तो एक लड़के ने कहा –‘अभी दो महीने पहले एक रात तेंदुआ हमारे बाड़े में घुस आया, भैंस के पाड़े को पकड़ लिया, तो इसने लट्ठ से उसकी कुटाई शुरू कर दी, एक पंजा मारा जो कंधे पर लगा ,तब तक और लो ग दौड़े,पाड़ा बचा लिया, इसे अस्‍पताल ले गए, बाबा (बाबा की ओर इ्रशारा करते )और बड़े भैया की डांट पड़ी एक डेढ़ महीने दवा चली किसी की सुनती नहीं है मन का करती है ।‘ वे उसके बड़े भैया से मिलने गए जो लेटे थे बोले-‘ अब ठीक हूं पर धीरे धीरे चल पाता हूं भौंदू ने पटक दिया था जानवर हैं मस्‍ती में आ जाते हें तो कुछ भी कर बैठते हैं ।‘आप लोगों को कल बिब्‍बो ले जाएगी वे उनका चेहरा देखने लगे तो बोले-‘ अरे वही मेरी बहन हम सब लोग उसे बिब्‍बो कहते हैं।‘

’दूसरे दिन सब लोग तैयार हो गए। बुजुर्ग तो रूक गए। डा. अहमद दम्‍पति भी रूक गए ,पर माथुर साहब तैयार थे। नईमा ,धीरू ,माथुर साहब के बेटा बेटी, सब उत्‍साह में थे। पटेल साहब मना कर रहे थे ,कि आप सब मजे नहीं कर पाओगे, पर सब बच्‍चे अड़ गए तो तैयार हो गए । बिब्‍बो आज बेहतर ड्रेस में थी जम रही थी धीरू उसे बड़ी देर तक देखता रहा दो वालंटियर लड़के और साथ थे सब पीछे पिट्ठू बैग लिऐ थे दूसरे ग्रुप के गोरे भी आ गए ।,सब चले तो डा. माथुर बोले-‘ बिब्‍बो !आपने चार्ज तो बताया नहीं इंडिविजुअल होगा या पूरे ग्रुप का? हमें कितना देना होगा?’ बिब्‍बो बोली –‘सर आप जैसा समझों कोई मोल भाव नहीं ।आप गेस्‍ट हाऊस वालों से पूछ लें जो दे दें, मेरे बाबा ने मना किया है ।वैसे तो वे ही अपना गाईड देते। पर उनका स्‍टाफ कम है। इसलिए मैं जा रहीं हूं ।दो वालंटियर और हैं ।गोरे तो बहुत दूर जाते हैं पच्‍चीस -तीस किलो मीटर, बहुत दिनों रूकते हैं ,जड़ी बुटियां खोजते हैं ।आप तो इतना चल नहीं पाएंगे पांच किलो मीटर या दस ।‘

पटेल साहब बोले-‘ हम भी चलेंगे।‘

तो बिब्‍बो ने कहा –‘आप तो चल लेंगे, शायद आर्मी मेन हैं ,पर ये सब नहीं चल पाएंगे ,इसलिए आप न बताएं इन्‍हें बताने दें ,मैं कह रही हूं पांच बहुत होगा आने- जाने में दस किलो मीटर हो जाएगा पहाडि़यां हैं उतार चढ़ाव हैं ।।आप सब थक जाएंगे, दिन भर लगेगा, ठीक है ।‘

पटेल साहब बोले-‘ ठीक है ।‘निश्चित ही चढ़ाई उतार का रास्‍ता था कठिन था और बच्‍चों व वयस्‍कों को आदत नहीं थी एक जगह उन्‍हें बिठाया गया छाया दार पेड़के नीचे सब हांफ रहे थे सुस्‍ता लेने से राहत पाई बच्‍चे दूर बीन से देखने लगे साथ में लाया नाश्‍ता व खाना सबको बांटा उन दोनो वालंटियर के बैग से भी पानी की बोतलें लीं बाटीं फिर बिब्‍बो गोरों के बीच जा पहंची व उन्‍हें भी सामान पूंछा वे सब अपना लाए थे पुराने टूरिस्‍ट थे अत: कम थके थे बड़ी देर मुस्‍करा कर बात करते रहे। उन्‍हें जाने क्‍या सूझा वे बिब्‍बो को हाथ पकड़ कर कुछ कह रहे थे ।

पटेल साहब चिंतित हो उठे पंडे का बेटा बोला –‘अंकल में जाता हूं।‘ पर जब तक वह पहुंचा, तो सब की हंसी छूट गई, वे नाचने को कह रहे थे सब लोग नाचने लगे तो पंडा जी का बेटा निखिल पास खड़ा देख रहा था एक गोरे ने उसे भी खींच लिया वह थका था पर पहाड़ी था तो साथ लड़खड़ा रहा था पर नाचने लगा एक पहाड़ी धुन गाने लगा। जल्‍दी ही वह लौटी उन लोगों के बीच आई अब सब लोग खड़े हुए पूछा –‘आप लोग आगे जाना चाहंगे या लौट चलें बोलो? सब बोले-‘ कितना चले होगे ?’तो धीरू बोला-‘ शायद चार किलो।‘

बिब्‍बो उसकी आंखों में आंखें डाल बोली-‘ मेरे साथ और चलोगे?

धीरू –‘वह थकी हुई मुस्‍कान से जैसे जबरदस्‍ती मुस्‍कराया, तो बिब्‍बो ने उसका बैग उसके कंधे से लेकर अपने कंधे पर टांग लिया-‘ अब मैं खाली हो गई, आपका बोझ उठा सकती हूं।‘ सब लौटने लगे अब रास्‍ता थोड़ा जाना पहिचाना था ,पर थके थे। धीरू सबसे पीछे था ,तो बिब्‍बो उसके पास पहुंची,-‘ अरे ज्‍यादा थक गए, मेरे कंधे का सहारा ले लो,।‘ तो धीरू हंस पड़ा बोला-‘ नहीं नहीं चल लूंगा।‘ बिब्‍बो –‘शरमाओ मत लड़की समझ के झेंप रहे हो? अरे यार !मैं तुम्‍हारी गाईड हूं ,मेरा रोज का काम है, और कई लड़कों मर्दों को सहारा देती हूं, तुम जैसा हेंडसम लड़का, मेरे कंधे का सहारा ले, तो IT will be pretty feeling come on (यह एक अच्‍छा अनुभव होगा आओ )।‘और उसका हाथ अपने कंधे पर रख लिया वे ग्रुप तक पहुंचे पटेल साहब देख कर हंस पड़े एक दम बोले –‘अरे बिब्‍बो ये तुम्‍हारे सहारे? ये लड़के बड़े बदमाश होते हैं तुम्‍हारा सहारा मिले तो सारी जिंदगी यूं ही लटका रहेगा, इसे लिफट मत दो।‘ तो सब लोग हंसने लगे। बिब्‍बो भी मुस्‍करा गई बोली –‘ नहीं अंकल ये तो बड़ा शर्मीला है, बदमाश नहीं, मना कर रहा था, पर बहुत थका था ,शायद पिंडलियां कसक रही होंगीं ,’’’ शायद पहली बार लगातार इतना चला तो मैने ही सहारा दिया।‘धीरू की ओर देखते हुए उससे बोली-‘ शहर में तो शायद बाईक पर चलते होगे या घर में फोर व्‍हीलर होगा इसलिये पैदल चलने की आदत नहीं रही ।‘ और अपने कधें पर रखा उसका हाथ थपथपाया ।-‘माइंड मत करो अंकल सबको छेड़ते रहते हैं ।‘ नईमा धीरू के साथ चल रही थी तो धीरे से बोली-‘धीरू मियां !क्‍यों बिब्‍बो का सारी जिंदगी साथ लेना चाहोगे ?’ धीरू अचकचा गया सवाल को तैयार नहीं था बिब्‍बो को देखता रहा फिर नईमा से मुखातिब होकर बोला-‘ मैं.... मैं..... तैयार हूं बिब्‍बो से पूंछो।‘

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