TEDHI PAGDANDIYAN - 26 in Hindi Fiction Stories by Sneh Goswami books and stories PDF | टेढी पगडंडियाँ - 26

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टेढी पगडंडियाँ - 26

टेढी पगडंडियाँ

26

सिमरन इस बीच बेहद घबराई पङी थी । उसे हरपल गुरनैब की सलामती की फिक्र रहती । कहीं गुरनैब को कुछ हो न जाये । निरंजन जैसे कद्दावर जट्ट की अन्यायी मौत उसकी आँखों के सामने नाचती रहती । एक एक मिनट गिन कर उसने ये तेरह दिन निकाले थे । गुरनैब किसी काम से भी बाहर जाता तो उसका दिल डूबने लगता । जबतक वह वापिस नहीं आता , पता नहीं किस किस देवी देवते को याद करती रहती और जब लौट आता तो दिल ही दिल में सौ शगन मनाती । उसे समझ ही नहीं आ रहा था कि किससे अपने मन का डर साझा करे । मायके में अब न माँ थी न बापू । दो भाई थे पर दोनों अपनी गृहस्थी में मगन । घर में भाभियों की चलती । उनसे क्या कहे । सास ससुर पहले से ही सब जानते है , समझ रहे हैं । ऊपर से भाई की अस्वाभाविक मौत ने उन्हें बुरी तरह से तोङ दिया है तो उन्हें कैसे मन का हाल बताए ।
इसी कशमकश में ये तेरह दिन बीत गये । आज तो भोग भी पङ गया । अब घर में लोगों की भीङभाङ कम हो जाएगी । खतरा बढ जाएगा । आज वह सोच कर बैठी थी कि हर हाल में पति से इस बारे में बात जरुर करनी है । पर उसे सुबह से पति से बात करने का मौका नहीं मिला था । पूरा दिन लोग आते रहे थे । उन सबका चायपानी और खाना पूरा दिन चला था । आये गये की देखभाल , सारसंभाल ने उसे बुरी तरह से थका दिया था । मन कर रहा था कि मुँह ढक कर सो जाये पर बात तो करनी ही थी तो अब इस समय वह बेसब्री से गुरनैब के कमरे में आने का इंतजार कर रही थी । उसने थोङी देर इंतजार किया और जब इंतजार कर करके थक गयी तो सोती हुई ननी को सास के पास सुलाकर उसने हारे से दूध का गिलास भरा और धीरे से सीढियाँ चढ गयी । गुरनैब अभी सोया नहीं था । मुँह सिर लपेटे लेटा हुआ था । सिमरन वहीं उसकी चारपायी पर बैठ गयी और धीरे धीरे उसके बालों में उँगलियाँ फिराने लगी । गुरनैब बिना हिलेजुले वैसे ही चुपचाप लेटा रहा । उसने सिमरन की इस हरकत पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी । सिमरन फिर संशय में पङ गयी । वह सोच रही थी , बात कहाँ से शुरु की जाय । कुछ देर चुप रह कर आखिर उसने सीधे ही बात शुरु कर दी ।
सुन , अब चाचा तो रहा नहीं । वही लाया था उस हूर परी को । तो आज जब लाने वाला ही नहीं रहा तो तू उसे छोङ आ कहीं दूर । मुसीबत बनकर आई है वह इस परिवार पर । सब खत्म कर डालेगी । उस कलहकारी का हमारी जिंदगी से जाना ही ठीक होगा । तू सुन रहा है न ।
गुरनैब ने सिमरन का हाथ झटक दिया और उठकर बैठ गया – तू पागल तो नहीं हो गयी । उसे कहाँ छोङना है , कहाँ नही ये फैसला तो उसी दिन पंचायत में हो गया था । आज नये सिरे से ये बात कैसे याद आ गयी तुझे । उस लङकी के लिए दुनिया जहान के थाने कर लिये । पंचायतें भुगत ली । दो गाँवों में मिठाइयाँ बांट दी । यहाँतककि घर का बेटा भी मरवा लिया तो अब उसे कैसे छोङ देंगे और क्यों छोङेंगे ।
देखो जी ...
और तेरा क्या ले रही है ? यहाँ हवेली में उसने कभी आना नहीं । अलग कोठी में पङी है । तुझे उससे क्या तकलीफ हो रही है । चल मेरा सिर न खा । वैसे ही मेरे सिर में बहुत दर्द है । चल जा । नीचे जाकर चुपचाप सो जा और मुझे भी चैन से सोने दे ।
गुरनैब ने खेस लपेटकर करवट बदलकर आँखें मूँद ली तो सिमरन को पास कहने सुनने को कुछ बचा नहीं । वह उठ खङी हुई । उसने पलटकर गुरनैब को देखा कि शायद अब वह उसका हाथ पकङकर उसे रोक ले पर गुरनैब ने आँखें खोली ही नहीं । वह आँखें पोंछती हुई नीचे चली गयी ।
ये लङकी अभी और क्या दिन दिखाएगी । वाहेगुरु मेहर कर । – उसने फैसला किया कि न तो वह रोयेगी , न चीखेगी । न ही मायके जाकर उन पर वोझ बनेगी । उसकी पढाई लिखाई शायद आज जैसे हालातों का सामना करने के लिए कराई गयी थी तो सुबह उठते ही सबसे पहले कहीं एपलाई करना है ताकि अपने पैरों पर खङी हो सके ।
उसने पिछले सात दिन के अखबार निकाले और वांटिड के विज्ञापन देखने लगी । आखिर में उसे दो विज्ञापन अपने लायक लगे । एक प्राइवेट स्कूल में टीचर की जगह खाली थी और जवाहर नवोदय विद्यालय में लैक्चरार की पोस्ट खाली थी , यह एडहाक पोस्ट थी । उसने जवाहर नवोदय विद्यालय के बारे में गूगल पर जानकारी माँगी । यह सरकारी आवासीय विद्यालय थे । गूगल में बताया गया था - ग्रामीण प्रतिभाओं को आगे लाने के लिए व अवसर प्रदान करने के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1986 के अंतर्गत ऐसे आवासीय विद्यालयों की परिकल्पना की गयी हैं जिनको Jawahar Navodaya Vidyalaya का नाम दिया गया हैं। ग्रामीण परिवारों के वे छात्र/छात्राएं जो उत्तम श्रेणी की शिक्षा प्राप्त करने के लिए फीस देने में असमर्थ रहते हैं ऐसे छात्र/छात्राओं को अवसर प्रदान करने के लिए सरकार द्वारा जवाहर नवोदय विद्यालय की शुरुआत की गयी हैं। नवोदय विद्यालय की सहायता से गरीब व ग्रामीण परिवार के विद्यार्थी भी शहरी क्षेत्र एवं अच्छे परिवारों के विद्यार्थियों की भांति अच्छी शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे और तेजी से आगे बढ़कर अपना भविष्यसुरक्षित कर सकेंगे। सम्पूर्ण देश के ग्रामीण क्षेत्रों में नवोदय विद्यालय की स्थापना की जाती हैं ताकि वहां के छात्र/छात्रा भी पढ़-लिख सकें और आगे बढ़ सके।
दोनों विज्ञापनों को सर्कल करके उसने अखबार तहा कर रख दिये । अर्थशास्त्र में मास्टर्स तथा बी.एड करने का फायदा लेने का समय आ गया था । अगर उसे यह नौकरी मिल गयी तो वह ननी को लेकर इस माहौल से दूर चली जाएगी । जहाँ वह और ननी होंगे , दूसरा कोई नहीं होगा । ये सब सोचते सोचते उसकी आँख कब लग गयी , उसे पता ही नहीं चला ।
सिमरन को तो गुरनैब ने नीचे भेज दिया पर उसके खुद की आँखों से नींद गायब हो गयी थी । जैसे ही वह आँखें बंद करता , जंगीर और जसलीन का चेहरा उसके सामने आ जाता । उनकी कानोंसुनी बातें कानों मे जहर घोलने लगती । घबराहट थी कि बढती ही जा रही थी । उसने घङी देखी ,अभी रात के आठ ही बजे थे । अंत में जब लेटना असंभव हो गया तो वह उठ गया ।

बाकी कहानी अगली कङी में ...