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बैलों की वापसी

रात दिन को अपने में समेट चुकी थी | सब कुछ शांत था | पर मेरा मन आज बेचैन था | कुछ घबराहट थी| शायद उसके आतंक ने मुझे बेचैन कर दिया था|
बाघ . .हां बाघ . इस शिकारी जानवर का ही आतंक था| आसपास के 27 गांव में अब तक 100 से ज्यादा जानवर व 10 से ज्यादा लोगों को मौत दे चुका है वो |
ट्रंप लगे हुए हैं ,किसी जाल में बकरी ,कहीं मुर्गा ,शिकारी पेड़ पर छुपे बैठे हैं | शिकारी के लिए हंसी आती है ,सरकारी महकमे को देखकर. . 1 महीने से यह सब चल रहा है |
शिकारी ,शिकार कर रहा है | कब आता है, कब जाता है, भनक तक नहीं लगती है | अपना काम निपटा कर चला जाता है | क्या कहूं महकमे को रिश्वत नहीं दी गई है ,गांव वालों की तरफ से ,शायद इसलिए काम नहीं हो रहा है | मजाक कर रहा हूं, आखिर यह काम ही बिना रिश्वत का है या फिर मैं गलत हूं..

सोचता हूं ,थोड़ा गहराई में जाया जाए | एक महीना हो चुका है | 100 से ज्यादा लोग इस शिकारी को पकड़ने या जान से मारने के लिए रखे गए हैं ..पर शिकारी तो अपना काम कर रहा है |
मेरे घर से थोड़ी ही दूरी पर ,मेरे पशुओं का अस्तबल है | घास फूस से बना हुआ ..रात 11:00 बजे उनके रभाने की तेज ध्वनि सुनाई देने लगी | ,मैं ,और गांव के लोग भी उधर को भागे | बाघ दो बैलों को मारकर खा रहा था, वह झोपड़ी की दीवार को अपने तेज पंजों से फाड़ कर अंदर आया था | बैलों की यह दशा देखकर मैं जड़ हो गया |
तेज हल्ला हो रहा था, बाघ खूंखार हो रहा था, रात के अंधेरे में, टॉर्च वह मसाल की रोशनी में, वह किसी दैत्यकार राक्षस जैसा लग रहा था | ..कुछ लोग तो उसे उस रूप में देखकर ही भाग खड़े हुए ..| फिर वही हुआ ,जो होता आया है, एक लंबी छलांग और बाघ अंधेरे में गायब ,पीछे रह गए मेरे शिकार बने बैल और हल्ला करते लोग |
दुखी मत होइए ,मुझे मुआवजा मिल गया | यह राहत की बात होती है | पर शायद सरकार यह बात नहीं जानती कि मैंने उन बैलो को उनके बचपन से ही ,अपने साथी की तरह पाला है.. कुछ नहीं बहुत कुछ जुड़ा था,उन बैलों के साथ.. पर चलो इस बात पर नहीं जाते हैं |
मन की बेचैनी घबराहट सब खत्म हो चुकी थी, कुछ दिन बीत गए थे, शांति थी, पिछले 2 हफ्ते से सब शांत था, सरकारी तंत्र अपने काम में लगा हुआ था | फॉरेस्ट विभाग के आला अधिकारी भी यही थे ,कई बार इनको देखकर लगता था कि यहां मजे ही कर रहे हैं..
शाम होते ही उनके कॉटेज में ,शराब और शबाब, दोनों पहुंच जाते हैं | जैसे यहां पिकनिक पर हो ,,छुट्टियों का आनंद ले रहे हो | गांव के कुछ युवक उनके चमचे बने हुए हैं ,शहर से उन्हें शराब व अन्य सामान मुहैया कराते हैं ,और अपना भी डुबकी लगा लेते हैं..|
आखिर यह बाघ जाता कहां है, यह सवाल मेरे मन में उठता रहा है |और इसी उधेड़बुन में में उसे खोजने निकल पड़ा | मैं जानता था ,यह खतरनाक है पर मैं जोश में था | आखिर उसने मेरे दो बैल जो मार डाले थे | जंगल से ही मैंने एक लकड़ी को नुकीला बना लिया था | अपनी सुरक्षा के लिए, और उसी दिशा में तलाश करना शुरू किया, जिधर को वह उस दिन, बैलों को मार कर भागा था |
4 घंटे से उसे तलाश कर रहा हूं | कहां गायब हो जाता है यह | तभी एक हल्की सी गोराहर्ट सुनाई दी | चट्टानों के बीच में एक सुरंग बनी हुई थी | और वहां जो देखा उसे देखकर मैं चौक गया | मेरा शरीर कांपने लगा | धड़कन की स्पीड बढ़ गई, बाघ बिल्कुल मेरे से 20 मीटर दूर ही तो था | नहीं , शायद मैं गलत हूं | दो शावक चट्टानों के बीच से बाहर आ रहे थे ,तो यह बाघ नहीं बाघिन है.. |
मैंने ध्यान से देखा, हां यह वही है ,,इसका एक कान फटा हुआ है. | और मेरे बैलों को मारने वाले का कान भी फटा हुआ था | यह वही है, पर वन विभाग का कहना है कि ,वह एक बाघ है | यह सरकारी विभाग भी बस ,क्या कहें ,डेढ़ महीने में वह ,एक बाघ बाघिन में फर्क नहीं कर सका ,"निकम्मा विभाग" |
अब क्या किया जाए ,सोच रहा हूं | गांव में जाकर सबको बताऊं या नहीं ,,बता देना चाहिए ,ताकि इसे मारा जा सके | हां यही ठीक रहेगा..|

रुको, रुको ,नहीं, रहने दो | उन दो बच्चों को देख कर दिल ने कहा | कल को, किसी और को, यह बाघिन शिकार बनाएगी, फिर तेरा दिल क्या कहेगा | मन एक के बाद एक सवाल कर रहा था , उन नन्हे बच्चों को देखकर | कैसे लग रहे हैं ,तेरे बैलों की जोड़ी की तरह ही है ना | क्या इरादा है, यह आदमखोर बाघिन है ,तू पहले यहां से निकल ,मन बड़बड़ा रहा था. |
रात को बिस्तर पर लेटते ही आंख लग गई | अगली सुबह सब नया था | फॉरेस्ट वाले मजे कर रहे थे ,गांव वाले अपने काम में लगे हुए थे ,और तभी एक हल्के से शोर ने सारा माहौल गर्म कर दिया | बाघ, बकरी का शिकार कर, ले गया था | पता लगा ,"पिंजरे की बकरी को बाघ उठा ले गया है" उसकी कुंडी अटक गई थी | उसने काम नहीं किया, सब गांव वाले हंस रहे थे ,बात ही ऐसी थी |
मैं जंगल की तरफ चल दिया , पर घबराहट कम थी | और मैं बहुत ही जल्दी वहां तक पहुंच गया | बाघिन वह शावक दिखाई नहीं दे रहे थे | मैं वही एक सीधे पेड़ पर चढ़ गया | लगभग 2 घंटे बाद बाघिन व बच्चे बाहर आए | पहली बार दिल खुश हो गया | उन्हें देखकर ,बच्चे अपनी मस्ती में थे, अपनी मां के साथ अठखेलियां करने में लगे रहे | मुझे चिंता सी होने लगी, अगर वन विभाग ने पकड़ लिया तो क्या होगा, पर यही ज्यादा अच्छा रहेगा | इस जगह से उसे बेहोश किया जा सकता है, और आसानी से पकड़ा जा सकता है | वरना कहीं गांव में बाघिन आए और किसी शिकारी की गोली का शिकार ना हो जाए | तब उसके बच्चों का क्या होगा ,मेरे बैलों का दुख मुझे ,उन बच्चों में दिखाई दे रहा था..|

मैं सीधा नीचे उतरा पेड़ से , जाकर वन विभाग को सारी जानकारी दी | और उनसे आश्वासन लिया कि बाघिन को जिंदा ही पकड़े | वन विभाग के अधिकारी मुझे गुस्से से घूर रहे थे | मेरे अकेले जंगल में जाने के कारण यह उनकी नजर में अपराध था | परंतु वे कर कुछ नहीं सकते थे | क्योंकि अब मैं ही उन्हें ,उस स्थान पर ले जाने वाला था , इसलिए |
सिर्फ 4 घंटे में ही वह बेहोश कर दी गई और पिंजरे में डाल दी गई | सबसे पहले मैंने हीं उन दोनों शावकों को गुफा से बाहर निकाला | दोनों ही एकदम कोमल से | कौन कह सकता है बड़े होकर यह दोनों , सबसे शक्तिशाली जंगली शिकारी बनेंगे | मैंने उन्हें अपने कंधे पर रखा | मेरे बदन में एक सिहरन सी दौड़ गई, मैंने वहीं स्पर्श महसूस किया ,जब मेरे बैल अपने सिर को मेरे कंधे पर रख देते थे | क्या यह मेरे बैलों का का नया जन्म है | मैंने उन्हें पिंजरे में डाल दिया | मैं सोचते हुए चल पड़ा | मैंने मुड़ कर उन्हें पुकारा, लालू ! कालू! वह दोनों झटके से खड़े हो गए ,मुझे देखने लगे | मेरे चेहरे पर मुस्कान आ रही है ;लौट आए थे मेरे दो बैल!!!