Rupaye, Pad aur Bali - 3 in Hindi Detective stories by S Bhagyam Sharma books and stories PDF | रुपये, पद और बलि - 3

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रुपये, पद और बलि - 3

अध्याय 3

बात मालूम होने पर पुलिस की खाकी यूनिफॉर्म स्टेशन के प्लेटफार्म के चारों ओर जमा हो गई।

गुलाब की पंखुड़ियां चारों तरफ बिखरी हुई थी माणिकराज के चारों तरफ मक्खियां भिन्न-भीना रही थी। उनके स्वागत करने आए अनुयायी कुछ दूर पर खड़े होकर तमाशा देख रहे थे। पार्टी के मुख्य कार्यकर्ता चार-पांच लोग सिर्फ फिक्र के साथ खड़े हुए थे |

इंस्पेक्टर उनके पास आए।

"किस ने चाकू मारा पता चला...?"

"पता नहीं चला इंस्पेक्टर। भीड़ का फायदा उठाकर उसने ऐसा किया।

"पास में कौन-कौन खड़े थे ?"

"मालूम नहीं।"

"तुम लोग कौन हो ?"

"हम इस पार्टी के कार्यकर्ता हैं।"

"एक प्रधान आ रहे हैं तो उनके लिए सुरक्षा का इंतजाम तो कर लेते ।

"भीड़ को कंट्रोल नहीं कर सके इंस्पेक्टर।"

"सर।"

आवाज सुनकर इंस्पेक्टर ने मुड़ कर देखा। माणिकराज का पी.ए. परमानंद उनके पास आए।

"सर। मेरा नाम परमानंद है। माणिकराज का पी.ए. हूं।"

"बोलिए।"

"माणिकराज जब गांव में थे तो उन्हें एक धमकी भरा पत्र आया था सर।"

"धमकी भरा पत्र ? क्या था?"

"तुम मंत्री बनने की इच्छा मत करो। इच्छा करोगे तो मार दिये जाओगे।"

"वह लेटर अभी कहां है ?"

"उन्होंने उसे उसी समय फाड़कर फेंकने को कह दिया। मैंने भी उसे फाड़ कर फेंक दिया।"

"इस बात को पुलिस को बताया क्या ?"

"नहीं बताया।"

"क्यों ?"

"प्रधान जी ने मना कर दिया।"

"क्यों मना किया।"

"लेटर न्यूज़ पेपर में पब्लिश होना सही नहीं रहेगा। पार्टी के प्रधान उन्हें मंत्री पद देने के लिए सोचेंगे ऐसा वे बोले।"

"लेटर कब आया ?"

"जिस दिन वह जीते थे उसी दिन ।"

इंस्पेक्टर जब परमानंद से बात कर रहे थे उसी समय सब इंस्पेक्टर की आवाज आई।

"सर।"

इंस्पेक्टर मुड़े।

"क्या बात है विक्टर ?"

"एक मिनट आ रहे हो क्या सर ?"

वे गए।

सब इंस्पेक्टर, माणिकराज के पेट में जो चाकू घुसा था उसे दिखाया। "चाकू के हैंडल में एक कागज रखा हुआ था। उसे निकाल कर देखें क्या सर?"

"आपके हाथों के निशान नहीं आए इसलिए रुमाल का उपयोग करके निकालिए।"

इंस्पेक्टर के बोलते ही सब इंस्पेक्टर माणिकराज के शव पर झुक कर अपने जेब से रुमाल निकाल कर चाकू के हैंडल से कमर में जो पत्र रखा था उसे निकाला।

उसे बहुत ही छोटा तह किया हुआ था।

उसे खोला।

खोलते-खोलते फुल स्केप का पेपर था । तमिल में टाइप किया हुआ था।

'पुलिस वालों को नमस्कार !

मैं एक भारतीय नागरिक हूं। उसमें भी तमिलनाडु का। माणिकराज के मरने के लिए किसी को दुख मनाने की जरूरत नहीं। कोर्ट में एक जज द्वारा एक आदमी को मृत्युदंड देने पर उसे समुदाय जैसे स्वीकार करता  है उसी तरह से माणिकराज के मृत्यु को भी समुदाय को वैसे ही स्वीकार करना चाहिए। मैं राजनीति को पसंद करता हूं। परंतु उसी समय राजनैतिक नेताओं से नफरत भी करता हूं क्योंकि बहुत से लोग राजनीतिक नेताओं से बहुत परेशान हैं।

माणिकराज राजनीति में एक दुर्भाग्य के कारण एम.एल.ए. बनकर आ गए। वे अपने बीस लाख रुपए खर्च करके जीते हैं ‌। यह जीत न्यायसंगत नहीं है। एम.एल.ए. बन कर आए माणिकराज निश्चित रूप से मंत्री बन जाएंगे।

उन्हें मंत्री नहीं बनना चाहिए। इसीलिए इस प्लेटफार्म पर हत्या हुई, अब जल्दी से बॉडी को ले जाकर पोस्टमार्टम करके देखो उसका हृदय है भी या नहीं फिर जे.जी हॉस्पिटल के पिछवाड़े में जो शमशान हैं वहां जाकर जला दीजिएगा ।

माणिकराज के मरने से देश के लिए बहुत बड़ा नुकसान हुआ ऐसा दुख लोग प्रकट करेंगे। परंतु जिन्होंने वोट दिया और टिकट दिया थोड़े दिन इनके बारे में बात करके माणिकराज को सब भूल जाएंगे।

राजनीति में न्याय और बिना पक्षपात रहित न्याय करने वाला आदमी ही होना चाहिए ऐसा मैं चाहता हूं। राजनीतिक आदमी कोई न्याय के विरुद्ध आचरण करें तो उनका नाम माणिकराज के लिस्ट में ही आ जाएगा यह मेरी चेतावनी है।'

पत्र यहीं खत्म हुआ।

इंस्पेक्टर ने अपनी गर्दन ऊंची की।

"विक्टर, यह पत्र बहुत ही तेज दिमाग वाले आदमी ने लिखा है।"

"कोई आतंकवादी हो सकता है सर।"

"अभी कुछ दिन पहले जो कैदी जेल से छूटे हैं उनकी लिस्ट को देखें तो आदमी पकड़ में आ सकता है।"

"सर, ज्यादा देर यहां रहे तो भीड़ ज्यादा हो जाएगी। बॉडी को पोस्टमार्टम के लिए लेकर चले जाएं क्या सर ?"

"तैयारी करो।"

सब-इंस्पेक्टर विक्टर के सरकते - इंस्पेक्टर पत्र के साथ - निजी सहायक के पास गए।

"क्या उस दिन का पत्र इसी तरह का था ?"

उसे लेकर – परमानंद देख रहे थे तभी - कांस्टेबल, एक पोर्टर को लेकर आए।

"क्या बात है ?"

"सर, इस पोर्टर ने हत्या करके भागने वाले आदमी को देखा है।"

इंस्पेक्टर बड़े खुश होकर उसकी तरफ आए।

"उसे तुमने देखा ?"

"हां सर।"

"तुम्हारा नाम क्या है ?"

"मारीमुथु।"

"तुमने कहां देखा ?"

"आठवीं प्लेटफार्म के पास एक आदमी छुप-छुप कर दौड़ रहा था सर। मैंने भी उसको फॉलो किया। बीच में एक गुड्स ट्रेन के आने से वह मेरे आंखों से ओझल हो गया।"

"आदमी कैसा था ?"

"कॉलेज के लड़कों जैसा पैंट शर्ट पहन के स्टाइल से था सर। आंखों में धूप का चश्मा लगाया था।"

"विक्टर तुम बॉडी को पोस्टमार्टम के लिए ले जाने के काम पर ध्यान दो। इस फार्मर एंक्वायरी को खत्म करो। मैं जाकर आता हूं।"

"वे पोर्टर के साथ चलने लगे।

"तुम्हें तुरंत पुलिस को बताना चाहिए था ना ?"

"क्या बात है यह मुझे पता नहीं था सर। कोई यात्री बिना टिकट के बीच की गली से दौड़ रहा है ऐसा मैंने सोचा। बाद में ही मुझे इस हत्या के बारे में पता चला।"

वे आठवें प्लेटफार्म पर पहुंचे।

"इस तरफ उतर कर दौड़ा।"

पोर्टर मारीमुथु के हाथ दिखाने से इंस्पेक्टर रेल की पटरियों के बीच में नीचे कूदे।

"आओ... मेरे साथ वह जहां से बचकर भागा रास्ता दिखा दो.…."

पोर्टर भी नीचे कूदा फिर दोनों पैदल पटरियों को पार कर - वॉल टाक्स रोड पर आए।

रोड के किनारे - चार-पांच ऑटो लाइन से खड़े थे - इंस्पेक्टर उनके पास गए।

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