Shanaya (My first crush) - 1 in Hindi Love Stories by Kapildeo books and stories PDF | शनाया - सफर ए मोहब्बत - 1

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शनाया - सफर ए मोहब्बत - 1

ये इश्क प्यार मोहब्बत न बड़ा ही टिपिकल होता है सच में कहें न तो ये मूवीज वैब सीरीज वाला से भी ज्यादा टफ होता है और हर एक के लाइफ से किसी न किसी मोड़ पर जरूर जुड़ा होता है।
वैसे तो इश्क की कोई एक परिभाषा नहीं है लेकिन मेरे हिसाब से क्लासरूम में किसी एक कोने में बैठकर चुप चाप किसी एक को देखते(निहारना) रहना और उसके बारे में सोचकर मकबूल हो के मंद मंद ही मुस्कुराना और जब नजरें आपस में टकरा जाए तो नजरें ऐसे हटा लेना , जैसे मानो की हम तो उसे देख ही नहीं रहे थे और ये बात उन्हें भी मालूम होना की हम तो सिर्फ उन्हें ही देख रहे थे, मेरे समझ से शायद इसे ही इश्क कहते हैं!
कुछ इसी तरह शुरू हुई थी हमारी पहली इश्क,
खैर चलिए शुरू से बताते हैं यही अक्टूबर 2016 का महीना चल रही थी थोड़ी बहुत गर्मी और ठंड मिला जुला मौसम था और मेरे ट्रेनिंग के तीसरे महीना की शुरुवात भी हो चुका था, अबतक तो सबकुछ ठीक ठाक ही चल रहा था की फिर एक दिन बहुत सारे न्यू ट्रेनीज कैंपस आए, हमलोग बाहर ही थे यही कोई लगभग 200 ट्रेनीज आए थे और फिर नजर एक फॉर्मल व्हाइट शर्ट और कर्ली बाल पर पड़ी और फिर क्या था बस मैं खो गया, एक अजीब सा महसूस होने लगा न चाहते हुवे भी मैं उसे बस घूरे जा रहा था, हमें तो लग रहा था एक अदृश्य चुंबकीय शक्ति काम कर रही हो और मैं साउथ पोल हूं और नॉर्थ पोल वो है,
शाम के यही 5 बज रहा होगा थोड़ी सी धूप थी और हल्की हल्की हवाएं चल रहे थे वो धूप और हवाओं का संयोग ऐसा लग रहा था जैसे कोई रेशम लहरा रहा हो और उनकी वो उड़ती बालें बस हमें ही बुला रहा हो।
मैं खो ही गया था की अचानक वो व्हाइट शर्ट आंखों से ओझल हो गया, पर मेरे नजर उन 200 की भीड़ में बस उन्हें ही तलाश रहा था और दिल बोल रहा था की एक बार सामने से तो देख लो।
यही सब चल ही रहा था की अचानक पीछे से कोई पीठ थप थापा रहा था और मोहित–मोहित बोल रहा था उस और देखने के बाद पता चला कि वो तो मेरा दोस्त है।

दोस्त– अबे कहां खो गया है तुम यहीं बैठे रहोगे या घर भी जाना है, साला दिन में ही सो के सपना देख रहे हो।
मैं– हां, नहीं वो 6 बजे जाना है न?
दोस्त– अबे क्या हां और ना, घड़ी देख 6 बजकर 5 मिनिट हो गया , चल।
और फिर हमलोग घर के लिए निकल पड़े। घर तो आ गए लेकिन दिल दिमाग मन में बस वही चल रही थी, अबतक मेरा वो पहली रात था जिसे हम चाह रहे थे की जल्दी ढले और एक न्यू सुबह आए एक नया आश लेके, पता है कभी अगर उस समय मेरे पास शक्तिमान या फिर सुपरमैन आ जाता न तो हम बस उनसे यही मांगते की एक झटके में ये रात खत्म कर के मुझे ट्रेनिंग सेंटर छोर दीजिए।
यही सब सोचते सोचते हमें कब नींद आया और कब हम सो गए पता ही नही चला कि जब नींद खुला तो सूर्य देव जी के दर्शन हो गए इसबार मैं पहली बार मन ही मन सूर्य को नमस्कार किए और मांगे कि काश भले हमें कुछ दिखे या न दिखे लेकिन वो कर्ली टेल्स दिख जाए, जल्द बाजी में फ्रेश होकर नाश्ता कर के निकल चले अपने गंतव्य की और, आज मेरे अंदर कुछ ज्यादा ही जोश था और हम कुछ ज्यादा ही मुस्कुरा रहे थे , हमारे पैरों मे मानो स्प्रिंग लग गया हो आखिरकार उसे जो देखना था।
अबक्तक 8 बज चुका था और मैं ट्रैनिंग सेंटर पहुंच चुका था।
और मेरे नजर अभी भी किसी के तलाश में इधर उधर भटक रहे थे और मन , मन का क्या ये तो अक्सर नजरों के ही साथ देकर मचल रहा था की दिख तो जाए।
काफी खोज बिन करने के बाद इलेक्ट्रॉनिक्स के क्लास में 3rd लास्ट बेंच में एक चश्मा पहनी, केटली जैसी झुमका लगाए बुक ओपन कर के कुछ लिख रही थी,

एक पल के लिए उसे देखकर तो हमे लगा की –

भोली सी सूरत,
आंखों में चश्मा,
कानों में केतली।
और,
दूर से चिल्लाए
चाय–चाय।
ये वाला शायरी आ गया दिमाग में,

खैर
और फिर क्या एक झटके में इन आंखों ने पहचान लिया की मोहित इसी ने ही तुम्हें मोहित कर दिया है, और पैरों में मानो डिस्क ब्रेक लग गया हो अचानक से वहीं रुक गया।
आज फिर हम खो गए और नजरे उतर ही नहीं रही थी ऐसा सुकून मिला मानो कितने जन्म से बिछड़े हुए हुवे यार मिल गया गया है और मैं उनसे मिल रहा हूं, इन सभी के बीच उसने अपनी चस्मा उतारी और एक नजर मेरे तरफ ऐसे देखी जैसे मानो हम स्टील में सल्फर या हॉट मेटल में फॉरेन मटेरियल आ गए हैं और फिर से चस्मा पहनी और पड़ना शुरू।
पूरी लाइफ में पहली बार इतना सुकून मिला था एक अलग टाइप का खुशी जिसे शब्दों से बता पाना कम है , जो इस पल से गुजरता है वही फील कर सकता है।
खैर एक नजर ही तो सही नजर तो मिली इसबात का खुशी था मन में।
और शाम तक हम उसके क्लास के बाहर अबतक 7 बार चक्कर लगा चुके थे , कभी सर से कुछ पूछने के बहाने तो कभी बॉटल में कॉलर से पानी भरते हुवे उसे देखने की कोशिश करते हुए।
मुझे नहीं पता था क्रश क्या होता और किसी को आलिया भट्ट या एंजेलिना जॉली क्रश क्यों लगने लगता था, पर अब हमारे लिए तो एंजेलिना जॉली वही कर्ली टेल्स, रेशम जैसे बाल और रेड कलर फ्रेम की चस्मा से अपनी नजरों को बचाने वाली , किताबों में घुसी पड़ी , झुकी नजरों वाली तौता परी जैसी दिखने वाली 3rd लास्ट बैंच में बैठने वाली थी।

वैसे देखे तो बहुत सारे नजारे ,
पर सुकून उसे ही देखने पर मिला।

मुझे अबतक नहीं पता प्यार मोहब्बत क्या होता है लेकिन पूरे इंस्टीट्यूट की इतनी सारी लड़कियों से भरी भीड़ सिर्फ मेरे नजर को उसे तलाश करना, और उससे देखने से ही एक अपनापन लगना, दिल को सुकून मिलना मिलना, पूरे लाइफ की टेंशन खत्म हो जाना और उनमें ही खो जाना शायद यही इश्क है, और हां मुझे भी इश्क हो चुका था।
.....to be continue...