Azab gaav ki gazab kahaani - 1 in Hindi Fiction Stories by shama parveen books and stories PDF | अजब गांव की गजब कहानी - 1

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अजब गांव की गजब कहानी - 1

यह कहानी पूरी तरह से काल्पनिक है इसका किसी भी गांव या व्यक्ति से कोई संबंध नही है।

एक गांव था जिसका नाम सुंदर नगर था। ये गांव भी और गांव की तरह ही था। मगर यहां के नियम थोड़े अजीबो गरीब थे। जैसे की सबको पता है की जब से दुनिया बनी है तब से ही पुरुषो को उत्तम समझा जाता है और महिला को बुद्धि हीन समझा जाता है। तो इसी के साथ में आज की कहानी शुरू करती हु।

सुंदर नगर एक ऐसा अजीबो गरीब गांव है जहा सिर्फ और सिर्फ पुरुष को ही बुद्धि मान मानते हैं। इस गांव में महिला को काफी निचला दर्जा दिया जाता है। अगर यहां पुरुष पढ़ा लिखा होता है तो उसे सभ्य माना जाता है अगर कोइ महिला कितना ही क्यों ना पढ़ ले मगर उसे बुद्धिहीन ही समझा जाता है।

इस गांव में एक अजीब सा रिवाज भी था जिसे की सबको मानना पड़ता था अगर उस रिवाज को कोई नही मानता था तो उसका उसे दंड मिलता था। वो रिवाज ये था की अगर कोइ पुरुष पढ़ा लिखा है तो उसे सब बहुत आदर देते थे। मगर अगर कोइ महिला पढ़ी लिखी है तो उसका विवाह नही होता था।

इस गांव में लड़कियों का पढ़ना लिखना अपशगुन माना जाता था। इसलिए शादी के वक्त पहले ये देख लिया जाता था की लडकी पढ़ी लिखी तो नही है। अगर गलती से कोई लड़की पढ़ी लिखी होती थी तो शादी के वक्त उसके पढ़ाई के सारे कागजात जला दिए जाते थे जिससे की किसी को ना पता चले कि लड़की पढ़ी लिखी है।

इस गांव में पढ़ी लिखी लड़की को मनहूस माना जाता था। उन्हे लगता था की जो लड़की पढ़ी लिखी होती है वो अपने पति को बरबाद कर देती है। तथा उसका पूरा का पूरा वंश बर्बाद कर देती है।

इस गांव का जो भी इंसान होता था उसे ये नियम मानना ही पड़ता था। लड़कियों को ना चाह कर भी ये कानून मानना ही पड़ता था। इन्ही सब के बीच इसी गांव में मीठी नाम की एक लड़की रहती थी। जसे पढ़ने लिखने का बहुत ही शोक था। वो बचपन से ही पढ़ाई के सपने बुनती थी। वो बड़ी होकर एक आदर्श वकील बनना चाहती थी।

जिद ही जिद में उसने 12वी कक्षा पूरी करली। अब उसे आगे की पढ़ाई करनी थी मगर उसके गांव में तो लड़कियों को आगे पढ़ने ही नही दिया जाता था। मगर उसने अपने माता पिता से बहुत जिद करी । उसके जिद के आगे उसके माता पिता को झुकना पड़ा। एक रात अचानक मीठी के पिता ने उसे अपने साथ लिया और शहर चले गए । शहर में उसके पिता के चाचा जी रहते थे । मीठी के पिता ने मीठी को उन्ही के यहां उसे छोड़ दिया। और बोला की आप मेरी बेटी को आगे की पढ़ाई पूरी करवा देना आपका जो पैसा होगा में आपको हर महीने दे दूंगा । चचाजी आपको तो पता है ना की मेरी बेटी को पढ़ना कितना अच्छा लगता है मगर क्या करू उस गांव के लोग मेरी बेटी को पढ़ने ही नही देंगे। इसी लिए में उसे यहां लाया हू।

उसके बाद मीठी के पिता वहा से चले जाते हैं। और फिर मीठी वहा मन लगा कर पढ़ती है।

इसी के साथ पता भी नही चलता की तीन साल केसे गुजर जाते हैं । अब मीठी पढ़ लिख कर एक अच्छी वकील बन जाती है। और उसे शहर में एक अच्छी नोकरी भी मिल जाती है। मगर मीठी उस नोकरी को मना कर देती है। तब उसके दादा जी पूछते है की बेटी तूने इतनी अच्छी नोकरी करने से क्यों मना कर दिया।

तब मीठी कहती हैं की दादा जी आपको तो पता है ना की मेने कितनी मुश्किल से पढ़ाई की है। अगर आज मै जो भी हु आप ही की बदौलत हु अगर आज आप नही होते तो में पढ़ भी नही पाती।।

मगर अब ऐसा नही होगा अब गांव की हर एक लड़की पढ़ेगी । क्योंकि अब में अपने गांव जाऊंगी और सारे दकया नूसी रिवाजो का बहिष्कार करुगी। तब उसे दादा जी समझाते है की बेटी ये सब जो तू कह रही है इतना आसान नही है। तब मीठी कहती हैं की दादा जी मेरा वकील बनना भी आसान था क्या मगर में बनी ना। मीठी अपने दादा की एक बात भी नही सुनती है और अपने गांव जाने की तयारी कर लेती है।

जैसे ही मीठी बस में बैठने वाली होती है तभी वहा पे नैतिक आ जाता है और बोलता है की में तुम्हे अकेले जाने नही दूंगा क्योंकि वहा पे बहुत खतरा है। इसलिए मै भी तुम्हारे साथ चलूंगा। क्योंकि में तुमसे बहुत प्यार करता हु। उसके बाद दोनों गांव के लिए रवाना होते हैं।

फिर अगली सुबह दोनों गांव पहुंच जाते हैं। वो दोनों अपने आप को शहरी बताते है । मीठी अपनी सच्चाई सब से छुपा कर रखती है। तभी वो क्या देखती है की एक लड़की की शादी हो रही है और वो बहुत ही रो रही है क्योकी उसके पढ़ाई के सारे कागजात जला दिए जा रहे हैं और वो कुछ नही कर पा रही है। इस समय मीठी भी अपने आपको काफी लाचार समझती है और वो यूएस लड़की के लिए कुछ भी नही कर पाती है।

फिर शाम होती है तो मीठी नैतिक से कहती हैं की अब हमे जल्द से जल्द ही कुछ करना होगा वरना ये सब यू ही लड़कियों की जिन्दगी बरबाद करते रहेंगे। तब फिर दोनों अपने काम पर निकल पड़ते हैं। वो इस बात का पता लगाने की कोशिश करते है की एसा क्या हुआ था की इस गांव में लड़कियों को पढ़ने नही देते हैं।।

कई दिन बित जाते हैं मगर उन्हें कुछ भी पता नही चलता। वो दोनों काफी परेशान हो जाते हैं। तभी वो दोनो एक पेड़ के नीचे बैठ जाते हैं और बाते करने लगते हैं। तभी उनकी बाते एक आदमी सुन लेता है फिर वो उनके पास आता है और बोलता है की मेने तुम्हारी बाते सुन ली है।

में तुम्हारी मदद कर सकता हु अगर तुम चाहो तो। तब मीठी बोलती है की तुम हमारी मदद कैसे करोगे। तब वो आदमी उसे सारी बात बताता है की मेरे दादा जी इस गांव के सफाई कर्मचारी थे। वो राजा के महल की सफाई करते थे । उसी सफाई में उन्हे बहुत से सामान मिलते थे जो आज एक कमरे में बंद हैं । अगर आप लोग चाहो तो में आपको वो सब दिखा सकता हु।

तब वो दोनों जल्दी जल्दी से उसके साथ जाते हैं । फिर वो आदमी उस कमरे का दरवाजा खोलता है फिर वो दोनो जल्दी जल्दी से सब कुछ ढूंढने लगते है । तभी मीठी के हाथ में एक कागज का लिफाफा आता है और वो उसे खोल कर देखती है । और फिर उसे पढ़ने लगती है। वो जैसे ही उसे पढ़ती है उसका दिमाग एक दम घूम जाता है क्योकी उसे उस बात का पता चल जाता है की आखिर कार गांव में ये नियम क्यों है।

मगर ऐसा क्या लिखा होता है की मीठी का सर चकरा जाता है........

कर्मशे...........