Pyaar Facebook wala - 1 in Hindi Adventure Stories by Rajesh Kumar books and stories PDF | प्यार फेसबुक वाला - 1

प्यार फेसबुक वाला - 1

मोहित ने आज पहली बार फेसबुक चलाई। उसे बड़ा ही अच्छा लगा। बेचारा इश्क़ का मारा मुकम्मल होने से पहले ही सब कुछ खत्म हो गया।
अपना अकेलापन कैसे दूर करे। कोई तो हो जिससे वो प्यार करे। दिल की सारी बातें कह सके। दिल खोल कर महोब्बत कर सके।
मैं लुटाना चाहता हूँ महोब्बत,
कमबख्त कोई मिले तो सही..
उसे लगता था कि शायद ही उसकी जिंदगी में कोई आएगा...
मोहित एक दिन फेसबुक पर एक प्रोफ़ाइल देखता है, उसने उसे फ्रेंड रिक्वेस्ट भेज दी। कुछ दिन बाद एक नोटिफिकेशन आया कि मोहित का मित्रता अनुरोध स्वीकार कर लिया गया है। उसने उस प्रोफ़ाइल को चेक़ किया। मगर अंजली का कोई भी फ़ोटो अपलोड नही था। अधिकतर नेचर जिनमें नदी, तालाब, पेड़, पर्वत आदि के पोस्ट और कभी कभार शायरी भरी पोस्ट।
इधर मोहित भी शायरी पोस्ट कर दिया करता था। मोहित अंजली की पोस्ट पर कमेंट कर दिया करता था। पोस्ट लाइक भी। मगर उधर से कोई प्रतिउत्तर नही मिलता था।।
एक दिन मोहित ने अपनी फोटो जो उसने एक टूर पर ली थी जिसमें पहाड़ बर्फ और वो, पोस्ट कर दी।
केप्शन रखा
"कि ये हसीन वादियां,
महोब्बत लुटाती हैं।
कोई उसे महसूस तो करे।।"

पहली बार अंजली ने उसकी पोस्ट को लाइक किया और साथ में "वाह👍" लिखा। ये मोहित को बहुत अच्छा लगा। मोहित ने रिप्लाई में "शुक्रिया दोस्त" लिख कर भेज दिया।
अब मोहित अच्छे अच्छे केप्शन के साथ नेचर की फोटोज़ पोस्ट कर दिया करता। बस उसे अंजली की प्रतिक्रिया का इंतजार रहता। ये सिलसिला लगातार चल रहा था। अचानक से अंजली की प्रतिक्रिया आना बंद हो गईं। एक दिन मोहित ने देखा तो पता चला अंजली ने तकरीबन दो महीने से फेसबुक चलाई ही नही है। अब उसका ध्यान भी धीरे धीरे फेसबुक से दूर होने लगा।
कि हर सफ़र आबाद होने से पहले छूट जाता है।
मुक़म्मल हो कैसे हमारा हर ख्वाब ही टूट जाता है।

एक दिन अंजली ने एक पोस्ट कि जो बनारस का था जिसमें बनारस के किसी घाट का फोटो था ढलता सूरज उढ़ते पक्षी, तटों पर मंदिर और जल में बने बिम्ब। लिखा था।

ढ़लती हर शाम, को निहारु मैं।
हे प्रेम के बिम्ब बनारस........,
तुम्हीं में यहीं कहीं खो जाऊं मैं।।

मोहित ने तुरंत ही फ़ोटो को लाइक किया,और लिखा "बेहद हृदयस्पर्शी, सच में बनारस प्रेम का प्रतीक है"
मोहित ने आज पहली बार इनबॉक्स में मैसेज भेजा।
"बहुत दिनों बाद" कहाँ गुमसूम रहे आप।
दो दिन बाद मोहित ने देखा कि अंजली ने रिप्लाई दिया।
"कहीं नही जी,बनारस गए हुए थे बुआ जी के यहां पर।
हम फेसबुक ज्यादा नही चलते है ना। तो जब वक्त मिले तब चला लेते है।"
मोहित-"अच्छा जी, वैसे आप शायरी अच्छी लिखते हैं।"
अंजली-"आपसे किसने कहाँ कि हम शायरी लिखते है। जो हमें अच्छा लगता है उसे डाल देते है किसी की भी लिखी हुई।"
मोहित- "अरे नहीं मुझे लगा कि आप खुद से लिखते होंगे।"
अंजली-जी नही!
मोहित थोड़ा असहज सा महसूस कर रहा था। मोहित ने ये वार्तालाप आज के लिए यहीं रोक दिया।
अगले दिन मोहित ने पोस्ट किया
कितने खुशनसीब थे,बचपन के दिन ए यारों।
ना चिंता,ना परवाह बस खुशी हर लम्हें में थी।
और साथ में खेलते बच्चों की तस्वीर....
सभी लोग पोस्ट को लाइक और कमेंट कर रहे थे। अंजली ने भी लिखा "सच में बचपन सबसे अनमोल होता है।, हम लौट तो नही सकते पर महसूस कर सकते हैं।"


बाकी अगले भाग में:-
"तो बने रहिये हमारे साथ जानने के लिए कि कैसे मोहित और अंजली की प्रेम कहानी कैसे आगे बढ़ेगी।।"

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