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PURPOSE

मज़ाक़ जब भी कोई करता है तो हमेशा होंठों पर मुस्कान ला देता है और कभी -कभी थोड़ा सा ग़ुस्सा या फिर ये कहूँ की पूरा ग़ुस्सा मुझे मज़ाक़ बहुत पसंद हैं और मैंने महक भी ख़ूब किया करता हूँ।बात उन दिनो की है, जब मैंने कॉलेज में study कर रहा था, वैसे तो मेरे चेहरे पर हमेशा हीं हँसी रहतीं हैं पर कॉलेज के दिन की कुछ और ही होते है।


मैं study करने एक छोटे से शहर से Delhi आया, जहाँ मैंने अपने चाचा चाची के साथ रहा था। वहाँ सारे काम ख़ुद करने होते थे, तब समझ आता था की मम्मी कितना काम करती है। यहाँ रहा कर मैं खाना बनाना भी सीखा लिया और कपड़े धोना भी.... जो सच कहूँ तो मुझे धोना पसंद नहीं पर क्या करे "मरता क्या न करता तो फिर मैंने भी करने लगा।" मुझे कॉलेज के बारे में कुछ ख़ास पता नहीं था क्यूँकि मैं अपनी family से जाने वाला पहला बंदा था।जहाँ मैंने कॉलेज जा रहा था और मेरे साथ कुछ शर्तें भी जा रही थी। तब ये शर्तें माइने नहीं रखती थी क्यूँकि मुझे तो अपने सपने और कॉलेज की life नज़र आ रही थी।


अब वो दिन आ गया जब मैंने कॉलेज के निकल, मैं कोई अमीर student नहीं था जो अपनी कार या बाइक में जाएगा। अपनी बस ज़िन्दाबाद.......।। कॉलेज पहुँच के मुझे बहुत अच्छा लगा रहा था। पहला दिन नए लोग, नई सोच ऐसा लगा मानो सब कुछ मेरे सामने घूम रहा था। ऐसा माहौल माइनेपहले कभी नहीं देखा था, जहाँ लड़के और लड़कियाँ एक दूसरे से बिना किसी हिचकिचाहट के बात कर रहे है। मेरे लिए तो ये एक अलग ही experience था, सब कुछ बहुत अच्छा लगा रहा था। मुझे मेरे classmates भी मिले जो बहुत ही अच्छे थे, मैं तो boys के साथ ख़ूब मस्ती करता था, लड़कियों से बात करते time मेरे तो बारह बज जाते थे समझ हीं नहीं आता था कहा से शुरू मेरी और क्या पुछू?


दो महीने तक ऐसा ही चला मैं अपनी class के सभी students को जानता था, लेकिन एक दिन अचानक एक लड़की 1st समेस्टर के exam शुरू होने से पहले आई। वो सब से अलग थी जब वो कॉलेज आईं तो सब यही बात कर रहे थे कि ये course कैसे complete करेंगी और sir ने भी Assignment दे दिए थे, उसने तो कोई lucture भी नहीं लिया है।जब assignment के marks आये तो पूरी class shocked श्री के highest मार्क्स थे, ये कैसे हो गया सब हैरान, इसके बाद जब 1st समेस्टर का result आया तो वो top 5 स्टूडेंट्स में से एक थी।अब सब समझ गये थे कि वो भी कुछ है।


Class में हम सब को वो बहुत straightforword लगतीं थी, जो उसके दिल में होता वही उसकी जुबना पर।उस से कोई पंगा नहीं लेता था, वरण ऐसी जगह जवाब देती की लग ही जाती थी। इसी बात पर मुझे एक क़िस्सा याद आया जिस से उसने मेरी ज़िंदगी में दस्तक दीं।बात २nd year कि है मैं class के बाहर दोस्तों से बात कर रहा था, हमारी class होने में time था सारे classments ऐसे ही बात कर रहे थे की श्री आइ और सब को hi कहा सब से बात करने लगी। बातों ही बातों में मेरा श्री की टाँग खिंचने का मन कर गया और मैंने मज़ाक़ में सब के सामने उसे ये कहा दिया "श्री भगवान ने तेरी hight कुछ कम कर दी है और थोड़ी होती तो अच्छा होता" सब मुझे और श्री के मुँह की तरफ़ देखने लगे। श्री मुस्कुराई और बोली "सच कहा तभी तो तू मुझसे सर झुक कर बात कर रहा है"। हय !! ये सुन कर मैं speechless हो गया और वह से चुप चुप मुँह छुप कर निकल गया वहाँ मेरी पूरी class मौजूद थी। है भगवान ये क्या हो गया............I COULD NOT EXPLAIN THAT FEELING........


Next day मैं श्री के पास गाय और sorry बोल और वो बोली ignore करो....be happy..... मैंने कभी भी उसे sad नहीं देखा था, इसके साथ ही मेरी दोस्ती की शुरुआत हुई । वो मुझे अच्छी लगती थी और मेरे ही सामने ना जाने कितने लड़कों ने उसे purpose किया था और उसने न जाने कितने को मना किया था । उसके मना करने का तरीक़ा मुझे बहुत अच्छा लगता था वो बाक़ी लड़कियों की तरह ग़ुस्सा नहीं करती थी बल्कि बस यही कहतीं थी कि "sorry, अच्छा लगा आप मुझे पसंद करते हो लेकिन इस पसंद को पसंद तक ही रखो उस से आगे ना बढ़ो....समझें"। उसकी ये लाइन मुझे उस से कुछ कहने की हिम्मत नहीं देती थी।देखते ही देखते final year ख़त्म होने वाला था। अब मैंने हिम्मत करके उसे purpose करने का सोच 6th semester के ब्रेक शुरू होने वाले थे और ये class last दिन था। हम दोनों साथ में बस स्टैंड आ रहे थे, उस दिन हम दोनों ही थे। मैंने सोच मौक़ा अच्छा है दिल की बात बोल देनी चाहिए । मैंने उस से कहा श्री............ कुछ कहना है । तो बोल क्या कहना हैं, कितनी देर से कहा रहा है कुछ बोलना हैं अब बोल भी दुनिया भर की बात कर रहा है लेकिन जो कहना है वो नहीं बोल रहा है.........Okay.................ओके.................."तू मुझे अच्छी लगती है और....."

क्या कहा तूने ? तुझे पता भी है तू क्या कहा रहा है, हम दोस्त है पता है ना, तू सच में कहा रहा है ? उसके चेहरे का रंग ही उड़ गया था, मुझे लगा सब कुछ ख़त्म हो जाएगा।मैं एक अच्छी दोस्त खो ना दूँ। मैं एक दम से ज़ोर ज़ोर से हंस कर बोल April fool बनाया बड़ा माँज आया, और ज़ोर ज़ोर से हँसने लगा और बोल तुझे सच लगा क्या, पागल है तू........समझ, तू तो जानती है मेरे बारे मैं!! अक्षय तूने तो मुझे डर दिया, मुझे तो याद ही नहीं रहा आज 1st April है चल क्लोज़ कर Topic......Hmm