Phool bana Hathiyar - 21 in Hindi Fiction Stories by S Bhagyam Sharma books and stories PDF | फूल बना हथियार - 21

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फूल बना हथियार - 21

अध्याय 21

"ऐसा है तो परशुराम अंकल को नहीं बचा सकते आंटी....?"

"सॉरी... आई एम हेल्पलेस। ही इज काउंटिंग हिज लास्ट मिनिट्स.....!"

"आंटी! आप गलत न सोचे तो मैं एक बात बोलूं...."

"बोलो....!"

"बेसेंट नगर में ‘कार्डियो केयर' नामक एक हॉस्पिटल है। परशुराम अंकल को वहां शिफ्ट करके देखें..... क्योंकि वह एक मल्टी स्पेशलिटी कार्डियोलॉजिस्ट बहुत से लोग हैं.... ऐसे पेशेंट के लिए वहां एडवांस कोई ट्रीटमेंट होगा क्या....?"

"तुम्हारे मन में ऐसा कोई विचार है तो जरूर प्रयत्न कर देखो!"

अक्षय अप्पा की तरफ मुडा।

"आप क्या कह रहे हो आप...?"

"नहीं अक्षय.... अपनी डॉक्टर कह रही हैं वहीं ठीक होगा।" कोदंडन कहकर मुंह बंद भी नहीं किया आईसीयू से ड्यूटी डॉक्टर तेजी से बाहर आए। उमैयाल के पास जाकर खड़े हुए।

"क्या है मुकुंदन?"

"ही इज डेड मैडम..…बट प्राण जाने के पहले कुछ वाक्य बोले?"

"फूल बना हथियार' नहीं चाहिए बोला।"

कोदंडन और अक्षय शॉक लगे जैसे एक दूसरे को देखने लगे, उमैयाल अपने माथे पर उत्पन्न हुए एक बड़े प्रश्न के साथ ड्यूटी के डॉक्टर को देखा।

"क्या! फूल से बना हथियार?"

"हां मैडम....!"

"इसका क्या अर्थ है?"

"मालूम नहीं मैडम"

उमैयाल अपने पास खड़े कोदंडन और अक्षय को असमंजस की स्थिति में देखा।

"परशुराम के बारे में आपको ही अच्छी तरह पता है। 'फूल बना हथियार’ नहीं चाहिए बोला। इसका क्या अर्थ है?"

"मालूम नहीं है...!"

"इट्स ओ.के....! परशुराम के फैमिली मेंबर्स कोई है तो उनको तुरंत इन्फॉर्म कर दो... उनके आते ही इसके बारे में बात करेंगे!"

"परशुराम की फैमिली नहीं है आंटी। उनके एक ब्रदर हैं। सेतुरामन उनका नाम है!"

"सूचना देकर उन्हें तो आने को बोलो! पहले बॉडी को रिसीव करने दो। बाद में और बातें करेंगे।" उमैयाल कहकर चली गई तो कोदंडन एक दीर्घ श्वास छोड़कर पास पड़े कुर्सी पर बैठ गए। अक्षय पास में बैठा।

"परशुराम अंकल 'ऐसे मर जाएंगे' मैंने बिल्कुल नहीं सोचा था अप्पा....!"

"इसी यामिनी के कारण परशुराम को बहुत ही मानसिक कष्ट हुआ। पहले से ही वे हाइपरटेंशन के मरीज थे।"

"उनके बड़े भाई सेतुरामन को समाचार दे दे...?"

"दे दो...! परशुराम का मोबाइल अभी तुम्हारे पास ही है ना?"

"हां....!"

"उसमें सेतुरामन का नंबर होगा। उनसे फोन करके बात कर लो" कोदंडन बोल रहे थे उसी समय डॉक्टर उत्तम रामन पसीने से तरबतर होकर पैदल सांस भरते हुए आ रहे थे।

"सॉरी.... ट्रेफिक में फंस गया...! परशुराम अभी कैसे हैं?"

"चले गए... मेसिव अटैक..."

उत्तम रामन इधर-उधर चारों तरफ देखकर अपनी आवाज को नीचे की।

"मुझे विश्वास नहीं..."

"क्या विश्वास नहीं....?"

"वह मेसिव अटैक प्राकृतिक नहीं आया..."

"फिर?"

"उसे बुलाया है... अर्थात मर्डर!"

कोदंडन और अक्षय स्थिर होकर उत्तम रामन को ही देखने लगे।

"डॉक्टर! आप क्या कह रहे हैं...?

"उसने मुझे फोन किया।"

"कौन?"

"यामिनी को किडनैप करने वाले ब्लैकमेलर ने।"

"क्या बोला?"

"मैं कार से आ रहा था उसी समय उसने फोन किया। मेरे और उसके बीच हुए कन्वर्सेशन को मैंने वैसे ही रिकॉर्ड कर लिया। उसे आन करूं क्या?"

अक्षय और कोदंडन दोनों के चेहरे पर पसीना चमकने लगा। वे आसपास नजर दौड़ा कर कोई नहीं है पक्का कर "हां ऑन करिए!" बोले। डॉक्टर ने सेलफोन को आन किया। डॉक्टर की आवाज और उसकी आवाज सुनाई दी।

"कौन हो?"

"क्यों डॉक्टर! परशुराम को देखने हॉस्पिटल जा रहे हो लगता है...?"

"तुम कौन हो...?"

"देखा ! भूल गए! मैं आपका नया पार्टनर हूं। अक्षय को ही फोन करता हूं। अक्षय अभी डॉक्टर उमैयाल के हॉस्पिटल में है अतः आपको फोन किया।"

"क्या बात है बोल...!"

"आपके हॉस्पिटल पहुंचने के पहले ही परशुराम अपने प्राणों को त्याग देगा । अतः रास्ते में से ही एक माला लेकर चले जाओ....!"

"यह देखो! ऐसे टॉर्चर करने का काम करने की जरूरत नहीं। तुम तारीख तय करो। तुम्हारे हिस्से के पैसे को लेकर उन लड़कियों को हमें सौंप दो.... परशुराम के हार्ट अटैक आने का कारण तुम ही हो....!"

"सॉरी डॉक्टर... परशुराम को जो हार्ट अटैक आया वह अपने आप आया हुआ नहीं है... वे तंदुरुस्त ही थे। उनके मस्तिष्क में एक मुख्य रक्त की नली के फटने का कार्य मैंने ही किया।"

"तुम क्या कह रहे हो?"

"वह एक मर्डर है...."

"कैसे...?"

"सिर्फ आपको ही फूल से हथियार बनाना आता है..... मुझे भी आता है"

सेल फोन की आवाज बंद हो गई। उत्तम रामन ने मोबाइल को बंद किया।

उसी समय कोदंडन और अक्षय दोनों का चेहरा काला पड़ गया।

"डॉक्टर.... यह हो सकता है ?" अक्षय ने पूछा।

"क्या?"

"एक स्वस्थ आदमी का हार्टअटैक करवा देना...?"

"विदेश के डॉक्टरों के लिए यह संभव है। ऐसी मृत्यु को सोफिस्टिकेटेड क्राइम कहकर क्लासिफाई किया है....! बट अपने इंडिया में ऐसे क्राइम्स नहीं हुए हैं। उसकी बात को तुमने नोट किया ?"

"क्या?"

"सिर्फ आपको ही फूल बने हथियार बनाना आता है.... मुझे भी आता है।"

"इसका मतलब... उसको सब कुछ पता है!"

"अब क्या कर सकते हैं?"

"उसका उद्देश्य हमसे रुपए लेना नहीं है डॉक्टर।"

"फिर?"

"जान लेना भी! दो दिन पहले डेविल चर्च में ईश्वर, आज परशुराम, कल हम तीनो में से कोई भी एक उसका शिकार हो सकता है।"

कोदंडन बीच में बोले "ठीक है डॉक्टर.... अब हमें इस विषय में कोई रिस्क नहीं लेना चाहिए! पुलिस में चले जाते हैं। अभी हमारे पास जो डीजीपी है वह मेरे बहुत ही नजदीक है। करेंसी

को फेंक दो तो बस..... बाहर न्यूज़ आए बिना पर्दे के पीछे ही अपने समस्या को ठीक कर देंगे...."

"अप्पा कह रहे हैं वही ठीक है डॉक्टर.... अभी और इस विषय में अपने को रिस्क नहीं लेना चाहिए! पुलिस में चले जाते हैं।"

उत्तम रामन अपने दृढ़ शब्दों में "नो" बोला।

"पुलिस नहीं चाहिए.... पुलिस में जाए तो हमें सब कुछ बताना पड़ेगा। अपना प्रोजेक्ट लोकल नहीं है। इंटरनेशनल है। हम पुलिस में जाएं तो अगले हफ्ते चेन्नई आ रहे कार्ल मैथ्यू नहीं आएंगे। अपने शत्रु कौन हैं मालूम करने के और भी रास्ते हैं उनके बारे में हमें सोचना है!"

अक्षय डॉक्टर को जवाब देने की कोशिश कर ही रहा था उसी समय एक नर्स उसकी तरफ आ रही थी तो वह मौन हो गया। वह नर्स उसके पास आकर खड़ी हुई।

"सर!"

"क्या है?"

"आपकी मदर आपको देखना चाहती है...."

"मैं आता हूं... तुम जाओ....! बोलकर अक्षय कोदंडन को देखा। "अप्पा मैं अम्मा को देखकर आ रहा हूं। आप अंकिल से बात करिए...." कहकर अक्षय आईसीयू के स्पेशल वार्ड की तरफ चलने लगा।

तेज चाल चला।

'अम्मा क्यों बुला रही है?'

'परशुराम को यहां एडमिट्स करा उसके थोड़ी देर पहले ही वे मर गए इसके बारे में अम्मा को पता होने का सवाल ही नहीं'। सोचते हुए आधा बरामदा चलकर लिफ्ट के पास आया और जल्दी से खड़ा हो गया।

लिफ्ट में से निकल रहे आदमियों की भीड़ में नकुल का चेहरा साफ दिखाई दिया।

'नकुल यहां किसको देखने आया है?'

'अम्मा को?'

'अम्मा को देखने आता तो मुझे फोन करता?'

नकुल एक तरह की हड़बड़ी में हैं ऐसा उसे लगा तो अक्षय ने जल्दी से अपने को एक पिलर के पीछे छुपाकर खड़ा होकर उस पर निगरानी रखने लगा।

नकुल बाईं ओर मुड़कर चलने लगा। अक्षय उसके पीछे चलने लगा।

30 सेकंड चलकर।

नकुल डॉक्टर उमैयाल के कमरे के सामने जाकर खड़ा हुआ। दरवाजे को खटखटा कर कुछ क्षण खड़ा रहा फिर अंदर गया। अक्षय दौड़ कर थोड़े से खुले दरवाजे के पास कान लगाकर उनकी बातों को सुनने लगा।

अंदर से बातों की आवाज सुनाई दे रही थी।

उमैयाल की आवाज आई।

"क्या है नकुल! जिस काम के लिए गया था वह हुआ.... या नहीं..?"

कमरे के अंदर डॉक्टर उमैयाल और नकुल बात कर रहे थे, बाहर दरवाजे के पास खड़ा अक्षय अपने कान को वही लगा रखा था।

"क्यों नकुल जो करने गया था वह काम सफल हुआ या असफल ?"

"सफल डॉक्टर...! परंतु मन को कष्ट हो रहा है!"

"कैसा कष्ट...?"

"बेचारी छोटी उम्र की लड़की। शादी करके पति के साथ खुशी से रहने के दिनों में ऐसे फंसकर दिमाग के मृत्यु के स्टेज में जाकर शरीर के अंगों को दान करने की नौबत आई। लड़की के मां-बाप को इस तरह बिलक-बिलक कर रोते हुए नहीं देखा जाता डॉक्टर! दिल में एक टन लोहे को रखा है जैसे लग रहा था।"

"नकुल! मैं एक डॉक्टर हूं इसीलिए ऐसी बात मेरे लिए एक साधारण सी बात लगती है। विधि के कठोर खेल को कभी-कभी हाथ बांधकर चुपचाप देखना पड़ता है। क्या कर सकते हैं..? मेरा एक पेशेंट है। बहुत अच्छे हैं। बहुत दान धर्म करते हैं। उनकी दोनों आंखें 'कार्नियो' से प्रभावित होकर आंखें ही चली जाने की नौबत आ गई। तुरंत उनके आंखों को बदलने से ही उनका जीवन में रोशनी वापस आ सकती हैं । परंतु आंखें तुरंत मिलेगा...? हाथ में करोड़ों रुपया लेकर जाओ तो वह मिलने वाला सामान है? इसीलिए आपके ‘अपनापन' संस्था को फोन करके दिमाग के मौत हुई किसी पेशेंट की आंखें मिलेगी क्या पूछा। उन्होंने ही फोन करके आपको कांटेक्ट करने के लिए कहा।"

"डॉक्टर ! आपने मुझे फोन किया तब वह समय सही था। उसी समय ही दिमाग के डैड हो जाने के कारण, लड़की की अम्मा-अप्पा को शरीर के अवयवों के दान के लिए मैं कन्वींस कर रहा था।"

"एनी हाउ नकुल... एक अच्छे आदमी को निगाहें मिलने के लिए आपने प्रयत्न किया.... विश यू ऑल दी बेस्ट।"

"थैंक्स... डॉक्टर! आप मुझे अच्छी तरह ब्लेस करिए। मेरी अपनी कीमती वस्तु गुम गई है। उसे जल्दी मिल जाना चाहिए आप आशीर्वाद दो...."

"क्या गुम गया...?

"आपके आशीर्वाद की मुझे बहुत जरूरत है डॉक्टर... मेरा जिस पर हक है वह मिल जाए तो मैं आपको देखने आऊंगा।"

"नकुल तुम्हारे जैसे सामाजिक कार्यकर्ता के दिलवालों को छोटे-मोटे कठिनाइयां बीच में आने पर भी सब कुछ 'पासिंग क्लाउड्स' जैसे चला जाएगा। दूसरे अच्छे रहना चाहिए ऐसा सोच कर उनके जीवन में हमेशा खुशियां हो सोचने वालों के जीवन में खुशियों की कोई कमी नहीं होती!"

"यह आशीर्वाद बहुत है डॉक्टर....! मैं आता हूं... आज शाम को 6:00 बजे के अंदर उस मस्तिष्क डैड लड़की के मुख्य अवयव को निकाल देंगे। आपके हॉस्पिटल में एक जोड़ी आंखें फ्रिर्जव कंटेनर आ जाएगा। आंख के ऑपरेशन के लिए जो तैयारियां करना है आप कर लीजिए डॉक्टर!"

"श्योर... अभी मैं ऑप्टिक सर्जन शंकर नारायणन को फोन करके कह देती हूं। वे सब बंदोबस्त कर देंगे।"

"मैं आता हूं डॉक्टर।"

"डोंट वरी नकुल... गॉड इज विद यू!"

"थैंक्यू डॉक्टर!"

नकुल के बाहर आने को महसूस करके अक्षय जल्दी से सरक कर वहां जो पिलर था उसके पीछे छुप गया।

कमरे से बाहर निकल कर नकुल थके हुए कदमों से लिफ्ट की तरफ चलने लगा, अक्षय उसकी पीठ को ही देखता रहा ।

दो दिन खत्म होने पर, उस दिन सुबह 11:00 बजे उस बड़े मकान में कोदंडन के ऑफिस वाले कमरे में ए.सी. चल रहा था। अक्षय एक फॉर्मेलिटी के लिए दरवाजे को थपथपा कर अंदर आ गया। कमरा दिसंबर महीने के ऊटी के ठंड जैसे हो जाने के बाद भी कोदंडन का चेहरा पसीने से तरबतर था। उसके शरीर में एक हड़बड़ाहट भी थी।

"बुलाया था क्या अप्पा?"

"हां.. यू.एस. से कार्ल मैथ्यू ने फैक्स किया है। फूल बना हथियार ड्रॉप्पड !"

"क्या बोल रहे हो अप्पा ?"

"फैक्स के लेटर को तुम पढ़ कर देखो...!" पेपरवेट के नीचे रखे उस फैक्स के पत्र को निकाल कर कोदंडन ने दिया। अक्षय लेकर पढ़ा। पत्र अंग्रेजी में लिखा हुआ था जो उसके मन में तमिल में दौड़ रहा था।

इदम् चैरिटेबल ट्रस्ट के मुख्य जिम्मेदार सभी लोगों को इस फैक्स का समाचार तुरंत बता दें। यू.एस. बायोमेडिकल साइंस चेंबर के द्वारा फूल बना हथियार नामक प्रोजेक्ट्स को जिस उद्देश्य के लिए शुरू किया था वह उद्देश्य हम जैसे चाहते थे वैसे सफलतापूर्वक काम नहीं हो सका। चेन्नई पुलिस ट्रस्ट के गतिविधियों पर संदेह कर कोर्ट ने इनकी गतिविधियों पर रोक लगा दिया है । फिर भी सुप्रीम कोर्ट से स्टे ऑर्डर को वापस ले लेंगे और हम फिर से ट्रस्ट की कार्यवाही को शुरू करेंगे इसलिए हम इंतजार करते रहे।

परंतु पिछले कुछ दिनों से जो घटनाएं घट रही है उसने हमारे विश्वास को खत्म कर दिया। परशुराम अब जीवित नहीं है। आप लोगों के जीवन का भी अभी कोई भरोसा नहीं है। ऐसे एक विपरीत स्थिति में फूल बना हथियार प्रोजेक्ट को रद्द करते हैं। आइंदा आगे से यू.एस. बायोमेडिकल साइंस चेंबर को, इदम् ट्रस्ट से किसी प्रकार का संबंध नहीं होगा | ऐसा हम इस फैक्स से सूचित कर रहे हैं।

अक्षय फैक्स को पढ़कर सदमे से अप्पा को देखा।

"अप्पा ऐसा फैक्स दिया है?"

"पता नहीं कैसे.... यहां का सारा समाचार उनको पहुंच गया है!"

"अब क्या करें अप्पा? करोड़ों-करोड़ों डॉलर में फायदा देख कर ही तो हमने 50 करोड़ रुपया इसमें डाल दिया था |”

"अक्षय! उसे मुझे याद मत दिलाओ मेरा दिल बैठ जाएगा ऐसा लगता है!" कहकर मेज पर रखें मिनरल वाटर के बोतल को उठा कर पानी पीया।

"अप्पा ! आप कहे तो मैथ्यू से फोन पर बात करूं?"

"मैंने करके देख लिया। वहां सबके फोन स्विच ऑफ हैं? कोई भी बात नहीं करेगा"

"धोखेबाज कुत्ते हैं!"

"अक्षय! यह सब काम उस ब्लैकमेलर का ही होगा!"

"यदि ऐसा है तो.... वह हमसे होशियार है!"

"परशुराम ने जैसे संदेह किया वैसे उनके ब्रदर सेतुरामन का काम होगा क्या?"

"सेतुरामन को देखकर मुझे ऐसा नहीं लगता। अपने छोटे भाई के डेड बॉडी को देखकर दो बार बेहोश होकर गिर गये। श्मशान में उनका रोना..…

"यह सब एक नाटक क्यों नहीं हो सकता?"

"नहीं अप्पा वह रोना तड़पना सच था।"

"ऐसा है तो.... यह डॉक्टर उमैयाल, नकुल का काम हो सकता है!"

"चांस ही नहीं है! वे दोनों मिले हुए हैं शरीर के अंगों के दान करने के विषय में!"

"यह सब कोई नहीं है तो फिर कौन?"

"अप्पा! मुझे शुरू से ही एक के ऊपर संदेह है...!"

"तुम किसे कह रहे हो?"

"डॉक्टर उत्तम रामन"

कोदंडन हड़बड़ाते हुए बोले अक्षय! तुम क्या कर रहे हो? डॉक्टर उत्तम रामन अपने प्रोजेक्ट में एक पार्टनर हैं। इस प्रोजेक्ट को क्रियान्वित करने वाले ही वही हैं।"

"क्यों एक पार्टनर धोखा नहीं दे सकता क्या?"

"अक्षय! तुम क्या कह रहे हो! उनके ऊपर संदेह करने की कौन सी बात है?"

"अप्पा! यू.एस. बायोमेडिकल साइंस चैंबर संस्था 'इदम्' चैरिटेबल ट्रस्ट मिलकर 'फूल बना हथियार अर्थात 'फ्लावर नाइफ' के नाम से प्रोजेक्ट शुरू किया था उसकी बातें क्या थी ?"

"वह एक ओवम डिनोशन सिर्फ एमपीरियो से संबंधित एक शोध था। अर्थात अप्राकृतिक रूप से डिंब और शुक्राणुओं से एक भ्रूण तैयार करना फिर उसे लड़कियों के गर्भाशय में रोपना उसका शोध था। यह लड़कियों के लिए एक वर प्रसाद था। उस बारे में था वह प्रोजेक्ट?"

"हां!"

"वह प्रोजेक्ट सक्सेस हो जाए तो इंटरनेशनल मेडिकल काउंसिल में भेज कर कॉपीराइट लेकर करोड़ों डालर लाभ कमा सकते थे। यही हमारा उद्देश्य था?"

"हां!"

"वहीं पर डॉक्टर एक विलन में बदल गए।"

"अक्षय तुम क्या कह रहे हो?"

"अप्पा...! उस प्रोजेक्ट में मेडिकल के रीति से सब सच्चाई जानने वाले अपने डॉक्टर रिसर्च काउंसिल 50 करोड़, हमने 50 करोड़ डाला। पैसे डालने के बाद हमारा काम खत्म हुआ। परंतु उसके बाद काम करने वाले डॉक्टर ही थे। इस प्रोजेक्ट की सभी सच्चाईयां डॉक्टर उत्तम रामन जानते थे उन्होंने कोई दूसरे संस्था से मोलभाव कर लिया है सोचता हूं.... उसे हम कहीं मालूम ना कर लें इस डर से वह ब्लैक मेलिंग ड्रामा कर रहे हैं......! मेरा विचार यही है।"

कोदंडन की आंखें चिंता में स्थिर हुई।

"ऐसा है तो परशुराम के मरने का कारण डॉक्टर उत्तम रामन...?"

"श्योर ! यहां होने वाले सब घटनाओं को तुरंत यूएसए को भेजना डॉक्टर का ही काम है....! प्रोजेक्ट को यदि वे बंद कर दे तो ये 'ओवम, एमपीरियो डोनेशन' से संबंधित सभी को दूसरे एक मेडिकल रिसर्च सेंटर को अच्छे रेट में बात कर सकते हैं...?"

"ठीक! इन सब का कारण डॉक्टर उत्तम रामन ही है इसे कैसे कंफर्म करेंगे।"

"आप डॉक्टर को फोन करके पन्नै के अपने गेस्ट हाउस में आज शाम को 6:00 बजे उन्हें आने के लिए कहिएगा..."

"आने के लिए....?"

"आप बोल दीजिए.... मैं उनसे बात करूंगा।"

"अक्षय ! अपनी हाथ में कोई आधार के बिना उन्हें हम दोषी कंफर्म कैसे कर सकते हैं?"

"उन्हें कॉर्नर करना पड़ेगा!"

"कैसे! मुझे समझ में नहीं आया!"

"अप्पा! डॉक्टर से पहले उस ब्लैकमेलर के बारे में बात करेंगे। वह ब्लैकमेलर कौन हैं इसके बारे में विवरण हमें पता है इस विषय को भी उनसे कह देंगे। उस समय उनके चेहरे पर कैसे भाव आते है और वे कैसे बदलते है उसका निरीक्षण करेंगे। वे दोषी हो तो उनके चेहरे पर पसीना आएगा उनका शरीर कांपेगा पता लग जाएगा!"

कोदंडन कुछ क्षण चुप रहे फिर धीमी आवाज में बोले

"तुम जो कह रहे हो वह सही है अक्षय! तुम उनको फोन करते हो कि मैं करूं?"

"आप ही करो...!"

कोदंडन अपने मोबाइल को हाथ में लिया तो पास से एक आवाज आई।

"अप्पा और बेटा किस रहस्य की बात कर रहे हो?"

थोड़ा हड़बड़ा कर अक्षय मुड़कर देखा। उसकी मां रोहिणी एसी के ठंड में हल्के शॉल ओढ़े थोड़े डगमगाते कदमो से चल कर आ रही थी। अक्षय घबराकर उनके पास गया।

"अय्यो... अम्मा! हॉस्पिटल से डिस्चार्ज होकर पूरा एक दिन भी नहीं हुआ उसके अंदर पहले जैसे तुम अपना काम शुरू कर दिया? डॉक्टर उमैयाल आंटी ने क्या कहकर आपको भेजा है पता है? एक हफ्ते की तुम्हें बेड रेस्ट सिर्फ टॉयलेट ही जाकर आ सकती हो। और कमरे से बाहर नहीं आना है!"

"अरे जा रे! उस डॉक्टर को कोई काम नहीं है। तुमको भी कोई काम नहीं है। तुम्हें मेरी बीमारी ठीक करनी है तो उसके लिए एक ही दवाई है वह है तुम्हारी शादी। इस घर में पोते-पोती की आवाज सुने तो बस ! मेरे शरीर में जो बीमारी है एक सेकंड में चली जाएगी!"

अक्षय अप्पा की तरफ मुड़ा।

"अप्पा! अम्मा ने अपना पुराना गाना शुरू कर दिया। आप सुन रहे हो। आप सुनते रहिए। मैं ऑफिस जाकर आ रहा हूं!"

कोदंडन की तरफ देखकर आंखें मिचकाई।

"तुम डॉक्टर को फोन करके बात कर रहे हो क्या अक्षय?"

"हां बात करता हूं" कमरे से बाहर आकर सीढ़ियों से उतरते समय ही अपने मोबाइल को लेकर डॉक्टर उत्तम रामन को लगाया।

दूसरी तरफ रिंगटोन जाने से एक लड़की की आवाज आई।

"आंटी! मैं अक्षय।'

"बेटे! मैं ही तुम्हें फोन करने वाली थी।"

"क्या बात है आंटी?"

"कल शाम को 6:00 बजे घर से बाहर गए वे अभी तक घर नहीं आए बेटा!"

"यह...यह... क्या कह रहीं हैं आंटी?"

दूसरी तरफ से डॉक्टर उत्तम रामन की पत्नी लगभग रोना ही शुरु कर दिया।

"बेटा! मुझे क्या करना है समझ में नहीं आ रहा। कभी-कभी हॉस्पिटल में कोई ऑपरेशन होता तो रात को वहीं ठहर जाते थे । परंतु सूचना दे देते थे । अबकी बार कोई भी सूचना नहीं आई...."

अक्षय अपनी घबराहट को दूर रखकर आंटी! घबराइए मत! गायब होने के लिए डॉक्टर छोटे बच्चे हैं क्या? कल शाम को 6:00 बजे पेरंबूर में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के हॉल में हुए कोई फंक्शन में डॉक्टर जाने वाले हैं बोला था... उस फंक्शन में डॉक्टर आए कि नहीं आपने  कंफर्म कर लिया ?" उसने पूछा।

"हां फोन करके पूछा!"

"क्या बोला?"

"वे फंक्शन में नहीं आए बोला।"

"ऐसा है तो.... डॉक्टर उस फंक्शन में जा रहा हूं कह के और किसी जगह गए हैं?

"हां ...बेटा!"

"कहां गए होंगे आप सोचती हैं आंटी?"

"मुझे कुछ भी समझ में नहीं आ रहा है बेटे!"

"ठीक है.... आप टेंशन मत करो आंटी। डॉक्टर अंकल का पता लगाने कि मैं कोशिश करता हूं। आप जल्दबाजी में पुलिस में मत चले जाइए....!"

"मेरा पुलिस में जाना वे पसंद नहीं करेंगे।"