Peshi number sixty eight in Hindi Thriller by Laxman gour Gour books and stories PDF | पेशी नंबर 68 - ट्रेलर

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पेशी नंबर 68 - ट्रेलर

पेशी नंबर सिक्सटी एट (ट्रेलर)

सिगरेट के एक कश के ऊपर दूसरा कश लेता हुआ, चरित्र का इतना कच्चा की कोई भी लड़की या औरत सुंदर हो या फिर दिखने में ठीक-ठाक उसे अपनी वासना बुझाने के लिए कोई ना कोई चाहिए होता था। वो एक नम्बर का पियक्कड़ भी था तो वहीं उसकी आदतों को कोई देख ले तो कोई उसको पूछे तक नहीं.... लेकिन रुकिए... एक ऐसी कला जो उसके दुर्गुणों को ढंक लेने का काम करती थी। जी हाँ, वो गज़ब का वकील था। इतना की कई वकील उसके सामने केस लड़ने तक से डरते थे क्योंकि आज तक उसे कोई केस हरा नहीं सका था। केस को लड़ने का उसका अंदाज इतना कमाल का था की कोर्ट रूम तालियों की गडगडाहट से गूँज उठता था। उम्र यही कोई पैंतीस साल और वकालत का अनुभव मात्र आठ साल का मगर वो अनुभवी और एक ही ढर्रे से केस लड़ने वाले वकीलों की अपेक्षा में बहुत आगे था।लेकिन वो कहते हैं ना। इन्सान चाहे जितना कमाल का क्यों ना हो.... जब उसकी जिन्दगी में राजनीति एंट्री करती है तो फिर उसकी जिन्दगी में भूचाल आना तय होता है। कुछ एक लोगों की तो हस्तियां मिटते हुए आपने और हम सब ने देखी होगी। मगर मेरे हिसाब से लगता है कुछ ऐसा ही ऐसा ही हुआ था हमारे युवा वकील साहब हर्षवर्धन सिंह के साथ।
प्रशासन के लोगों के साथ झगड़े करना और उनके काले करतूतों को उजागर करने का तो मानो उसने ठेका ही ले रखा था। राजस्थान की रीट भर्ती के पेपर को आउट करवाने वाला दोषी आरपीएससी चेयरमेन बक्तुल्ला खां पर केस करके उसे सजा दिलवाने का काम हो या फिर सिटिंग सीएम के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाना हो। उसने किसी को नहीं छोड़ा था और फिर वो रातों रात पूरे राजस्थान में प्रसिद्ध हो गया था। मगर वो कहते हैं ना.... राजनीति वो गंदगी है जिसे अगर साफ़ करने के लिए अगर कोई उस गंदगी में उतरता है तो फिर कुछ कीचड़ के धब्बे तो उसके ऊपर भी पड़ते हैं और ऐसा ही हर्षवर्धन सिंह के साथ हुआ था। उसे सबने मिलकर फंसा लिया।
तो क्या गरीबों का मसीहा, प्रेम को अपने पैरों की जूती समझने वाला, केस लड़ने का महारथी, सच्चाई का साथ देने,अन्याय झूठ और फरेब के खिलाफ बेबाक होकर बोलने का आदि वकील हर्षवर्धन सिंह अपने खिलाफ की गई साजिशों का बदला ले सकेगा? या फिर सरकारी कर्मचारियों को सेटिंग्स सीएम वकील साहब को घेर कर अपना शिकार बना लेंगे। राजनीति मैं शिकार और शिकारी दोनों दांव पर रहते हैं। यह तो इस कहानी को पढ़ने से ही पता लगेगा इसमे शिकार कौन है। वह शिकारी कौन है । जानने के लिए मेरे द्वारा लिखित मेरा पहला उपन्यास पेशी नम्बर सिक्सटी एट को दिनांक 30 मई 2022 से पढ़िए!
आपको ट्रेलर कैसा लगा? इसके बारे में अपनी प्रतिक्रियाएं जरुर दें। आपकी प्रतिक्रियाएं पाकर मुझे और भी ज्यादा लिखने का मनोबल मिलेगा। मातृभूमि की दुनिया में नए मुसाफिर को अपनाकर अपने दिल के कोने में छोटा सा स्थान मुझे भी प्रदान करें।
Laxman gour