Kashish - 4 books and stories free download online pdf in Hindi

कशिश - पार्ट 4

अरे ये तो वहीं पागल लड़की है जो गांव मैं बेगानी होकर फिरती हैं, गांव वाले एक स्वर में कहते हैं।
युवराज - जी हां आपने सही कहा, यह वही हैं, परंतु मैं आपको एक बात बताना चाहता हूं कि यह कोई पागल नही है यह हमारी बहन और इस रियासत की राजकुमारी हैं।
गांव वाले आश्चर्य से उसकी ओर देखते हैं और मन ही मन खुद को कोसते हैं कि क्यों उन्होंने उसे अनजाने में ही भला बुरा कहा, सब एक स्वर में युवराज क्षमा करे।
युवराज (हंसते हुए) - क्षमा करने वाले हम कौन होते हैं, यह तो आप जाने और हमारी बहन परिणीति जाने, क्यों सही कहा ना ।
परिणीति - आप सभी गांव वालों को मेरा सादर प्रणाम जैसा की आप मुझ से परिचित है और मैं भी आपसे, परंतु आप मेरे औधे से अनभिज्ञ थे फिर भी आपने सदैव मेरा अपने गांव वालो की तरह ही ख्याल रखा इसके लिए मैं आपका शुक्रिया अदा करती हूं।
गांव वाले इतनी नम्रता देख प्रसन्न होते हैं कि इनमे इतना भी घमंड नहीं है और साथ साथ उनकी उत्सुकता इस नाटक की वजह जानने की होती है।
परिणीति - जैसा कि युवराज जी ने बताया की मैं इनकी बहन हूं , साथ साथ में इस रियासत की वित्त मंत्री भी हूं।
हमारी रियासत के अंतर्गत 100 गांव आते हैं इन 100 गांव के विकास की जिमेदारी मेरे उपर है, मैंने जब देखा कि इन 100 गांव में से केवल एक गांव ऐसा है जिसके विकास की गतिविधि को लेकर कभी कोई शिकायत नहीं आई, ना ही कभी कोई वित्तीय सहायता मांगी गई। यह बात मुझे कुछ अजीब लगी तथा मैंने निश्चय किया कि मैं उस गांव में रहकर इसके बारे में पूर्ण रूप से पता लगाऊंगी। इसलिए मैंने यह सब नाटक किया।
मुखिया जी - राजकुमारी जी यह सब जानकारी एकत्रत्र तो आप साधारण महिला बनकर भी कर सकते थे।
परिणीति - मुखिया जी आप सही कह रहे हैं परंतु हमारी रियासत के अंतर्गत जो 100 गांव आते हैं उनमें से जो आपका गांव है वह दूसरे राज्य की सीमा के लगभग करीब है तो मुझे लगा कि आप का गांव अन्य रियासत की मदद से विकसित हो रहा है। मुझे माफ करिए कि मैंने आपके गांव के बारे में गलत सोचा , सुरक्षा संबंधी कारणों के कारण भी मैंने ऐसा नाटक किया कि मैं एक पागल लड़की बनू और संपूर्ण गांव वालों के व्यवहार को करीब से जान सकूं ताकि उनकी जो समस्या है ,जो कि हमारी रियासत पूर्ण नहीं कर पा रही है वह भी पूर्ण हो जाए।
युवराज बात काटते हुए - तो कैसा लगा आपको गांव वालों का व्यवहार
परिणीति - मुझे गांव वालों का व्यवहार ऐसा लगा जैसे कि यह मेरा परिवार है ।उन्होंने मुझे भी इतना सम्मान दिया बहुत बार अपने घर में भोजन कराया यह न जानते हुए भी कि मैं कौन हूं, परंतु!
परन्तु क्या राजकुमारी जी (गांव वाले एक स्वर में कहते हैं)
परिणीति - (हंसते हुए )यही कि सब मेरे बारे में जानने को बड़े उत्सुक रहते थे और उनकी उत्सुकता दिन प्रतिदिन बढ़ती जाती थी और शायद आज उनकी ये उत्सुकता समाप्त हो गई है।
सभी लोग एक साथ हंसने लग जाते है और युवराज की जय ,राजकुमारी की जय नारे लगाते हैं।
"कहानी समाप्त"