Sath Zindgi Bhar ka - 45 books and stories free download online pdf in Hindi

साथ जिंदगी भर का - भाग 45

वरद आस्था को घर ले आ चुका था आस्था खामोश ऐसी किसी बेजान गुड़िया की तरह उसके साथ आ गई

वरद उसे लगातार बातें कर रहा था लेकिन आस्था ना कुछ जवाब दे रही थी और ना ही कुछ रिजेक्ट कर रही थी

पिल्लू.......... पिल्लू वरद ने उसे जोर-जोर से पुकारा आस्था डर सी गई

सॉरी बच्चा तुम्हें डराने का कोई इरादा नहीं था

वरद ने प्यार से उसके सर पर हाथ रखा कुंवर जी का क्या कॉल आया

आस्था ने भरी आंखों से उससे पूछा भरत खामोश रहा आराम करो जाओ

अब हम परसो सुबह लंदन के लिए निकलना है कल पैकिंग चेक कर लेना वरद ने उसकी बातों का जवाब देना टाल दिया

आस्था भी बिना कुछ कहे अंदर चली गई

क्यों कुंवर जी क्यों आपकी नजरों में हमें जो आज तक देखा वह प्यार था या तरस खा कर आप एहसान कर रहे थे हम पर

सिर्फ एहसान अगर ऐसा ही है तो हमें आपका और कोई एहसान नहीं चाहिए

हम नहीं जा रहे हैं लंदन नहीं जा रहे हैं हमारी पढ़ाई का खर्च उठाकर आपका एक और एहसान हम नहीं लेना चाहते

आस्था शावर के नीचे खड़े होकर एकांश के साथ बिताए हुए हर लम्हों को याद कर रही थी

शावर बंद कर बाहर आई उसने अपने आंसू पहुंच दिए

और अपना सामान देखने लगी दाई मा ने उसका सारा सामान पैक करवा कर दिया हुआ था एकांश के दिए हुए महंगे कपड़े और गिफ्ट ज्वेलरी सब कुछ उसने उस सारे सामान में से अपना सामान जो वह अपनी मां के घर से लेकर आई थी उतना ही लिया

अपने डाक्यूमेंट्स पासपोर्ट बैंक पास बुक जो उसकी मां ने उसके लिए सेेविंग्स की हुई थी वह सब एक बैग में भरा और एक साइड रख दिया

...... पिल्लू वरद की आवाज से वह बाहर आ गई यह क्या है बच्चा यह तुम्हारे बाल गिले क्यों है

अभी अभी बीमारी से उठी हूं ना और वरद ने इतनी फिक्र से उस को डांट लगाते हुए कहा

आई लव यू दादा आस्था उसे लिपट गई वरद भी प्यार से उसके सर को सहला का रहा था

उसे इस बात की खुशी थी कि फाइनली उसने कुछ तो बोला आई लव यू टू पिल्लू पिल्लू पिल्लू और प्लीज जो हो गया भूल जाओ उसे

स्टार्ट फ्रेश नाउ मैं तुम्हें बहुत सक्सेसफुल देखना चाहता हूं

काकी का भी तो यही ख्वाब था कि तुम बहुत तरक्की करो और अपने नाम कमाओ फिर उन्हें अच्छा लगेगा

तुम्हें यूं रोता देखकर वरद उसे प्यार से समझा रहा था

आज मा और मासी माँ होती तो कितना अच्छा होता ना दादा

मां और मासी माँ दोनों हमें छोड़ कर चले गए आस्था

वरद उसे एक सही वक्त देखकर अपनी मां के गुजर जाने के बारे में बता दिया

पिल्लू किसी का हमारी जिंदगी में रहना यह जाना हमारे हाथ में नहीं होता है

तो उस बात के लिए रोते बैठना यह कहां की समझदारी है

वरद सच कहा आपने आस्था चलो आज मैं अपनी पिल्लू को अपने हाथों से खाना खिला लूंगा

लेकिन उससे पहले अपने बाल साफ कर लो देखो कितने गिले हैं

वरद ने उसे भेज दिया आस्था ने अपने बाल अच्छे से सुख आए और बाहर आ गई

दोनों ने बातें करते हुए डिनर कि आप भले ही आता पहले जैसे बहुत बातें नहीं कर रही थी

लेकिन वरद भी खुश था कम से कम वह कुछ बोल तो रही है वरद ने उसकी मेडिसिन देकर सुलाया और एकांश को कॉल करके आस्था के बारे में बताया

एकांश नीचे आ गया कुंवर सा आस्था कैसी है मृणाल वह अब ठीक है बड़ी मां एकांश हमें उससे बात कर ले सुनीता छोटी मां एक बार वह लंदन चली जाए फिर आप उनसे रोज बातें कर लेना

अगर आपने अभी कॉल किया तो वह शायद फिर से यहां आने की Zid करें

एकांश हां आप उनसे मुंबई जाकर मिल सकते हैं

लेकिन हम कॉल भी नहीं कर सकते रूद्र ने गुस्से से कहा आस्था के जाने के बाद उसने एकांश की तरफ देखा भी नहीं था

रूद्र सुनीता जी ने उसे गुस्से से घूर कर क्या मां यह जो चाहे वह कर सकते हैं

लेकिन हम बोल भी नहीं सकते रूद्र रूद्र भाई ऐसा नहीं है

एकांश ने उसके कंधे पर हाथ रखना चाहा लेकिन रूद्र ने उसका हाथ झटके से हटा दिया

डोंट कुंवर सा और एक बात जिस वक्त आपने हमारी भाभी नहीं हमारी बहन को घर से जाने को बोला था ना

उसी वक्त आपका और हमारा रिश्ता टूट गया अब जब वह वापस आएंगे तभी हम आपसे बात करेंगे रुद्र ने कहा और वहां से चला गया

एकांश को बहुत बुरा लगा रूद्र सबसे छोटा था

इसलिए वह सब को बहुत लाड़ला था एकांश कि तू जान था

भाई सा वह गुस्सा है अभी और नाराज भी हैं और आपको पता है ना वह हम सबके बिना रह नहीं सकता है

लेकिन आपके बिना बिल्कुल भी नहीं सो मान जाएगा वह

इस वक्त मैंने कहा और एकांश ने उसे गले से लगा लिया उतरा ऐश्वर्या भी उसके गले लग गए

सभी ने डिनर किया और अपने अपने कमरे में सोने चले गए एकांश के कदम अपने आप ही आस्था के कमरे की ओर बढ़ गए

वहां की हर एक चीज को छूकर एकांश आस्था को महसूस कर रहा था उसके स्टडी टेबल के चेयर पर बैठ गया

और टेबल पर अपना सिर टिका दिया ऐसे ही तो आस्था स्टडी करते-करते ही सो जाती थी

और फिर वह उसे अपनी बांहों में उठा कर बेड पर सुला देता था काफी यादें जुड़ी हुई हैं

कुछ रीडर की यह शिकायत थी कि कल का पाठ उनको अच्छा नहीं लगा लेकिन अगर मैं पार्ट में थोड़ा मिर्च मसाला ना डालो तो मजा कैसे आएगा आप ही लोग मुझे बताइए अगर मैं थोड़ा मिर्च मसाला ना लगाऊ इस स्टोरी में तो आपको मजा नहीं आएगा आस्था अब अपनी नई जंग पर निकल चुकी है अपनी नई जिंदगी बनाने और जिंदगी अपनी नई पहचान बनाने के लिए उसको इन चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा इसलिए मैंने कल का ऐसा एपिसोड डाला अभी आकर बहुत कुछ पढ़ने को मिलेगा रूद्र की शादी भरत की शादी वरद का बेबी और आगे बहुत कुछ रेवा की शादी किससे होगी तो कहां मिली जुड़े रहिए

आज का पार्ट kesa लगा batna jarur

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