Ishq hai sirf tumse - 16 in Hindi Love Stories by Heena katariya books and stories PDF | ईश्क है सिर्फ तुम से - 16

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ईश्क है सिर्फ तुम से - 16

नाज शॉपिंग करने के बाद अपने घर आती है। जैसे ही वह घर में दाखिल होती है तो देखती उसकी अम्मी, अब्बू और भाई हॉल में बैठे हुए बात कर रहे थे । नाज हॉल की ओर जाते हुए बैग बगल में रखते हुए सोफे पर बैठते हुए ग्लास में पानी भरते हुए पीने लगती है।

नाज: अम्मी खाने में क्या बना है!? ।
सादिया: प्लेटफार्म पर तुम्हारे लिए ढक रखा है! गर्म कर के खालो! ।
नाज: साद! ( भोली शक्ल बनाते हुए )।
साद: ( मुंह बिगाड़ते हुए ) क्या! मेरी ओर ऐसे क्या देख रही हो! मैं कोई हेल्प नहीं करने वाला, खुद ही गर्म करो!।
नाज: मेरा प्यारा भाई! इतना भी नहीं कर सकता क्या!?।
साद: नही! बिलकुल भी नहीं! ।
नाज: ( साद के कंधो को मसाज करते हुए ) मेरे प्यारे क्यूट से भाई! देख मैंने ( धीरे से ) नीलम को तेरी अच्छी अच्छी बात बताई है। ) ।
साद: ( नाज की ओर मुस्कुराते हुए देखते हुए ) सच में,?।
नाज: सच में! ।
साद: बोलो व्लाही! ( खुदा कसम ) ।
नाज: व्लाही,! ।
साद: ( शरमाते हुए मुस्कुराकर कहता है। ) ठीक है, इस बार हेल्प कर देता हूं ।
नाज: ठीक है! मैं फ्रेश होने जा रही हूं! कमरे में दे जाना! ( इतना कहते ही वह साद की बात सुने बिना अपने कमरे की ओर भाग जाती है। ) ।

नाज बैग को टेबल पर रखते हुए! फ्रेश होने चली जाती है। तकरीबन दस मिनिट के बाद साद दरवाजा खटखटाए सीधा कमरे में दाखिल हो जाता है! । खाने की प्लेट को टेबल पर रखता है। और नाज के बेड पर लेट जाता है मानो जैसे उसका कमरा हो । नाज तीखी नजरो से साद की ओर देखती है।

नाज: (टावल से बालो को सुखाते हुए ) तैने ना जानवर ही रहना है! मैनर्स नाम की कोई चीज नहीं है! पता नहीं नीलम क्या देख कर पसंद आए हो ।
साद: ( मुस्कुराते हुए ) मेरी खूबसूरती! और क्या!? ।
नाज: ( शोखी मिजाज के साथ ) कौन सी खूबसूरती! आईने में शक्ल देखी है अपनी!? बंदर भी खूबसूरत लगे तुम्हारे आगे! ।
साद: ( गुस्से में नाज की ओर देखते हुए ) लगता है! तुम्हारी आंखों का चेक अप करवाने की जरूरत है!? भला! मेरे से खूबसूरत लड़का तुमने देखा है क्या!? ।
नाज: ( तभी एक पल के लिए उस अनजान इंसान की छवि सामने आती है। नाज सिर को ना में हिलाते हुए कहती है । ) तुम जरा आंख खोलकर देखो! ईलाज की जरूरत तुम्हे मैने नहीं ।
साद: ( बेड पर बैठते हुए ) व्हाट एवर! । ( नाज के बैग को देखते हुए ) ।
नाज: ( खाना खाते हुए ) कितनी बार कहां है की लड़कियों के बैग बिना पूछे नहीं देखा करते,! ।
साद: हां पर यहां पर लड़की कहां है!? तुम तो पापा की परी हो नहीं!।
नाज: ( चिल्लाते हुए ) साद गेट आउट! अभी के अभी मेरे कमरे से निकल ।
साद: ( मुंह बिगाड़ते हुए कमरे से चला जाता है। ) ।

तभी नाज खाने की प्लेट को साइड में रखते हुए शॉल जो बैग में रखती है। तभी उसका ध्यान सुलतान की दी हुई शॉल पर पढ़ता है। नाज कुछ देर देखती हैं फिर उस बैग को बगल में रखते हुए । उसकी अम्मी का बैग लेते हुए! हॉल में दाखिल होती है। नाज अम्मी के करीब जाकर कहती है ।

नाज: ( बैग को आगे करते हुए ) अम्मी! ये शॉल ली है! आपका पसंदीदा कलर है ।
सादिया: ( शॉल को देखते हुए ) हम्म! अच्छी हैं पर कितने में ली! या फिर हर बार की तरह है! इस बार भी बिना मोल भाव किए बिना खरीद ली ।
नाज: अरे! अम्मी इस बार मैंने जरा भी ज्यादा पैसे नी दिए! ।
सादिया: हम्मम! काफी अच्छी है फिर ।

नाज मुस्कुराते हुए अपने कमरे में वापस चली जाती है। फिर बैग में से जो कुर्ती उसने खरीदी थी उसे निकालते हुए शीशे के सामने रखते हुए देख रही थी। तभी नाज बैग में से शॉल निकालते हुए कुर्ती के साथ मैच कर रही थी। तो सुलतान वाली शॉल उसकी एक कुर्ती के साथ काफी जच रही थी। तभी नाज मन ही मन सोचती है। " काफी अजीब इंसान था । " इतना कहकर वह फिर कपड़ो को अलमारी में रखने लगती है।

दूसरी ओर सुलतान ऑफिस में मीटिंग्स और सारा काम पूरा करने के बाद घर की ओर निकलता है। जैसे ही वह अपने बंगलो के पर कार पार्क करता है वह सीधा बेसमेंट की ओर कदम बढ़ाता है। चलते चलते वह शर्ट के पहले दो बटन खोल देता है। और शर्ट बांह को मोड़ते हुए वह बेसमेंट में दाखिल होता है। जैसे ही वह दाखिल होता है तो बेसमेंट में उसके आदमी लुसियन के साथ बैठे हुए थे । सुलतान अपनी चेयर पर बैठते हुए! सब की ओर एक नजर घुमाता है। सभी सुलतान की ओर सिर जुकाकर सलाम करते है। सुलतान सिर्फ सिर को हां में हिलाते हुए जवाब देता है। फिर लुसियन की ओर देखते हुए कहता है।

सुलतान: लूसी! क्या खबर है!?।
लुसियन: ( सिर को ना में हिलाते हुए ) कुछ खास हाथ नहीं लगा! ।
सुलतान: ( दांत भींचते हुए हाथ को टेबल पर पटकता है।) लूसी! ।
लुसियन: बॉस, एक क्लू मिला है! पर कह नहीं सकते की वह हमारे काम आएगा या नहीं।
सुलतान: और!?।
लुसियन: और पाकिस्तान! में इसके ( फोटो को टेबल पर रखते हुए ) होने की संभावना है।
सुलतान: और रोमानो!? ।
लुसियन: डोंट वरी बॉस! उसे नहीं पता! की मैं आपका आदमी हूं! ।
सुलतान: ( हंसते हुए ) या तो तुम मुझे बेवकूफ समझ रहे हो! या उसे! ।
लुसियन: नो बॉस उसे सच में कुछ नहीं पता ।
सुलतान: ( श्यतानी मुस्कुराहट के साथ ) वह रोमानों है लूसी! वह बिना मतलब के किसी को जीने नहीं देता तो पनाह देना तो दूर की बात है।
लुसियन: बॉस! तो आपको लगता है की!? ।
सुलतान: हम्मम! देखते है! आखिर क्या चाहिए उसे! ।
लुसियन: अब आगे क्या प्लान है बॉस!?
सुलतान: अभी कुछ दिन आराम करो फिर जैसा प्लान है वैसे ही
लुसियन: ठीक है बॉस! ( इतना कहते ही वह निकल जाता है। ) ।
रग्गा: ( सुलतान के पास आते हुए ) बॉस मुझे लूसी पर भरोसा तो है! पर कही वह जाने अंजाने में!? ।
सुलतान: डोंट वरी वह ऐसा कुछ नहीं करेगा और अगर ऐसा कुछ हुआ तो तुम जानते ही हो क्या करना है ।
रग्गा: ठीक है बॉस फिर हम लॉग निकलते है! लूसी वापस आया है तो बार पर जा रहे हैं।

सुलतान हाथ से इशारा करते हुए जाने के लिए कहता है। सुलतान फिर बेसमेंट से निकलते हुए अपने घर के अंदर दाखिल होता है। वह सीधा अपने कमरे में फ्रेश होने के लिए चला जाता है। जैसे ही वह नहाकर टावल लपेटे हुए कमरे में दाखिल ही हुआ था की उसकी नजर शॉपिंग के बैग अपने बेड पर दिखते है। और उसके जहन में सीधा नाज का ख्याल आता है। जो उसके दिल में हलचल मचा देता है। सुलतान सिर को ना में हिलाते हुए ख्याल दिल से निकालने की कोशिश करता है । लेकिन जितना वह नाज को भुलाने की कोशिश कर रहा था उतना उसके दिल में ख्याल आ रहे थे । जिस तरह से वह बात करती है। बिलकुल सिंपल ब्लैक ड्रेस में भी वह कितनी खूबसूरत लग रही थी यह बात अब सुलतान के जहन में आती है। क्योंकि जिस वक्त वह लोग मिले तब नाज की आंखों ने सुलतान को उलझा के रखा था तो वह ध्यान ही नहीं दे पाया की वह कितनी प्यारी लग रही थी । सुलतान सिर को ना में हिलाते हुए! नाइट वेर पहन कर बालकनी की ओर चला जाता है।




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