Bhishma and Arjuna in Hindi Fiction Stories by ravindra thawait books and stories PDF | भीष्म और अर्जुन

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भीष्म और अर्जुन

गृह मंत्री की हत्या
जम्बूतिया की राजधानी वैशाली नगर का पाशा बाजार का दशहरा मैदान में इस समय तिल रखने की जगह नहीं थी। पूरा मैदान खचाखच भरा हुआ था। जिधर देखो सिर्फ सिर ही सिर दिखाई दे रही थी। जुटे हुए भीड़ को इंतजार था देश के गृहमंत्री बृज बिहारी का। वे आज इस आम सभा को संबोधित करने वाले थे। आमसभा में भीड़ जुटने की खास वजह थी,बृज बिहारी,वो गृह मंत्री थे,जिन्होने गृह मंत्रालय सम्हालने के बाद,सबसे पहले आतंकवादी संगठन काला मोती के खिलाफ सीधे जंग का एलान कर दिया था। इतना ही नहीं,साल भर तक चली ताबड़तोड़ कार्रवाई में काला मोती को पूरी तरह नेस्तनाबूद कर दिया था। इस संगठन का चीफ बदरूद्दीन तैयब,देश छोड़ कर भाग चुका था। काला मोती संगठन के बर्बाद होने के बाद,गृहमंत्री बृज बिहारी की यह पहली आमसभा थी। आतंकवादी हमले की आशंका को देखते हुए,सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त थे। गृहमंत्री को चार चक्रीय सुरक्षा प्रदान की गई थी। सुरक्षा की कमान सम्हाल रहे थे वैशाली नगर पुलिस पोस्ट का इंचार्ज भीष्म सहानी ने। पुलिस के कमांड़ो इस समय पूरी तरह से मुस्तैद थे। मंच के आसपास परिंदा को पर मारने की अनुमति नहीं थी। इसी समय भीष्म सहानी को गृहमंत्री के सभा स्थल पर पहुंचने की सूचना मिली। भीष्म सहानी,लगभग 35 साल का,कसरती बदन का चुस्त फुर्तिला पुलिस अफसर,उसने तत्काल कमर से वायरलैस सेट निकाला और सुरक्षाकर्मियों को एल्र्ट जारी किया -
एलर्ट,सभी एल्र्ट,गृहमंत्री का काफिला पहुंचने ही वाला है। ध्यान दे किसी भी स्थिति में,भीड़ से किसी भी व्यक्ति को गृहमंत्री के पास न आने दें।’
बात समाप्त करने के साथ ही भीष्म तेजी से मंच से गेट की ओर दौड़ पड़ा। प्रवेश द्वार के पास पहुंच कर,भीष्म एलर्ट हो कर खड़ा हो गया। चंद सेकेंड में ही गृह मंत्री बृज बिहारी का काफिला गेट के पास पहुंचा। प्रवेश द्वार के पास पहुंचते ही गृहमंत्री की शेवरलेट कार रूकी। मंत्री हाथ हिला कर भीड़ का अभिवादन करते हुए,कार से बाहर निकले। आगे बढ़ते हुए,मंत्री बृज बिहारी की नजर,इंस्पेक्टर भीष्म सहानी पर पड़ी। वे चंद पल के लिए ठिठके और उसकी ओर आगे बढ़े।
हाथ मिला कर पूछा - कैसे हो भीष्म?
भीष्म ने उसी गर्मजोशी से हाथ मिलाते हुए कहा - सब आपका आशिर्वाद है सर।
आशिर्वाद तो उसका है मित्र,उसकी मेहर में हम सबका कल्याण है। हाथ उपर उठाते हुए गृहमंत्री ने कहा। ठीक इसी समय एक युवती माला लेकर,गृहमंत्री की ओर बढ़ने की कोशिश की। मंत्री की सुरक्षा घेरे में एक कमांडो ने उसे रोकते हुए कहा - ऐ लड़़की चुपचाप खड़ी रह।
कमांडों की तेज कड़क आवाज से मंत्री बृज बिहारी का ध्यान उसकी ओर आकृष्ट हुआ। उसने कमांडो को कहा - आने दो बच्ची को।
भीष्म ने उसकी बात काटते हुए कहा - ‘सारी सर,लेकिन सुरक्षा प्रोटोकाल के तहत हम ये अलाउ नहीं कर सकते।’
बृज बिहारी - अरे भाई,चिंता क्यो करते हो,ये बच्ची कोई आतंकवादी नहीं है। इस प्यारे से देश की प्यारी सी बिटिया है। अगर वह हमसे मिलना चाहती है तो इसमे क्या हर्ज है?
भीष्म ने कड़े शब्दों में कहा - आई एम एक्सट्रीमली सारी सर,लेकिन हम प्रोटोकाल का उल्घंन नहीं कर सकते।
बृजबिहारी ने कहा - मै गृहमंत्री बृज बिहारी आदेश देता हूं बच्ची को आने दिया जाए।
बृज बिहारी की बातें सुनकर,भीष्म ने बेबसी से कंधे उचकाए और बच्ची को रोके हुए कमांडो को इशारा किया। संकेत मिलते ही कमांडो ने युवती को छोड़ दिया। युवती चलते हुए आई और मंत्री बृज बिहारी को फूलों का माला पहनाते हुए कहा -
‘काला मोती को तोड़ने वाले गृहमंत्री जुग जुग जियो।’ युवती की बात को सुनकर बृज बिहारी ने हाथों में माला को लेकर कहा - ‘
इस देश का भविष्य तुम लोगो के हाथो में है मेरे बच्चों। मैने तो मेरा काम कर दिया।’
युवती ने मासूमियत से कहा -
‘भविष्य की चिंता न करें,सर। देश कभी नहीं रूकता,किसी के जाने से तो बिल्कुल भी नही।’ युवती की बात सुनकर गृहमंत्री जोर से हंसे और हंसते हुए आगे बढ़ने लगे। इसी बीच,वह युवती आगे बढ़ी और एक बार फिर मंत्री बृज बिहारी के आगे खड़ी हो गई। तेजी से आगे बढ़ कर,पैर छुने की कोशिश करने लगी। भीष्म ने बाज की सी तेजी से आगे बढ़ कर उसे रोक लिया। तेज झटका लगने से युवती जमीन में गिर गई। जमीन में गिरते ही युवती की आंखों में आंसू आ गए। आंसू देखते ही मंत्री का पारा सातवें आसमान में चढ़ गया,उसने चिल्ला कर कहा -
भीष्म क्या हिमाकत है यह? क्या कर रहे हो?
भीष्म ने कहा - ‘सारी सर,सिक्यूरिटी प्रोटोकाल के तहत मैं इसे,आपके पैर छूने की इजाजत नहीं दे सकता।’
‘टु हेल युअर सिक्यूरिटी प्रोटोकाल। देश की जनता से उपर कोई नहीं है।’ कहते हुए बृज बिहारी आगे बढ़ कर,जमीन में गिरी युवती को उठाने लगे। इस बीच दो कमांडो ने युवती को खड़ा किया। उसके पास आ कर मंत्री ने कहा - हम बहुत शर्मिंदा है बच्चे। तुम्हारे साथ हुए इस व्यवहार के लिए।’
कोई बात नहीं,अंकल भी तो अपनी ड्यूटी कर रहे हैं। युवती ने कहा। भीष्म की ओर देखते हुए कहा -
सीखो,इस बच्ची से कुछ सीखो। जिसे तुमने गिराया,वह तुम्हारी तारीफ कर रही है। कहते हुए,बृज बिहारी ने प्यार से युवती के सिर पर हाथ फेरा और आगे बढ़ गए। कमांडो के घेरे में चल रहे बृज बिहारी भिड़ का अभिवादन करते हुए,मंच की ओर आगे बढ़े। मंच के उपर चढ़ कर,बृज बिहारी ने भिड़ का अभिवादन किया। मंच पर मौजूद लोगों ने विशाल माला पहना कर,मंत्री का स्वागत किया। स्वागत के क्रम के बाद बृज बिहारी आम सभा को संबोधित करने के लिए माइक के पास पहुंचे,उन्होनें बोलना शुरू किया -
‘प्यारे देशवासियों,काला सागर से घिरा हमारा देश जम्बूतिया,विश्व का सबसे चमकता हुआ मोती है। इस देश ने विश्व को शांति का संदेश तो दिया ही है। हमारे वैज्ञानिकों ने देश को परमाणु बम के हमलों से सुरक्षित कर,बता दिया है कि हम आक्रमणकारियों से देश की सुरक्षा करना भी जानते हैं। देश में आतंक फैला रहे काला मोती का हाल तो आप सबको तो मालूम ही है। तालियों की गड़गड़ाहट के बीच,मंत्री ने कहा - इसका श्रेय मुझे नहीं,हमारे देश की पुलिस और सेना के जांबाज जवानों और अफसरो को............
अचानक मंत्री बृज बिहारी बैचेन दिखाई देने लगे। संबोधन रोक कर,वे अपने दोनों हथेलियों को रगड़ना शुरू कर दिया। इससे पहले की कोई कुछ समझ पाता,अचानक बृज बिहारी के शरीर से आग की लपटे निकलने लगी,चंद सेकेण्ड में पूरा शरीर आग में घिर गया। मंच पर मौजूद कमांडो आगे बढ़े,लेकिन वे बुरी तरह से चीख रहे मंत्री के पास पहुंचते ही इससे पहले ही एक धमका हुआ और मंच पर गहरा काला धुंआ फैल गया। धुआं छटते ही मंच का दृश्य भयावह हो गया था। मंत्री बृज बिहारी का बुरी तरह से जला हुआ शव मंच में पड़ा हुआ था। धमाके के कारण शरीर के कई हिस्से की चिथड़े उड़ गए थे। उन्हें बचाने के लिए आगे बढ़ रहे कमांडो भी बुरी तरह से घायल हो कर कराह रहे थे। वहीं,मंच के सामने भी भगदड़ की स्थिति बन गई थी। अफरा तफरी में लोग,जान बचाने के लिए बाहर की ओर दौड़ रहे थे। इस भगदड़ में कई लोग कुचले जा रहे थे। चंद मिनट में सब कुछ शांत हो गया। मैदान से भिड़ गायब हो चुकी थी। थी तो सिर्फ दबे कुचले घायल लोगों की दर्द भरी चीख पुकार और इधर मंच में भी इंस्पेक्टर भीष्म बुत बना हुआ खड़ा हुआ था। कभी वह बुरी तरह से जले हुए मंत्री बृज बिहारी को देख रहा था तो कभी घायल कमांडो को। अचानक उसने जोर से चिल्लाया - एंबुलेंस,जल्दी से एंबुलेंस भेजो।