I am a boy... books and stories free download online pdf in Hindi

में एक लड़का हूं...

सबसे पहले तो में शुक्रिया करना चाहूंगी उनका जिन्होंने मुझे मेरी पहली कहानी पढ के इस विषय का सुझाव दिया..….. बहोत बहोत शुक्रिया !

ना में छोटा बच्चा हू, न में बड़ी उमर का हु
बाप नही है मेरा, मेरी मां का इकलौता बेटा हु
बहन हे मेरी छोटी, उसका में एक भाई हु
पर इससे भी बड़ी बात में एक लड़का हु........……………...

ना में अमीरों का घर का हु, ना गरीबों कि बस्ती का हू
में एक मिडल क्लास का लड़का हु , कच्चे मकान में रहता हु
एक ही कमरा हे उस मकान में , इसीलिए ज्यादा तर बाहर ही रहता हु
क्योंकि में एक लड़का हूं.......…………………….………

ना में ज्यादा हंसता हूं ना में ज्यादा बोलता हूं
बस पुस्तक में मुंह गड़ाए दन भर पढ़ता रहता हु
बनना हे कुछ मुझे दिन भर बस यही सोचता हु
क्योंकि जिम्मेदारियों से दबा, में एक लडका हू.…..................

ना में ज्यादा घूमता हूं, ना में ज्यादा फिरता हूं
नोकरी की तलाश में दर दर की ठोकरें खाता फिरता हूं
घर आके मां के ताने सुनता हूं, क्योंकि उनका ही में एक एटा हु
पर इन सबसे ऊपर में एक लड़का हु...........................

न में ज्यादा खर्चा करता हु, ना दोस्तो के साथ बीयर पार्टी करता हु
में ऑफिस में ओवर टाइम करता हु,और रात में भी काम करता हु
मेरी एक छोटी बहन ही, में बस उसकी शादी की चिंता करता हु
क्योंकि में एक जिम्मेदार लड़का हु...........…........………..

ना में ज्यादा हैंडसम हु , ना में ज्यादा स्मार्ट हु,
तू भी ना परियों जेसी हे,फिर भी तुझे करता हु,
में तेरा आशिक हूं, तेरे सादगी पर मरता हु
क्योंकि में एक सीधा साधा लड़का हु........……………….…...

ना में तुझे बड़े गिफ्ट दे सकता हु, ना रोज रोज तुझे घुमा सकता हु
तू क्यों जिद करती हे, में तुझमें बेइंतिहा मरता हू
फिर भी तू छोड़ कर चली जाती हे,में बस देखता रह जाता हु
क्योंकि में एक मिडल क्लास का लड़का हु.…………….......

ना में ज्यादा रोता हूं, ना सिसकियों में सिसकता हु
ना में तेरी यादों में बिखरता हु, ना ही तुझे भूल पाता हूं
फिर भी घर वालो की बात मान कर एक अजनबी के साथ सात फेरे लेता हु
क्योंकि मेरी मां का में एक लड़का हू.……................

न में उससे मुंह फेरता हू, न में उसे दुत्कारता हु
तुझे यादों में रखता हु और हमेशा के लिए भूलता हु
और उसके साथ आने वाली जिंदगी के नए सपने संजोता हु
क्योंकि में एक वफादार लड़का हु………................

ना में मां को बोल पाता हु, न में बीवी को समझा पाता हूं
जब तुम दोनो का झगड़ा होता है तो में पीस के रह जाता हु
फिर भी में न कुछ कह पाता हूं,बस में टॉर्चर सेहता जाता हू
क्योंकि में एक सहनशील लड़का हु....……………….…

ना में उमर का कच्चा हु , न उमर से ज्यादा हु
ना में एक अच्छा लड़का हूं,ना में एक बुरा लड़का हु
ना में बिगड़ा हुआ लड़का हु , ना में सुधरा हुआ लड़का हूं
में बस एक लड़का हु, हा लड़का और बस लड़का हूं....................!
लड़का हो या लड़की , तकलीफ तो दोनो के ही जीवन में होती हे,
बात तो सिर्फ समझ की हे, दोनो एक दूसरे को समझ सके तो शायद दोनो की ही तकलीफ कम हो सकेंगी .
में एक लड़की हु इसीलिए शायद लड़को की तकलीफों को ज्यादा ना समझ पाऊं, फिर भी मेने एक नादान कोशिश की हे. इस कहानी को लिखते समय मेरे भाई की ही तस्वीर आंखो के सामने थी बस . लिखने में कोई गलती हुई हो तो माफ करना.......!