Aise Barse Sawan - 18 in Hindi Love Stories by Devjit books and stories PDF | ऐसे बरसे सावन - 18

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ऐसे बरसे सावन - 18

आज स्वरा आई हैं इस बात का तो पता हैं इसलिए थोड़ी संतुष्टि हैं पर वह कहां हैं दिखाई क्यों नहीं दे रही हैं पीछे दूर तक लंबी लाइन हैं पर वह पीछे मुड़कर नहीं देख सकता क्योंकि उसके पीछे ही उसका दोस्त स्वास्तिक बैठा था जिसने मानो उसी पर अपनी नजरें टीका रखी हो अगर वह इधर-उधर अपनी गर्दन घुमा कर स्वरा को खोजता हैं तो उसे स्वास्तिक के सवालों का जबाब देना पड़ेगा जो वह अभी बिल्कुल भी नहीं चाहता है l

अब आगे-

इसलिए उदास मन से योग पर ध्यान लगाने की कोशिश करता हैं पर उसका मन बिल्कुल भी योग में नहीं लग रहा था पर क्या करे लगाना तो पड़ेगा ही क्योंकि वह कॉलेज के लड़कों की तरह फौज में व्यवहार नहीं कर सकता है .....फौज के अंदर अपने ही तौर तरीके होते हैं जिसका उन्हें पालन करना होता है और अपने पद की गरिमा को ध्यान मे रखकर एक जिम्मेदार इंसान की तरह व्यवहार करना होता है l

आज स्वरा फैमिली के बीच जाकर घूम घूमकर उन्हें योग करने के सही पोजिशन बता रही हैं और उनकी मदद कर रही है ....इसी प्रकार उसके बाकि के साथी भी लोगों के बीच फैल कर उनकी मदद कर रहे हैं l

ऑफिसर से के लिए सबसे आगे की दो लाईनों में व्यवस्था है और अभिराम आगे की लाइन में हैं इसलिए वह स्वरा को नहीं देख पा रहा है l

आज के ये 2 घंटे उसके लिए बिताना बहुत ही
मुश्किल हो रहा है l मन ही मन उसका दिल कह रहा -
"हवाओं में खुशबु हैं मेरे महबूब की
आसपास ही हैं वो कहीं
दिल में है पर मेरी नजरों से ओझल कहीं "

किसी तरह 2 घंटे की समय बीत जाता है पर उसकी मुलाकात स्वरा से नहीं हो पाती क्योंकि योग खत्म होने के बाद उसके कलिग और सीनियर साथ में होते हैं सभी आपस में एक दूसरे से बात कर रहे होते हैं तो वह उनके बीच से हिल नहीं सकता हैं l
10 मिनट बाद सभी अपने अपने घर के लिए निकलने लगते हैं l

अभिराम भी अपने परिवार को लेकर निकल जाता है और उसके आगे से ही स्वरा की बस निकल जाती हैं l

अभिराम मन ही मन थोड़ा उदास हो जाता है की आज भी स्वरा की उससे बात नहीं हो पाई l

आज वह पूरे दिन बहुत ही व्यस्त रहता है पर स्वरा को लेकर थोड़ा उदास भी था क्योंकि न तो उसकी मुलाकात और न ही प्रेम की शुरुआत हो पाती है l

रात को लेटे लेटे बस वह स्वरा के बारे में ही सोच रहा है l अगले दिन रविवार हैं यह सोचकर वह बहुत ही खुश होता हैं क्योंकि रविवार को ऑफिस की टेंशन नहीं थी और उस दिन उसके पास काफी समय रहेगा स्वरा से जान पहचान बढ़ाने के लिए l

वह जानता है कि अगले दिन योग समाप्ति पर
एक छोटी सी रिफ्रेशमेंट पार्टी रखी गयी हैं और स्वरा की टीम को भी रविवार होने की वज़ह से जल्दी कॉलेज जाने की हडबडी नहीं होगी l

इन्हीं ख्यालों में डूबे उसकी आँखें लग जाती हैं....सपनों में भी बस उसे स्वरा ही दिखाई देती हैं ....उसे सपने में ऐसा लगता हैं जैसे की स्वरा उसे बुला रही है पहले तो वह नज़र अंदाज करता हैं लेकिन फिर से उसे आवाज आती हैं अभीsss अभीsss 2 , 3 बार बुलाने पर उसकी आंखें खुल जाती है और देखता है की उसकी माँ उसे जगा रहीं हैं (फिर मन में सोचता है ओ शीट ये तो सपना था )

माँ - अभि उठो बेटा 6 बज गए हैं ....नहीं तो कल की तरह लेट हो जाओगे l

अभिराम मुस्कराते हुए - गुड मॉर्निंग मोम

माँ - गुड मॉर्निंग बेटा

अभिराम सपने की बात सोचकर मन ही मन मुस्कुराता है वह खुद को आज बहुत ही तरो-ताजा मेहसूस करता हैं l

वह एकदम फ्रेश मूड में टाॅवल लेकर बाथरूम में जाता है अच्छे से नहा धोकर बाहर निकलता है l

फिर अच्छे से तैयार होता है वह सबसे पहले अपना एडीडास का ट्रैक सूट पहनता हैं फिर बालों को करीने से सेट कर उन पर जेल लगाता हैं और फिर अपने व्हाइट कलर के एडीडास के स्पोर्ट शू पहनता हैं और हाथों में बिग डायल वाला स्मार्ट वाॅच पहनता हैं उसके बाद अंत में अपने ऊपर पर्फ्यूम स्प्रे करता हैं l

उसके बाद हर एंगल से खुद को शीशे में देखता है
जब वह अपने आप को तैयार देखकर पूरी तरह संतुष्ट हो जाता है तो उसके बाद खुद की अलग अलग पोज में सेल्फी लेता है l

उसको ऐसा करते देख अधीरा देख लेती हैं और कहती हैं....क्या भाई आज तो बड़े मूड में हो ..... क्या चक्कर हैं l

अभिराम अपनी हड़बड़ाहट छुपा कर - क्यों, जब तु अपनी आड़े टेढ़े मुह बना बना कर सेल्फी लेती हैं तो मैंने कभी कुछ कहा हैं....फिर तुम क्यों इतने सवाल कर रही हो l

अधीरा हंसते हुए - मूड कर रहा था तुम्हें छेड़ने के लिए l

माँ - अब सुबह सुबह तुम दोनों मत शुरू हो जाओ
चलो जल्दी हमें समय से योगा के लिए भी पहुँचना हैं l


अभिराम - जी मॉम, आप सब बाहर आइए मैं गाड़ी निकालता हूँ l

अधीरा डोर लाॅक कर देती हैं फिर सभी साथ में आकर गाड़ी में बैठ जाते हैं... अभिराम गाड़ी स्टार्ट कर देता है और प्यारा सा संगीत लगा देता हैं.....वे कुछ ही समय में योग मैदान में पहुंच जाते हैं l

अभिराम पार्किंग स्टेंड में अपनी गाड़ी लगा देता है l फिर सभी धीरे-धीरे मैदान की ओर बढ़ने लगते हैं l
और अपना स्थान ग्रहण कर लेते हैं l

दूसरी तरफ स्वरा और उनकी टीम सभी अपने अपने घर के बाहर बस का इंतजार कर रहे होते हैं .. ड्राइवर सभी लोगों को उनके घर से ले लेता है उसके बाद गाड़ी को आर्मी केंट के ओर लिए दौड़ाने लगता है लेकिन कुछ दूर जाने पर बस पंचर हो जाती हैं ..... ऐसा होने पर सभी जिज्ञासा वश गाड़ी से नीचे उतर कर देखने लगते हैं कि क्या हो गया l

निखिल( टायर की तरफ देखकर ) - ओ शीट ,ये तो बड़ी गडबड हो गयी इसे भी अभी होना था l

ड्राइवर - सर , बस पंचर हो गई है....इतनी सुबह तो कोई दुकान भी नहीं खुली होगी इसलिए अभी कोई मेकैनिक नहीं मिल पाएगा , ऐसा कीजिए आप लोग दूसरी बस से चले जाइए l

निखिल कॉलेज प्रशासन को फोन लगाता हैं और अपनी स्थिति के बारे में बताता है l

कॉलेज प्रशासन - ठीक है आप लोग वहां 5 मिनट इंतजार कीजिए मैं आपको कॉल बैक करता हूँ l
सब कुछ पता करने के बाद .....


आगे जानने के लिए पढ़ते रहिए
"ऐसे बरसे सावन "
llजय श्री राधे कृष्णा ll