Aehivaat - 16 in Hindi Women Focused by नंदलाल मणि त्रिपाठी books and stories PDF | एहिवात - भाग 16

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एहिवात - भाग 16

जुझारू को संतोष था की बेटी अच्छे घर जाएगी शेरू घर की खुशियों में शामिल था जुझारू शेरू के सर पर हाथ फेरते बोले इहे हमे राह दिखाएस ।
 
सौभाग्य के रिश्ता खातीर अनबोलता शेरू घरे क सदस्य लड़िका जईसन बा शेरू जैसे अपनी तारीफ को समझ रहा हो अपनी दुम हिलाते हुए जुझारू के भवो कि जैसे स्वीकृति दे रहा था पति पत्नी और शेरू के बीच अपनी चिर परिचित अंदाज़ में खिलखिलाती सौभाग्य कही से आई और बाबू जुझारू से शिकायती लहजे में बोली कहां रहिगे रहे पूरी रात माई तोहार राह देखत रही ?
जुझारू बोले बिटिया तोहरे वियाह तय कर दिया हई अब गोड़ धोवाई के रस्म खातिर दिन बार तय करेका है सौभाग्य ने शर्म से चेहरा झुकाते कहा बाबू का हम तोहरे खातिर बोझा होइगल हई जुझारू बोले नही बिटिया ई त दुनियां के रिवाज ह बेटी के पाल पोषि के माई बाप दूसरे के सौंप देत है तू सुखी रहबू हमरो खुशी होय आखिर एक न एक दिन तोहे जाना बा सौभाग्य कि आंखे नम हो गयी जुझारु ने और अधिक बात करना उचित नही समझा बोले बेटी आजे तोहार ई हालत बा त विदाई के दिने का होई ।
 
चिन्मय सौभाग्य को भूल चुका था उसके समक्ष मात्र अपना उद्देश्य इंटरमीडिएट कि परीक्षा में भी अपनी मैट्रिक परीक्षा कि स्थिति को पूर्ववत कायम रखते हुए प्रदेश में प्रथम स्थान लाना था।
 
आदर्श उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के प्राचार्य हृदयशंकर सिंह का निर्देश था कि चिन्मय को पढ़ाने वाला प्रत्येक शिक्षक चिन्मय पर विशेष ध्यान देगा प्राचार्य के निर्देश का पालन भी प्रत्येक शिक्षक द्वारा बड़ी जिम्मेदारी के साथ किया जा रहा था ।आखिर विद्यालय के प्रतिष्ठा कि बात थी ।
कहते है समय के गर्भ में क्या रहस्य छिपा रहता है कोई नही जानता विद्यालय के प्राचार्य हृदयशंकर सिंह द्वारा कोल जनजाति के जीवन विरासत इतिहास पर नाटक मंचन का कार्यक्रम रखा गया समस्या यह थी की नाटक में कोल जनजाति का महिला किरदार कौन होगा?
 
पुरुष किरदार के लिए चिन्मय का चयन किया गया नाटक मंचन में एक महीने का समय था प्राचार्य हृदयशंकर सिंह द्वारा विद्यालय के शिक्षकों कि मीटिंग बुलाई गई जिसमें उन्होंने बताया कि विद्यालय स्थापना के वार्षिकोत्सव में अन्य आयोजनों के अतिरिक्त इस वर्ष कोल जनजाती के रहन सहन संस्कृति संस्कार पर आधारित नाटक का आयोजन विशेष किया जा रहा है क्योकि हमारा विद्यालय कोल आदिवासी समाज के बस्तियों गांवों से बहुत निकट है फिर भी विद्यालय का दुर्भाग्य यह है कि कोल जन जाती का एक भी छात्र या छात्रा विद्यालय के किसी क्लास में नही पढ़ता है इसीलिये मैंने स्वंय कोल जनजाति के रहन सहन खान पान संस्कृति पर अध्ययन कर नाटक लिखा है मुझे विश्वाश है कि मेरा यह प्रयास कोल जनजातीय समुदाय में शिक्षा के प्रति जागरूकता का संचार करेगा अतः मैं चाहूंगा कि नाटक के मंचन के दिन कोल समुदाय कि पुरूष स्त्रियां और युवक युवतियां इस नाटक को देंखे इसके लिये शिक्षकों की एक समिति बनाता हूँ जिसके सदस्य जोगिंदर सिंह, रमणीक दुबे ,सुकान्त श्रीवास्तव, और समर्थ गुप्त होंगे जिनकी जिम्मेदारी नाटक के नारी पात्र के चयन से लेकर नाटक के दिन विद्यालय में कोल परिवारों के स्त्री पुरुष बच्चे बच्चियों को लाने कि एव नाटक के सफल मंचन कि होगी ।
 
समर्थ गुप्त,रमणीक दुबे सुकान्त श्रीवास्तव एव जोगिंदर सिंह अपनी जिम्मेदारियों पर सयुक्त रूप से जुट गए चारो ने निर्धारित किया कि जिन पात्रों का चयन नाटक के लिए हो चुका है उन्हें कोल गांवों बस्तीयों में ले जाकर पंद्रह दिन कोल जनजाती के रहन सहन खान पान बोली भाषा से कुछ परिचित कराया जाय इस बीच प्रभावी महिला पात्र कि खोज भी की जाय।
 
इसके लिये आवश्यक है था कोल बस्तियों में जाना प्राचार्य द्वारा बनाई कमेटी के चारो सदस्यों ने कोल बस्तियों में जाने का निश्चय किया अवकाश के दिन रविवार को कमेटी के चारो सदस्य रमणीक दुबे ,सुकान्त श्रीवास्तव, जोगिंदर सिंह एव समर्थ गुप्त कोल जन जाती कि बस्तियों में पहुँचे और बस्ती के लोंगो से विद्यलय के उन छात्रों को बस्ती में कुछ दिन रहने की इजाजत चाही जो छात्र नाटक में प्रमुख पात्रों कि भूमिका निभाने वाले थे ।
 
कोल बस्ती के मुखिया जोगी कोल ने बहुत ना नुकुर के बाद आधे अधूरे मन से गांव में विद्यालय के छात्रों को आने एव जनजातीय रहन सहन परम्पराओ को जानने समझने की इजाज़त दी ।
कमेटी ने विद्यालय के छात्रों के साथ कोल बस्ती में रहने के लिए कमेटी के सदस्य रमणीक दुबे को अधिकृत किया ।
 
रमणीक दुबे नाटक में भाग लेने वाले छात्रों चिन्मय संजीव चिरंजीवी आदि को दूसरे ही दिन साथ लेकर कोल बस्ती पहुंचे और छात्रों को कठोर निर्देश दिया कि उनके किसी भी कृत्य व्यवहार से कोल परिवारों कि भावनाओ को ठेस ना पहुंचे।