Tilismi Kamal - 8 in Hindi Adventure Stories by Vikrant Kumar books and stories PDF | तिलिस्मी कमल - भाग 8

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तिलिस्मी कमल - भाग 8

इस भाग को समझने के लिए इसके पहले से प्रकाशित सभी भाग अवश्य पढ़ें -–--------------–-🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏



सुकन्या परी और राजकुमार धरमवीर कालीन में बैठकर परीलोक की ओर चल दिये ।  राजकुमार धरमवीर सुकन्या परी के गोद मे अपना सिर रख कर सो गया । सुकन्या परी राजकुमार को एक टक देख रही थी ।



राजकुमार सुकन्या परी की गोद मे सर रखे कब तक सोता रहा इसका पता ही नही चला । लेकिन जब उसने आंखे खोली तो अंधेरा हो चुका था । राजकुमार की आंख भी अपने आप नही खुली थी । बल्कि सुकन्या परी के जगाने से नींद टूटी थी ।

" उठो राजकुमार , हम परी लोक आ गए है ।" - सुकन्या परी राजकुमार के सर पर प्यार से हाथ फेरती हुई बोली ।

राजकुमार उठ कर बैठ गया । उसे बहुत दिनों अच्छी बात नींद आयी थी । राजकुमार के उठते ही कालीन भी परी लोक के जमीन पर उतर गया ।

सुकन्या परी को परी लोक में वापस देखकर उसके माता पिता बहुत खुश हुए । सुकन्या परी ने अपनी पूरी दास्तान अपने माता पिता को बताया कि राजकुमार ने उन्हें कैसे बचाया ? ये कौन है ? और परीलोक में क्यो आये है ? 

सुकन्या परी की सहेलियो ने दोनो का शानदार स्वागत किया । सुकन्या परी की मां और सहेलियाँ राजकुमार से मिलकर बड़ी खुश हुई और उन दोनों के साथ महल तक आई ।

परी लोक की सुंदरता न्यारी थी । रात के अंधेरे में भी परी लोक स्वर्ग की तरह जगमगा रहा था ।  सुकन्या परी का अपना आलीशान महल था ।

राजकुमार धरमवीर सुकन्या परी के साथ दो दिन रहा । उसने उन दो दिनों में उसने पूरे परी लोक कर सैर की और उड़ने वाली कालीन में बैठ कर आसपास के लोक भी देखे ।

राजकुमार परी लोक आकर उड़ने वाले टापू पर जाने की बात तो भूल ही गया था । सुकन्या परी के याद दिलाने पर राजकुमार को तिलिस्मी फल की याद आयी ।

रात के ठीक बारह बजे । सुकन्या परी और राजकुमार धरमवीर दोनो बड़े सावधान खड़े थे । उड़ने वाला टापू किसी भी क्षण प्रकट हो सकता था । 

" राजकुमार ! उड़ता हुया टापू यहाँ एक क्षण भी नही रुकता । उसे देखते ही तुम कालीन पर सवार हो जाना । यह कालीन हमेशा तुम्हारे साथ रहेगा । इस पर .....…... "  सुकन्या परी की बात अभी पूरी भी नही हो पाई थी कि कही दूरी पर एक तारा चमकता हुया दिखाई दिया । जो बड़ी तेजी से परी लोक की ओर बढ़ रहा था ।

सुकन्या परी ने राजकुमार को सावधान करते हुए कहा - " सावधान राजकुमार ! यही उड़ता हुया टापू है । "

राजकुमार तो पहले से ही सावधान था । वह पलक झपकते ही कालीन पर सवार हुया और अगले ही क्षण उड़ते हुए टापू की ओर उड़ चला ।

उड़ते हुए टापू पर पहुंचने में राजकुमार को कोई समय नही लगा । उड़ता हुया टापू धरती की तरह एक सामान्य टापू था । किन्तु इस उड़ते हुए टापू पर हरियाली नही थी ।

राजकुमार धरमवीर उड़ते हुए टापू पर पहुंचकर बहुत खुश हुया । उसने कभी सोचा नही था कि वह इतनी सरलता से यहाँ तक पहुंच जाएगा । अब उसे टापू में उस पेड़ की तलाश थी जिसमे तिलिस्मी फल लगता है ।

राजकुमार ने समय बर्बाद करना उचित नही समझा और कालीन पर सवार होकर पेड़ की तलाश में निकल पड़ा । राजकुमार ने पूरे टापू का चक्कर लगा डाला , किन्तु उसे कही भी कोई पेड़ नही मिला । राजकुमार परेशान हो उठा ।

वह अभी पेड़ और उसके तिलिस्मी फल के बारे में सोच ही रहा था कि अचानक उसके पीछे से सर पर भरपूर वार किया । राजकुमार असावधान था और चोट भी भयानक थी । अतः वह सहन नही कर सका और बेहोश हो गया ।

राजकुमार धरमवीर कब तक बेहोश पड़ा रहा , इसका उसे पता ही नही चला , किन्तु जब उसे होश आया तो उसने अपने आपको एक गुफा में पाया । गुफा में अंधेरा था ।

इसका मतलब था कि या तो इस समय रात थी या फिर गुफा चारो तरफ से इस तरह से बंद थी कि भीतर प्रकाश ही नही आ रहा था ।

राजकुमार बड़ी देर तक पड़े पड़े सोचता रहा । वह उस अज्ञात व्यक्ति के बारे में सोच रहा था । जिसने पीछे से उसके सर पर प्रहार किया था । अज्ञात व्यक्ति ने इतने जोर से प्रहार किया था कि उसका सर अभी भी दर्द से फटा जा रहा था ।

राजकुमार के समझ मे कुछ नही आ रहा था कि इस अंधेरी गुफा में वह क्या करे या  क्या न करे ? राजकुमार ने इधर उधर टटोल कर देखा तो उसकी तलवार उसके पास थी । किन्तु अंधेरे में कालीन कही नही मिला ।

अचानक गुफा प्रकाश से भर उठा । राजकुमार सावधान हो गया । उसने अपनी तलवार हाथ मे ली और गुफा की दीवार से चिपक कर खड़ा हो गया ।

यह एक लंबी चौड़ी गुफा थी । जिसके द्वार को एक बहुत बड़ी चट्टान से बंद कर दिया गया था । अभी अभी चट्टान हटाने से गुफा प्रकाशित हो गई थी ।

गुफा में राजकुमार अकेले नही था । उससे कुछ दूरी पर हाथी के आकार के दो विचित्र जीव पड़े दिखे । दोनो दैत्याकार विचित्र जीव बड़े खूंखार दिखाई दे रहे थे । यदि वे बंधे नही हुए होते तो राजकुमार को कच्चा चबा जाते ।

गुफा में प्रकाश होते ही दोनो विचित्र जीवो की नजर राजकुमार पर पड़ी । उन्होंने राजकुमार को देखकर मुँह से भयानक आवाज निकाली , किन्तु बंधे होने के कारण अपने स्थान से हिल भी न सके । 

तभी गुफा के भीतर बड़े बड़े नाखूनों वाला एक हाथ आया और छोटे बच्चे की तरह एक जीव को पकड़ कर गुफा के बाहर ले गया । इसके बाद गुफा में पुनः अंधेरा छा गया ।

राजकुमार ने यह दृश्य देखा तो चकित रह गया । गुफा के अंदर आने वाला हाथ निश्चित रूप से किसी देव या दानव का था । राजकुमार सोच में पड़ गया ।

जिस व्यक्ति का हाथ इतना शक्तिशाली है कि उसने हाथी जैसे जीव को कुत्ते के बच्चे की तरह उठा लिया , वह व्यक्ति कितना ताकतवर होगा ? 

राजकुमार को लगा कि उसकी मौत निश्चित है । वह गुफा के भीतर कुछ भी नही कर सकता था । उसने एक बार गुफा के द्वार की तरफ बढ़ने का विचार किया , किन्तु विचित्र जीव का ध्यान आते ही उसने अपना विचार छोड़ दिया ।

विचित्र जीव गुफा के द्वार के पास ही था और उसके रहते हुए  गुफा के द्वार तक पहुंचना असम्भव था । इसके साथ राजकुमार ने यह भी सोचा कि यदि वह किसी तरह अंधेरे में विचित्र जीव को मारकर गुफा के द्वार तक पहुंच भी जाये तो द्वार पर अड़ी हुई भारी भरकम चट्टान हटाना उसकी शक्ति के बाहर था ।

राजकुमार यही सब सोच ही रहा था कि उसके दिमाग में एक नया विचार आया । राजकुमार ने सोचा कि क्यो न गुफा के दूसरे सिरे की तलाश की जाए । यह अंधेरे में भटकने वाला विचार था ।

गुफा का दूसरा सिरा बन्द हुया तो राजकुमार की पूरी मेहनत बेकार हो जानी थी , किन्तु राजकुमार के पास दूसरा कोई रास्ता नही था । अतः वह गुफा की दीवार का सहारा लेकर दूसरे सिरे की ओर चल पड़ा ।

राजकुमार का भाग्य अच्छा था । वह अभी कुछ ही कदम आगे बढ़ा था कि उसके पैर में कोई मुलायम चीज टकरा गई । राजकुमार ने टटोल कर देखा तो यह सुकन्या परी का दिया हुया कालीन था ।

राजकुमार को कुछ आशा बंधी । उसे लगा कि उड़ने वाला कालीन इस काली अंधेरी गुफा से बाहर निकालने में उसकी मदद कर सकता है ।

राजकुमार ने कालीन बिछाया और उस पर बैठते हुए बोला - " ओ उड़ने वाले कालीन ! मुझे इस गुफा के बाहर किसी सुरक्षित स्थान पर ले चलो । "

तभी एक चमत्कार हुया । कालीन राजकुमार को लेकर धीरे धीरे गुफा के दूसरे सिरे की ओर उड़ गया । कालीन इस ढंग से उड़ रहा था कि राजकुमार कही भी गुफा से टकरा नही रहा था ।

कुछ ही क्षणों के बाद राजकुमार को प्रकाश दिखाई दिया । इससे स्पष्ट था कि गुफा के दो द्वार थे और दूसरा खुला हुया था । कालीन अभी भी धीरे धीरे उड़ रहा था और वह उड़ते हुए गुफा से बाहर आ गया ।

राजकुमार ने कालीन के नीचे झांक कर देखा तो उसके रोंगटे खड़े हो गए । गुफा का दूसरा द्वार बहुत गहरी खाई में खुलता था । और खाई में ऐसे बहुत से विचित्र हिंसक जीव घूम रहे थे जैसे उसने गुफा के भीतर देखे थे ।


                                     क्रमशः ...................💐💐💐💐💐💐


सभी पाठकगण को तहे दिल से धन्यवाद जो अपना बहुमूल्य समय निकाल कर मेरी कहानी का यह भाग पढा । और आप सब लोगो को यह भाग कैसा लगा यह अपनी समीक्षा देकर जरूर बताएं ताकि मेरा मनोबल बढ़े । अगला भाग जैसे ही प्रकाशित करूँ वह आप तक पहुंच जाए इस लिए मुझे जरूर फॉलो करें ।



विक्रांत कुमार
फतेहपुर उत्तरप्रदेश 
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