Bewafa - 18 in Hindi Love Stories by Mehul Pasaya books and stories PDF | बेवफा - 18

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बेवफा - 18

समीरा, राहुल, विजय, सलोनी, सौम्या और योगेश की कहानी – एपिसोड 1

शहर की हलचल भरी जिंदगी में, जहाँ हर कोई अपनी दौड़ में व्यस्त था, वहीं समीरा, राहुल, विजय, सलोनी, सौम्या और योगेश की दोस्ती किसी ताजे हवा के झोंके जैसी थी। वे कॉलेज के दिनों से ही साथ थे और आज भी एक-दूसरे के लिए वैसे ही खड़े थे जैसे पहले दिन थे।

शुरुआत का मोड़

एक शाम, जब सब कैफ़े में मिले, तब बातचीत में अचानक पुरानी यादें ताजा हो गईं। हँसी-मजाक के बीच राहुल ने एक चौंकाने वाली बात कही, “क्या तुम लोगों ने कभी सोचा है कि हमारी ज़िन्दगी अचानक एक रहस्य में बदल जाए?”

सलोनी ने हँसते हुए जवाब दिया, “रहस्य? हमारे लिए तो रोज़मर्रा की ज़िंदगी ही किसी पहेली से कम नहीं है।”

लेकिन राहुल गंभीर था। उसने एक पुरानी फैक्ट्री के बारे में बताया, जो सालों से बंद थी। लोग कहते थे कि वहाँ अजीब घटनाएँ होती हैं, कुछ लोगों ने वहाँ जाने की कोशिश की थी, लेकिन वे वापस नहीं आए।

समीरा ने दिलचस्पी लेते हुए कहा, “अगर ये सिर्फ़ अफवाह है, तो हमें खुद जाकर देखना चाहिए।” विजय ने भी हामी भरी, और सबने तय किया कि अगली रात वे उस फैक्ट्री में जाएंगे।

फैक्ट्री के अंदर

अगली रात, आधी रात के करीब, वे सब फैक्ट्री पहुँचे। हवा में एक अजीब-सी ठंडक थी, जो वहाँ की वीरानी को और डरावना बना रही थी। जैसे ही उन्होंने अंदर कदम रखा, दरवाज़ा खुद-ब-खुद बंद हो गया।

योगेश घबरा गया, “ये…ये कैसे हुआ?”

सौम्या ने फोन का टॉर्च जलाया, लेकिन कुछ सेकंड बाद ही वह बंद हो गया। विजय ने चारों तरफ़ देखा, “कुछ तो गड़बड़ है यहाँ। चलो, जल्दी से देख लेते हैं और निकलते हैं।”

वे आगे बढ़े, हर कदम के साथ डर बढ़ता जा रहा था। तभी एक पुरानी अलमारी अचानक गिर गई और उसके पीछे एक गुप्त दरवाज़ा दिखा।

समीरा ने धीरे से कहा, “अब वापस जाने का कोई सवाल ही नहीं। हमें देखना होगा कि इसके पीछे क्या है।”

एक नया रहस्य

दरवाज़ा खोलते ही उन्हें एक गुप्त तहखाना मिला। दीवारों पर अजीब निशान थे, और बीच में एक पुरानी डायरी पड़ी थी। राहुल ने उसे उठाया और पढ़ने लगा।

“यहाँ कुछ लिखा है—‘जो यहाँ आया, वो वापस नहीं गया।’”

सभी की साँसें अटक गईं। क्या उन्होंने अनजाने में किसी भयानक रहस्य को छेड़ दिया था?

राहुल ने आगे पढ़ा, “यह जगह एक प्रयोगशाला थी, जहाँ कुछ अजीब प्रयोग किए जाते थे। कुछ लोगों को यहाँ कैद कर रखा गया था और उनके साथ भयानक प्रयोग किए गए थे।”

सलोनी ने भयभीत होकर कहा, “हमें यहाँ से जल्दी निकलना चाहिए, यह जगह खतरनाक हो सकती है।”

जैसे ही वे बाहर निकलने लगे, तहखाने के अंदर एक हल्की सी सरसराहट हुई। एक परछाई दीवार पर दिखी। योगेश ने धीरे से कहा, “यहाँ कोई और भी है…”

सभी ने अपनी साँसें रोक लीं। परछाई धीरे-धीरे उनकी ओर बढ़ने लगी।

(अगले एपिसोड में जारी…)

अब यहा से कुछ चीजें बदल जाएगी ये 18वा एपिसोड हैं। जिसमें कुछ लिखावट और कहानी का ढलाव थोड़ा बदल जाएगा। और है कैरेक्टर नाम सब वही रहेगा। इस लिए आपको कोई आपको कन्फ्यूशन नहीं रहेगी।

पढ़ना जारी रखें. . .