Aek Anjani Dosti - 2 in Hindi Adventure Stories by krick books and stories PDF | एक अंजानी दोस्ती - पार्ट 2

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एक अंजानी दोस्ती - पार्ट 2

बडे लम्बे समय के बाद युग और रुशिका आखिर मे वो दोनो अब पेहली बार मिलने वाले थे ये सोच सोच के युग तो बहुत खुश हो रहा था की पुरे क्लास मे ऐसी दोस्त नही है लेकिन बहुत दूर कही एक दोस्त है जिसे वो मिलने वाला था  यूनिवर्सिटी की परिक्षा पास आ गई थी रुशिका ने भी युग को बताया की वो अगर एक कॉलेज मे परिक्षा के बैठक नंबर आये तो ठीक है लेकिन अगर नही आये तो फिर भी एक बार वो जरूर मिलेंगे । रुशिका ने युग को बताया की उसे यूनिवर्सिटी देखनी है उसे घूमना है क्युकी यूनिवर्सिटी का केम्पस बहुत ही बड़ा था उसमे बहुत सारे हरे भरे सुंदर बगीचे थे हरियाली ही हरियाली थी बहुत ही सुंदर ये सब कुछ रुशिका को देखना था इस लिये युग और रुशिका दोनों ने ही ये सोच लिया की वो दोनों पेहली बार यूनिवर्सिटी मेही ही मिलेंगे वो कोई पेपर के बीच मे छुट्टी मिलेगी तो वो जरूर आयेगी। धीरे धीरे यूनिवर्सिटी की परिक्षा भी नजदीक आ रही थी और युग भी बहुत ही खुश था की वो अपनी दोस्त को मिलने वाला था लेकिन ये सब एक झूठे साबित हुआ ऐसा कुछ भी नही हुआ युग का लगाव और सब्र ही उसकी पिडा बन गई रुशिका उसे मिली ही नही हमारे नंबर अलग अलग कॉलेज मे थे मे तो ये सोच सोच के थक गया की वो मुझे अभी कोल करेगी और मिलने के लिये बतायेगी पहला पेपर गया बाद मे दूसरा भी चला गया लेकिन मिलने की उसने एक बात तक नही की फिर मैने ये सोचा की सायद उसे सिटी मे मुसाफ़रि करने मे दिक्कत होती होगी उसे नया नया लगता होगा इस लिये मैने रुशिका को पूछा की दिन जा रहे है पेपर भी खत्म होने को है तुम मुझसे सिर्फ पाच किलो मीटर भी दूर नही हो फिर भी मिलने की बात ही नही कर रही हो फिर उसने जो बताया उससे मेरे होश उड़ गये । 

"उसने ये बताया की मेरी आर्थिक स्थिति अभी ठीक नही है हम बाद मे कभी मिलेंगे ये सुनते ही मे सोच मे पड़ गया की ये क्या हुआ मेरा इतना समय उसके बारे मे सोचने मे गया था मैने कितनी सारी उसे से आशा ये रखी थी उसने वो सब 1 मिनिट मे ही खत्म कर दिया वो मिलने ना आ पाये तो क्या हुआ मेतो फिर भी उसे मिलने जाने ही वाला था लेकिन ये बात सुनके मुझे ऐसा लगा की मे कुछ ज्यादा ही गेहरि दोस्ती निभा रहा था मेरा लगाव ही मेरी पिडा बना रहा था और रुशिका ने 1 मिनिट मे बात खत्म कर दी अगर वो एक बार भी मुझे मिलने की बात कहती तो अहमदाबाद मे बिना 1 रुपिया खर्च किये भी brts मे हम कही भी घूम सकते है 3 घंटे तक आसानी से बाते कर सकते है बस हम स्टेशन के बाहर नही निकला ना है   लेकिन क्या फायदा मेरी ऐसी सोच का जो उसे मिलना ही नही था। 

"आज तक युग और रुशिका की सिर्फ फोन पर मेसेज से ही बात होती थी उन्होंने एक दूसरे की आवाज तक नही सुनी थी वेसे तो रुशिका युग से दो साल बडी थी लेकिन पेपर के आखरी दिन उसका पेहली बार कोल आया उसने कुछ बाते की कुछ पूछा मुझसे मैने वो बताया और उसके बात बात खत्म । लेकिन मैने उसकी आवाज से ही पहचान लिया उसकी बाते सुनते ही मुझे पता लग गया की वो दो साल बडी नई छोटी है साल मे बडे होने से कोई बड़ा नही हो जाता । 

उसके बाद रुशिका ने युग को मेसेज करके बताया की उसकी आवाज बहुत बड़ी है वो बहुत बड़ा दिखता है वो उसके साथ बात करती है तो उसे कुछ ठीक नही नही होता है अच्छा नहीं लगता है तब युग को पता चला की भले ही ये मुझसे दो साल बडी क्यु ना है लेकिन बाते तो उसकी अभी भी छोटे बच्चे वाली थी क्रिक तो हैरान हो गया की जिस दोस्त को इतना ओनलाइन मानता था जानता था वो ओफ़लाइन वास्तविक मे कुछ अलग ही है  मे रुशिका की बुराई नही कर रहा हूँ लेकिन जो मुझे अनुभव हुआ है जो मुझे दिल से फील हुआ है वो सिर्फ बता रहा हूँ दोस्ती मे जो मेरा लगाव था वही पिडा साबित हुआ दोस्ती तो आज भी रुशिका और युग की चल ही रही है लेकिन अब मिलने की युग की कोई आशा नही है मीलेगें तो ठीक है वरना दुनिया तो वैसे भी ओनलाइन चल रही है । 

"ऐसा भी नही था की युग रुशिका से प्रेम करता था या फिर दोस्ती ऐसी निभा रहा था जिसकी वजसे उसको बुरा लगा लेकिन हर एक रिश्ता भावना और विश्वास से जुडा होता है एक सीधे धागा टूट जाये फिर भी उसे जोड़ा जा सकता है लेकिन उसकी डोर पेहले जेसी मजबूत नही हो जाती क्युको धागे को जोड़ ने के बाद उसमे गांठ पड़ जाती है जो रिश्ते को कभी भी तोड़ सकने का डर बनाती रहती है ये सत्य है । "

"इसदोस्ती के अनुभव से ये तो साबित हो गया की एक दोस्ती वो होती है जो आमने सामने से होती है उसके बात दूर रहकर भी निभाई जाती है जो अच्छे से चलती भी है और दूसरी ये की दूर रहकर इतनी हद तक आगे बढ़ जाती है की कोल पर बाते करने और आमने सामने मिलने से पेहले ही विचारों के समन्दर मे डूबा देती है ऐसी ही दोस्ती है रुशिका और युग की जो सिर्फ ओनलाइन तक ही सीमित है । "

हा और ये कहानी ये मेरी एक तरफी दोस्ती की फीलिंग में रुशिका को भी नही बताई थी लेकिन अब वो पढ़ सकती है मे ये नही केह रहा हु की इसमें रुशिका की कोई गलती है या मजबूरी है बस जो दोस्ती मे हुआ उसके एक तरफे विचार बता रहा हूँ वैसे भी ये बात एक महीने पुरानी भी है अब रुशिका और युग ये बाते भूल भी जायेंगे । 

अगर फिर कभी " रुशिका मिलना चाहे तो मिल सकती है और अपनी दोस्ती का तीसरा पार्ट बना सकती है लेकिन युग की अब कोई भी आशा नही है चलो दोस्तो चलता हूँ सायद अगले पार्ट मे फिर मिलता हूँ । "