Fan phobia in Hindi Magazine by Shivangi Pandey books and stories PDF | फैनफोबिया

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फैनफोबिया

सेलिब्रेशन और सेलिब्रिटी के तमाशे इतने ऊंचे स्तर पर नही होने चाहिए कि मौत मुद्दा नहीं ब्रेकिंग न्यूज बनकर रह जाए
मौत होगी भी तो किसकी मिडिल क्लास बेवकूफों की, जिनके लिए आप जानवर बने है आप जैसे ही जानवरों के लिए वो bodyguard लेके चलते है वो safe है करोड़पति है और आप क्रिकेट के जुआरी।
लोगों में इतनी चेतना तो होनी ही चाहिए कि भीड़ कहाँ लगानी है
सबसे बड़ी बात , क्यों लगानी है?
फैन हो अच्छी बात है क्यों हो ये सवाल तो अंदर होना ही चाहिए
वैसे भी भारत के युवाओं में जिस तरह से भेड़ बुद्धि का विकास हुआ है शायद किसी और देश में नहीं। मैंने एक बुक में पढ़ा था " जितने जड़ बुद्धि क्रिकेट फैंस भारत में हैं उतने दुनिया के किसी कोने में नही , आज देख भी लिया। एक तरफ लोग मर रहे दर्द से तड़प रहे उसी जगह पर लोग चिल्ला रहे सेलिब्रेट कर रहे जैसे कश्मीर फतह कर लिया हो , किसी भी चीज के क्रेज की एक हद होती है, जो लोग वहां नही जा पाए वो स्टेटस लगा रहे अब आप खुद सोचिए आप दूसरों को दोष देते है संवेदन हीन तो आप खुद भी है

फैन फोबिया का क्रेज इस कदर चढ़ा है लोगों पर को उन्हें सच दिखता ही नही , अपने डिजिटल और डिज्नी वर्ल्ड से बाहर आकर भी देखो । किसी को इतना ज्यादा भी इंपॉर्टेंट मत बना लो कि कुत्तों जैसी मौत भी स्वीकार कर लो, हमेशा याद रखो जितने वो इंसान हैं जिनके आप फैन है उतने आप भी ,  वक्त, और जिंदगी बहुत ज्यादा कीमती है उतना ही कीमती जितनी ये सांसे। आप कस्टमर है यूज भी आप ही होंगे, आपके ही पैसे से वो करोड़पति बनेंगे, आपकी ही फैन फॉलोइंग से फेमस भी होंगे तो कुल मिलाकर केंद्र में आप है, और सबसे ज्यादा इग्नोरेबल भी आप ही है क्योंकि आप अखंड मूर्ख हैं इसीलिए आप नेताओं के लिए महज वोटर्स और सेलिब्रिटीज के लिए अदना सा फैन है यह भूलकर की वो सिर्फ एक एंटरटेनर हैं । कुछ ज्यादा इंपॉर्टेंस हमने ही उन्हें देकर खोपड़ी पर चढ़ा रखा है । ह ह ह ह sorry , क्रिकेट तो मैं भूल ही गई दुनिया में क्लाइमेट चेंज, बेरोजगारी , दूल्हा मर्डर, रेप , AI क्रेज जैसी बड़ी समस्याएं है इनके  लिए भीड़ नहीं लगती । क्रिकेट जो कि एक खेल है उसे ऐसे परोसा जाता है जैसे बॉर्डर पर फौजी और भारत में क्रिकेट दो जगह ही देश प्रेम है प्लेयर्स देश के लिए जान देने को तैयार है और सट्टेबाज उनके साथ आखिरी दम तक है 

मैं ये नही कहती कि क्रिकेट देखना बुरा है या फैन होना बुरा है लेकिन हर चीज का महत्व कैसे होना चाहिए ये पता होना चाहिए और यहां मुद्दा आज कुछ लोगों के मर जाने का नही है ना ही फैन होने को बुरा कहने का, मुद्दा बस इतना है कि हम जिन चीजों को पसंद कर रहे वो जीवन में आपको भी पसंदीदा बना रहे हैं या नहीं और यहां बात खुद के साथ न्याय करने की है। आज हमारे देश में बहुत सी समस्याएं ऐसी है जो देश को खाए जा रही हैं  हमें भीड़ लगाने की जरूरत है आवाज उठाने की जरूरत है चीखने चिल्लाने की जरूरत है सिर्फ उन चीजों के लिए जो देश के विकास में बाधक है हमेशा मिडिल क्लास ही पीसेगा ऐसा कब तक होगा क्योंकि अमीरों के पास इतना टाइम नहीं वो खुद इन सब में इंवॉल्व होकर पैसे बना रहे होते है और गरीब को रोटी दाल कमाने से फुरसत नहीं तो बचे मिडिल क्लास , मिडिल क्लास को अन्न से लेके अन्याय तक , टैक्सी से लेके टैक्स तक , मूक से लेके आवाज तक सबका बोझ लेके घूमना पड़ता है 

विचार करो इंसान हो जानवर नही। 

धन्यवाद 

शिवी