Stree Ka Shrap Part 2 in Hindi Horror Stories by Vedant Kana books and stories PDF | स्त्री का श्राप - भाग 2

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स्त्री का श्राप - भाग 2

5 साल बाद…

गाँव अब भी वैसा ही था — चुपचाप, रहस्यमय, और डर से भरा हुआ। लोग अब वहाँ बसते नहीं थे, सिर्फ पुराने लोग ही बचे थे जो कहीं और नहीं जा सकते थे। गाँव के बीचोंबीच खड़ा वह पीपल का पेड़ अब भी वैसा ही था — भय और रहस्य का प्रतीक।

लेकिन अब एक नई कहानी की शुरुआत होने वाली थी...

राघव — एक यूट्यूब वीडियो ब्लॉगर और पैरा-साइकोलॉजी का छात्र — अपने चैनल “Haunted Truths” के लिए भारत के सबसे डरावने गाँवों की खोज कर रहा था। उसे लक्षिता वाले गाँव की कहानी पता चली।

“ये सिर्फ अफवाहें हैं,” उसने सोचा। “अगर वहाँ सच में कुछ है, तो मैं उसे कैमरे में कैद करूंगा।”

राघव अपने कैमरे, टॉर्च और उपकरणों के साथ गाँव पहुँचा। गाँव वाले उसे देखकर डर गए।
“मत जा उस पेड़ के पास… वो आज भी वहीं है,” बूढ़े हरिप्रसाद ने चेताया।

लेकिन राघव नहीं माना।
उस रात, वह अकेला ही पीपल के पेड़ के पास गया।
कैमरा ऑन किया, और बोलने लगा, “मैं यहाँ हूँ — उस आत्मा से मिलने, जिसका नाम लक्षिता था। अगर तुम सच में हो, तो सामने आओ।”

हवा अचानक तेज़ हो गई। पत्तियाँ बवंडर की तरह उड़ने लगीं। टॉर्च खुद-ब-खुद बंद हो गई।

फिर एक धीमी सी हँसी गूंजी…
“तुम यहाँ क्यों आए हो?”
राघव चौंका। कैमरा अब भी चल रहा था, पर उसमें बस धुंध और लाल रोशनी दिख रही थी।

सामने एक आकृति उभरी — लाल साड़ी, जलता चेहरा, और खून से भरी आँखें।

लक्षिता!

“मैं... मैं तुम्हारी कहानी सबको दिखाना चाहता हूँ,” राघव बोला कांपते हुए।
लक्षिता ने करीब आकर कहा, “अगर सच्चाई चाहिए, तो दर्द भी सहना होगा।”

राघव बेहोश हो गया। जब उसकी आँख खुली, तो वह गाँव की पुरानी चौपाल में था — जहाँ कभी लक्षिता को मारा गया था।
वहाँ उसे पूरा अतीत दिखाई देने लगा — जैसे टाइम ट्रैवेल हो रहा हो। उसने देखा कि कैसे गाँववालों ने निर्दोषों को मारा, कैसे बलराज ने षड्यंत्र किया, और कैसे लक्षिता की आत्मा बनी।

राघव की आँखों में आँसू थे।
“तुम्हारे साथ अन्याय हुआ। लेकिन मैं वादा करता हूँ, अब सबको सच्चाई बताऊंगा,” वह बोला।

लक्षिता ने सिर हिलाया और कहा, “अगर तेरा दिल साफ है, तो मैं तुझे छोड़ रही हूँ… लेकिन जो भी झूठ बोलेगा, धोखा देगा — वो नहीं बचेगा।”

अगली सुबह, राघव बेहोश अवस्था में पेड़ के पास मिला। कैमरा अब भी चालू था — और उसमें सारी रिकॉर्डिंग सुरक्षित थी।

राघव ने गांव से निकलकर वीडियो को दुनिया के सामने अपलोड कर दिया।
वीडियो वायरल हो गया। लोगों ने लक्षिता की कहानी सुनी, उसे न्याय दिलाया। गाँव में अब एक स्मारक बना — “लक्षिता स्मृति स्थल”

गाँव में शांति लौट आई… लेकिन…

रात को उस स्मारक के पास खड़े एक छोटे बच्चे ने अपनी माँ से पूछा —
“माँ, वो लाल साड़ी वाली दीदी रोज रात यहाँ खड़ी क्यों रहती है?”

माँ ने काँपती आवाज़ में कहा —
“वो अब भी देखती है… कौन सही है, कौन ग़लत।”

(6 महीने बाद)

लक्षिता की आत्मा की कहानी पूरे देश में फैल चुकी थी। लोग अब उसे "भूत" नहीं, बल्कि "संरक्षक आत्मा" कहने लगे थे। गाँव में थोड़ी-सी रौनक लौटने लगी थी। लेकिन शांति ज्यादा दिन टिक न सकी...

गाँव के पास के जंगल में एक नई समस्या जन्म ले रही थी। लोगों की गाय-भैंसे गायब होने लगीं। बच्चों के गले पर अजीब नाखूनों के निशान दिखते। औरतों को रात में कोई साया घसीटने लगता।

पुराने तांत्रिक "महंत तेजा बाबा" ने घोषणा की,
"यह कोई सामान्य आत्मा नहीं... यह 'चुरैलिन' है — और इसका जन्म उस बुराई से हुआ है जो लक्षिता के अन्याय से भी गहरी है।"

राघव को फिर बुलाया गया। वह फिर से कैमरा लेकर गाँव पहुँचा।

जैसे ही वह उस बरगद के पास गया, एक तीखी हवा चलने लगी। हवा में लक्षिता की आवाज़ आई —
"राघव… यह नई आत्मा मेरी नहीं… यह रक्त की प्यास लिए आई है…"

राघव समझ गया — अब लक्षिता अकेली नहीं थी, एक और ताकत उसके क्षेत्र में आ चुकी थी।

रात के तीसरे पहर, गाँव के मंदिर के पास चुरैलिन प्रकट हुई — उसका चेहरा आधा सड़ा हुआ, बाल ज़मीन तक लटकते, और ज़ुबान सर्प की तरह फड़फड़ाती।

उसने गाँव की एक बच्ची को उठाने की कोशिश की… तभी लाल साड़ी लहराई और एक जलता हुआ प्रकाश चमका — लक्षिता आ गई थी।

चुरैलिन चिल्लाई —
"तू मुझे रोक नहीं सकती!"

लक्षिता गरजी —
"तेरा आतंक अब खत्म होगा!"

गाँव की मिट्टी थर्रा उठी। आसमान लाल हो गया। दोनों आत्माएँ आमने-सामने थीं।
पेड़ों की शाखाएं टूटने लगीं, मंदिर की घंटियाँ खुद बज उठीं।

लक्षिता के हाथ में आग की लपटें थीं, और चुरैलिन की आँखों से ज़हर टपक रहा था।

आधी रात तक दोनों के बीच भीषण युद्ध हुआ। राघव कैमरे में सब रिकॉर्ड कर रहा था, लेकिन उसकी आँखें डर से फटी रह गईं।

अंत में, लक्षिता ने अपनी शक्ति को एक मंत्र में समेटा —
"जो अधर्म से जन्मा, वो धर्म की अग्नि में भस्म होगा!"

और फिर उसने चुरैलिन को पीपल के पेड़ में बंद कर दिया — एक नई ताबीज़ के साथ।

अंत… या अगली चेतावनी?

सुबह गाँव वालों ने देखा कि पीपल के पेड़ के नीचे अब एक चमकती ताबीज़ बंधी हुई थी, और हवा में एक सुगंध थी — जैसे किसी देवी का वास हो।

राघव ने वीडियो अपलोड किया और उसका नाम रखा —
“Stree Returns: The War of Spirits”

लोगों ने लक्षिता को अब "रक्षक देवी" मान लिया। गाँव के बच्चों ने उसके नाम से मंदिर बनवाया।

एक बच्चा मंदिर की ताबीज़ छूता है… और अचानक ताबीज़ पर एक दरार आ जाती है…