Jhutha Pyar - 1 in Hindi Drama by Md Siddiqui books and stories PDF | झूठा प्यार - 1

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झूठा प्यार - 1

गांव का ग़रीब लड़का

लेखक: मो. इब्रार प्रतापगढ़ी


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इस कहानी का हीरो एक गांव का सीधा-सादा गरीब लड़का है।
उसके घर में मम्मी, पापा, भाई और बहन सभी हैं।


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शुरुआत

हीरो अपने मोहल्ले का चहेता है।
उसे सब प्यार करते हैं।
लड़कियाँ उसे बहुत पसंद करती हैं।
वह सबके साथ मज़ाक-मस्ती करता है, हमेशा खुश रहता है।
लेकिन उसके पापा रोज़ चार गाली देते हैं, वहीं मम्मी बहुत प्यार करती है।

अब उसे काम करना था।
वह शहर की एक कंपनी में इंटरव्यू देता है और सेलेक्ट हो जाता है।
वह बहुत खुश होता है।


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कंपनी की शुरुआत

कंपनी में 40 लोग काम करते हैं।
हीरो का पहला दिन – बॉस थोड़ा कठिन काम देता है लेकिन हीरो बहुत ईमानदारी से काम करता है।
धीरे-धीरे 1 महीना गुजर जाता है।
बॉस को उसका काम बहुत पसंद आता है, जिससे उसे अवॉर्ड मिलता है।


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लड़की की एंट्री

अगले दिन कंपनी में एक बहुत खूबसूरत लड़की इंटरव्यू के लिए आती है और वह भी सेलेक्ट हो जाती है।
(लड़की एक दूसरे गांव की है, जो बहुत गरीब है। उसके पापा बीमार रहते हैं और भाई कुछ काम नहीं करता।)

लड़की कुछ दिन तक ठीक से काम करती है।
फिर बॉस और असिस्टेंट बॉस दोनों उस लड़की के दीवाने हो जाते हैं।
बॉस उसे ऑफिस में बुलाता है, बात करता है।
छोटे बॉस को बहुत गुस्सा आता है।

हीरो इतना काम करता है कि कंपनी में सब उसे बहुत इज्जत और प्यार देने लगते हैं।
कुछ लोग उससे जलने भी लगते हैं।

लड़की कभी-कभी हिरोइन बनकर आती है, कभी मॉडर्न बनकर, जिससे दोनों बॉस के दिमाग में बस वही लड़की रहती है।


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पावर और जलन

छोटा बॉस इतना गुस्से में आ जाता है कि बड़े बॉस की नौकरी खा जाता है — हेड ऑफिस में कंप्लेन करके।
अब छोटा बॉस बन गया बड़ा बॉस।

जब भी उसके मन होता, लड़की को ऑफिस में बुलाता और छेड़छाड़ करता।
लेकिन कंपनी में बहुत सारे वर्कर थे, इसलिए ज़्यादा कुछ नहीं कर पाता।


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लड़की की मजबूरी

लड़की अकेले में रोज़ रोती और सोचती — अगर जॉब छोड़ दी, तो घर वालों का क्या होगा?
इसलिए सब बर्दाश्त करती रहती है।

एक दिन छोटे बॉस ने लड़की को फोन किया और ब्लैकमेल किया —
“आज तुम मुझसे अकेले में मिलो, नहीं तो नौकरी से निकाल दूंगा।”

लड़की रोती हुई ऑफिस आई।
सबने पूछा क्या हुआ?
पर उसने कुछ नहीं बताया।
उसने अपने दोस्तों से कहा — “आज हम साथ घर चलेंगे।”


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हीरो की एंट्री

अगले दिन हीरो हमेशा की तरह अपनी मस्ती में काम करता है।
लड़की फिर ऑफिस आई, बॉस ने फिर वही ब्लैकमेलिंग शुरू की।

अब लड़की ने अपने दोस्तों को सारी बात बताई।
लेकिन किसी को अपनी नौकरी प्यारी थी।

किसी ने कहा — “हीरो की पहुंच ऊपर तक है, वही मदद कर सकता है।”

लड़की ने हीरो को रोते हुए सब बताया।
हीरो ने हेड ऑफिस में फोन करके कंप्लेन की।

कुछ दिन सब नॉर्मल रहा।


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हीरो फँसता है – और फिर पलटवार

फिर हीरो पर चोरी का इल्ज़ाम लगाया गया।
हेड ऑफिस से लोग आए, जांच हुई और हीरो निर्दोष साबित हुआ।

पर हीरो अगली सुबह बॉस के घर गया और उसे बहुत पीटा – फुल एक्शन!
बॉस इतना मार खाने के बाद शर्मिंदा हो गया और नौकरी छोड़ दी।


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प्यार और रोमांस

हीरो और लड़की में दोस्ती हुई।
धीरे-धीरे प्यार हुआ, रोमांस हुआ।

🎵 गाना
अब दोनों कंपनी में काम कम, रोमांस ज़्यादा करते थे — कभी ऑफिस में, कभी पार्किंग में — फुल मस्ती।

कंपनी में दो नए बॉस आ गए, सब नॉर्मल हो गया।
बड़े बॉस को सब मालूम था लेकिन उन्होंने कुछ नहीं कहा।


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बड़ा मौका और दूरियाँ

कंपनी में एक दिन ऐलान हुआ — जो सबसे अच्छा कर्मचारी होगा, उसे ट्रेनिंग के लिए हेड ऑफिस भेजा जाएगा।

बॉस ने हीरो को चुना।
हीरो तैयार हो गया, अपनी हिरोइन से मिला और चला गया।

कुछ दिन बाद छोटा बॉस (पहले वाला) वापस आया — और उसने लड़की को प्रपोज़ कर दिया।
लड़की लालच में आकर "हाँ" कर देती है।
अब दोनों मिलने लगे, बातें करने लगे, साथ में लंच करने लगे।


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हीरो का दिल टूटता है

हीरो जब लौटा, तो उसे सब मालूम चला।
वह घर जाकर बहुत रोया, सब सामान तोड़ दिया, चिल्लाया।

दो दिन बाद कंपनी गया लेकिन किसी से बात नहीं की।
बस अपना काम करने लगा।

लोग उसका मज़ाक उड़ाने लगे।
हीरो परेशान हो गया।


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नौकरी छोड़ने का फैसला

अब हीरो ने तय कर लिया — नौकरी छोड़ देगा।

उसने रिज़ाइन लेटर बड़े बॉस को दिया और बोला —
“हम ये नौकरी अब नहीं कर सकते।”

बॉस ने मीटिंग बुलाई और लड़की से बोला —
“अगर नौकरी छोड़नी है तो दोनों छोड़ो, नहीं तो कोई नहीं जाएगा।”

तभी किसी ने कहा —
“सर, मैंने सुना है लड़की का अफेयर छोटे बॉस से चल रहा है।”

हीरो गुस्से में आ गया।
बॉस ने कहा —
“जिसने तुम्हारे बुरे वक्त में साथ दिया, तुम उसी को धोखा दे रही हो?
दोनों रिज़ाइन दो और घर जाओ।”

हीरो बोला —
“सर, ये बहुत गरीब घर की है, दूर से आती है — कहाँ जाएगी?
मैं अपना रिज़ाइन लेटर वापस लेता हूँ।”


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अंतिम फैसला

सब लोग अपने काम पर लग गए।
दो दिन बीते।

तीसरे दिन फिर वही शुरू — सब लोग हीरो का मज़ाक उड़ाने लगे।
हीरो बहुत ज़्यादा परेशान हो गया और फैसला किया —
जिस दिन लड़की नहीं आएगी, उसी दिन नौकरी छोड़ दूंगा।

और वो दिन आ ही गया — लड़की नहीं आई।
हीरो ने हँसते हुए नौकरी छोड़ दी और कभी उस लड़की को मुड़कर नहीं देखा।


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अंतिम पंक्तियाँ

या तो लड़की ग़लत थी... या उसके पास मज़बूरी थी।
लेकिन ये कहानी सच्ची है।


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आगे की कहानी जाननी है तो मैसेज करें...