एक खत तेरे नाम रिफा in Hindi Fiction Stories by MASHAALLHA KHAN books and stories PDF | एक खत तेरे नाम रिफा

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एक खत तेरे नाम रिफा

आज आरिफ के लिए बहुत खास दिन था आज वो अपने दिल की बात उस लड़की को बताने वाला था जिससे वो बेहन्ताह मौहब्बत करता था वो उस लड़की को बचपन से ही पसंद करता था वो लड़की उसके घर से ही थोड़ी सी दूर रहती थी स्कूल से ही दोनो की दोस्ती हुई फिर कालेज मे भी साथ रहे दोनो बहुत करीब थे पर कभी कोई अपने दिल की बात एक दूसरे को नही कहे पाया मगर आज आरिफ ठान चुका था अपने फीलिंगस रिफा को बताकर रहेगा !जी हां वो लड़की रिफा थी जिसके लिए आरिफ अपनी दोस्ती से आगे बढ़ कर उसे अपने दिल की बात बता देने वाला था इस वक्त का उसे बहुत बेसबरी से इन्तेजार था वो दिन आ ही गया आज उसे खुशी भी इस दिन के लिए मगर एक डर भी था वो डर रहा था कैसे खुदको सम्भालेगा अगर रिफा उसको रिजेक्ट कर देती है तो कैसे सह पायेगा ये उसके लिए आसान नही था पर उसे करना था और इसके लिए वह पूरी तरह तैयार था

फिर जाने लिए तैयार होने लगता है उसकी लक्की वाइट शर्ट बलू जिन्स वाइट एंड बलेक शेड शूज और उसके अब्बा का आखरी दिया गया गिफ्ट वो घड़ी जिसे पहन कर वो तैयार था चलने के लिए फिर वह अपनी बाइक निकाल कर चल पड़ता है दिल्ली की तंग गलियों से होते हुए वह पहुंच जाता है सलमान भाई के कॉफी शॉप पर 

  (द अल्फ कॉफी शॉप )

जहा वह अक्सर जाया करता था सलमान भाई जो उर्म मे आरिफ से बड़े थे पर उनका मिजाज एक दम दोस्ताना था वो आरिफ को अपना छोटा भाई मानते थे वो जानते थे आरिफ रिफा को बहुत चाहता है रिफा भी उनकी कॉफी शॉप पर अक्सर आरिफ और उनके दोस्तो के साथ आया करती थी उन्होंने कई बार आरिफ को अपनी मौहब्बत का इजहार करने के लिए कहा लेकिन वो हमेशा टाल देता था मगर आज उन्हे भी खुशी थी ये जानकर आरिफ रिफा को प्रपोस करने वाला है वैसे अक्सर लड़के लड़की उनकी कॉफी शॉप पर एक दूसरे को प्रपोस करते थे और कभी कभी तो शादी के लिए भी प्रपोस करते थे पर आज उनके दोस्त छोटे भाई की आरिफ के लिए बहुत खुशी हो रही थी और इस लिए आज उन्होंने आरिफ के आने बाद शॉप पर कलोजिंग ब्रोड लगा दिया था अर वो खुद भी दूसरी शॉप मे जाने की तैयारी कर रहे थे जब तक रिफा ना आ जाए शॉप पर सिर्फ एक दो ही वेटर थे आज बाकी छुट्टी पर गये थे .

आरिफ कॉफी शॉप मे दाखिल होता है सबसे पहले वह सलमान भाई को सलाम दुआ करता है वह उसे आल दा बेस्ट कहते है फिर वह हमेशा की तरह कार्नर वाली टेबल पर जाता है जहा से बहार के शोर शराबे से दूर एक शांत जगह थी वहा जाकर अपनी सीट पर बैठ जाता है और इन्तेजार करने लगता है रिफा के आने का और उसका इन्तेजार ज्याद वक्त नही रहता है 

कुछ वक्त बाद उसको रिफा आती दिखाई देती है जो पहले सलमान भाई को सलाम करके आरिफ को देखकर उसकी टेबल ओर चली आती है और आरिफ को हाय हैलो बोल कर उसके सामने रखी कुर्सी पर बैठ गई वह हमेशा की तरह खुबसूरत लग रही थी पीले रंग का सलवार सूट सिर पर दुप्पटा एक हाथ मे लाल रंग की चुड़िया दूसरे हाथ मे घड़ी उसकी पसंदीदा घड़ी चहरे पर बहुत हल्का मेकअप होठो पर लाइट पिंक कलर की लिपिस्टिक उसके खुले हुए बाल उसकी खुबसुरती को बया कर रहे थे लेकिन फिर भी उसे देखकर लग रहा था शायद थोड़ी असमंजस मे है

 कुछ देर दोनो एक दूसरे को ही देखते रहे इस दौरान उनके बीच कोई बात नही हुए वेटर आये कॉफी का ओडर लिया कॉफी और कुछ स्नेकस सर्व करके चले गये आज कॉफी शाँप खाली पड़ा था उन दोनो के अलावा कोई नही था वो दोनो वेटर भी स्टाप रूम मे चले गए .

इस दोरान उन दोनो बीच बस खामोशी थी मगर दोनो एक दूसरे को कुछ कहना चाहते थे लेकिन फिर भी दोनो खामोश थे और इस खामोशी को आखिर आरिफ ने ही तोड़ा .

आरिफ : मै तुमसे कुछ कहना चाहता हूं रिफा !

रिफा जो अभी गुमसुम सी थी वो जानती थी कि आरिफ उसे क्या कहना चाहता है आरिफ के बोलते ही उसने अपनी पलके बन्द की उसकी आंखे नम हो गई .

रिफा : ( नम आंखों से ) चुप रहो प्लीज मै जानती हू तुम क्या कहना चाहते हो मै जानती हूँ तुमने मुझे यहा क्यू बुलाया है मैंने कल तुम्हारी आंखो मे देख लिया था जब तुम ने काँफी शॉप मे मिलने को कहा मे जानती हूं ये जगह खास है तुम्हारे लिए तुम अपनी जिन्दगी के कुछ खास डिसीजन यही आकर लेते हो और मैं यह भी जानती हूं तुम  चाहते हो मुुुझसे हमारे लिए पर मे यह नही कर पाऊंगी प्लीज मुझे माफ कर दो आरिफ मे अपना खास दोस्त नही खोना चाहती !

आरिफ जो अभी थोड़ा उत्साहित था वो उदास हो गया वह रिफा की नम आंखों को देखते हुए पूछता है .

आरिफ : पर क्यो नही रिफा पर क्यू? तुम जानती हो ना कितने मुश्किल से खुद को तैयार किया कितना वक्त लगा यहा तक मुझे आने मे और मे ये भी जानता हूं तुम मुझे दोस्त से बढ़कर मानती हो तो प्लीस बताओ मुझे कि मे तुम्हे क्यू नही चाह सकता तुम्हे  क्यू नही खुदा के लिए बताओ रिफा .

रिफा कुछ देर चूप रही टेबल पर रखे पानी के गलास को देखती रही फिर उसने अपने आप को समेटकर वो कहा जिसे सुनकर आरिफ टूट गया .

रिफा : क्यूंकि मै किसी ओर से भी मोहबबत करती हूँ आरिफ कोई और भी है जो मेरे दिल मे धड़कता है जिससे मैने बेपनाह मोहब्बत की है .

आरिफ रिफा की बात सुन कर सून सा हो गया मानो उसकी रगो मे खून ने दोड़ना बन्द कर दिया हो उसका दिल उसकी धडकने थम सी गई थी दिल टूट गया था उसके लिए सब खत्म हो चूका था उसके आस पास किसी चीज का वजूद ही ना रहा उसकी से आंसू बहने लगे जो कभी अपने अब्बा की मौत पर भी नही रोया आज वो बेतहाशा रोये जा रहा था वो अन्दर ही अन्दर चीखे जा रहा था उसकी दुनिया खत्म हो गई उसे लग रहा था दल दल मे फस गया जो उसे नीचे ही खीचे चला जा रहा था जो हाथ उसको बचा सकता है वो हाथ किसी और की तरफ जा रहा थेआरिफ ने खुद को सम्भाला फिर रिफा से पूछता है

आरिफ : तो क्या तुम मुझे पसंद नही करती तो क्या तुम्हारे दिल मे मेरे लिए कोई जगह नही है तो इताने साल हम दोनो साथ रहे क्या तुम्हारे दिल मे थोड़ी भी फिलिंग नही आयी मेरे लिए क्या बस हम सिर्फ दोस्त थे सिर्फ दोस्त इससे बढ़कर कुछ नही तुम्हारे लिए .

रिफा : ऐसा कुछ नही है आरिफ तुम मेरे दोस्त से बढ़कर होएक ऐसा दोस्त जो मेरे साथ है मेरे करीब है जो मुझे दिल से पसंद करता जिसका दिल साफ है जो मुझे समझता है जो मेरी फिक्र करता है ऐसा नही है आरिफ मे तुम्हे पसंद नही करती मै तुम्हे बहुत पसन्द करती हू तहे दिल से पसंद करती हूं मै तुम्हे अपना मानती हूं लेकिन कोई और भी है जिसे मे तुमसे ज्यादा पसंद किया है जो मेरे दिल मे बसता था जिससे मिलने को मै आज तरसती हू जो मुझसे दूर है पर मेरे बहुत करीब है मेरे अहसास मेरी निन्द मेरे ख्वाब मै रहा है वो तुमसे मिलना मेरा मुक्ददर है उससे मिलना एक इतेफाक था तुम्हारे साथ रहना तुम्हारे साथ हंसना तुम्हारे साथ खाना वक्त बिताना मुझे बहुत पसन्द है मै हमेशा तुम्हारे साथ खुश रहती हूं पर वो है जिसने मुझे खुश रहना सिखाया मुझे जीना सिखाया जिसने मेरी उदास को मुस्कराहट मे बदल दिया मेरे निन्दो को ख्वाबो मे बदल दिया उसने मेरे दिल की धड़कनो को जिन्दा किया है उसने मुझे नयी जिन्दगी दी है . मगर मै तुम्हे भी छोड़ नही सकती तुम मेरे लिए बहुत खास हो आरिफ लेकिन मै तुम्हे कहना 

आरिफ : लेकिन क्या रिफा ये ही की तुम मुझसे मोहब्बत करती हो पर कोई और भी है जिससे तुम ज्यादा मोहब्बत करती हो यही कहना चाहती होना तुम्हारे अल्फाज मे वो दर्द मुझे साफ दिख रहा है रिफा वो दर्द जो मेरे लिए है पर उस दर्द का हिस्सेदार कोई और भी है अर वो कोई और मुझसे ज्यादा है ये बात मुझे और ज्यादा परेशान कर रही है रिफा मे खुद को सम्भालु कैसे बताओ ना

रिफा : मैंने ऐसा नही कहा आरिफ मेरा वो मतलब नही है

आरिफ : तुम्हारा मतलब कुछ भी हो मगर कोई ओर तो है ना जिसे तुम चाहती हो चलो ठीक है तो बताओ फिर कौन है वो शक्स ? जिसने मेरी खुशियो पे ढाका डाला है जिसने मेरी रूह को मुझसे से जुदा किया जिसने मेरे दिल को टुकडो मे काटा है जिसने मेरे ख्वाबो को मुझसे छिन लिया  आखिर कौन है वो शक्स रिफा जो मुझसे ज्यादा तुम्हारी मोहब्बत का हकदार है ?

रिफा आरिफ की बाते सुन रही थी उसके भी आंसू बहे जा रहे थे फिर कुछ वक्त खामोश रही और फिर आरिफ की ओर देखकर .

रिफा : नही पता कौन है वो कहा रहता है कैसा दिखता है क्या करता बस इतना पता है वो मेरे दिल मे बसा है मेरे ख्वाबो मे आता है मेरे अहसास मे रहता है .

आरिफ : ये क्या मजाक है रिफा तुम मेरे साथ कोई खेल खेल रही हो क्या जिस शक्स को तुम मुझसे ज्यादा चाहती हो उस शक्स को तुम जानती तक नही उस शक्स को देखा तक नही और फिर भी मुझसे ज्यादा तुम्हारी मोहब्बत का हकदार है वो कैसे रिफा कैसे चाह सकती हो ऐसे शक्स को .

रिफा : मैने ये नही कहा वो मेरी मोहब्बत का हकदार तुमसे ज्यादा है तुम जानना चाहते हो आरिफ तो ठीक है मे बताती हूं कैसे चाह सकती हूं एक अनजान शक्स को जिसे मैंने देखा तक नही जिससे मै मिली भी नही .

रिफा : ये तब शुरू हुआ था जब मै 10 th मे थी वो वक्त मेरे लिए मुश्किल भरा था मेरी एक दोस्त थी अनम हम बहुत छोटे थे तब से दोस्त थे हमारी दोस्ती बहुत गहरी थी उसके अलावा कोई मेरा दोस्त नही था तब हम हमेशा साथ ही रहती थे साथ खेलते थे मेरा पूरा दिन उसके घर मे उसका मेरे घर मे गुजरता था पर वो वक्त मेरे लिए बहुत मनूस था एक बिमारी ने उसे मुझसे छिन लियामेरी प्यारी दोस्त अनम को उसके इन्तेकाल बाद मै अकेली हो गई मेरा कोई और दोस्त नही था उसी दोर मे अब्बा को नोकरी से निकाल दिया गया था उन दिनो अब्बा बहुत गुस्सा रहते थे अम्मी से उनका झगड़ा लगातार हो रहा उनकी झगड़े लगातार बढ़ रहे थे और मैं इन सब मे पीसी जा रही थी उनके लड़ाइयो से मे सदमे मे रहती थी मै स्कूल आती गुम सूम रहती अगर कोई तेज आवाज मे कुछ कहते तो मै सहम जाती घर जाती तो घर के हालात बदतर हो गये थे मै इसके चलते बीमार होती जा रही थी ना अम्मी को मेरी फिक्र थी ना अब्बा को उन्हे तो बस अपनी पड़ी थी और फिर एक दिन आया मे होस्पीटलाईज हो गई दो दिन तक मे होस्पीटल मे थी लेकिन अब्बा और अम्मी के होने के बाद भी मुझे कोई सम्भालने वाला नही था इस बीच अब्बा को नयी नौकरी भी मिल गई थी लेकिन झगड़े कम नही हुए मेरे घर आने के बाद भी वो ही हालात थे ना तो मेरा उस वक्त कोई दोस्त था ना कोई ऐसा जिसे मै अपना दर्द बाट सकू मे अकेले रोती रहती थी स्कूल जाती और घर आती थी लेकिन मेरा दिल बेचेन रहता मै क्या करूं समझ नही आता था खुदा से दुआ मांगती रहती और बस कुछ नही कर सकती थी .और फिर वो एक दिन आया जिस दिन अब्बा ने मुझ पर हाथ उठा दिया था मै बहुत रोई अम्मी ने मुझे तसल्ली दी लेकिन उसमे भी मुझे मा का वो प्यार नजर नही आया मे अपने आप को बहुत बद किस्मत समझने लगी  मै बहुत रोई उस दिन मै स्कूल भी नही गई पूरा दिन बस अपने कमरे पड़ी रही खाने का एक निवाला तक नही नही खाया था मैंने अपने आप खत्म करने का सोच लिया था उस दिन शाम को अपनी सारी दवाई जो कई रोज से खा रही थी उनको लेकर अपनी छत के उपर बने छोटे से बागीचे के पास आई मै उस वक्त सारी दवाई एक साथ खाने वाली थी जो शायद मुझे मारने के लिए काफी थी मै उन दवाईयो एक जगह कर रही थी कि तभी मुझे गमले मे कुछ रखा हुआ दिखा मै उस गमले की ओर गई मुझे उसमे एक लिफाफा दिखा मैंने उस लिफाफे को उठाया और फिर उसे खोला तो उसमे एक चोकलेट और एक लेटर था मैंने उस लेटर को पड़ा तो सबसे उपर मेरा नाम लिखा था .

लेटर - प्रिय रिफा . . . मै जानता नही के किसी को खत कैसे लिखते है ये मै पहली बार लिख रहा हूं वो भी तुम्हारे लिएमै जानता हूं कि तुम बहुत उदास हो शायद तुम्हारी जिन्दगी बहुत बुरे दोर से गुजर रही है मे जानता हूं तुम अपने आप को हर दिन खो रही हो मुझे पता है कि तुम इस दोर अपने आप को अकेला महसूस कर रही हो मै ये भी जानता हूं कि तुम्हारा इस वक्त कोई दोस्त नही जिसे तुम अपना दर्द बता सको जिसके कांधे पर सर रख कर रो सको जो तुम्हारा साथ दे सके इस बुरे वक्त मे मुझे नही पता तुम्हे क्या परेशानी है तुम किस लिए दुखी हो क्यू इतना परेशान हो मै नही जानता पर मै तुम्हे उदास परेशान और यू बिमार नही देख सकता मैंने अभी एक खास शक्स को खोया है जिसे मै बहुत नफरत करता था जिसकी मे शकल तक नही देखना चाहता था लेकिन उस शक्स को खोकर मे आज पसता रहा हूं जानती हो वो शक्स मेरे अब्बा थे जिससे मेने आज तक नफरत की जिससे हमेशा दूर भागता था लेकिन वो हमेशा मेरे करीब थे अब जाकर पता चला मुझे उन्हे खोने के बाद और अब एक और शक्स है मेरी जिन्दगी मे वो तुम हो रिफा मुझे नही पता तुम क्या सोचोंगी ये खत पड़ कर मेरे बारे मे पर एक चीज है जो तुम्हे बता देना चाहता हूं मे रिफा और वो है तुम्हारे चहरे पर उदासी अच्छी नही लगती तुम्हे यू गुम सुम देखना मुझे पसंद नही है तुम्हारा खिला चेहरा तुम्हारी मुस्कान मुझे पसंद है और तुम अकेली नही हो मे तुम्हारे साथ हूं तुम्हे जब भी जरूरत होगी मेरा एक खत तुम्हारे गमले मे मिलेगा और हा अब अपने आंसू पोहचो और नयी शुरुआत करो ये तो अच्छा बुरा दोर आता ही रहेगा क्या हमेशा रोती ही रहोगी अकेली मत रहो चलो कुछ दोस्त बनाओ और हमेशा खुश रहो

खुदा हाफिज .  

अब और उदास तुम मत रहना

अब मैं हूं तुम्हारे साथ यही कहना

तुम्हारा एक दोस्त एक साथी . . .

उस खत को पढ़कर मै कुछ देर सोचती रही आखिर कौन है ये शक्स जो मुझे जानता है जो मुझे उदास नही देख सका क्या मे उसे जानती हूं क्या मैंने उसे देखा है आखिर ऐसे कौन लिख देता है किसी के बारे पर जो भी था मगर उस लेटर को पढ़कर मेरे दिल को थोड़ी राहत मिली मै अपने आप को खत्म कर देना चाहती थी उस एक लेटर ने मुझे रोक लिया मैंने उन दवाईयो को इक्कठा कर कूड़े मे डाल दी और फिर मैंने अपनी जिन्दगी की एक नयी शुरूआत की मैंने अपने आप को बदल दिया मैंने अपने नये दोस्त बनाने लगी और मेरे पहला दोस्त तुम थे आरिफ और उसके बाद कई दोस्त बने उसके बाद भी अम्मी अब्बा के झगड़े होते थे लेकिन मेने अपने आप को इन सब चीजो से दूर कर लिया और फिर मे एक अलग इन्सान बन गई मै अपने आप को सम्भालना सीख गई और मै खुश रहने लगी .

लेकिन एक चीज जो सबसे खास थी मेरी जिन्दगी मे वो खत जो मुझे जब जरूरत होती थी वो आते थे और मुझे मेरी उदासी मेरी परेशानी मेरे बूरे हालात से हमेशा बाहर निकलते थे मुझे हंसाते थे मुझे नयी उम्मीद दिखाते थे .

यहा तक अम्मी अब्बा के तलाक के बाद भी मे उसी घर मेजो अम्मी के नाम था वही रही वो वक्त भी बहुत बुरा था मेरे लिए लेकिन उन खतो ने मुझे उस दौर से भी बाहर निकाल दिया मै अहसान मंद थी और खुशकिस्मत भी ऐसा कोई था जो मेरी कद्र करता था जो मेरे साथ भले ही खतो के जरिये था पर वो था

 और मुझे पता ही नही चला कब उस शक्स से इतनी मोहब्बत हो गई जिसे मेने सिर्फ उन खतो की वजह से जाना है उसका दिल कैसा है वो किस तरह का इंसान होता होगा वो बहुत रहम दिल होगा उसकी छोटी-छोटी बाते मेरे दिल मे घर बनाने लगी मै दिन रात उसी के सपने देखने लगी मैं उसको मिलना चाहती थी मै उसे देखाना चाहती थी उसे छूना चाहती थी उसके गले लगाना चाहती थी उसे अपनी मौहब्बत के बारे मे बताना चाहती थी पर मैं कभी नही कर पायी ना उसे देख पायी ना उसे सुन पायी ना उसे छू पायी ना उसके गले लग पायी और अपनी मौहबबत कभी उसे बया ना कर पायी .

मैंने उसे ढूढ़ने की बहुत कोशिश की मैंने उसे हर जगह ढूढ़ा अपने मोहल्ले मे अपने स्कूल मे अपने कोलेज मे रिलेटिवस मे यहा तक कि मेने तुम्हे भी वो समझा आरिफ मैंने स्कूल मे तुम्हारी नोटबुक ली उससे उन खतो से हैंडराइटिंग मिलायी मगर वो तुम नही थे

‘ मेरा दोस्त मेरा साथी ‘मुझे नही पता वो क्यू मुझसे नही मिलना चाहता था क्यू मुझे अपने आप को नही दिखाना चाहता था पर एक बात थी वो भी मुझसे बेहन्ताह मोहब्बत करता था उसके लिखे हर लफ्ज ये ही बया करते थे उसकी लिखी हर बात ये इशारा करती थी वो कितना चाहता है मै उसकी जिन्दगी मे क्या मायने रखती हूँ मै उसके दिल की आवाज उन खतो के जरिये महसूस करती थी

मगर वो मिलना नही चाहता था या वो तैयार नही था मुझसे रूबरू होने के लिए  मगर मे उससे मिलने के लिए पागल होई जा रही थी मै उससे मिलने की हर मुमकीन कोशिश कर रही थी

मै अपने आप को छिपाकर उस छत के बागीचे पर नजर रखने लगी मैंने कई रोज इन्तेजार किया लेकिन कोई लेटर नही रखने आया मै उदास थी पर मुझे उम्मीद थी वो शक्स जरूर मेरे लिए लेटर लेकर आयेगा और मै इन्तेजार करती रही रात दिन

और वो वक्त आ गया जिसका मुझे इन्तेजार था सर्दी के दिनो मे एक शाम वो शक्स मुझे दिखा और मेरी सांसे थमने लगी मेरी धड़कने बडने लगी जिस शक्स को मे इतने वक्त से तलाश करती रही वो मेरे सामने था मै उससे दूर जीने पर बैठी थी मेरी नजार उधर बागीचे की ओर गयी मैंने देखा उस शक्स को वो ग्रीन हुड़ी मे उसने काले रंग की पेंट पहनी थी उसके जूतो रंग सफेद था उसने हुड़ी के केप को उड़ रखा था उसकी पीठ मेरी तरफ थी मै उसका चेहरा नही देख पायी मैंने उसे बहुत जोर से पुकारा उसने मेरी आवाज सुनी और मेरी ओर देखे बिना वो लेटर उस गमले मे रख कर भागने लगा और जल्द बाजी मे दिवार से टकराया उसकी कोहनी दिवार मे लगी किल मे धस गई उसकी कोहनी से खून बहने लगा मे चिल्लाई और मेरी आवाज सुनकर अम्मी छत पर आने लगी और वो जल्दी से छत से उतरकर चला गया

मै भागती उसकी ओर तभी अम्मी छत पर आ गई और मुझे डाटने लगी क्यू इतना हल्ला मचा रही है मै अम्मी को नजर अंदाज कर उसे के लिए छत के कोने पर गई लेकिन मुझे वहा कोई नही दिखा वो जा चूका था और फिर उदास हो गई वो शक्स मेरे इतना करीब था और मैं उसकी शकल तक देख ना पायी फिर मुझे ध्यान आया अम्मी का कही उनकी नजर उस खत पर ना पढ़ जाये इसीलिए मे उन्हे लेकर नीचे आ गई कुछ वक्त बाद उस खत को उठा लायी फिर काफी दिनो तक उसका कोई खत नही मिला और जब मिला उसका वो आखरी खत था मैने उसे पढ़ा 

लेटर - मेरी प्यारी रिफा . . .

कैसी हो तुम बहुत वक्त बाद मे ये खत लिख रहा हूंमै खत लिखना तो चाहता था लेकिन लिख नही पा रहा था वो तुम्हारी दिवार की किल ने थोड़ा ज्यादा जख्म दे दिया थातो कुछ वक्त लिख नही पाया वैसे अभी मै ठीक हूँ तुम ज्यादा परेशान मत होना अब मै पूरी तरह ठीक हू इसलिए ये खत लिख पा रहा हूं और एक बहुत जरूरी बात कहना चाहता हूं जिसे सुनकर तुम्हे शायद बहुत दुख होगा तुम उदास हो जाऊगी पर ये जरूरी है मेरे लिए तुम्हारे लिए इसलिए जो मे तुम्हें बताने जा रहा हूं वो ध्यान से सूनो ये शायद मेरा आखरी खत होगा तुम्हारे लिए उसके बाद मे तुम्हे कोई खत नही लिख पाऊंगा मै जानता हूं तुम मुझसे मिलना चाहती हो तुम मुझे देखना चाहती हो और शायद अपने दिल की कुछ बाते है जो तुम मुझसे कहना चाहती हो मै समझता हूं इसिलिए तुम छत अब हर रोज मेरा छत पर इन्तेजार करती रहती हो मै कब खत लाकर गमले मे रखू और तुम मुझे देख पाओ तुम मुझसे सवाल कर पाओ तुम अपने सवालो का जवाब ले पाओ मगर मे तुम्हारे सवालो का जवाब दे नही पाऊंगा क्यू मे तुमसे मिल नही सकता क्यू मे तुम्हे छू नही सकता क्यू मै तुम्हे गले नही लगा सकता क्यू तुम्हारे आंसू नही पोच सकता क्यू मै तुम्हारे करीब होकर भी करीब नही हो सकता बस इतना समझलो शायद मेरे अन्दर इतनी हिम्मत नही मै अभी तुम्हारे काबील नही हूं मै अभी खुद बहुत बुरे वक्त से गुजर रहा हूं मै अपने आप को तुम्हारे लिए तैयार कर रहा हूं लेकिन अभी नही जब वक्त आयेगा मै खुद तुम्हारे सामने खड़ा मिलूंगा तुम्हारा हर सवाल तुम्हारी हर तमन्ना पूरी करूंगा ये मेरा वादा है बस मे येही चाहता हूं अपने आप को सम्भालना अपने आप को दुख मत देना अपने आप को अकेला मत कर देना अपने आप को हमेशा खुश रखना मेरे लिए मेरे लिए रिफा .

ये मेरा आखरी खत जो तुम्हारे नाम लिखा है

कुछ पन्ने भरे एक पैगाम लिखा है

तुम इसे पढ़कर अब उदास मत होना

मेरे दिल पर बस तुम्हारा ही नाम लिखा है

तुम्हारा एक दोस्त एक साथी . . .

रिफा : और वो खत उसका आखरी खत था उसके बाद ना तो उसका खत मिला और ना ही वो कभी मुझसे मिलने आया 5 साल हो गए है इस बात को पर मै उसका आज तक इन्तेजार कर रही हू मेरा वो दोस्त मेरा वो साथी जाने कहा खो गया .इतना सब बताकर रिफा रोने लगी उसकी आंखो से बस आंसू ही बह रहे उसके चहरे की मासूमियत उसके चेहरे की मुस्कुराहट जाने कहा चली गई बस उसके चेहरे पर उदासी थी और एक थकावट एक लम्बे इंतेजार का बोझ था जिसे वो उठाते आ रही थी इतने सालो से फिर वह अपनी कर्सी का सहारा लेकर बैठ गई और पुरानी यादो मे खो गई .

इधर आरिफ रिफा की बातो को सुनकर उसे एक धक्का लगा वो समझ नही पा रहा था कैसे रिएक्ट करे उसकी धड़कने तेज हो गई थी उसकी सांसे भी तेज चलने लगी थीउसके माथे पर पसीना आ गया था उसकी आंखो से आंसू बह रहे थे उसके हाथ कापने लगे उसके पैर जमी मे धसने लगे उसका शरीर बेजान होने लगा उसने कुर्सी को अपने हाथो से दबाया अपने दांतो को भींचा उसके चेहरे पर गुस्से मलाल और दर्द के भाव थे

और फिर एक नजर उसने रिफा पर डाली जो टेबल पर अपना सर रखे हुए रोये जा रही थी और फिर उसने अपनी आंखे बंद करी काफी देर तक वो आंखे बन्द किये बैठा रहा और जब उसने आंखे खोली उसके चेहरे पर एक मुस्कान थी उसके चहरे के भाव बदल चुके थे उसके चहरे पर एक सुकून था ना उसमे गुस्सा था ना दर्द ना मलाल अब उसकी सांसे सही चलने लगी थी धड़कने भी नार्मल हो गई उसके हाथ पैरो ने भी सही काम करना शुरू कर दिया था अब वो पूरी तरह रिलेक्स था अपने आप को सम्भाल चूका था

फिर उसने रिफा की तरफ देखा जो अब बस आरिफ को ही देखे जा रही उसकी आंखे अभी भी नम थी वो बस आरिफ की बात सुनने का इन्तेजार कर रही थी पर आरिफ कुछ देर उसे देखता रहा और फिर अपनी कुर्सी से उठा और पास मे रखी टेबल पर बैठ गया उसने टेबल पर रखी नोट पेड उठाया उस पर अपने उल्टे हाथ से कुछ लिखने लगा 

रिफा बस आरिफ को ही देख रही थी जो नोटपेड पर कुछ लिख रहा था उसे लग रहा था अब आरिफ उससे बात नही करना चाहता इसीलिए कोई नोट उसके लिए लिख रहा है वो बस खामोश बैठी थी और आरिफ का इन्तेजार कर रही थी

कुछ वक्त बाद आरिफ उठा उसने नोटपेड से वो पेज फाड़ा जिस पर वह लिख रहा था उसको फोल्ड किया उस टेबल से रिफा के पास आया उस पेज को टेबल पर रखा और बिना कुछ बोले वाहा से निकल गया रिफा उसे बस जाता देखती रही और उसके जाने के बाद उसने उस पेज को उठाया उसको खोला और फिर पढ़ने लगी .

पेज - रिफा मै क्या कहूं कैसे कहूँ अभी कुछ समझ नही आ रहा है तुमने मेरी मोहब्बत ठुकराई है जो मे तुम्हे पिछले दस साल से करता आ रहा हूं और करता रहूंगा तुम्हारे साथ बिताया हर लम्हा यादगार रहा है जिस दिन तुमने दोस्ती हाथ बढ़या था वो मेरे जिन्दगी का सबसे खुबसुरत दिन था मै उन दिनो काफी शाय था लेकिन तुम मेरी पहली दोस्त बनी वो दिन मेरे लिए सपने से कम नही था उससे पहले मे तुम्हे बस दूर से देखता रहता था मेरे दिल मे मौहब्बत उससे भी पहले से थी और फिर हम दोस्त बने हमे कई अच्छे दिन गुजारे हम साथ रहे साथ खाया साथ घूमे साथ ही कालेज गये एक दूसरे के साथ लड़े हमारी वो नोकजोख हमारी दोस्ती को और खुबसुरत बनाती थी तुम्हारी साथ खुश होना मुझे बहुत पसंद था तुम्हारे साथ बिताया हर पल खुबसुरत था मुझे पता है ये खाली दोस्ती नही थी ये तुम भी जानती हो तुम मुझे अभी अपना दोस्त मानती हो औ सोरी खास दोस्त लेकिन तुम मेरे लिए खास दोस्त से भी बढ़कर हो रिफा तुम मेरी पहली और आखिरी मौहब्बत हो तुम किसी और शक्स को चाहती हो उसे जिसे तुमने देखा तक नही जिसे तुम मिली भी नही जिसे तुम सही तरह जानती भी नही कोई कैसे मौहब्बत कर सकता ऐसे शक्स से कैसे कर सकता हैतुम्हे तुम्हारी मौहब्बत मुबारक हो रिफा तुम खुश रहो उस शक्स के साथ मै दुआ करता हूं वो तुम्हे जल्दी आकर मिले और तुम्हारी दुनिया खुशियो से भर दे . 

खुदा हाफिज

तुम्हारा खास दोस्त आरिफ . . .

वो पेज पढ़ने के बाद रिफा की आँखो से आंसू बहने लगते है उसका दिन इतना दुख भरा होगा उसने सोचा नही वो बस यहा आरिफ को आगे बढ़ाने से पहले सच बताना चाहती थी उसकी मोहब्बत को कबूल करना चाहती थी लेकिन उसे नही पता था कि वो आरिफ को हमेशा के लिए खो देंगी वो अपने आप को गिरा हुआ महसूस करती है उसने आज किसी का दिल तोड़ा है उसे अपने आप पर शर्म आती है वो ऐसा कैसे कर सकती है किसी के साथ जो  उसका सबसे अच्छा दोस्त हो वो दोस्त जो उसके हर गम हर खुशी मे साथ था  जो हर मुसिबत हर लम्हे मे  उसके साथ खड़ा रहा वो दोस्त जिससे वो बेहन्ताह मोहब्बत करती है आज उसने उसे खो दिया था वो बस उस पेज को देखे जा रही उसकी लिखी हर लाईनो को बार बार पढ़ रही और रोये जा रही थी

लेकिन कुछ वक्त बाद वो उसके भाव बदल गये उसका रोना बन्द हो गया उसका वक्त रुक गया उसके आस पास सब शांत हो गया उसकी दिल रुक सा गया सांसे भारी होने लगी और फिर धड़कने बढ़ने लगी उसकी सांसे तेज हो गई उसके चेहरे पर कई सावालो के भाव आ गये वो चोक गयी थी उस पेज मे लिखे हुए शब्दो किस तरह उनको लिखा गया था

वो जल्दी से अपने पर्स मे कुछ ढूढ़ने लगी और फिर उसने वो जो उसकी जिन्दगी का खास हिस्सा था वो खत उसने उस खत को उस पेज के पास रखा और उसका अन्दाजा सही निकला उस खत की हैंडराइटिंग उस पेज से मेच कर रही थी तो  वो खत लिखने वाला शक्स कोई और नही वो खुद आरिफ था लेकिन कैसे उसने  कई बार ये चेक किया था लेकिन कैसे हो सकता है फिर उसे याद आया वो इस पेज को अपने उल्टे हाथ से लिख रहा था पर वो हमेशा सीधे हाथो से ही लिखता है पर आज क्यो क्या वो सारे खत उसने अपने उल्टे हाथ से लिखे इसलिए मै उसे पहचान नही पायी और हा अपने आखरी खत से पहले भी वो गायब था उसने 12th की क्लासेज भी मिस करी थी क्या उस चोट के बाद वो गायब था और फिर उस लास्ट खत के बाद वो मेरे कितना करीब हो गया

क्या वो असल मे मेरे करीब हो रहा था  अगर सच मे वो शक्स आरिफ था तो उसने मुझे बताया क्यू नही वो भी तो जानता था मे कितनी मोहब्बत करती हूं ऐसा क्यू किया आरिफ तुमने अब सब जानने के बाद भी नही बताया तुम मेरे इतना करीब थे

 फिर वो अपने आप किसी तरह सम्भालती है फिर जल्दी उठकर वो पेज और वो खत पर्स मे डालती कॉफी शॉप से बाहर आती है बाहर उसे वो वेटर दिखाई देते है 

वेटर : अरे रिफा मेम आप अभी तक यहा है अरिफ भाई तो कब का निकल गये .

रिफा : कहा गया वो ?

वेटर : हमे नही पता वो बाहर आये अपनी बाईक उठायी और चले गए

हमे तो आज जाते हुए बाये  तक नही बोला सब ठीक तो हैना 

रिफा : हा अब सब ठीक हो गया है और उसकी चिन्ता मत करो मे उसे 

ढूंढ लूंगी अच्छा मे चलती हूँ .

 वह आरिफ को फोन लगाती है उसका फोन स्वीच ऑफ आता है 

फिर वह कुछ सोचती है फिर ओटो लेकर निकल जाती है फिर ओटो

रुकता है वह ओटो से उतरती है ओटो वाले को पैसे देती है आगे

बढ़ने लगती है फिर वह एक बन्द पढ़े पार्क मे पहुचती यह काफी वक्त से बन्द पड़ा है यह पार्क उसके पुराने स्कूल से 500 मी० की दूरी पर था आरिफ जब उदास होता था तो अक्सर यहा आता था अपने दुख को कम करने की कोशिश करता था रिफा को उम्मीद थी वह यही होगा 

और उसका सोचना सही था उसे उसकी बाईक दिखाई देती है उससे थोड़ी दूरी पर एक बेंच पर  बैठा आरिफ दिखता है वह उसके करीब जाती है आरिफ उसे देखकर वह खड़ा होता है रिफा उसकी आंखो मे देखती है .

रिफा : (आरिफ की आंखो मे देखकर ) अपना हाथ दो !

आरिफ रिफा को देखकर जो गुस्से मे थी उसकी तरफ अपना हाथ बड़ाता है रिफा आरिफ का हाथ पकड़ कर उसकी शर्ट की आस्तीन उपर चढ़ाती है और फिर उसे वो दिख जाता है वो निशान जो दिवार की उस किल से उसकी कोहनी को जखमी करके बना था . 

रिफा आरिफ को देखती और एक तमाचा उसके गालो पर मारती है 

और गुस्से मे उसका कोलर पकड़ कर उससे पूछती है .

रिफा : तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मुझे इतना इन्तेजार कराने की 

5 साल तुम्हारा इन्तेजार किया पर तुम कभी आये ही नही और ना ही कोई खत तुम्हारा और तुम मेरे इतना पास थे इतना की मै सोच भी नही सकती तुम्हारी इतनी हिम्मत कैसे हुई मेरे इतना करीब रहकर  सच छुपाने की तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मुझे इतना तड़पाने की  तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मुझे इतना रुलाने की तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई दो शक्स बनकर मुझसे इतनी मोहब्बत करने की आखिर क्यू किया आरिफ तुमने ऐसा तुम बस एक बार ये कह देते कि तुम ही वो शक्स जो अपने खतो मेरी जिन्दगी मे खुशिया लाता है

तुम ही वो शक्स जिसने मुझे बुरे हालातो से निकाला है तुम्ही हो वो शक्स जिसने मुझे मरने से बचाया है तुम ही हो वो शक्स जिसने मेरी नयी दुनिया बनाई है तुम ही तो कहते थे मुझे हमेशा खुश रहना चाहिए और तुम मुझे ऐसे खुश रखना चाहते थे आखिर क्यो किया तुमने आरिफ मेरे साथ ऐसा बताओ आरिफ क्या जवाब है तुम्हारे पास ?

आरिफ : मेरी मोहब्बत ही मेरा जवाब है रिफा मैंने तुम्हारे लिए खत लिखना बन्द किये थे तुमसे मोहब्बत करना नही मै तुम्हारे हमेशा करीब रहा हूं चाहे उन खतो मे चाहे मै खुद और मेरा जवाब हमेशा मौहब्बत होगा जो मे तुमसे बेहन्ताह करता हूं .

हा मेरी गलती है जो मै तुम्हे सच नही बता पाया कभी हिम्मत ही नही हुई  शुरू मे मैंने कोशिश की तुम्हे बताओ कि मै ही हूँ तुम्हे वो  खत लिखने वाला इंसान  लेकिन मे अपने आप को आरिफ बनकर तुम्हे पाना चाहाता था ना की कोई खत के पिछे छिपकर कोई अनजान शक्स  जो तुमसे मोहब्बत करे पर मे गलत था मुझे पता होता तो मै ये सच बहुत पहले बता देता और तुम्हारी मौहब्बत हासिल कर लेता पर गलत था तुम्हे आज भी उसी शक्स से मोहब्बत है जो उन खतो के जरिये तुमसे मोहब्बत करता था तुमने उसे ही चूना है .

रिफा : हा तुम गलत  थे मुझसे सच छिपाने के लिए हा तुम गलत थे मुझसे मोहब्बत कर के इतना इन्तेजार कराने के लिए हा तुम गलत थे मेरे इनते पास रहकर मुझे इतना दूर रखने के लिए और आज भी तुम गलत हो हा मैंने उस शक्स से मोहब्बत की है मगर वो मेरा कल था हा मुझे उसका इन्तेजार था उससे शिकायत थी उससे कुछ सवाल थे उसे एक बार छूना था उसे गले लगाना था उसे शुक्रिया अदा करना था मेरी जिन्दगी खुबसुरत बनाने के लिए तुम्हे मेरी जिन्दगी मे लाने के लिए तुमसे बेहन्ताह मोहब्बत कराने के लिए उसका शुक्रिया अदा करना था और तुमने सही किया जो मुझे सच नही बताया और मुझे ऐसे शक्स से मिलाया जिसे आज मे बेपनाह मोहब्बत करती हूं वो सिर्फ तुम हो आरिफ .

तुम  शायद यकिन नही मानोंगे मै बस आज तुम्हे ही चनने वाली थी आरिफ मुझे तुम्हे बस सच बताना था जो मै सालो से लिये घूम रही थी लेकिन मुझे नही पता था वो शक्स तुम्ही निकलोगे पर मै तुम्हे मोहब्बत करती हूं एस ऐ आरिफ ना की ना की खत लिखने वाले उस शक्स को जो मेरी जिन्दगी का पास्ट था बस तुम्हे अपनाने से पहले तुम्हे सच जानने का अधिकार था जो मै तुम्हे बता देना चाहती थी बस इतना ही कहूंगी .

आरिफ : पहला जवाब :-मेरा नाम आरिफ अहमद है .

दूसरा जवाब : -  मै 24 साल का हू एक बड़ी कम्पनी मे जोब करता हूं

तीसरा जवाब :- देखो मै ऐसा दिखता हूं येही देखना चाहती थी ना तुम तुम मुझे छूना चाहती थी ना लाओ अपना हाथ दो 

आरिफ उसका हाथ पकड़ कर अपने गालो पर लगता है

आरिफ : तुम मुझे गले लगाना चाहती थी ना

फिर वह उसकी आंखो मे देख कर उसको गले लगा लेता है

 

आरिफ : तुम्हारा आखरी जवाब : हा मै उस वक्त तुमसे मोहब्बत करता था तुम्हारे दर्द मे मुझे दर्द होता था तुम्हारे उदास होने से मे उदास होता था 

तुम्हारे खुश होने से मे खुश होता था तुम्हारे बिना वो हर लम्हा जो गुजरता था उनको संयोज के उन खतो मे उतरता था और तुम्हारे तक पहुंचाता था 

हा मै तुमसे मौहब्बत करता था बेपनाह तुहारा दोस्त तुम्हारा साथी बनकर  ये ही  तुम्हारे सावलो के जवाब रिफा बस इतना ही .

और तुम्हारा जो सवाल  आरिफ यानी मुझसे था क्यू कभी मैंने तुम्हे सच नही बताया तो उसका जवाब है मै तुम्हे आरिफ बनके पाना चाहता है मे देखना चाहता था मे तुम्हारे काबिल भी हू या नही लेकिन तुम्हारे काबिल होने मे मुझे इतना वक्त लगेगा नही पता था उसके लिए मै तुमसे माफी मांगता हूं मुझे माफ कर दो रिफा तुम्हे इतना दर्द देने के लिए मुझे माफ कर दो प्लीज .

रिफा :तुम्हे मांफी मांगने की कोई जरूरत नही है आरिफ मांफी तो मै मांगती हूं तुम्हारा दिल दुखाने के लिए तुम्हे यू तड़पाने के लिए तुम्हे यू रुलाने के लिए मै तुमसे कान पकड़ कर मांफी मांगती हूं 

फिर आरिफ रिफा की तरफ  गया उसको सिने से लगाकर अपनी मोहब्बत को पाकर बहुत खुश था उनके सारे गिले  शिकवे गायब हो गए दो ने एक दूसरे के आंसू पोहचे और दोनो एक दूसरे का हाथ पकड़ कर चलने लगे .

रिफा : वैसे मैंने तुम्हारे प्रपोज करने के प्लान को खराब कर दिया 

तो क्या तुम अब मुझे प्रपोज नही करोंगे ?

आरिफ : नही अब नही करूंगा !

रिफा : क्यू नही करोंगे ?

आरिफ : क्योकि मे जानता हूं तुम मुझसे मौहब्बत करती हो तुम्हारा जवाब हा ही होगा तो मै उसकी जगह कुछ और प्रयोज करता हूं .

रिफा : वो क्या ?

आरिफ : तुम मुझसे शादी करोगी ?

रिफा रुक जाती है  आरिफ की ओर देखती है वो मुस्कुरा रहा था

और जवाब का इन्तेजार कर रहा था .

रिफा : थोड़ा जल्दी नही है अभी तो हमने साथ बैठ कर अपनी मोहब्बत भरी बाते भी नही करी  हमने अपनी लव लाईफ भी नही जी और तुम्हे  अभी से शादी करनी है .

आरिफ : भाई मै तो शादी के लिए मरा जा रहा हूं तुम हा नही करती हो तो अम्मी कहकर कोई लड़की पसंद करवाता हूं शादी के लिए तुम मान ही नही रही चलो कोई ओर सही .

रिफा : ( गुस्से से ) आरिफ तुम नही मानोंगे अभी बताती हूं तुम्हे !

आरिफ : क्या ?

रिफा : कुबूल है मुझे तुम्हारे साथ शादी कूबूल है 

और ऐसे ही दोनो हंसते मुस्कुराते अपनी नयी जिन्दगी की ओर चल पड़ते है .

         . . .THE END