Bloodstone in Hindi Fiction Stories by Mister Rakesh books and stories PDF | ब्लडस्टोन

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ब्लडस्टोन

रात का आसमान गहराता जा रहा था। शहर की रोशनी धीरे-धीरे बुझने लगी थी, और दिल्ली की ठंडी हवाओं में हल्की सी नमी घुली हुई थी। कुतुब मीनार के पास एक पुराना इलाका था — “फिरोज़ हाइट्स।” वहाँ एक पुरानी हवेली थी जो अब लगभग खंडहर बन चुकी थी। कोई वहाँ नहीं रहता था, बस दीवारों पर उग आई बेलें और छतों से लटकती धूल में पुराने समय की कहानियाँ अटकी हुई थीं।

लोग कहते थे कि उस हवेली में एक “रत्न” छिपा है — “ब्लडस्टोन।” कहा जाता था कि जो उसे पा ले, उसे अमरता और असाधारण शक्ति मिलती है। लेकिन कोई भी उसे ढूँढकर लौट नहीं पाया। हर कोशिश करने वाला या तो लापता हो गया या पागल।

पर इन बातों पर कोई विश्वास नहीं करता था। सिवाय एक व्यक्ति के — आर्यन कपूर, एक पुरातत्व विशेषज्ञ।
आर्यन इतिहास को सिर्फ किताबों में नहीं, ज़मीन के नीचे ढूँढता था। उसे अंधविश्वासों पर नहीं, संकेतों पर भरोसा था। जब उसे एक पुराने फारसी पांडुलिपि में “ब्लडस्टोन” का ज़िक्र मिला, तो उसे यकीन हो गया कि ये बस कहानी नहीं, सच्चाई है।

उसने टीम जुटाई, लेकिन सबने मना कर दिया। डर, हवेली का नाम सुनकर ही सबके चेहरों से रंग उड़ गया। अंत में वो अकेला ही निकल पड़ा — अपने कैमरे, टॉर्च, और “जार्विस” नाम के एआई डिवाइस के साथ, जो उसे हर खतरे की चेतावनी देता था।

रात के बारह बजे जब उसने हवेली का दरवाज़ा खोला, तो हवा में एक अजीब-सी धातु की गंध थी — जैसे किसी पुराने खून की।
“जार्विस,” उसने फुसफुसाया, “एनर्जी रीडिंग?”
“अननोन एनर्जी पैटर्न्स डिटेक्टेड, मास्टर आर्यन,” डिवाइस ने कहा।

हवेली के अंदर सन्नाटा था, बस कहीं दूर पानी की टपकने की आवाज़। आर्यन धीरे-धीरे आगे बढ़ा। दीवारों पर पुराने संस्कृत श्लोक उकेरे हुए थे — ‘जीवन शापित है जब तक रक्त रत्न सोया है।’

वो नीचे के तहखाने में पहुँचा। वहाँ दरवाज़े पर लोहे की जंजीरें थीं, लेकिन जैसे ही उसने उन्हें छुआ, वो अपने आप गिर गईं। अंदर एक गोलाकार हॉल था, और बीच में एक पत्थर का पेडस्टल, जिस पर एक लाल रत्न रखा था।

वो रत्न किसी इंसानी दिल जैसा लग रहा था — धड़कता हुआ, हल्की रोशनी छोड़ता हुआ।
“ब्लडस्टोन…” आर्यन ने सांस लेते हुए कहा।

“इसे मत छूना,” पीछे से किसी की आवाज़ आई।
वो पलट गया। सामने एक औरत खड़ी थी — सफेद साड़ी में, उसके बाल खुले हुए, चेहरा धूल से भरा, और आँखें अजीब हरे रंग की चमक में डूबी हुईं।

“तुम कौन हो?”
“मैं इस रत्न की रक्षक हूँ,” उसने कहा, “मेरा नाम इशाना है। इसे छूओगे तो तुम्हारा जीवन खत्म हो जाएगा।”

आर्यन ने ठंडी साँस ली, “तुम डराने की कोशिश मत करो। मैं सच चाहता हूँ, कहानी नहीं।”
“कहानी ही सच है,” उसने कहा, “ये रत्न किसी देवता का नहीं, एक पिशाच का है — ‘देवराज’। उसने इस पत्थर में अपनी आत्मा बाँध दी थी ताकि वो कभी मर न सके। हर सौ साल में वो नया शरीर खोजता है। जो भी इस पत्थर को छूता है, उसका शरीर उस राक्षस के लिए एक नया पात्र बन जाता है।”

आर्यन हँस पड़ा, “तुम्हें पता है तुम क्या कह रही हो?”
“हाँ,” इशाना बोली, “क्योंकि पिछली बार उसने मुझे चुना था।”

आर्यन ठिठक गया। “क्या मतलब?”
“मैं भी कभी इंसान थी। मैंने इस रत्न को छुआ था… और तब से मैं इस हवेली में कैद हूँ — उसकी आत्मा को रोके हुए। अगर मैं हट जाऊँ, तो वो लौट आएगा।”

“तो फिर मैं क्या करूँ?”
“बस चले जाओ। इसे वैसे ही छोड़ दो।”

लेकिन जिज्ञासा डर से बड़ी होती है। आर्यन आगे बढ़ा और पत्थर को छू लिया।
तुरंत बिजली-सी चमक हुई। हवेली काँपने लगी। जार्विस चीखा — “वॉर्निंग! एनर्जी स्पाइक डिटेक्टेड!”

आर्यन पीछे गिर पड़ा, और जब उसने आँखें खोलीं, तो उसकी आँखें भी लाल हो चुकी थीं। उसके सीने में एक अनजान शक्ति दौड़ रही थी।
इशाना चिल्लाई, “तुमने उसे जगा दिया है!”

अगले ही पल, उसके पीछे हवा का एक सर्पिल बना और उसमें से एक आकृति उभरी — लंबी, शाही पोशाक में, लेकिन चेहरा भयावह। वही देवराज पिशाच था।

“सदियों बाद मेरा पात्र मिल गया…” उसकी आवाज़ गूँजी।
आर्यन चीखा, “तुम… मुझ पर कब्ज़ा नहीं कर सकते!”
देवराज हँसा, “तुम इंसान हो, और मैं अमरता। विरोध मत करो।”

आर्यन की नसें नीली चमकने लगीं, उसका शरीर काँप रहा था।
इशाना आगे बढ़ी, “देवराज! तू अपनी सीमा भूल गया है। जिस प्रेम को तूने नष्ट किया था, वही आज तेरी मौत बनेगा!”

उसने अपने गले से एक लॉकेट उतारा — उसमें एक छोटा नीलम था। “यह रत्न तेरी आत्मा को बांध सकता है।”
देवराज गरजा, “तू नहीं कर पाएगी!”

इशाना ने आर्यन का हाथ थामा। “तू अब मेरा रक्षक है। साथ मिलकर ही इसे खत्म करेंगे।”
आर्यन की लाल आँखें धीरे-धीरे नीली हो गईं। उसकी हथेली में जार्विस की नीली लाइट चमक उठी। “एनर्जी ट्रांसफर मोड ऑन।”

दोनों ने अपनी शक्ति को एक साथ रत्न पर केंद्रित किया।
देवराज चीखा, “नहीं… नहीं!!!”
रत्न फट गया। आग की लपटों ने पूरा हॉल भर दिया।

जब धूल बैठी, हवेली शांत थी। बीच में सिर्फ आर्यन पड़ा था — बेहोश। इशाना गायब थी।

कुछ घंटे बाद आर्यन की आँखें खुलीं। जार्विस बोला, “एनर्जी सिग्नेचर नलिफाइड। टार्गेट डेस्ट्रॉयड।”
वो उठा और देखा — जहाँ रत्न था, वहाँ बस राख थी। लेकिन राख के बीच एक छोटा नीला पत्थर चमक रहा था — इशाना का नीलम।

आर्यन ने उसे उठाया, और हवा में एक हल्की फुसफुसाहट आई —
“अब मेरा श्राप खत्म हुआ… धन्यवाद।”

वो मुस्कराया, “अब मैं नहीं खोजूँगा रत्न, अब मैं उसकी कहानी लिखूँगा।”

उस दिन के बाद, “ब्लडस्टोन” का नाम इतिहास से मिट गया।
लेकिन कुछ कहते हैं — रात को जब हवेली के पास से हवा गुजरती है, तो नीली रोशनी अब भी झिलमिलाती है… और कोई धीमी आवाज़ सुनाई देती है —
“रत्न नहीं, प्रेम ही अमर है…”