The Hiding Truth - 8 in Hindi Thriller by Suresh sondhiya books and stories PDF | The Hiding Truth - 8

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The Hiding Truth - 8

मौत की खाई और मन की आँखें"


सिया और रोबोटिक सूट पहने उसके अंकल उस अंतहीन खाई में गिरते जा रहे थे। नीचे वह नीले और हरे रंग का ज़हरीला द्रव (Acid) किसी भूखे जानवर की तरह उफन रहा था। उसकी गर्मी इतनी तेज़ थी कि सिया को अपने नैनो-सूट के अंदर भी जलन महसूस होने लगी।



"सिया! मेरे थ्रस्टर्स काम नहीं कर रहे! हम मरने वाले हैं!" अंकल की आवाज़ में घबराहट थी। रोबोटिक सूट अलार्म बजा रहा था— WARNING! WARNING!

सिया ने भी हाथ-पैर मारे, हवा में उड़ने की कोशिश की, लेकिन कोई शक्ति काम नहीं कर रही थी। वह ज़हरीला समुद्र अब बस कुछ ही मीटर दूर था। सिया को लगा कि उसका अंत आ गया है। उसे मौत का डर लगने लगा।



तभी, उसके दिमाग में नाना यास्किन की आवाज़ गूंजी—

"यह ग्रह एक छलावा है... जो दिखता है, वह होता नहीं... तुम्हें अपने दिमाग को शांत रखना होगा।"



सिया का दिमाग बिजली की तरह दौड़ा।

"अगर यह ग्रह छलावा (Illusion) है, तो यह खाई, यह आग, यह गिरना... यह सब भी झूठ है! यह सब सिर्फ मेरे डर का खेल है। अगर मैं डरूंगा, तो यह मुझे मार डालेगा। लेकिन अगर मैं सच को देखूंगा..."

सिया ने ज़ोर से चिल्लाकर कहा, "अंकल! अपनी आँखें बंद कर लो! अभी इसी वक्त!"

"क्या? तुम पागल हो गए हो सिया? हम जलने वाले हैं!" अंकल चिल्लाए।



"अंकल, मुझ पर भरोसा करिये! यह आग असली नहीं है! यह सिर्फ हमारा डर है! अपनी आँखें बंद करिये और सोचिये कि आप ज़मीन पर खड़े हैं। कुछ भी मत देखिये!" सिया ने आदेश दिया।



सिया ने खुद अपनी आँखें कसकर बंद कर लीं। उसने उस भयानक शोर, गर्मी और गिरने के एहसास को अपने दिमाग से निकाल फेंका। उसने अपने "मन की आँखों" से देखा—

"मैं नहीं गिर रहा हूँ। मैं सुरक्षित हूँ। यह खाई है ही नहीं।"



जैसे ही सिया ने यह सोचा, अचानक हवा का शोर थम गया। वह जलन गायब हो गई।

लेकिन अंकल अभी भी डर रहे थे। उनका सूट 'आग' की लपटों को छूने ही वाला था।



"अंकल, प्लीज! आँखें बंद करिये! इसे अनदेखा कर दीजिये!" सिया ने अपनी पूरी मानसिक शक्ति लगाकर अंकल के दिमाग तक संदेश भेजा।



अंकल ने कांपते हुए अपनी आँखें बंद कर लीं। उन्होंने खुद को सरेंडर कर दिया।

...और फिर, सन्नाटा छा गया।



एक पल... दो पल...

कोई धमाका नहीं हुआ। कोई जलन नहीं हुई।

"अंकल, अब आप आँखें खोल सकते हैं," सिया की शांत आवाज़ आई।

अंकल ने धीरे-धीरे आँखें खोलीं। वे हैरान रह गए।



वे किसी खाई में नहीं थे। वे किसी आग में नहीं जल रहे थे। वे दोनों एक समतल और ठोस ज़मीन पर खड़े थे। उनके पैर ज़मीन पर मज़बूती से जमे हुए थे।



वह डरावनी खाई, वह पहाड़—सब गायब हो चुका था। उनके सामने अब सिर्फ एक शांत, सफ़ेद मैदान था। और उस मैदान के बीच हवा में, बिना किसी सहारे के, एक नीले रंग की मणि तैर रही थी।



'जीव मणि' (The Soul Stone)।

उसकी रोशनी इतनी पवित्र और शांत थी कि उसे देखते ही सारी थकान मिट जाए।



"यह... यह तो चमत्कार है," अंकल ने हकलाते हुए कहा। "हम तो गिर रहे थे न?"

सिया मुस्कुराया, "हम कहीं नहीं गिरे अंकल। हमारा डर हमें गिरा रहा था। यह ग्रह आपके दिमाग के साथ खेलता है। जो डरता है, वह यहाँ मर जाता है। जो सच देखता है, उसे ही मणि मिलती है।"



सिया धीरे-धीरे मणि की तरफ बढ़ा। जैसे ही उसने हाथ बढ़ाया, मणि उसकी तरफ खिंची चली आई, जैसे वह अपने मालिक को पहचानती हो।



सिया ने जैसे ही 'जीव मणि' को अपनी हथेली में रखा, एक ज़बरदस्त ऊर्जा की लहर उसके शरीर में दौड़ गई। उसकी नसों में बह रहा आधा इंसानी और आधा एलियन खून उबलने लगा। उसे लगा कि वह अब पूरे ब्रह्मांड की आवाज़ सुन सकता है।

"अब हमारे पास वह ताकत है जो उसे हरा सकती है," सिया ने मणि को अपनी मुट्ठी में भींच लिया।



लेकिन उनकी खुशी ज़्यादा देर नहीं टिकी।

अचानक, उस शांत सफ़ेद मैदान में एक काला धुआं उठने लगा। हवा में एक जानी-पहचानी और डरावनी हंसी गूंजी। वह हंसी ऐसी थी जिसे सुनकर सिया का खून जम गया।



"बहुत अच्छे, मेरे भाई... बहुत अच्छे!"

सिया ने झटके से पीछे मुड़कर देखा। काले धुएं के बीच से एक आकृति बन रही थी—बिलकुल सिया जैसी कद-काठी, लेकिन उसकी आँखों में नीली नहीं, बल्कि सुर्ख लाल रोशनी जल रही थी।



वह होलोग्राम नहीं था। वह 'काली परछाई' थी। सिया का जुड़वां भाई।



"तुमने मेरे लिए काम आसान कर दिया, सिया," उस परछाई ने कहा। "मैं इस मणि को नहीं छू सकता था क्योंकि यह 'पवित्र' है। लेकिन अब जब तुमने इसे छू लिया है... तो मैं इसे तुम्हारी लाश से छीन सकता हूँ!"



सिया और उसके भाई की नज़रें मिलीं। 10 साल बाद दोनों आमने-सामने थे। एक रक्षक, एक भक्षक।



सिया ने युद्ध का पैंतरा लिया। "मैं तुम्हें यह मणि ले जाने नहीं दूंगा। चाहे तुम मेरे भाई ही क्यों न हो।"



काली परछाई मुस्कुराई और उसने अपनी तलवार हवा में लहराई, जो अंधेरे से बनी थी।

"तो फिर आओ भाई... देखते हैं किसमें कितना दम है!"



अगले भाग में महा-मुकाबला:
सिया बनाम उसका भाई!
एक तरफ 'जीव Subh' की पवित्र शक्ति, दूसरी तरफ 'अंधेरे' की विनाशकारी ताकत।

क्या सिया अपने ही खून पर वार कर पाएगा? या भावनाओं में बहकर सब खो देगा?

दोस्तों, यह एपिसोड आपको कैसा लगा? कमेंट में जरूर बताएं। कहानी अब अपने सबसे रोमांचक मोड़ पर है!

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आपका लेखक,
सुरेश सौंधिया ✍️