inteqam, chapter-43 in Hindi Love Stories by Mamta Meena books and stories PDF | इंतेक़ाम - भाग 43

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इंतेक़ाम - भाग 43

अब तक आपने पढ़ा कि निशा और विजय माता रानी का आशीर्वाद लेने के लिए मंदिर जाते हैं,,,,,

निशा मंदिर में प्रसाद चढ़ाने के लिए दुकान पर से प्रसाद लेने लग जाती है, वहीं विजय मंदिर के एक कोने में खड़ा रहकर उसका इंतजार करने लगता है,,,,

तभी कोई लड़की उसके पीछे से कंधे पर हाथ रखती है विजय उसे अच्छे से देख पाता उससे पहले ही वह लड़की उसके गले लग कर रोने लग जाती है,,,,,

जब विजय जब उसे अपने आप से अलग करता है तो उसके मुंह से निकल पड़ता है लक्ष्मी तुम,,,,,,

वह लड़की दयनीय अवस्था में थी उसने फटे पुराने कपड़े पहन रखी थे, उसके सिर के बाल भी इधर-उधर फैले हुए थे,,,,

तभी निशा आ जाती है वह विजय के साथ किसी लड़की को देखकर वह हैरान रह जाती है,,,,,

तब विजय की नजर निशा पर पड़ती है तो वह निशा को आवाज देता है कि निशा,,,,

निशा उसकी आवाज सुनकर उसके पास आ जाती है और पूछती है विजय यह लड़की कौन है,,,,

तब विजय कहता है कि पहले तुम जाकर मंदिर में प्रसाद दे आओ,,,,

तब निशा कहती है तुम भी साथ चलो,,,,,

तब विजय कहता है कि तुम ही जाओ मैं नहीं आ पाऊंगा,,,,,

यह सुनकर निशा बिना कोई सवाल जवाब किए वहां से चली जाती है कुछ देर बाद जब वह मंदिर से आती है तो देखती है कि विजय उस लड़की के साथ अपनी गाड़ी में बैठा हुआ था,,,,,

यह देखकर निशा बिना कुछ कहे ही पिछली सीट पर बैठ जाती है सारे रास्ते विजय भी कुछ नहीं बोलता गाड़ी में से कोई नहीं बोलता,,,,,

निशा के मन में उलटे सीधे विचार आते हैं वह सोचती है यह लड़की कौन है,,,,,

कुछ देर में गाड़ी उनके घर के सामने जाकर रुकती है गाड़ी के रुकते ही निशा गाड़ी में से उतर जाती है,,,,,

तब विजय उस लड़की से कहता है आओ लक्ष्मी,,,,

वह लड़की भी उतर जाती है विजय दरवाजा खटखटा आता है,,,,

दरवाजा उसकी मां खोलती है उसकी मां कुछ कहती उससे पहले ही उसकी नजर उस लड़की पर पड़ जाती है उस लड़की पर नजर पड़ते ही वह हैरान रह जाती है और फिर कह दी है लक्ष्मी तुम,,,,,

यह कहकर कुछ देर चुप रहकर फिर वह गुस्से में कहती है क्यों आई हो तुम यहां, क्या बाकी रह गया है अब, अब क्या हमारी जान लेना चाहती हो जो वापस आ गई हो चली जाओ यहां से, कोई जगह नहीं है,तब विजय की मां विजय से कहती है विजय अंदर आओ,,,,,

यह सुनकर विजय उस लड़की से कहता है चलो लक्ष्मी अंदर,,,,,

तब विजय की मां कहती है यह अंदर नहीं आएगी,,,,,
तुम्हारे लिए इस घर में और ना ही विजय से मुझसे किसी से कोई नाता है तुम्हारा जाओ यहां से,,,,

यह सुनकर वह लड़की रोते हुए कहती है मुझे माफ कर दो ,,,,

तब विजय की मां कहती है निशा और विजय अंदर आओ,,,,

तब वह लड़की कहती है मुझे माफ कर दो मैं जानती हूं मैंने आप सब के साथ बहुत गलत किया है,,,,

यह सुनकर विजय की मां गुस्से में कहती है निशा बहू तुमने सुना नहीं मैंने क्या कहा,,,,,

यह सुनकर निशा बिना कुछ कहे अंदर आ जाती है,