पहली नज़र का प्यार
धुंध से ढका वह शहर किसी पुराने ख्वाब जैसा लगता था।
ऊँचे-ऊँचे पत्थर के महल, जिनकी मीनारें आसमान को छूने की कोशिश करती थीं, और उनके बीच बहती ठंडी हवा… जैसे हर सांस में कोई रहस्य छुपा हो।
उसी महल के साये में वह खड़ा था—
आरव वॉन ब्लैकस्टोन।
उसकी आँखों में वह ठहराव था जो सिर्फ उन लोगों में होता है, जिन्होंने ज़िंदगी से बहुत कुछ खो दिया हो।
चेहरा सख़्त, आवाज़ कम बोलने वाली, और दिल…
दिल जैसे किसी बंद दरवाज़े के पीछे कैद।
आरव उस रियासत का वारिस था, जिसे लोग ब्लैकस्टोन किंगडम कहते थे।
पर यह ताज उसे खुशी नहीं देता था।
क्योंकि उसी ताज के साथ उसे विरासत में मिली थी—
तन्हाई।
उसकी माँ बचपन में चल बसी थी।
पिता ने सत्ता को प्यार से ऊपर चुन लिया था।
और आरव ने बहुत पहले तय कर लिया था कि प्यार जैसी कमज़ोरी उसके हिस्से में नहीं आएगी।
वह पहली नज़र
उस दिन महल के बाहर बाज़ार सजा था।
रंगीन झंडे, घोड़ों की टापें, और लोगों की हलचल।
आरव सिर्फ औपचारिकता निभाने वहाँ आया था।
उसे नहीं पता था कि उसी भीड़ में उसकी किस्मत खड़ी है।
वह अचानक रुका।
भीड़ के बीच…
एक लड़की।
सुनहरे बाल, हवा में लहराते हुए।
आँखें—जैसे किसी ने आसमान का टुकड़ा चुरा कर उनमें भर दिया हो।
और चेहरा… मासूम, मगर गहरी उदासी से भरा।
उसका नाम था
एलीना।
एलीना एक साधारण लड़की थी।
महल की दीवारों से बहुत दूर की दुनिया से आई हुई।
वह अपने बीमार पिता के इलाज के लिए शहर आई थी।
जब उसकी नज़र आरव से टकराई—
वक़्त जैसे रुक गया।
आरव ने पहली बार महसूस किया कि दिल…
अब भी धड़क सकता है।
एलीना की सांस अटक गई।
वह नहीं जानती थी कि सामने खड़ा आदमी कौन है,
पर उसकी आँखों में कुछ ऐसा था जो डर और सुकून—दोनों दे रहा था।
कुछ पल।
बस कुछ पल।
और वही पल…
पहली नज़र का प्यार बन गया।
नज़दीकियाँ
अगले कुछ दिनों में, आरव बहाने ढूँढने लगा।
कभी बाज़ार का निरीक्षण,
कभी शहर का दौरा।
हर बार…
उसकी नज़र एलीना को ढूँढती।
और एलीना भी, बिना समझे, उसी चेहरे की तलाश करने लगी थी।
एक शाम, महल के पीछे वाले बगीचे में, उनकी फिर मुलाकात हुई।
“तुम यहाँ क्या कर रही हो?”
आरव की आवाज़ सख़्त थी, मगर आँखों में नरमी थी।
एलीना घबरा गई।
“माफ़ कीजिए… मुझे नहीं पता था ये जगह मना है।”
आरव ने पहली बार मुस्कुराया।
एक हल्की-सी मुस्कान।
“अब पता चल गया,” उसने कहा,
“फिर भी आई हो?”
एलीना ने उसकी आँखों में देखा।
“कभी-कभी दिल किसी मना की हुई जगह पर खिंच ही जाता है।”
आरव चुप हो गया।
उस पल…
उसे एहसास हुआ—
यह लड़की उसकी सबसे बड़ी कमज़ोरी बन सकती है।
प्यार और डर
दिन बीतने लगे।
चुपके-चुपके मुलाकातें।
अधूरी बातें।
और उन बातों के बीच पलता प्यार।
आरव जानता था—
अगर यह रिश्ता सामने आया, तो एलीना की ज़िंदगी खतरे में पड़ जाएगी।
ब्लैकस्टोन की राजनीति निर्दयी थी।
दुश्मन हर तरफ़ थे।
एक रात, जब चाँद पूरा था,
आरव ने एलीना से कहा—
“मुझसे दूर चली जाओ।”
एलीना का दिल टूट गया।
“क्यों?”
आरव ने सच नहीं बताया।
“क्योंकि मैं तुम्हें बर्बाद कर दूँगा।”
एलीना की आँखों से आँसू बह निकले।
“अगर प्यार करना बर्बादी है…
तो मैं ये बर्बादी कबूल करती हूँ।”
आरव ने उसे अपनी बाहों में खींच लिया।
पहली बार।
और आख़िरी बार…
ऐसा उसने खुद से वादा किया।
अंधेरे की आहट
उसी रात, महल की दीवारों के पीछे साज़िश रची जा रही थी।
राजगद्दी के दुश्मन जाग चुके थे।
और उन्हें पता चल गया था—
आरव को किसी से प्यार हो गया है।
और प्यार…
सबसे कमज़ोर हथियार होता है।
भाग 1 का अंत (लेकिन कहानी अधूरी नहीं)
उस सुबह, एलीना अचानक गायब हो गई।
ना कोई संदेश।
ना कोई निशान।
आरव पागल-सा महल में चीख़ रहा था।
“उसे ढूँढो!”
“पूरे राज्य में ढूँढो!”
उसकी आँखों में अब प्यार नहीं था—
सिर्फ़ आग थी।
और उसने कसम खाई—
“अगर मेरी पहली नज़र का प्यार मुझसे छीना गया…
तो मैं पूरी दुनिया जला दूँगा।”