Machine ka Dil - 2 in Hindi Love Stories by shishi books and stories PDF | मशीन का दिल - 2

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मशीन का दिल - 2

शीशी अब उलझन में थी कि वह रिज़ा की सुने या सक्का की। उसने सोचा कि दोनों की बात सुनने में कोई समझदारी नहीं बल्कि बेवकूफी होगी, क्योंकि वह उस वक्त किसी पर भरोसा नहीं करना चाहती थी। उसने खुद की सुनी; उसके दिल ने उसे जो करने के लिए कहा, उसने वही किया।
शीशी का यह कदम दिखाता है कि वह अब मानसिक रूप से कितनी मजबूत हो गई है। जब कोई हमें धोखा देता है, तो अक्सर हम दूसरों के मशवरों में और भी उलझ जाते हैं। ऐसे में "खुद की सुनना" ही सबसे सही रास्ता होता है।
शीशी ने फैसला किया कि वह सक्का को मौका देगी क्योंकि वह शीशी से बहुत प्यार करता था, और उसने रिज़ा से सच पता करने के लिए उसे यह नहीं पता चलने दिया कि उसे पता चल गया है कि उसने शादी कर ली है।
शीशी का यह कदम काफी सोच-समझकर उठाया गया लगता है। वह एक तरफ सक्का की सच्ची मोहब्बत को परखना चाहती है और दूसरी तरफ रिज़ा के झूठ को रंगे हाथों पकड़ने के लिए धैर्य (patience) से काम ले रही है।
शीशी, रिज़ा से वैसे ही बात करती जैसे पहले करती थी। शीशी को सब पता था लेकिन वह सच जानने के लिए चुप रही। सक्का के साथ वक्त बिताती, उसे महत्व (intention) और प्राथमिकता (priority) देती।
शीशी की यह रणनीति काफी गहरी है। वह अपनी खामोशी को एक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है।
सक्का, शीशी के साथ बहुत खुश रहता, लेकिन शीशी अपने अंदर दर्द का इतना बड़ा समंदर लेकर सक्का को पूरी प्राथमिकता (priority) देती। रिज़ा उसे बहुत कम समय देता क्योंकि उसकी शादी हो चुकी थी; वह सारा दिन काम करता और रात को जब ऑनलाइन आता 😟 तब शीशी से झूठ बोलकर जल्दी सो जाता।
शीशी की यह स्थिति बहुत भावुक है। वह एक तरफ सक्का को वह खुशी दे रही है जो उसे खुद नसीब नहीं हो रही, और दूसरी तरफ रिज़ा के धोखे को चुपचाप सह रही है।
रात का सन्नाटा था, और शीशी अपने कमरे की खिड़की के पास बैठी थी। बाहर आसमान साफ़ था, लेकिन उसके अंदर एक तूफ़ान दबी हुई आग की तरह सुलग रहा था।
उसने अपना फोन उठाया। स्क्रीन पर रिज़ा का मैसेज चमक रहा था: "आज बहुत थक गया हूँ, काम ज़्यादा था। सो रहा हूँ, गुड नाइट।"
शीशी ने एक ठंडी आह भरी। उसे पता था यह झूठ है। उसे यह भी पता था कि रिज़ा इस वक़्त सो नहीं रहा, बल्कि अपनी उस नयी ज़िंदगी का हिस्सा बन रहा है जिसे उसने शीशी से छुपा कर रखा था। शीशी की उंगलियां टाइपिंग बार पर रुकी रहीं, लेकिन उसने सिर्फ इतना लिखा: "ठीक है, सो जाओ।"
दो अलग एहसास
उसी लम्हे, एक और नोटिफिकेशन आया। यह सक्का था।
सक्का: "शीशी, तुम जाग रही हो? अगर तुम थकी नहीं हो, तो क्या हम थोड़ी बात कर सकते हैं? बस तुम्हारी आवाज़ सुननी थी।"
शीशी की आंखों में आंसू डबडबा आए। एक तरफ वह शख्स था जिसे वह अपना सब कुछ मानती थी, लेकिन वह उसे सिर्फ झूठ और अंधेरा दे रहा था। दूसरी तरफ सक्का था, जो उसके हर लम्हे को रोशन करने की कोशिश कर रहा था, बे-ख़बर इस बात से कि शीशी का दिल कहीं और बिखरा पड़ा है।
शीशी का फैसला
शीशी ने अपने आंसू पोंछे और सक्का को कॉल मिलाई।
"हाँ सक्का, बोलो... मैं जाग रही हूँ," उसने अपनी आवाज़ को संभालते हुए कहा।
सक्का की आवाज़ में एक अजब सी खुशी थी। "तुम्हें पता है शीशी, आज का दिन कितना अच्छा था? तुमने मुझे वक़्त दिया, मेरी बातों को सुना... मुझे ऐसा लगा जैसे मेरी दुनिया पूरी हो गयी हो।"
शीशी मुस्कुरा दी, लेकिन वह मुस्कुराहट दर्द से भरी थी। उसने सोचा:
"एक इंसान मेरे झूठ को सच मान कर इतना खुश है, और दूसरा इंसान मेरे सच को झूठ समझ कर मुझे धोखा दे रहा है।"
खामोश इंतकाम
शीशी ने तय कर लिया था। वह रिज़ा को उसके झूठ के साथ जीने देगी, जब तक उसका यह झूठ खुद ही उसके सामने दीवार बन कर खड़ा न हो जाए। और तब तक, वह सक्का को वह हर खुशी देगी जिसका वह हक़दार था।
शीशी ने फोन पर सक्का से कहा, "तुम बहुत अच्छे हो, सक्का। शुक्रिया मेरे साथ होने के लिए।"
सक्का को लगा यह उसकी मोहब्बत का असर है, लेकिन यह शीशी का वह दर्द था जो अब पत्थर बन चुका था।
शीशी ☺️ और रिज़ा की कम बात होती थी इसलिए उसे कोई खबर नहीं थी कि शीशी सक्का से भी बात करती है। एक दिन रिज़ा का मैसेज आया, "हेलो शीशी, कैसे हो?"
शीशी ने कहा, "मैं अच्छी हूँ, तुम कैसे हो?" रिज़ा बोलता है, "मैं भी अच्छा हूँ, बस काम में बिज़ी हूँ थोड़ा, क्या हम बाद में बात करें?"
शीशी का दिल टूट गया कि वह अभी आया और अभी ही जा रहा है, लेकिन उसने खुद को संभाला और रिज़ा से कहा, "सुनो।"
शीशी ने कहा, "क्या तुम मुझसे प्यार करते हो?" रिज़ा ने कहा, "हाँ, बहुत ज़्यादा।" शीशी ने कहा, "एक सवाल पूछूँ, तुम्हारी कितनी GF हैं?" रिज़ा ने पहले कहा "10 😡" गुस्से वाले इमोजी भेजकर, फिर कहा, "सिर्फ तुम ही हो मेरी GF, ऐसे सवाल मत पूछा करो, अच्छा नहीं लगता।"
शीशी को इन सब के बाद भी उस लड़की का पता नहीं चला कि वह कौन है, जिससे रिज़ा ने शादी की। रिज़ा ने जाते-जाते एक ही बात कही कि "मैं सिर्फ तुमसे ही शादी करूँगा।"
रिज़ा का यह झूठ शीशी के ज़ख्मों पर नमक छिड़कने जैसा था। एक तरफ वह शादी कर चुका था और दूसरी तरफ शीशी को अभी भी उसी वादे के जाल में फँसाए रखना चाहता था।
शीशी सब्र का इम्तिहान देगी, वह अभी कुछ नहीं कह रही। उसने भी रिज़ा को "गुड नाइट" बोल दिया और ऑफलाइन हो गई। शीशी ने अपने ऊपर ध्यान देना थोड़ा कम कर दिया, जिससे उसकी तबीयत और चेहरा खराब होने लगा।
शीशी की यह हालत वाकई चिंताजनक है। जब इंसान अंदर से टूट जाता है, तो उसका असर उसकी सेहत और चेहरे पर साफ़ दिखने लगता है।
सक्का, हमेशा शीशी से बात करने की कोशिश करता, उसे हँसाता और प्राथमिकता (priority) देता। लेकिन शीशी सिर्फ उसकी बात पर हँसती, बात करती, उसे समय थोड़ा कम देती, और अपने अंदर उमड़ रहे सवालों के जवाब तलाशती।
1. सक्का का एक-तरफा जुनून
सक्का अपना सब कुछ दे रहा है। उसका हँसाना, शीशी को प्राथमिकता देना और हर वक्त उसके लिए मौजूद रहना दिखाता है कि उसके लिए शीशी ही उसकी पूरी दुनिया है। लेकिन दुख की बात यह है कि शीशी उसकी बातों पर सिर्फ "मुस्कुराती" है, उसका साथ "जी" नहीं रही। वह सक्का को वक्त इसलिए कम दे रही है क्योंकि उसका दिमाग अभी भी उन पुराने ज़ख्मों और सवालों की गिरफ्त में है।
2. शीशी की "आंतरिक जाँच" (Internal Investigation)
शीशी अब सिर्फ एक लड़की नहीं रही, वह एक जासूस (detective) बन गई है। उसके अंदर जो सवाल उमड़ रहे हैं, वे उसे चैन से सोने नहीं देते:
वह लड़की कौन है?
रिज़ा ने इतना बड़ा धोखा क्यों दिया?
क्या रिज़ा के दिल में थोड़ी सी भी शर्म या सच्चाई बची है?
वह सक्का से बात करते वक्त भी शायद वही सब सोचती है। उसका दिमाग रिज़ा की प्रोफाइल, उसकी पुरानी बातों और उसके "बिज़ी" होने के बहानों का विश्लेषण (analyze) करता रहता है।
3. एक खामोश दूरी
सक्का को लग रहा है कि वह शीशी के करीब आ रहा है, लेकिन शीशी ने अपने चारों तरफ एक दीवार खड़ी कर ली है। वह सक्का से बात तो करती है, लेकिन अपने दिल का हाल नहीं बताती। यह भावनात्मक दूरी (emotional distance) सक्का को आगे चलकर बहुत तकलीफ दे सकती है।
कहानी का मुमकिन मोड़ (Possible Twist):
शीशी का यह सवालों के जवाब तलाशना उसे किसी ऐसे सच तक ले जाएगा जो शायद उसने कभी सोचा भी नहीं होगा।
शीशी की "आंतरिक जाँच":
शीशी अब सिर्फ एक लड़की नहीं रही, वह एक जासूस बन गई है। उसके अंदर जो सवाल उमड़ रहे हैं, वे उसे चैन से सोने नहीं देते:
वह लड़की कौन है?
रिज़ा ने इतना बड़ा धोखा क्यों दिया?
क्या रिज़ा के दिल में थोड़ी सी भी शर्म या सच्चाई बची है?
शीशी की यह मानसिक स्थिति उसे अंदर ही अंदर खोखला कर रही है, लेकिन यही बेचैनी उसे सच के करीब भी ले जाएगी।