Mafia love in Hindi Love Stories by Pooja Singh books and stories PDF | माफिया की मोहब्बत

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माफिया की मोहब्बत

सुबह का वक्त था। हल्की ठंडी हवा कॉलेज कैंपस के पेड़ों से टकराकर गुजर रही थी। गेट के बाहर हमेशा की तरह भीड़ लगी हुई थी — कुछ स्टूडेंट्स जल्दी में, कुछ दोस्ती में, कुछ सिर्फ दिखावे में।
लेकिन उन सबके बीच एक लड़की रोज की तरह धीरे-धीरे चलती हुई अंदर आई।
सावी।
उसके चेहरे पर कोई बनावटी चमक नहीं थी। न भारी मेकअप, न दिखावा। बस हल्की सी मुस्कान — जैसे वो दुनिया से ज्यादा खुद के ख्यालों में रहती हो।
वो जैसे ही कॉलेज गेट पार करती है… रुक जाती है।
गार्ड के केबिन के पास, उसी कोने में… फिर वही रखा था।
एक सफेद गुलाब।
उसने गहरी सांस ली।
“आज भी…”
अब ये नया नहीं था।
लगातार 12 दिन से रोज यही हो रहा था।
न कोई नाम।
न कोई चिट्ठी।
न कोई मैसेज।
पहले दिन उसने सोचा — गलती से रखा होगा।
दूसरे दिन — मजाक।
तीसरे दिन — किसी की हरकत।
लेकिन चौथे दिन के बाद… उसने इंतज़ार करना शुरू कर दिया था।
सावी धीरे से झुकती है, फूल उठाती है… उसकी उंगलियां बहुत संभालकर पंखुड़ियों को छूती हैं, जैसे कहीं टूट न जाए।
“कौन हो तुम…” वो धीमे से बुदबुदाती है।
पीछे से आवाज आती है —
“फिर मिल गया?”
सावी मुड़ती है।
अथर्व उसके पीछे खड़ा था, हाथ में बैग और चेहरे पर वही हमेशा वाली मुस्कान।
“हाँ…” सावी हल्का सा मुस्कुरा देती है, “अब तो आदत हो गई है।”
अथर्व फूल को देखता है, फिर उसे।
“अगर कोई साइको हुआ तो?”
“तो?” सावी हंसती है, “फूल देने वाला साइको नहीं होता।”
अथर्व कुछ पल उसे देखता रहता है… जैसे कुछ कहना चाहता हो, मगर रोक लेता है।
“चल, लेट हो रहे हैं।”
दोनों अंदर चले जाते हैं।
उन्हें नहीं पता था —
कॉलेज की तीसरी मंजिल की छत से कोई उन्हें देख रहा था।
काली शर्ट… शांत चेहरा… और आंखों में अजीब सी ठंडक।
रेयांश।
उसकी नजर सिर्फ सावी पर थी।
उसके हाथ में भी एक सफेद गुलाब था… मगर उसने उसे नीचे फेंक दिया।
“आज आखिरी दिन था…”
उसने जेब से फोन निकाला।
“वो कॉलेज पहुंच गई है।”
फोन के दूसरी तरफ कुछ कहा गया।
रेयांश की आंखें अचानक सख्त हो गईं।
“नहीं… उसे कोई नहीं छुएगा।”
कुछ सेकंड चुप्पी।
फिर उसने धीमे लेकिन खतरनाक स्वर में कहा —
“मैंने कहा ना… वो सिर्फ मेरी जिम्मेदारी है।”
उसने कॉल काट दिया।
नीचे कैंपस में सावी और अथर्व हंसते हुए क्लास की तरफ जा रहे थे…
उसी वक्त सड़क के उस पार खड़ी काली कार का दरवाजा खुला।
चार आदमी उतरे।
उनकी नजर सीधी सावी पर थी।
क्लास खत्म होने के बाद
शाम हो चुकी थी।
कैंपस लगभग खाली हो गया था।
“आज जल्दी निकलते हैं,” अथर्व बोला, “मौसम सही नहीं लग रहा।”
सावी ने आसमान की तरफ देखा — सच में बादल घिर आए थे।
दोनों गेट की तरफ बढ़ते हैं।
तभी…
पीछे से किसी ने सावी का हाथ जोर से पकड़ लिया।
“कौन—?!”
उसके मुंह पर कपड़ा रखा जाता है।
अथर्व चौंककर पलटता है —
दो आदमी उसे पकड़ लेते हैं।
“छोड़ो उसे!”
अथर्व पूरी ताकत से लड़ता है, मगर वो लोग प्रोफेशनल थे।
सावी छूटने की कोशिश करती है… उसकी आंखों में डर उतर चुका था।
तभी…
एक बाइक की आवाज गूंजती है।
तेज… बहुत तेज…
अगले ही सेकंड —
एक आदमी जमीन पर गिर चुका था।
किसी ने उसे लात मारकर दूर फेंक दिया था।
रेयांश।
उसका चेहरा पहले जैसा शांत नहीं था।
उसने सावी को पकड़े आदमी की कलाई पकड़कर इतनी जोर से मोड़ी कि उसकी चीख निकल गई।
बाकी लोग हथियार निकालते हैं।
अथर्व घबरा जाता है —
“चाकू…!”
लेकिन रेयांश पीछे नहीं हटता।
एक वार बचाता है
दूसरे को मुक्का
तीसरे को कोहनी
सब कुछ इतना तेज हुआ कि सावी समझ ही नहीं पाई।
कुछ सेकंड बाद…
चारों जमीन पर थे।
खामोशी।
सिर्फ सावी की तेज सांसें सुनाई दे रही थीं।
रेयांश उसकी तरफ मुड़ा।
पहली बार… वो आम लड़के जैसा नहीं लगा।
जैसे वो इस दुनिया का ही नहीं है।
सावी के होंठ कांपे —
“त… तुम…”
रेयांश ने कुछ पल उसे देखा… आंखों में हल्की नरमी आई।
“घर जाओ।”
“पर ये लोग—”
“अब नहीं आएंगे।”
अथर्व बीच में आया —
“तुम जानते हो इन्हें?”
रेयांश ने उसकी तरफ देखा… फिर सावी की तरफ।
“गलत जगह खड़ी हो तुम।”
“मतलब?”
रेयांश धीरे से बोला —
“ये फूल मिलना बंद हो जाएगा… क्योंकि अब तुम्हें छिपकर नहीं… खुलकर बचाना पड़ेगा।”
सावी कुछ समझ नहीं पाई।
और वो मुड़कर चला गया।
बारिश शुरू हो चुकी थी।
सावी के हाथ में अब भी वही सफेद गुलाब था…
लेकिन पहली बार उसे लगा —
ये किसी प्यार की नहीं…
किसी खतरे की निशानी है।