Trisha - 38 in Hindi Women Focused by palvisha books and stories PDF | त्रिशा... - 38

Featured Books
  • Money Vs Me - Part 13

    मैं उस दिन रात भर ठाकुर साहब के बंगले पर ही था। ठाकुर साहब ब...

  • स्वयंवधू - 67

    67. हमारा इतिहास भाग 2(अभी …हाह… क्यों? …अभी क्यों?…)महाशक्त...

  • आषाढ़ पूजा

    कहानी- आषाढ़ पूजा 'सुनो दिव्या आज हम सब माता वाली टेकरी पर चल...

  • Fannaah: An Impossible Love Story - 8

    अध्याय 8 : दूसरी परिक्षा – खून की प्यास सभा में सन्नाटा पसरा...

  • कर्मशील मनुष्य

    ऋग्वेद सूक्ति-- (73) की व्याख्या न देवास: कवत्नवे।ऋगवेद--7/3...

Categories
Share

त्रिशा... - 38

राजन ने उन लोगो के पास जाकर आदर से त्रिशा के पापा और मामा को नमस्ते कहा। उन्होनें भी उसे सुखी और सफल रहने का आशीर्वाद दिया। फिर एक एक कर त्रिशा के चारों के भाईयों ने एक एक कर राजन के पैर छुए। त्रिशा ने भी नीचे आकर राजन की नानी, मामी और मां के पैर छुए और अपने पापा और मामा को नमस्ते कहा। 

समान्य शिष्टाचार के बाद सभी लोग वहीं  बैठ गए। मेहमानों के लिए जल्दी से पहले चाय - नाश्ते का इंतजाम किया गया। फिर चाय और गपशप के बाद , मेहमानों को पकवानों से खातिरदारी का इंतजाम किया गया। 


खाना हो जाने के बाद कल्पेश ने उन लोगों से जाने को कहा और उनकी इजाजत मिलने के बाद कल्पेश ने त्रिशा के भाईयों से उसका सामान गाड़ी में रखने को कहा। कल्पेश की बात सुनकर त्रिशा के भाई उसके साथ उसके रुम  में गए और उसका सूटकेस उठाकर चलने लगे। 

त्रिशा अपने सारे बैग्स रखवा ही रही थी कि इतने में पीछे से राजन भी कमरे में आ गया। अपने भाइयों के जाते ही त्रिशा भी अपना पर्स लेकर नीचे की ओर जाने लगी लेकिन तभी राजन ने त्रिशा की कलाई पकड़ कर उसे रोका और अपनी तरफ खींच कर कमरे का दरवाजा बंद कर दिया। 

राजन को ऐसा करता देख त्रिशा ने पूछा ," अरे... अरे.... अरे..... क्या कर रहे हो आप????? दरवाजा खोलिए नीचे सब इंतजार कर रहे है मेरा!!!!!!!" 

" खोल दूंगा,  दरवाजा भी पर जरा अपनी बीवी को थोड़ा सा प्यार तो कर लूं!!!!!! और वैसे भी कर लेने दो सबको इंतजार क्योंकि उसके बाद मुझे भी तो महिने भर अपनी बीवी का इंतजार ही तो करना है!!!!!!!!" राजन ने त्रिशा को अपनी बाहों में भरते हुए कहा। 

" अच्छा जी!!!!!!!" त्रिशा ने शर्माते हुए जवाब दिया‌। और खुद को उसकी बाहों में समेट दिया। 

"हां जी!!!!!!!!" राजन ने हस कर जवाब दिया और फिर त्रिशा के चेहरे को निहारने लगा। उसने अपनी उंगलियों से त्रिशा के चेहरे पर आती लटों को कान के पीछे किया और फिर उसके माथे को चूमते हुए कहा," जा तो रही हो, पर  हो सके तो जरा जल्दी वापिस आना!!!!!! अपने मायके जाकर पति को भूल मत जाना।।" 

त्रिशा ने मुस्कुराते हुए हां में सिर हिलाया और वह हंसते हुए बोली," आप जाने तो दो पहले, वापिस तो मैं तब आऊंगी ना!!!!!!!!" 

" हे भगवान!!!!!! कैसी बीवी दी है आपने मुझे????? पति यहां प्यार कर रहा है और पत्नी को देखो कैसे बस मायके जाने की लगी है!!!!!!!!" राजन ने शिकायती बच्चें की तरह शक्ल बनाते हुए कहा‌। 

पर त्रिशा कुछ कह पाती इतने में ही किसी ने दरवाजा आकर खटखटाया और बाहर से मानस की आवाज आई,
" त्रिशा!!!!!!! और कुछ सामान तो नहीं है ना तुम्हारा?????" 

अपने भाई की आवाज सुनकर त्रिशा को समझ नहीं आया एक पल को कि क्या कहे। वो तो शर्म से पानी पानी हो रही थी यह सोच कर की कहीं उसके भईया राजन और उसकी बात ना सुन ली हो। सुन ली होगी तो क्या सोच रहे होगे वो। 

त्रिशा को ऐसे चुप खड़ा देख कर राजन ही बोला," नहीं भईया और सामान नहीं है। त्रिशा भी वाशरुम में है जब आएगी तो मैं उससे पूछ लूंगा और अगर कुछ होगा तो मैं ले आऊंगा!!!!!!" 

"ठीक है!!!!! त्रिशा से कहना हम लोग गाड़ी में उसका इंतजार कर रहे है वो आ जाए नीचे!!!!!"  मानस ने बाहर से ही जवाब दिया और वो चला गया। 


मानस के जाते ही त्रिशा ने राहत की सांस ली लेकिन तभी राजन उसे छेड़ते हुए बोला,
" अरे तुम इतना घबरा क्यों गई थी????? पत्नी हो तुम मेरी, और पति हूं मैं तुम्हारा। हमारे पास पूरा हक है एक दूसरे के करीब रहने का‌ और प्यार भरी बाते करने का!!!!!!" 

"आप और आपकी बातें!!!!!!" त्रिशा ने राजन की ओर देखते हुए कहा। फिर वह दोनों ही चुप हो गए और एक दूसरे को देखने लगे। फिर अंत में त्रिशा ही बोली," नीचे सब इंतजार कर रहे है हमारा!!!!!!!" 

"हम्मममम!!!! "राजन‌ ने जवाब दिया। फिर वह बोला," अच्छा ठीक है मैं तुम्हें नीचे जाने दूंगा पर पहले अपनी आंखे बंद करो!!!!!!" 

" आंखे बंद करुं???? लेकिन क्यों????" त्रिशा ने चौकते हुए पूछा। 

"नीचे सब इंतजार कर रहे है ना!!!!!! ऐसे ही सवाल जवाब करती रहोगी मुझसे  तो नीचे जाकर सबको जवाब तुम्हें देना पड़ जाएगा कि ऊपर क्या कर रही थी???? फिर मुझसे उम्मीद मत रखना कि मैं जवाब दूंगा!!!!इसलिए जल्दी से आंखे बंद कर लो!!!"  राजन ने त्रिशा की आंखे बंद करते हुए कहा। 

त्रिशा चुपचाप आंखे बंद करके खड़ी हो गई और फिर उसने महसूस किया कि राजन ने उसके गले में कुछ पहनाया है और साथ ही हाथ में कुछ रखा है। त्रिशा सोच ही रही थी कि तभी राजन उसका हाथ पकड़ कर उसे ले जाने लगा और चलते चलते बोला,
" आंखे मत खोलना अभी!!!! जब मैं बोलूं तभी खोलना!!!!!" 

इतना कहते हुए राजन‌ ने उसे एक जगह खड़ा कर दिया और फिर उससे कहा कि" अब खोलो आंखें अपनी!!!!!"

त्रिशा ने धीमे से अपनी आंखें खोली और सामने आइने को पाया जिसमें वो और राजन दिखाई दे रहे है। राजन ने उसके गले की ओर इशारा करके पूछा," कैसा लगा????" 

राजन के इशारे के बाद त्रिशा ने अपने गले में देखा तो उसमें सोने कि एक  चैन थी जिसमें त्रिशा और राजन का नाम लिखा एक पैंडेंट था जो कि बहुत ही सुंदर लग रहा है। त्रिशा ने खुश होते हुए कहा," बहुत प्यारा!!!!!! बहुत सुंदर!!!!!" 

"वैसे तुम्हारे हाथ में भी कुछ है।"  राजन ने‌ त्रिशा के कान में धीरे से फुसफुसाया। और त्रिशा ने अपने हाथ की ओर देखा जिसमें एक नया नवेला टच स्क्रीन फोन है। त्रिशा ने चौकते हुए पूछा," ये किसके लिए????" 

"मेरी प्यारी बीवी के लिए और किसके लिए होगा!!!!!!!! और वैसे भी एक महीने के लिए जा रही हो तुम तो मैं तुमसे  वहां बात कैसे करुंगा???? बार बार घर पर कोई फोन करुंगा!!!!!! इसलिए यह तुम्हारे लिए!!!!! और हां अब ज्यादा नखरे ना करना जल्दी से रख लो और चलो नीचे सब खड़े है तुम्हारे लिए!!!!!!!"  राजन ने जवाब देते हुए कहा और फिर एक बार त्रिशा के माथे को चूमने के बाद दोनों कमरे से बाहर आ गए। 

चलते चलते त्रिशा राजन से बोली," अपना ध्यान रखिएगा और मेरा इंतजार करिएगा।।।" 

एक दूसरे से एकांत में विदा लेने के बाद दोनों नीचे पहुंचे तो सब लोग पहले से ही गाड़ी में बैठ चुके थे। त्रिशा ने सभी के पैर छुए और वो भी जाकर गाड़ी में बैठ गई। उसके बाद  मानस ने गाड़ी का इंजन शुरु किया और गाड़ी सरपट दौड़ने लगी।