बारिश की वो पहली मुलाकात
(एक हिंदी कहानी – न्यूनतम 2000 शब्द)
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प्रस्तावना
बरसात का मौसम हमेशा से ही दिलों में एक अजीब सी हलचल पैदा करता है। कहीं मिट्टी की खुशबू, कहीं भीगी हुई हवाओं का संगीत, और कहीं दिल की धड़कनों का नया राग। यह कहानी है "वो पहली मुलाकात" की, जब बारिश ने दो अनजाने दिलों को एक-दूसरे से मिलाया और ज़िंदगी की किताब में एक नया अध्याय लिख दिया।
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अध्याय 1 – इंतज़ार की घड़ियाँ
अमृतसर के पास एक छोटे कस्बे में, जून का महीना था। गर्मी अपने चरम पर थी। लोग पंखों और कूलरों के सहारे दिन काट रहे थे। लेकिन सबकी निगाहें आसमान पर थीं—कब बादल आएँगे, कब बारिश होगी।
आरव, जो शहर के कॉलेज में पढ़ता था, छुट्टियों में अपने गाँव आया हुआ था। वह अक्सर शाम को खेतों की ओर निकल जाता, जहाँ हवा थोड़ी ठंडी होती और पेड़ों की छाँव में सुकून मिलता। उसके मन में एक अजीब सी बेचैनी थी, जैसे किसी का इंतज़ार हो।
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अध्याय 2 – पहली बूंदें
एक दिन अचानक आसमान में काले बादल छा गए। हवा में ठंडक घुल गई। लोग अपने-अपने घरों से बाहर निकल आए। बच्चों ने खुशी से शोर मचाना शुरू कर दिया।
आरव भी खेतों की ओर निकल पड़ा। मिट्टी की खुशबू उसके दिल को छू रही थी। तभी पहली बूंद उसके चेहरे पर गिरी। उसने आँखें बंद कर लीं और उस एहसास को जीने लगा।
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अध्याय 3 – मुलाकात
बारिश तेज़ हो चुकी थी। आरव पास के बरगद के पेड़ के नीचे जाकर खड़ा हो गया। तभी उसने देखा—एक लड़की भीगती हुई उसी पेड़ की ओर दौड़ रही थी। उसके हाथ में किताबें थीं, जिन्हें वह बचाने की कोशिश कर रही थी।
लड़की का नाम था सिया। वह गाँव की लाइब्रेरी में पढ़ने जाती थी और वहीं से लौट रही थी। बारिश ने उसे अचानक घेर लिया था।
दोनों की नज़रें मिलीं। सिया हल्की मुस्कान के साथ बोली—
“लगता है बारिश ने हमें एक ही जगह शरण लेने पर मजबूर कर दिया।”
आरव ने भी मुस्कुराते हुए कहा—
“शायद यही बारिश का जादू है।”
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अध्याय 4 – बातचीत की शुरुआत
पेड़ के नीचे खड़े होकर दोनों बातें करने लगे। सिया ने बताया कि उसे किताबें पढ़ने का बहुत शौक है। वह कविताएँ लिखती है और बारिश उसके लिए प्रेरणा का स्रोत है।
आरव ने भी अपने शौक बताए—उसे संगीत पसंद था। वह गिटार बजाता था और अक्सर बारिश में धुनें बनाता था।
सिया ने हँसते हुए कहा—
“तो फिर आज बारिश हमें दोनों को एक नया गीत और एक नई कहानी दे रही है।”
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अध्याय 5 – दिल की धड़कनें
बारिश थमने का नाम नहीं ले रही थी। दोनों की बातें गहराती चली गईं। आरव को लगा कि सिया की आँखों में एक अलग चमक है, जैसे बारिश की बूंदें उनमें झिलमिला रही हों।
सिया भी आरव की बातों में खो गई थी। उसे लगा कि यह मुलाकात साधारण नहीं है।
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अध्याय 6 – विदाई
जब बारिश थोड़ी हल्की हुई, सिया ने किताबें सँभालीं और घर की ओर चल दी। जाते-जाते उसने कहा—
“शायद अगली बारिश हमें फिर मिलाए।”
आरव ने उसे जाते हुए देखा और मन ही मन सोचा—
“यह मुलाकात मेरी ज़िंदगी की सबसे खूबसूरत याद बन गई।”
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अध्याय 7 – अगली मुलाकातें
दिन बीतते गए। हर बार जब बादल घिरते, आरव का दिल धड़कने लगता। और सचमुच, कई बार बारिश ने उन्हें फिर मिलाया। कभी लाइब्रेरी के बाहर, कभी खेतों में, कभी गाँव की गलियों में।
दोनों की दोस्ती गहरी होती चली गई। सिया अपनी कविताएँ आरव को सुनाती, और आरव उसके लिए गिटार बजाता।
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अध्याय 8 – इज़हार
एक दिन तेज़ बारिश हो रही थी। दोनों फिर उसी बरगद के पेड़ के नीचे मिले। आरव ने गिटार निकाला और एक धुन बजाने लगा।
उसने कहा—
“सिया, जब भी बारिश होती है, मुझे लगता है कि यह हमें मिलाने के लिए आती है। क्या तुम भी ऐसा महसूस करती हो?”
सिया ने मुस्कुराते हुए कहा—
“हाँ, बारिश हमारी कहानी लिख रही है।”
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अध्याय 9 – नई शुरुआत
उस दिन से दोनों ने तय किया कि वे अपनी कहानी को आगे बढ़ाएँगे। सिया ने अपनी कविताओं को किताब का रूप देना शुरू किया, और आरव ने उसके लिए गीत बनाए।
गाँव के लोग भी उनकी जोड़ी को पसंद करने लगे। बारिश अब उनके लिए सिर्फ मौसम नहीं थी, बल्कि प्यार का प्रतीक बन गई थी।
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उपसंहार
बरसात की वो पहली मुलाकात ने दो दिलों को जोड़ा। मिट्टी की खुशबू, भीगी हवाएँ, और बूंदों का संगीत उनकी ज़िंदगी का हिस्सा बन गए।
कभी-कभी ज़िंदगी की सबसे खूबसूरत कहानियाँ यूँ ही अचानक शुरू हो जाती हैं—जैसे बारिश की पहली मुलाकात।