एपिसोड 4 - "सफर, शक्ति और ब्रह्मांड का दरवाज़ा"
कहानी: द ग्रेट नथिंग (R3G7: ब्रह्मांड का रहस्य)
लेखक: सुरेश सोंधिया
दृश्य 1: एक नामुमकिन मंज़िल
स्थान: डॉ. आरव की सीक्रेट लैब
"मुझे पता है वह जगह कहाँ है," रोबोट अंकल (इंसान, पर गैजेट्स के उस्ताद) की गंभीर और भारी आवाज़ लैब के सन्नाटे को चीरते हुए गूंजी।
डॉ. आरव ने अपनी कंप्यूटर स्क्रीन से नज़र हटाकर उनकी तरफ देखा। उसकी आँखों में अविश्वास था। "तुम मज़ाक कर रहे हो अंकल? 'ग्रेट नथिंग' (Great Nothing) की लोकेशन इस ब्रह्मांड के किसी रडार, किसी नक्शे में मौजूद ही नहीं है!"
"रडार में नहीं है डॉक्टर," रोबोट अंकल ने अपने टूल-बेल्ट को कसते हुए कहा, "क्योंकि वह हमारे ब्रह्मांड का हिस्सा होकर भी उससे अलग है। वह मौत और शून्यता का केंद्र है। चलो, हमारे पास वक्त कम है।"
कुछ ही देर में, डॉ. आरव, रोबोट अंकल और उनका एक रहस्यमयी साथी 'गुरूष' एक विशाल, अंडरग्राउंड हैंगर में खड़े थे। सामने एक बेहद आधुनिक, काले रंग का स्पेसशिप खड़ा था, जिसे कुछ दिन पहले ही एक अनजान ग्रह 'K-452b' से लाया गया था।
रोबोट अंकल ने अपने साधारण कपड़े उतारे और एक भारी, काले रंग का हाई-टेक रोबोटिक कॉम्बैट सूट (Combat Suit) पहन लिया। सूट लॉक होते ही उसकी आँखें और चेस्ट-प्लेट नीली रोशनी से चमक उठीं। वह इस कवच में किसी अजेय योद्धा की तरह लग रहे थे।
आरव स्पेसशिप की तरफ बढ़ा, लेकिन तभी गुरूष वहीं ठिठक गया।
"मेरा सफर यहीं तक था, आरव," गुरूष की आवाज़ में एक अजीब सी उदासी थी। "मुझे अपने ग्रह लौटना होगा। ब्रह्मांड को बचाने की यह लड़ाई... अब तुम्हें और रोबोट अंकल को ही लड़नी है।"
रोबोट अंकल ने मुड़कर देखा। "क्या तुम हमारे साथ नहीं चलोगे गुरूष? तुम्हारी प्राकृतिक ताकत वहाँ बहुत काम आ सकती है।"
गुरूष ने एक गहरी, खौफनाक सांस ली। "नहीं... मैं इस ब्रह्मांड की उन गहराइयों में नहीं जा सकता। अगर मेरी प्रजाति के लोग खुले अंतरिक्ष के उस पार, उस शून्यता (Great Nothing) में जाएंगे, तो एक विनाशक शक्ति हमें अपने कब्ज़े में ले लेगी।"
गुरूष ने अपनी आँखें बंद कीं। "अभी मैं तुम्हारी तरह एक इंसान दिखता हूँ डॉक्टर... लेकिन वहाँ पहुँचते ही मेरा पूरा शरीर 'डार्क मैटर' (काले धुएं और ऊर्जा) में बदल जाएगा। मेरी आँखें ठंडी धातु की तरह हो जाएंगी और मैं असीमित शक्ति के साथ एक ऐसा 'विनाशक' बन जाऊंगा... जो सिर्फ तबाही लाएगा। इसीलिए हम कभी अपनी सीमाएं नहीं लांघते।"
आरव ने खौफ के साथ सहमति में सिर हिलाया। उसने गुरूष से विदा ली और रोबोट अंकल के साथ स्पेसशिप के कॉकपिट में बैठ गया।
दृश्य 2: शून्यता का खौफ और खूंखार हमला
स्थान: द ग्रेट नथिंग (अंतरिक्ष का शून्य)
स्पेसशिप के थ्रस्टर्स नीली आग उगलते हुए चालू हुए और वह रौशनी की गति (Speed of Light) से अंतरिक्ष का सीना चीरते हुए निकल पड़ा।
कुछ ही समय बाद, स्पेसशिप की रफ़्तार धीमी हुई। डॉ. आरव ने कॉकपिट की बड़ी स्क्रीन की तरफ देखा और उनकी आँखें फटी की फटी रह गईं।
वहाँ कोई तारे नहीं थे। कोई चमकता हुआ नेबुला नहीं था। बस एक अनंत, खौफनाक और जमा देने वाला अंधेरा था— 'द ग्रेट नथिंग'। और उस घुप्प अंधेरे के बीचों-बीच एक बहुत ही अजीब, खुरदुरा और मृत ग्रह तैर रहा था।
स्पेसशिप उस वीरान ग्रह की सतह पर उतरा। बाहर का माहौल इंसान के लिए जानलेवा था। रोबोट अंकल ने अपनी बेल्ट से एक छोटी सी शीशी निकाली और आरव को दी। "इसे पी लो डॉक्टर। यह लिक्विड (तरल) तुम्हारे फेफड़ों को इस तरह म्यूटेट (बदल) देगा कि तुम बिना ऑक्सीजन के भी इस मरे हुए ग्रह पर सांस ले सकोगे।"
आरव ने बिना सोचे वह लिक्विड पी लिया और दोनों स्पेसशिप से बाहर उस मृत ग्रह की ज़मीन पर उतर गए।
चलते हुए रोबोट अंकल ने अपने सूट के कम्युनिकेटर से छुपकर एक सीक्रेट हैलो-मैसेज 'सिया' नाम के एक लड़के को भेज दिया था। अंकल को पता था कि ब्रह्मांड की इस दरार को सिर्फ एक ख़ास खून की बूंद ही बंद कर सकती है।
अचानक... उनके पैरों के नीचे की ज़मीन भयंकर रूप से हिली!
इससे पहले कि वे कुछ समझ पाते, उस वीरान ग्रह की क्रेटर (गड्ढे) में छिपे हुए एक खूंखार एलियन क्रिएचर (परग्रही जानवर) ने उन पर हमला कर दिया। वह डायनासोर से भी विशाल था और उसके जबड़े में तेज़ाब टपक रहा था।
रोबोट अंकल ने तुरंत अपने रोबोटिक सूट की शक्ति से उस पर पलटवार किया। हवा में लेज़र की नीली किरणें और भारी मुक्कों की आवाज़ें गूंज उठीं। लेकिन वह क्रिएचर बहुत ताकतवर था। उसने अपनी कांटेदार पूंछ से इतना ज़ोरदार वार किया कि रोबोट अंकल का भारी सूट हवा में उछलकर एक विशाल चट्टान से टकराया। चट्टान चूर-चूर हो गई और रोबोट अंकल वहीं बेहोश होकर गिर पड़े।
आरव घबरा गया। उसने अपनी प्लाज़्मा गन निकाली और उस क्रिएचर की आँखों पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। जानवर दर्द से चीखा और किसी तरह चकमा खाकर वहां से अंधेरे में भाग गया।
आरव दौड़कर रोबोट अंकल के पास पहुँचा। उनकी हालत खराब थी, उनकी सांसें उखड़ रही थीं। आरव ने तुरंत उनका वह भारी, डैमेज हुआ रोबोटिक सूट उतारा और अपनी जेब से वह 'तरल' निकालकर रोबोट अंकल के मुंह में डाल दिया, ताकि वे बिना सूट के भी उस ग्रह पर जिंदा रह सकें।
खतरे को देखते हुए, आरव ने खुद वह पावरफुल रोबोटिक सूट पहन लिया ताकि वह अगला हमला रोक सके।
दृश्य 3: गलतफहमी का महासंग्राम
तभी, आसमान से एक उल्कापिंड की तरह कोई चीज़ ज़मीन पर आ गिरी। धूल छंटी तो वहां एक गठीला लड़का खड़ा था— सिया!
सिया ने जैसे ही देखा कि रोबोट अंकल (जिन्होंने उसे बचपन से पाला था और पिता समान थे) बेहोश पड़े हैं, और उनका वह खास कॉम्बैट सूट किसी अजनबी (डॉ. आरव) ने पहन रखा है... सिया का खून खौल उठा। उसे लगा आरव ने ही रोबोट अंकल को मारा है।
दूसरी तरफ, आरव ने सिया को गुस्से में अपनी तरफ बढ़ते देखा और उसे कोई नया दुश्मन या एलियन समझ लिया।
बिना एक भी शब्द कहे, दोनों एक-दूसरे पर खूंखार जानवरों की तरह झपट पड़े!
यह कोई आम लड़ाई नहीं थी; यह दो अलग-अलग ताकतों का महासंग्राम था। आरव के पास रोबोट अंकल का हाई-टेक सूट था जो रॉकेट की तरह उड़ सकता था और दोनों हाथों से लेज़र फायर कर सकता था। वहीं, सिया के पास अपनी प्राकृतिक, रहस्यमयी और असीमित फुर्ती थी।
लड़ाई इतनी ब्रूटल (खतरनाक) थी कि हर वार के साथ उस मृत ग्रह की ज़मीन फटने लगी थी। आरव हवा से मिसाइलें दाग रहा था, तो सिया अपनी फुर्ती से उसके हर वार को नाकाम कर रहा था। यह लड़ाई एक या दो घंटे नहीं... बल्कि लगातार तीन दिनों तक चलती रही!
दृश्य 4: ब्रह्मांड का दरवाज़ा और एक नई शुरुआत
तीन दिन बाद।
दोनों पूरी तरह से पस्त हो चुके थे। आरव का रोबोटिक सूट भी बुरी तरह टूट-फूट चुका था, उसकी एक आँख का शीशा चटक गया था।
अंतिम प्रहार के लिए, सिया ने एक चीते की तरह हवा में छलांग लगाई और आरव के सूट के सीने पर अपना नंगा हाथ दे मारा। उसका निशाना सूट के बीचों-बीच लगा वह चमकता हुआ 'पावर कोर' (पत्थर) था, जो पूरे सूट को ऊर्जा दे रहा था।
जैसे ही सिया ने उस पत्थर को अपनी पूरी ताकत से नोचकर बाहर निकाला... एक भयंकर नीली रोशनी का विस्फोट हुआ!
विस्फोट की ताकत इतनी ज्यादा थी कि भारी सूट पहने डॉ. आरव हवा में तिनके की तरह उड़कर कई मीटर दूर जा गिरे। वहीं दूसरी तरफ, उस कोर की अत्यधिक और अनियंत्रित ऊर्जा के कारण सिया का वह दायां हाथ बुरी तरह झुलस गया।
दर्द से कराहते हुए सिया के हाथ से खून की एक बूंद टपकी... और वह बूंद सीधा उस वीरान ग्रह के उसी प्राचीन खड्डे में जा गिरी जहाँ से वह प्रलयकारी दरार शुरू हुई थी।
सिया के खून की बूंद के उस खड्डे में गिरते ही पूरे ग्रह पर एक भयंकर भूकंप आ गया! ज़मीन दो हिस्सों में चीरने लगी।
उसी धमाके और कंपन से रोबोट अंकल को होश आ गया। उन्होंने उठकर जो नज़ारा देखा, वह किसी की भी रूह कंपाने के लिए काफी था। फटी हुई ज़मीन के बीच से अंतरिक्ष की एक नीली और बैंगनी दरार खुल गई थी— यह एक 'वॉर्महोल' था... दूसरे ब्रह्मांड (R3G8) का दरवाज़ा!
और सिया के हाथ में मौजूद वह चमकता हुआ पावर कोर (पत्थर) किसी शक्तिशाली चुंबक की तरह उस दरवाज़े की तरफ खिंचा... और उस पार (तक्ष राज्य वाले ब्रह्मांड में) एक उल्कापिंड की तरह अंतरिक्ष में कहीं चला गया। पत्थर के जाते ही वह दरवाज़ा हमेशा के लिए बंद हो गया।
तीनों ने आसमान की तरफ देखा। 'द ग्रेट नथिंग' की जो विशालकाय दरार पूरे ब्रह्मांड को निगलने वाली थी, वह सिया के खून की बूंद के प्रभाव से धीरे-धीरे अपने आप सिल रही थी।
तबाही रुक गई थी।
सिया अभी भी गुस्से से फुफकार रहा था। वह अपने झुलसे हुए हाथ के साथ फिर से डॉ. आरव को जान से मारने के लिए आगे बढ़ा।
"रुक जाओ सिया!" रोबोट अंकल लड़खड़ाते हुए बीच में आ गए। "यह हमारा दुश्मन नहीं है बेटे! यह डॉ. आरव हैं, और यह ब्रह्मांड को बचाने में हमारे साथ हैं।"
सिया ठिठक गया। उसकी मुट्ठी ढीली पड़ गई।
तभी... उनके ठीक पीछे से एक सर्द, जमा देने वाली हवा का झोंका आया।
तीनों ने झटके से पलटकर देखा। कुछ दूरी पर एक विशाल, खौफनाक काली परछाई खड़ी थी। उसका पूरा शरीर अंतरिक्ष के अंधेरे से भी ज्यादा काला (डार्क मैटर) था, और उसकी आँखें ठंडी, बेजान धातु की तरह चमक रही थीं। उस परछाई से जो खौफनाक ऊर्जा निकल रही थी, वह चीख-चीख कर बता रही थी कि वह वहां दोस्ती करने नहीं... बल्कि उन्हें खत्म करने आई है।
क्या यह वही 'गुरूष' था जो अपनी सीमाएं लांघकर एक विनाशक बन चुका था?
(स्क्रीन काली हो जाती है)
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— लेखक: सुरेश सोंधिया