Shahad ki Gudiya - 7 in Hindi Fiction Stories by Ramesh Desai books and stories PDF | शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (7)

Featured Books
Categories
Share

शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (7)

               

                   शहद की गुड़िया - प्रकरण - 7

        " दादू! कहानी में मुझ से लिखवाना की ऐसे आप की हर डांट से मेरा आप के प्रति प्यार बढ़ता था. ".

        "आप की बेबाकी ने मेरा सारा डर निकाल दिया था."

         "मुझे महसूस हुआ था आप एक पिकु एप्लीकेशन के केवल सभ्य नहीं बल्कि कोई मेरे अपने हो  जो बिछड़ गया था और कई साल के बाद मेरी ज़िन्दगी में लौटा था. "

         "मुझे आप से मिलकर कितनी खुशी मिली थी वह मैं ब्यान नहीं कर सकती थी. लेकिन कहानी में उसे प्रस्तुत करने का नेक प्रयास जरूर करूंगी. "

          " दादू! वह खुशी ऐसी थी जैसे बरसो की  प्यासी रूह को मानो पहली बारिश मिल गईं हो. आप की बेबाकी ने मेरे अकेलेपन को मानो पलभर में दूर कर दिया था. ऐसा लगा जैसे बहुत बड़ा करिश्मा हो गया. आप की हर एक डांट ने मुझे बहुत कुछ सिखाया था. आप ने मुझे भरपूर प्यार का बड़ा उपहार दिया था. "

         " दादू! कहानी में लिखना कैसे मेरी राते बदल गईं थी? बस प्रतिपल आप के रोमांटिक मेसेज की राह टकती थी. "

          " राते कैसे बदल गईं थी. उस के बारे में लिखना अति आवश्यक हैं, यह याद रहे. "

          " हा दादू आप की यह नसीहत आप की पिकु कभी नहीं भूलेंगी. "

         " दादू यह भी लोगो को बताना सच्चा प्यार क्या क़्या कर सकता हैं! "

         " प्यार यह एक वरदान हैं जो हर किसी को नहीं मिलता और जिसे मिला हैं उस से खुश होना, कुछ सिखना, जलन के शिकार होकर उस को तोड़ने का गलती से भी प्रयास नहीं करना. दुनिया में दो प्यार करने वालों को अलग करने जैसा महा पाप और कोई नहीं हैं. "

         " मैं आप की बाहों की कायल हो गईं हूं, हर पल उस में रहने को तरसती हूं. आप के साथ रहना चाहती हूं. इसी लिये आप ने नया रास्ता खोज लिया. "

      " दादू! मुझे अपनी सेक्रेटरी बनाकर मुझे बागबाग कर दिया था. पहली बार केबिन में दाखिल होते ही आपने बड़े प्यार से मुझे वेल कम किया था. मेरे कहने पर मुझे अपनी गोद में बिठा कर मेरे गाल और होठों को चुम्बन किया था. मेरे दूध के कटोरे को छूने का प्रयास किया था. लेकिन मैंने आप को रोक लिया था. "

          " मैंने अंदर दाखिल होने के पहले औपचारिकता दिखाते हुए आप की अनुमति मांगी थी, ' दादू मैं अंदर आ सकती हूं तब आपने बड़े प्यार से कहां था : ' पिकु यह ओफिस भी तुम्हारी ही है, तुम्हे अनुमति लेने की कोई जरूरत नहीं हैं.. "

           "और अपनी जगह से उठकर केबिन के दरवाजे तक आकर मेरा हाथ पकडकर केबिन के भीतर ले गये थे.यह मेरा बहुत बड़ा सन्मान था. जिस ने मुझे गदगड़ित कर दिया था. "

           " मैंने आप से कहां था : ' दादू मैं आप की पिकु की फ़ाइल लेकर आई हूं.  जिसमे हमारे कारनामें और शरारत का पूरा लिखा जोखा दर्ज हैं."

            " मैं आप के कहने पर आप का पसंदीदा टाइट शर्ट पहनकर आई हूं. उस के ऊपरी दो बटन भी खुल्ले छोड़ दिये हैं. "

           " मैं फ़ाइल रखने के बहाने नीचे झुकती हूं ताकि आप मेरे दूध के कटोरो को इत्मीनान से निहार सको. "

           " आप को मालूम ही होगा भीतर क़्या हैं? आप ने हमारी सारी शरारत और हरकतों को खुल कर लिखा हैं जो आप की कहानी के मुख्य अंश हैं. आप मेरे पुष्ट दूध के कटोरो से नजर उठायो यह मुझे अच्छा नहीं लगता. "

           " क़्या आप की यह सेक्रेटरी आप को इतनी सुन्दर लगती हैं. वह आप की कहानी की जान बनकर लोगो के दिल में घर कर लेगी. उस में शक की कोई गुंजाईश नहीं हैं.

            " मैंने जान बूझकर फ़ाइल सेट करने के बहाने ज्यादा झुकना पसंद किया था ताकि आप मेरे दूध के कटोरो को इत्मीनान से निहार सको. मेरा नशा देखकर आप की सांसे भारी हो जाये. "

             " मैं कुछ खुद या आगे बढू आपने मेरा हाथ पकडकर होनी पास खिंच लिया और केबिन का दरवाजा भीतर से बंद कर दिया. मुझे आप के इरादों की भनक लग गईं थी. मैं खुद उस के लिये तैयार थी. "              " दादू आपने अपनी कुर्सी पर बैठकर मुझे अपनी गोद में बिठा लिया."

             " मेरे शर्त के बाकि के बंद बटन आप की धड़कन को तेज कर रहे थे.

             " दादू आपने मेरे हाथो से कलम छिन ली और मुझे अपनी बाहों में सख़्ती से भींच लिया. ओफिस की उस ख़ामोशी में अपनी धड़कने साफ सुनाई रही थी.. आप की इतनी नजदीकी ने मेरे होंश उड़ा दिये थे. "

          " दादू ओफिस की बंद केबिन में आप की पकड़ मजबूत होती जा रही थी, आप ने धीरे से मेरे बाकी के बटन भी खोलने का प्रयास किया लेकिन मैंने आप को रोक लिया. "

          " आप की भूखी नजर मेरे मिठास के दो कटोरे पर टिकी हुई थी जिस से मेरे हाथो से कलम छूट कर नीचे गिर गईं. आप के प्यार पाने की धुन ने ऐसा माहौल खड़ा किया था. जिस ने मुझे मानने को प्रेरित किया था की भगवान भी हमारे साथ था. ".

           " दादू! आप ने धीरे से मेरे शर्ट के भीतर हाथ सरकाने का प्रयास किया तो मुझे फिर आप को  रोकने के लिये मजबूर होना पड़ा. रीडर्स के सामने दूध के कटोरो को छूने वाली हरकत नहीं कर सकते थे. इस लिये मुझे दोबारा रोकने की जरूरत पड़ी.

        " शारीरिक मस्ती की कोई सीमा होती है उस की कोई नियत जगह होती हैं. हर जगह उस का प्रदर्शन कर के हमें उसे लज्जित नहीं करना हैं. "

         "ठीक हैं तुम्हारा आदेश सर आँखों पर."

                 00000000000  ( क्रमशः)