दिन का बॉयफ्रेंड – भाग 2
कैफे से बाहर निकलते समय आसमान में हल्का अंधेरा छाने लगा था।
सड़क की लाइटें जलने लगी थीं और शहर की रफ्तार फिर तेज़ हो गई थी।
सिया धीरे-धीरे चल रही थी।
आर्यन उसके साथ कदम मिलाकर चल रहा था, लेकिन उसके मन में अभी भी वही सवाल घूम रहा था।
“अब कहाँ चलना है?” आर्यन ने पूछा।
सिया ने हल्की मुस्कान के साथ कहा—
“एक जगह… जहाँ मैं अक्सर आती थी।”
दोनों टैक्सी में बैठ गए।
करीब बीस मिनट बाद टैक्सी एक शांत से इलाके में रुकी।
वह जगह शहर की भीड़ से बिल्कुल अलग थी।
एक छोटा सा पार्क, जहाँ कुछ ही लोग थे।
सिया धीरे-धीरे अंदर चली गई।
आर्यन उसके पीछे-पीछे चलने लगा।
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पार्क के बीच में एक बेंच थी।
सिया वहाँ बैठ गई।
कुछ पल तक वह चुप रही।
हवा में हल्की ठंडक थी।
आर्यन ने धीरे से पूछा—
“अब तो बताओ… सुबह जो कहा था उसका मतलब क्या था?”
सिया ने गहरी सांस ली।
“आर्यन… क्या तुमने कभी सोचा है कि अगर किसी को पता चल जाए कि उसके पास बहुत कम समय बचा है… तो वो क्या करेगा?”
आर्यन थोड़ा चौंक गया।
“मतलब?”
सिया की आवाज़ धीमी हो गई।
“मुझे तीन महीने पहले पता चला कि मुझे एक बहुत गंभीर बीमारी है।”
आर्यन के चेहरे से मुस्कान गायब हो गई।
“कौन सी बीमारी?”
सिया ने जमीन की ओर देखते हुए कहा—
“ब्रेन ट्यूमर।”
आर्यन कुछ सेकंड तक कुछ बोल ही नहीं पाया।
सिया आगे बोलती रही—
“डॉक्टरों ने कहा है कि ऑपरेशन बहुत मुश्किल है… और शायद सफल भी न हो।”
हवा जैसे अचानक भारी हो गई।
आर्यन के मन में कई सवाल एक साथ उठने लगे।
“तो तुम आज…?”
सिया ने हल्की मुस्कान के साथ कहा—
“आज मैं इस शहर को छोड़कर जा रही हूँ।
मेरा इलाज दूसरे देश में होने वाला है।”
आर्यन ने राहत की सांस ली।
“तो यह अच्छी बात है।”
सिया ने सिर हिलाया।
“हाँ… लेकिन डॉक्टरों ने एक बात और कही है।”
“क्या?”
सिया की आँखों में हल्की नमी आ गई।
“अगर ऑपरेशन सफल नहीं हुआ… तो शायद मैं वापस कभी इस शहर में नहीं आऊँगी।”
आर्यन का दिल जैसे किसी ने कसकर पकड़ लिया।
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कुछ देर तक दोनों के बीच खामोशी रही।
फिर आर्यन ने पूछा—
“लेकिन तुमने मुझे ही क्यों चुना?”
सिया मुस्कुराई।
“क्योंकि मैं तुम्हें कई दिनों से देख रही थी।”
“कहाँ?”
“मेट्रो स्टेशन पर… कैफे में… कभी-कभी सड़क पर चलते हुए।”
आर्यन हैरान रह गया।
“तुम मुझे देखती थीं?”
“हाँ।”
“लेकिन क्यों?”
सिया ने कहा—
“क्योंकि तुम्हारे चेहरे पर हमेशा एक अजीब सी शांति होती है।
जैसे तुम किसी भी हाल में मुस्कुरा सकते हो।”
आर्यन हल्का सा हंस पड़ा।
“मुझे तो खुद पता नहीं था।”
सिया ने धीरे से कहा—
“मुझे लगा… अगर मेरे जीवन का आखिरी खुश दिन होना है, तो मुझे किसी ऐसे इंसान के साथ बिताना चाहिए जो मुझे हंसाए।”
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पार्क से निकलने के बाद दोनों शहर की सड़कों पर घूमने लगे।
अब रात हो चुकी थी।
चारों तरफ रोशनी ही रोशनी थी।
सिया अचानक एक खिलौने की दुकान के सामने रुक गई।
“चलो अंदर चलते हैं।”
आर्यन ने हंसते हुए कहा—
“तुम बच्चे हो क्या?”
“आज हूँ।”
दोनों अंदर गए।
सिया ने एक छोटा सा टेडी बियर उठाया।
“ये मुझे बचपन से पसंद है।”
आर्यन ने वह टेडी खरीदकर उसे दे दिया।
सिया की आँखें चमक उठीं।
“तुम बहुत अच्छे बॉयफ्रेंड हो।”
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रात के करीब दस बज रहे थे।
दोनों फिर से समुद्र किनारे पहुँच गए।
लहरें अंधेरे में भी चमक रही थीं।
सिया चुपचाप पानी को देख रही थी।
फिर उसने अचानक पूछा—
“आर्यन… क्या तुम्हें कभी किसी से प्यार हुआ है?”
आर्यन ने सिर हिलाया।
“नहीं।”
सिया मुस्कुराई।
“अच्छा है।”
“क्यों?”
“क्योंकि अगर तुम्हें मुझसे प्यार हो गया… तो तुम्हें बहुत दुख होगा।”
आर्यन ने मजाक में कहा—
“एक दिन में कोई प्यार नहीं करता।”
सिया ने धीरे से कहा—
“कभी-कभी एक दिन ही काफी होता है।”
आर्यन उसके शब्द सुनकर चुप हो गया।
उसके दिल में अजीब सी हलचल होने लगी।
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रात के ग्यारह बज चुके थे।
सिया ने धीरे से कहा—
“अब मुझे जाना होगा।”
“इतनी जल्दी?”
“मेरी फ्लाइट रात दो बजे है।”
आर्यन का दिल भारी हो गया।
दोनों टैक्सी से एयरपोर्ट की तरफ जाने लगे।
रास्ते भर दोनों ज्यादा कुछ नहीं बोले।
लेकिन दोनों को पता था कि यह एक दिन की कहानी अब खत्म होने वाली है।
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To be Continued....